मंत्री जी, विधायक जी की भावना को समझें : अध्यक्ष

भोपाल,राज्य विधानसभा के अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने सरकार को निर्देशित करते हुए कहा कि मंत्री जी अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें। विधायक को बुलाए और उनकी भावनाओं को समझें। आसंदी से निर्देश मिलने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने अध्यक्ष को आश्वस्त किया कि उनका आदेश शिरोधार्य है।विधानसभा में प्रश्नोत्तरकाल के दौरान विधायक नीरज विनोद दीक्षित द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के उच्चयंत मद में विगत लगभग 16 सालों से लंबित राशि के समायोजन हेतु की गई कार्यवाही के संबंध में सुशील चंद्र वर्मा उत्कष्टता पुरस्कार प्रदान करने में पक्षपात करने के आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे कर्मचारी को इस पुरस्कार से वंचित कर दिया गया जिसने 11 महीने एवं 23 दिन काम किया है। जबकि मात्र सात दिन काम करने वाले कर्मचारी को पुरस्कार प्रदान कर दिया गया। उन्होंने इस गलती को सुधार कर पुरस्कार से वंचित कर्मचारी को पुरस्क्रत करने की मांग की।प्रश्न के उत्तर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा कि पुरस्कार वितरण में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता बरती गई है। जो पुरस्कार दिए गए है वे लगन मेहनत से काम करने वाले कर्मचारियों को दिए गए है जो कि पूरी तरह से उचित है। सरकार की ओर से यह जवाब मिलने पर आसंदी से निर्देशित किया गया कि जो तथ्य सदस्य द्वारा बताए जा रहे हैं, उनसे स्पष्ट है कि पुरस्कार देने में गलती हुई है। इसीलिए विधायक को बुलाकर उनकी भावनाओं को समझा जाए। आसंदी मिले निर्देश को सरकार द्वारा मान्य कर लिया गया।
अध्यक्ष जी, आपकी मुस्कराहट का राज क्या है
विधानसभा में आज उस समय ठहाके लगने लगे जब भाजपा के वरिष्ठ विधायक नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति से सवाल किया कि अध्यक्ष जी आपकी मुस्कराहट का राज क्या है।बाकी लोगों के चेहरे तो मुरझाए हुए ही लग रहे हैं। इतना सुनते ही सदन में ठहाके लगने लगे। प्रजापति ने भी जवाब में कहा कि आपके जैसा हसीन चेहरा जब सामने देखता हूं तो मुस्कराहट आ ही जाती है। इसी बीच सीएम को घेरे मंत्री-विधायकों की भीड की ओर इशारा करते हुए नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान एक ही जगह भीड क्यो नजर आ रही है अध्यक्ष जी। इस पर श्री प्रजापति ने सभी सदस्यों को अपने-अपने स्थान पर जाने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रश्नोत्तरकाल में विधायकों को निश्चेतना में नहीं चैतन्य रहना चाहिए। इतना सुनते ही श्री भार्गव ने तंज कसते हुए कहा कि निश्चेताना विशेषज्ञ दिग्विजय सिंह इन्हें चैतन्य कर देते हैं।

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