छत्तीसगढ़ के बजट में नरवा,गरुवा,घुरुवा एवं बारों पर विशेष ध्यान

रायपुर,छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज साल 2019 -20 बजट पेश किया गया। इसमें छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारियों नरवा,गरुवा,घुरुवा एवं बारों के विशेष संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। मर्रा,दुर्ग ,साजा और बेमेतरा में नए कृषि महाविद्यालयों की स्थापना की बात कही गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिनके पास वित्त विभाग भी है यह बजट पेश किया। उन्होंने कहा किसान कर्ज माफी से करीब 20 किसानों को लाभ पंहुचेगा। बघेल ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि वास्तविक भारत गांव में बसता है। यदि गांव नहीं बचे तो देश भी नहीं बचेगा। यह बात आज भी सार्थक प्रतीत होती है। छत्तीसगढ़ की 75 फीसदी आबादी गाँव में निवास करती है और आज भी हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है। कृषि और किसानों के विकास से ही हमारे गाँव समृद्ध होंगे। इसी अवधारणा को लेकर हमारी सरकार का पहला बजट प्रदेश के किसानों और कृषि विकास के कार्यों पर केन्द्रित है। मानसून की अनिश्चितता एवं वर्षा आधारित कृषि ही हमारे प्रदेश में किसानों का भविष्य निर्धारित करती रही है। अधिकांश किसान खेती किसानी का काम अल्पकालीन कृषि ऋण लेकर करते हैं किन्तु समय पर वर्षा का पानी नहीं मिलने से फसलों का नुकसान तो झेलते ही हैं साथ ही कर्जा चुकाने का बोझ भी उन पर अलग से आता है। राज्य की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा पेश करते हुए उन्होंने कहा वर्ष 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार स्थिर दर पर वर्ष 2018-19 में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद मंें 6.08 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जो इसी अवधि के लिए अनुमानित अखिल भारतीय सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत की तुलना में कम है।
नरवा: प्रत्येक गांव में जल स्रोतों, नालों के उद्गम स्थल से शुरुआत करते हुए जल संचयन एवं संवर्धन हेतु आवश्यकतानुसार कच्ची पक्की संरचनाओं का निर्माण वैज्ञानिक पद्धति से किया जायेगा। गांव के तालाबों को सोलर पम्प एवं पाइपलाइन से भरा जायेगा। वर्तमान नदी-नालों एवं तालाबों का संधारण, जीर्णाेद्धार एवं गाद हटाने की कार्यवाही की जायेगी। इससे भूगर्भ-जल के स्तर में वृद्धि होकर जल 12 स्रोतों में बारहमासी पानी का बहाव होगा तथा दो फसलों के उत्पादन में मदद मिलेगी।
गरुवा: हर गांव में 3 एकड़ भूमि का चयन कर पशुओं के लिए गौठान बनाया जायेगा। गौठान में पशुओं के बैठने के लिए प्लेटफार्म एवं शेड का निर्माण, पीने के पानी की व्यवस्था तथा दुग्ध संग्रहण केन्द्र बनाये जायेेंगे। गौठानों मंे कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण एवं बधियाकरण की सुविधाएं दी जाएंगी। इससे दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार एवं दूध के उत्पादन में वृद्धि होगी।
घुरुवा: गौठान में सामुदायिक आधार पर बायोगैस प्लांट, कम्पोस्ट इकाईयां एवं चारा विकास केन्द्र बनाये जायेंगे। इससे कम लागत में अधिक फसल उत्पादन व ऊर्जा उत्पादन का लाभ मिलेगा।
बाड़ी: हर घर में उद्यानिकी फसलों तथा सब्जियों के उत्पादन के लिए बाड़ी को प्रोत्साहित किया जायेगा। नदी-नालों के किनारे भी फलदार वृक्षों का रोपण किया जायेगा। इससे ग्रामीणों को पोषण आहार के अलावा नगद आमदनी में वृद्धि का भी लाभ मिलेगा।

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