दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से फैल रहा स्वाइन फ्लू!

नई दिल्ली, दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू पीड़ितों की संख्या 1 जनवरी से अब तक 900 हो चुकी है, जबकि पिछले साल सिर्फ 205 मामले सामने आए थे। एम्स, सफदरजंग और गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने संभावना जताई है कि हो सकता है इस बीमारी के फैलने के पीछे प्रदूषण और कम तापमान हो। एम्स के मेडिसन विभाग के प्रो. नवल विक्रम ने चीन के शंघाई में पिछले साल हुए एक शोध के हवाले से बताया कि पीएम 2.5 के साथ इन्फ्लुएंजा ए वायरस के कुछ समय के लिए संपर्क में आने पर शरीर के अंदर इस वायरस के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही प्रदूषण अधिक होने से पीएम 2.5 के अधिक समय तक संपर्क में रहने पर प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे स्वाइन फ्लू या कोई भी मौसमी फ्लू से लोग गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। प्रो. विक्रम ने हांगकांग में हुए एक और शोध के हवाले से बताया कि हवा में नाइट्रस ऑक्साइड, ओजोन और पीएम10 की मात्रा बढ़ने पर निमोनिया, अस्थमा के साथ इन्फ्लुएंजा (फ्लू) के मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है।
संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ और एम्स के प्रोफेसर आशुतोष बिश्वास का भी मानना है कि प्रदूषण स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने की बड़ी वजह हो सकता है। जब संक्रमित व्यक्ति छींकता है या खांसता है तो पानी की छोटी बूंदों के रूप में वायरस हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) के साथ मिल जाता है और तापमान कम होने पर यह पीएम कणों के साथ लंबे समय तक एक स्थान पर हवा में जीवित रह सकता है।
गंगाराम अस्पताल के वाइस चेयरमैन डॉ.अतुल कक्कर का कहना है कि अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में लोगों के रहने पर प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर स्वाइन फ्लू से लोग बुरी तरह बीमार हो सकते हैं। इस बार दिल्ली में स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता बढ़ी है और लोग इसके लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचकर जांच करा रहे हैं। दिल्ली के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने की यह भी वजह हो सकती है।

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