नदी में पानी और रेत की कमी से चंबल में घड़ियालों पर संकट

मुरैना,घड़ियालों के लिए उपयुक्त चंबल नदी में रेत की कमी की वजह से उन पर संकट मंडरा रहा है। इस साल चंबल नदी में नवंबर महीने से ही पानी कई जगहों पर 2 से 5 फीट तक रह गया है। बाढ़ न आने से किनारों की सारी रेत नदी के बीच में आ गई है। यानी इस साल घड़ियालों के पास कोई घर नहीं है। घड़ियालों को धूप सेंकने और अंडे देने के लिए एक से डेढ़ मीटर मोटी रेत की परत चाहिए होती है। लेकिन इस बार किनारों पर दो से ढ़ाई फीट ही रेत है। इस स्थिति में घड़ियालों को अंडे देने में भी परेशानी आएगी। इस संकट को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग मुरैना ने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट से मदद मांगी है। वन विभाग की मानें तो चंबल में किसी भी तरह पानी छुड़वाना जरूरी हो गया है। नदी में इस समय 1400 के करीब घड़ियाल हैं। 30 साल में पहली बार ऐसा हुआ, जब चंबल नदी नवंबर में ही सूखने लगी है। हर साल चंबल का बारिश के दौरान जल स्तर 136 से 139 मीटर तक पहुंच जाता था। लेकिन इस साल यह जल स्तर 130 मीटर भी नहीं पहुंच पाया था। नदी में पानी की कमी और वेग कमजोर होने से किनारों की सारी रेत धीमे बहाव के कारण नदी के बीच के गड्ढों में जमा हो गई है। हाल ही में नदी में हुए 65 किलोमीटर के सर्वे के दौरान यह बात वन विभाग को पता चली। नदी के बीच धार में इतनी रेत एकत्रित हो गई है कि यहां बोट चलना भी मुश्किल हो गई है। जबकि किनारे रेत से खाली दिखाई दे रहे हैं। नदी के पारिस्थितिक तंत्र में यह बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि फरवरी महीने में वन विभाग नदी में बोट के जरिए ही जलीय जीवों की गणना करता है, जबकि नवंबर महीने में ही नदी में बोट चलने लायक पानी नहीं है।

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