आदिवासियों का अहित करते रहे जोगी-नेताम

रायपुर,पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने आदिवासियों का लगातार अहित किया। उन्होंने फर्जी प्रमाण-पत्र के माध्यम से महत्वपूर्ण पदों को जो आदिवासियों के लिए आरक्षित या उसका उपयोग किया। जय छत्तीसगढ़ पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष अरविंद नेताम ने कहा है, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की जो स्थिति बनी है, उसमें अजीत जोगी की भूमिका रही है। १९९१ में अजीत जोगी को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाये जाने पर मैनें आपत्ति की थी।
१९९८ में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा क्षेत्र रायगढ़ के लिए प्रत्याशी घोषित करने पर स्व. राजीव गांधी के समक्ष अजीत जोगी के आदिवासी वर्ग का नहीं होने के आधार पर कांग्रेस के कई आदिवासी नेताओं द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई, लेकिन पुनः १९९९ में अनुसूचित जनजाति के आरक्षित लोकसभा क्षेत्र शहडोल का प्रत्याशी घोषित किया गया। इस पर शहडोल के आदिवासियों ने फर्जी आदिवासी को स्वीकार नहीं किया और भारी मतों से पराजित कर दिया। श्री नेताम ने पत्रकारों से चर्चा में ये बातें कहीं। उन्होंने बताया, वर्ष २००० में कांग्रेस पार्टी के ९० फीसदी विधायकों के विरोध के बावजूद अजीत जोगी को मुख्यमंत्री घोषित किया जाना हाईकमान की ऐतिहासिक भूल थी। इसके कारण २००३ के चुनाव में कांग्रेस पार्टी पराजित हुईं और आज १४ साल तक सत्ता से बाहर है। अरविंद नेताम ने भाजपा के वरिष्ठ नेता नंदकुमार साय और आदिवासी नेता संतराम की प्रशंसा करते हुए कहा, ये दोनों नेता शुरु से अब तक जोगी की जाति मामले में लगे रहे और उन्हीं के प्रयास से सफलता मिली। इसके लिए आदिवासी समाज कृतज्ञ है। जय छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी सोहन पोटाई ने पत्रकारों से चर्चा में कहा, अजीत जोगी पर जाति का मामला आज का नहीं, उस समय से है, जब आदिवासी मुख्यमंत्री के लिए उन्होंने दावा किया।

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