सेहत के लिए चुनौती बनी सीवेज फार्मिंग

जबलपुर,चंद पैसों के खातिर लोग निर्दोषों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर में सीवेज फार्मिंग के बढ़ते चलन के कारण हररोज हम जाने-अनजाने में दूषित सब्जियां खाने मजबूर हैं। जो हमारी सेहत पर विपरीत असर डाल रहीं हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकर (एनजीटी) द्वारा सीवेज फार्मिंग पर लागाई गई। रोक के बावजूद जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीवेज फार्मिंग पर रोक लगाने में लापरवाही बरत रहा है। जिसका फायदा दूषित सब्जियां बेचने वाले उठा रहे हैं। अमखेरा, गोहलपुर, एनएच-४, कछपुरा के आसपास के क्षेत्रों में सीवेज फार्मिंग की जा रही है। जिसके तहत् नाले में मोटर डालकर सीधे सब्जियों में दूषित पानी की तराई की जाती है, इस फार्म में सीधे चोरी की बिजली की इस्तेमाल किया जाता है। सीवेज फार्मिंग के जरिए उगाई गई सब्जी व खेतों में उगाई जाने वाली सब्जी देखने में ज्यादा अंतर नजर नहीं आता। इस तरह की सब्जी में उत्पादक की आमदनी आधिक होती है। सीवेज फार्मिंग की सब्जी कम समय में पक कर तैयार हो जाती है। जिससे इसकी लागत परंपरागत सब्जी की तुलना में काफी कम होती है। दूषित पानी से उगाई जाने वाली सब्जियों को बेचने वाले सब्जी के ऑफ सीजन का फायद उठाते हैं। यह सब्जी गर्मी व बारिश के मौसम में बेची जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि नाले के पानी में आर्मोनिक, लेड व अन्य विषाक्त तत्व होते हैं जो शरीर में लीवर, किडनी व अमाश्य पर विपरीत असर डालते हैं इस तरह की सब्जियों के सेवन से लीवर के वैंसर की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा किडनी की सामान्य क्षमता भी प्रभावित होती है। जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है वहां यदि नाले के पानी का इस्तेमाल कर साब्जियां उगाई भी जाती है तो उस पानी का ट्रीटमेंट कर इस्तेमाल किया जाता है। देश के कई महानगरों में यह काम एनजीटी की गाईड लाईन के तहत् किया जाता है।

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