तीन तलाक दंडनीय अपराध मोदी सरकार ने अध्यादेश को दी मंजूरी

नई दिल्ली,केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बार में तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को बुधवार को मंजूरी दे दी है। कानून मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन यह राज्यसभा में लंबित है। वहां पर मोदी सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। यह प्रथा अब भी जारी है इसलिए इस दंडनीय अपराध बनाने की खातिर विधेयक लाया गया।

‘राजनीतिक फुटलबाल’ बना रही है सरकार: सुरजेवाला
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार तीन तलाक के मुद्दे को ‘राजनीतिक फुटबाल’ की तरह इस्तेमाल कर रही है। लेकिन तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के पति की संपत्ति जब्त न कर उनके साथ अन्याय कर रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के तीन तलाक पर तीन साल की सजा के प्रावधान वाले अध्यादेश को बुधवार को मंजूरी देने के बाद यहां पत्रकारों से कहा कि मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं को न्याय नहीं देना चाहती है। तीन तलाक के नाम पर सरकार सिर्फ राजनीति करना चाहती है इसलिए इस संबंध में अध्यादेश लेकर आई है।

“अल्लाह के कानून से नहीं बड़ा कोई कानून”
बुधवार को तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले अध्यादेश को मोदी कैबिनेट द्वारा पास कर दिया गया। तीन तलाक बिल को संसद के दोनों सदन में पास कराने में असफल रहने के बाद केंद्र सरकार ने अध्यादेश का यह रास्ता चुना है। अध्यादेश आते ही तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई है। मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने कहा यह बीजेपी का चुनावी मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जो इस्लामिक शरह के एतबार से जायज है, वही सही है। अल्लाह के कानून से बड़ा कोई कानून नहीं है इसलिए हम तो तलाक के मामले में अल्लाह के कानून को ही मानेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अध्यादेश कुरान और शहर की रोशनी में है उन्हें कोई एतराज नहीं है। इससे पहले अध्यादेश के संबंध में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि इस अध्यादेश में मुस्लिम महिला विधेयक की तरह ही प्रावधान होंगे। बता दें कि इस बिल को पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पारित किया गया था। परंतु राज्यसभा में सरकार के पास संख्याबल कम होने के कारण एवं हंगामे के चलते इस बिल पर बहस नहीं हो पाई थी। तीन तलाक के बिल का राज्यसभा में कड़ा विरोध हुआ था जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने मांग की थी कि इस बिल को कड़े प्रशिक्षण के लिए संसदीय समिति के पास भेजना चाहिए। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर सभी राज्य सरकारों से अपनी राय मांगी थी, जिसमें से ज्यादातर राज्य सरकारों ने इसका समर्थन किया था।

 

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