गुजरात की कंपनी द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत बनाये 50 शेड् हवा में उड़े

भोपाल,मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारी कागजों पर सरकारी योजनाएं बनाकर किस तरह की अफरा-तफरी बड़े पैमाने पर करते हैं। इसका लाभ हितग्राही तक पहुंचे या ना पहुंचे अधिकारियों की जेबें जरूर भर जाती हैं।
मध्य प्रदेश उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने गुजरात की एक निजी कंपनी से सांठगांठ करके केंद्र सरकार की एकीकृत आदिवासी विकास योजना के तहत आदिवासी किसानों के खेत में शेडनेट लगाने में जबरदस्त घपला किया है। योजना के तहत धार जिले के तिरला नालछा और सरदारपुर के विकासखंडों में 50 किसानों के लिए शेड स्वीकृत किए गए थे। गुजरात की कंपनी किसान एग्रोटेक को शेडनेट हाउस बनाने के आदेश दिए गए थे कंपनी ने पिछले माह सभी 50 किसानों के खेतों में शेड हाउस बना दिए थे जो पहले ही आंधी में हवा में उड़ गए हैं। इस मामले में अधिकारियों और कंपनी की मिलीभगत सामने आ गई है। उद्यानिकी विभाग का कहना है। कि उन्होंने अभी कंपनी द्वारा लगाए गए सेट का निरीक्षण और सत्यापन नहीं किया है। यदि ऐसा है। तो कंपनी से पुनः काम कराया जाएगा
किसानों की जगह कंपनी को भुगतान
योजना के अनुसार शेडनेट हाउस के लिए 175000 का अनुदान सीधे किसान के खाते में भेजा जाना चाहिए किसान स्वयं अपनी मनपसंद की कंपनी से शेडनेट लगवा सकता है। लेकिन अधिकारियों ने भ्रष्टाचार करने के लिए गुजरात की कंपनी, किसान एग्रोटेक को शेडनेट हाउस बनाने के आदेश दिए और इसमें भारी भ्रष्टाचार किया गया है। कंपनी ने साधारण और सस्ती कीमत वाली चलताऊ नेट लगा दी। उसका स्ट्रेक्टर भी मानकों के अनुरूप नहीं है। पानी देने के लिए ड्रिप नहीं लगाई गई सिंगल डोर लगा कर खानापूर्ति कर दी गई इसमें उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों और कंपनी के बीच भारी लेनदेन होने की खबरें हैं।
मध्यप्रदेश में उद्यानिकी विभाग द्वारा बड़े पैमाने में इसी तरह की गड़बड़ियां योजना में करके करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करने की बात सामने आ रही है। कंपनियों से मिलकर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किसानों के नाम पर उद्यानिकी विभाग कृषि विभाग कर रहा है। सरकारी खजाने से अरबों रुपए किसानों के नाम पर खर्च कर दिए जाते हैं। किंतु इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता है। उल्टे कई योजनाओं में किसान कर्ज का शिकार हो रहा है। यही कारण है। कि किसान सरकार से और अधिकारियों के भ्रष्टाचार से परेशान होकर सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

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