पंजाब की यह अकादमी जिसने हॉकी को दिए हैं इस बार दस खिलाडी

जालंधर,भारतीय हॉकी के विकास में पंजाब का हमेशा से अहम योगदान रहा है। न्यूजीलैंड में होने वाले चार देशों के टूर्नामेंट की टीम को देख कर यह एक बार फिर नजर आ रहा है। हॉकी इंडिया (एचआई) ने हाल ही में इस साल के पहले टूर्नामेंट के लिए 20 सदस्यीय भारतीय पुरुष हॉकी टीम की घोषणा की जिसमें से 12 खिलाड़ी पंजाब से ही हैं। 17 जनवरी से शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट में भारत का सामना ओलंपिक उपविजेता बेल्जियम, जापान और मेजबान न्यूजीलैंड से होगा। इससे पहले जूनियर विश्व कप जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम में 10 खिलाड़ी पंजाब के थे व एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में भी पंजाब के 6 खिलाड़ी थे।
जालंधर अकादमी से 10 खिलाड़ी
इन 12 में से 10 खिलाड़ियों ने जालंधर के सुरजीत हॉकी अकादमी में ट्रेनिंग ली है। पंजाब के खिलाड़ियों में कप्तान मनप्रीत सिंह पवार के अलावा रूपिंदर पाल सिंह, सतबीर सिंह, कृष्णा पाठक, हरमनप्रीत सिंह, वरुण कुमार, गुरिंदर सिंह, हरजीत सिंह, सिमरनजीत सिंह, मनदीप सिंह, रमनदीप सिंह और दिलप्रीत सिंह शामिल हैं। भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने कहा, “पंजाब हमेशा भारतीय हॉकी का में सबसे आगे रहा है, लेकिन इस बार यह संख्या अद्वितीय है। उनमें से ज्यादातर ने जूनियर हॉकी टीम के साथ मेरे कार्यकाल के दौरान मेरे अंडर खेला था। बहत समय बाद मैंने इतनी फिट टीम देखी है।”
टीम के गोलकीपर पाठक 2016 के जूनियर विश्व कप जीतने वाले सदस्य थे। इस 21 वर्षीय गोलकीपर ने जूनियर विश्वकप से दो दिन पहले दिल का दौरा पड़ने के कारण अपने पिता को खो दिया था। टीम में सिलेक्शन को लेकर एक भावनात्मक पाठक ने कहा, “जब मैंने अपने चयन के बारे में सुना तो मैं बहुत भावुक हो गया। मेरे लिए यह एक सपना सच होने जैसा है।
दिलप्रीत पर टिकी नजरें
18 वर्षीय स्ट्राइकर दिलप्रीत का सिलेक्शन भी उत्साह उत्पन्न करता है। दिलप्रीत भी सिमरनजीत और पाठक जैसे जालंधर के सुरजीत अकादमी में ट्रेनिंग लेते रहे हैं। वह उस जूनियर टीम का हिस्सा थे जिसने पिछले साल सुल्तान ऑफ जोहोर कप में कांस्य पदक जीता था। अंडर-21 की आयु वर्ग के अपने पहले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में दिलप्रीत ने छह मैचों में नौ गोल किए और शीर्ष स्कोरर के रूप में टूर्नामेंट का अंत किया। दिलप्रीत ने कहा, “यह एक अद्भुत भावना है। जब मुझे संदेश मिला तो मैं सदमे में था और मुझे अपने आप को यकीन दिलाने में 30 मिनट लग गए। “मेरा मानना है कि इस दौरे के बाद मैं एक बेहतर खिलाड़ी बनूंगा।”

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