चर्चित चेहरे

किदांबी श्रीकांत यानी भारतीय बैडमिंटन का नया सुपरस्टार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में बैडमिंटन के इस सितारे का नाम लिया और पल भर में ख़बर आई कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज़ अपने नाम कर लिया। इसके बाद यदि किदांबी श्रीकांत को भारतीय बैडमिंटन का नया सुपरस्टार कहे तो सही ही होगा। पिछले एक साल में श्रीकांत ने जिस तरह खेल खेला हैं वहां काबिले तारीफ है।
श्रीकांत ने ख़िताबी मुक़ाबले में चीन के चेन लोंग को सीधे सीटों में हराया। बीते सप्ताह इंडोनेशियाई सुपर सीरीज़ का ख़िताब जीतने वाले के.श्रीकांत का ये लगातार दूसरा सुपर सीरिज ख़िताब है। हालांकि श्रीकांत के करियर का ये चौथा सुपर सीरीज़ ख़िताब है। इससे पहले उन्होंने बीते 18 जून को जापान के काज़ुमासा सकाई को हराकार इंडोनेशियाई सुपर सिरीज़ का ख़िताब जीत लिया था।
इससे पहले उन्होंने 2014 में चाइन ओपन और 2015 का इंडिया ओपन सुपर सीरीज़ का ख़िताब जीता था।ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सिरीज़ के फ़ाइनल में श्रीकांत ने वो करिश्मा कर दिखाया जो वो पहले कभी नहीं कर पाए थे, चेन लोंग के साथ ये उनका छठा मुक़ाबला था और श्रीकांत पहली बार उनसे कोई मुक़ाबला जीत पाए।
इसके बाद भारतीय बैडमिंटन स्‍टार किदांबी श्रीकांत ने 7 लाख 50 हजार डॉलर इनामी राशि वाली डेनमार्क ओपन चैंपियनशिप का पुरुष सिंगल्‍स वर्ग का खिताब जीत लिया है। उन्‍होंने यहां खेले गए फाइनल में दक्षिण कोरिया के ली ह्यून इल को लगभग एकतरफा मुकाबले में 21-10, 21-5 से हराया। इस खिताबी मुकाबले को जीतने में श्रीकांत को ज्‍यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और कोरियाई खिलाड़ी ने आसानी से हार स्‍वीकार कर ली।श्रीकांत का यह तीसरा सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब है, इस साल इंडोनेशिया ओपन और ऑस्ट्रेलिया ओपन का खिताब जीतने वाले आठवें वरीय श्रीकांत ने ओडेंसे स्पोर्ट्स पार्क में अपने से 12 साल सीनियर ली को सिर्फ 25 मिनट में 21-10 21-5 से शिकस्त दी। दुनिया के आठवें नंबर के खिलाड़ी श्रीकांत का यह तीसरा सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब है, उन्होंने इससे पहले 2014 में चीन ओपन जबकि इस साल इंडोनेशिया ओपन का खिताब जीता।
श्रीकांत ने अपने से अधिक अनुभवी 37 साल के ली को कोई मौका नहीं दिया। ली ने शनिवार को सेमीफाइनल में हमवतन और दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी सोन वान हो को हराया था लेकिन वह इस प्रदर्शन को नहीं दोहरा पाए, श्रीकांत ने धीमी शुरुआत की और पहले आठ अंक के बाद दोनों खिलाड़ी 4-4 से बराबर थे। श्रीकांत ने इसके बाद अपने ताकतवर स्मैश की बदौलत 9-5 की बढ़त बनाई, भारतीय खिलाड़ी ब्रेक तक 11-6 से आगे था। ली के पास श्रीकांत के दमदार स्मैश और क्रॉस कोर्ट रिटर्न का कोई जवाब नहीं था जिससे भारतीय खिलाड़ी ने 14-8 की बढ़त बनाई। ली ने इसके अलावा बेसलाइन पर भी गलतियां की और उनके कई शॉट बाहर गए जिससे श्रीकांत ने 17-8 की बढ़त बनाई, कोरियाई खिलाड़ी ने दो शॉट बाहर मारे जिससे श्रीकांत को 20-8 के स्कोर पर 10 गेम प्वाइंट मिले। श्रीकांत की गलती से ली को दो अंक मिले लेकिन उन्हें इसके बाद शॉट बाहर मारकर गेम भारतीय खिलाड़ी की झोली में डाल दिया। दूसरे गेम में श्रीकांत ने बेहतरीन शुरुआत की और वह ब्रेक के समय 11-1 से आगे थे।ली को अपने शॉट को लेकर जूझना पड़ा। उन्होंने कई शॉट बाहर मारे जबकि कई शॉट नेट पर उलझाए जिससे श्रीकांत को गेम और मैच जीतकर खिताब अपने नाम करने में कोई परेशानी नहीं हुई। इससे पहले 2013 की विश्व चैंपियन थाईलैंड की रतचानोक इंतानोन ने महिला एकल में पहला गेम गंवाने के बाद जोरदार वापसी करते हुए जापान की चौथी वरीय अकाने यागामुची को एक घंटे और छह मिनट में 14-21 21-15 21-19 से हराकर सत्र का अपना पहला खिताब जीता।
2017 में श्रीकांत की सुपर सीरीज जीत
1. इंडोनेशिया ओपन (18 जून 2017), जापान के काजूमासा साकाई को 21-11, 21-19 से हराया
2. ऑस्ट्रेलिया ओपन (25 जून 2017), चीन के चेन लॉन्ग को 22–20, 21–16 से हराया
3. डेनमार्क ओपन (22 अक्टूबर 2017), कोरिया के ली ह्युन को21-10, 21-5 से हराया
(इसी साल अप्रैल में श्रीकांत सिंगापुर ओपन सुपर सीरीज के फाइनल में हारे थे.)

विराट ने कमाई में मेसी को पीछे छोड़ा
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली फोर्ब्‍स की कमाई की सूची में अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनेल मेसी से भी आगे निकल गये हैं। फोर्ब्‍स की सूची में विराट 7वें स्‍थान पर पहुंच गये हैं जबकि मेसी को 9वां स्‍थान मिला है। विराट इस समय खेल के सभी प्रारुपों में बेहद सफल हैं । विराट की कप्तानी में टीम इंडिया लगातार जीत दर्ज कर रही है। विराट की कप्‍तानी में टीम इंडिया इस समय आक्रामक क्रिकेट खेल रही है।
वहीं खेल से कमाई के मामले में विराट ने अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को भी पछाड़ दिया है। फोर्ब्‍स की दुनिया के नामी खिलाड़यों की यह सूची उनकी कमाई (वेतन, बोनस और एंडोर्समेंट की राशि) के आधार पर तैयार की गई है। इस सूची में स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर नंबर वन पर हैं। उनकी कमाई 372 मिलियन डॉलर आंकी गई है। वहीं जमैका के एथलीट उसेन बोल्‍ट सूची में दूसरे और पुर्तगाल के फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्‍डो तीसरे तीसरे स्‍थान पर हैं। बॉस्‍केटबॉल प्‍लेयर लेब्रान जेम्‍स 33.4 मिलियन डॉलर की कमाई के साथ रोजर फेडरर के पीछे दूसरे स्‍थान पर हैं। फोर्ब्‍स की इस लिस्‍ट में विराट कोहली (14.5 मिलियन डॉलर) सातवें स्‍थान पर हैं जबकि मेसी को नौवां स्‍थान मिला है।
फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में खिलाड़ि‍यों और उनकी सालाना कमाई इस प्रकार है।
1. रोजर फेडरर (37.2 मिलियन डॉलर)
2. लेब्रोन जेम्‍स (33.4 मिलियन डॉलर)
3. उसेन बोल्‍ट ( 27 मिलियन डॉलर)
4. क्रिस्टियानो रोनाल्‍डो ( 21.5मिलियन डॉलर)
5. फिल मिकेलसन (19.6 मिलियन डॉलर)
6.टाइगर वुड्स (16 मिलियन डॉलर)
7.विराट कोहली (14.5 मिलियन डॉलर)
8.रॉकी मैकलेरॉय (13.6 मिलियन डॉलर)
9.लियोनेल मेसी (13.5 मिलियन डॉलर)
10. स्‍टीफन करी (13.4 मिलियन डॉलर।

 

भांबरी विश्व रैंकिंग में फिर शीर्ष 150 में शामिल
भारत के यूकी भांबरी 6 स्थान के सुधार के साथ विश्व रैंकिंग में एक बार फिर से शीर्ष 150 में शामिल हो गए हैं जबकि महिला युगल रैंकिंग में सानिया मिर्जा एक स्थान के सुधार के साथ ही 8वें नंबर पर पहुंच गई हैं। पिछले साल और इस साल के शुरू में चोटों से परेशान रहे यूकी ने 2017 की शुरूआत 474वें स्थान से की थी जिसमें लगातार सुधार करते हुये वह इस साल पहली बार 150 खिलाड़ियों में पहुंचे हैं। यूकी की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 88 रही है जो उन्होंने नवंबर 2015 में हासिल की थी। वह फरवरी 2016 में टॉप 100 खिलाड़ियों से बाहर हुए थे जिसके बाद उनकी रैंकिंग में लगातार गिरावट आती रही।
वहीं रामकुमार रामनाथन एक स्थान गिरकर 149वें और प्रजनेश गुणेश्वरन 5 स्थान गिरकर 227वें स्थान पर खिसक गए हैं। युगल रैंकिंग में रोहन बोपन्ना ने एक स्थान का सुधार किया है और अब वह 16वें नंबर पर आ गये हैं। लिएंडर पेस को 3 स्थान का नुकसान हुआ है और वह 71वें नंबर पर खिसक गए हैं। महिला युगल रैंकिंग में सानिया मिर्जा एक स्थान के सुधार के साथ 8वें नंबर पर आ गई हैं।

डब्ल्यूडब्ल्यूई में में उतरने वाली पहली भारतीय महिला होगी कविता
भारत की कविता देवी अब डब्ल्यूडब्ल्यूई में दुनिया भर के रेसलर्स (पहलवानों) को टक्कर देने की तैयारियों में जुट गई हैं। कविता भारत की पहली महिला रेसलर बन गई हैं, जिनके साथ प्रबंधन ने डेवल्पमेंट कॉन्ट्रेक्ट साइन कर लिया है। इसके तहत अब विश्व की श्रेष्ठ रेसलर्स के साथ रिंग में भिडेंगी।
हरियाणा की यह युवा रेसलर को जनवरी 2018 में ओरलैण्डो, फ्लोरिडा स्थित डब्ल्यूडब्ल्यूई के परफोर्मेंस सेंटर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। 2016 में साउथ एशियन गेम्स में 75 किग्रा श्रेणी में स्वर्ण जीतने वाली कविता को दिलीप सिंह राणा उर्फ खली ने भी विश्व चैंपियनशिप के लिए प्रशिक्षण दिया था।
भारत सहित दुनिया में महिला डब्ल्यूडब्ल्यूई की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कंपनी ने पहली बार किसी भारतीय महिला पहलवान के साथ समझौता किया है। इसके लिए उन्होंने पूर्व वेट लिफ्टर कविता देवी को चुना गया है। वो डब्ल्यूडब्ल्यूई द्वारा आयोजित यंग क्लासिक टूर्नामेंट का हिस्सा रही हैं। कविता देवी डब्ल्यूडब्ल्यू ई के इतिहास में डेवलपमेंटल कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने वाली पहली महिला पहलवान हैं। इस बात की घोषणा नई दिल्ली दौरे के दौरान चैंपियन जिंदर महल ने की।
कविता देवी ने साल 2026 में दक्षिण एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था।
यह उपलब्धि हासिल करने के बाद कविता देवी ने कहा, डब्ल्यूडब्ल्यू ई के रिंग में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनना मेरे लिए सम्मान की बात है। अब मैं आगे भारत के लिए डब्ल्यूडब्ल्यू ई विमेंस चैंपियनशिप का खिताब जीतना चाहती हूं।
इससे पहले कभी कोई भारतीय महिला पहलवान डब्लूडब्लूई का हिस्सा नहीं बनी है। उसे रेस्लिंग वाले कपड़ों की जरुरत नहीं पड़ती। वह सलवार-सूट में भी रेस्लिंग रिंग में उतर जाती हैं।
कविता अपने चार साल के बेटे के साथ 13 जून को जालंधर में एक रेस्लिंग शो देखने गई थीं। इस शो में दिल्ली की पहलवान बुलबुल रिंग में खड़ी थी और ऑडियन्स को खुद से लड़ाई करने के लिए ललकार रही थी। कविता ने देखा कि जब कोई उससे लडऩे के लिए आगे नहीं आ रहा है तो उसने बुलबुल की चुनौती स्वीकार की और सलवार-सूट पहने रिंग में उतर गईं। कविता ने बुलबुल को करारी शिकस्त दी।

भारत के सागर बने आयरनमैन
फिलीपींस में भारत के युवा पेशेवर मुक्केबाज सागर नर्वत ने भारत का गौरव बढ़ाया है। फिलीपींस के मशहूर प्रोफेशनल बॉक्सर मैनी पैकियाओ के गढ़ में भारत के सागर ने वो कर दिखाया, जिसका सपना बड़े मुक्केबाज देखते हैं। विदेशी धरती पर अपनी पहली भिड़ंत में सागर ने मेजबान देश के धाकड़ मुक्केबाज जुन मामो को करारी शिकस्त दी। वहीं दूसरी ओर सागर की उपलब्धि पर उसके परिवार के लोगों में खुशी का माहौल है।
विदेशी धरती पर अपनी पहली भिड़ंत के लिए उतरना सागर के लिए किसी भी लिहाज से आसान नहीं था। जुन मामो की गिनती फिलीपींस के दमदार मुक्केबाजों में होती है। उन्हें वहां के ‘आइरन मैन’ के नाम से जाना जाता है। इस दौरान दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
सागर ने इस मुकाबले को 39-37, 39-37, 38-38, 39-36 से जीत दर्ज की। सागर ने डिफेंस और अटैक से इस मुकाबले को जीत लिया। मुकाबला जीतने के बाद वो काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं और सागर ने इस जीत का श्रेय अपने कोच रोशन नथेनियल को दिया। सागर ने कहा कि ‘मेरा कोच साथ हो तो मैं किसी को भी हरा सकता हूं।’
यह जीत भारतीय पेशेवर मुक्केबाजी को बढ़ाएगी
कोच रोशन नथेनियाल ने अपने शिष्य की जीत से बेहद खुश हैं रोशन ने कहा कि कड़ी मेहनत के बाद यह जीत हासिल हुई है। यह काफी मुश्किल टक्कर थी। सागर ने अपने पंच सही टार्गेट में मारे, जिसकी वजह से उन्हें जीत हासिल हुई है। आने वाले समय में इस जीत की लय को बरकार रखने की कोशिश करेंगे। प्रो मुक्केबाजी में अपने योगदान के लिए रोशन को फिलीपिंस की तरफ से डब्ल्यूबीओ एशियन ट्रेनर लाइसंस फ्री दिया गया है, जो किसी भारतीय मुक्केबाजी कोच के लिए बड़ी गर्व की बात है।
युवा प्रो-मुक्केबाजों को होगा लाभ
देश के पहले पेशवर मुक्केबाज रहे धर्मेंद्र सिंह के अनुसार सागर की इस जीत से युवा मुक्केबाजों का हौसला बढ़ेगा। देश में जगह-जगह प्रोफेशनल मुक्केबाजी शुरू हो चुकी है, जिसका असर आने वाले दिनों दिखेगा। सबसे बड़ी बात यह कि इससे मुक्केबाजी में कॅरियर के विकल्प खुलेंगे। जिन खिलाड़ियों को नौकरी नहीं मिल पाई है। वो प्राइवेट कोचिंग से पैसा कमा पाएंगे और प्रो मुक्केबाजी का स्तर में सुधार सकते हैं। इसके अलावा धर्मेंद्र ने कहा कि बॉडी कॉन्टेक्ट वाले खेलों में मेजबान खिलाड़ी को शिकस्त देना बहुत बड़ी बात होती है। इसलिए सागर की यह जीत कई मायनों में बेहद खास है।
सागर की इस जीत पर देश को गर्व है, लेकिन देश में अमेच्योर और प्रो बॉक्सिंग को एक लंबा रास्ता तय करना है। सरकार को ऐसी नीति बनाने की जरुरत है, जिससे हाशिए पर चल रहे कोच और खिलाड़ियों को फायदा मिले। इससे देश में खेलों के स्तर को सुधारने में मदद मिलेगी।

पृथ्‍वी हैं उभरते क्रिकेटर
घरेलू क्रिकेट में इस समय मुंबई के पृथ्‍वी शॉ की हर कहीं चर्चा है। इस खिलाड़ी को अगला सचिन तेंदुलकर बताया जा रहा है। यदि किसी खिलाड़ी की सचिन जैसे महान खिलाड़ी से तुलना हो तो निश्चित ही उसमें कोई खास बात होगी। 17 वर्ष के पृथ्‍वी की खासियत है रनों के लिए उनकी जोरदार भूख। यह खिलाड़ी लगातार बड़ी पारी खेलने के लिए जाना जाता है। एक बार क्रीज पर सेट होने के बाद पृथ्‍वी का आउट करना दिग्‍गज बल्‍लेबाजों के लिए भी मुश्किल होता है। 9 नवंबर को 18 वर्ष पूरे करने वाले पृथ्‍वी ने अपने पहले रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी मैच में शतक बनाए हैं। लोगों की निगाह अब उनके ईरानी ट्रॉफी के पहले मैच पर टिकी हुई हैं। हर किसी को उम्‍मीद है कि वे ईरानी ट्रॉफी में भी यह कारनामा करने में सफल होंगे। ईरानी ट्रॉफी का मैच रणजी की विजेता टीम और शेष भारत एकादश के बीच खेला जाता है। जाहिर है इस मैच के लिए पृथ्‍वी को इंतजार करना पड़ेगा। पृथ्‍वी से पहले सचिन तेंदुलकर अपने पहले ही रणजी, दिलीप और ईरानी ट्रॉफी मैच में शतक लगाने का कमाल कर चुके हैं।
ओपनर पृथ्वी ने मुंबई की ओर से तमिलनाडु के खिलाफ अपना रणजी ट्रॉफी पदार्पण किया था। इस मैच में उन्‍होंने मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर के कारनामे की बराबरी करते हुए शतक (120 रन) जमाया था। इससे पहले पृथ्‍वी स्‍कूली क्रिकेट में 500 से अधिक रन की पारी खेलकर धूम मचा चुके हैं। गौरतलब है कि 10 दिसंबर, 1988 को मुंबई की ओर से सचिन ने अपना पहला रणजी मैच खेला था। गुजरात के खिलाफ इस मैच में उन्होंने 100 रन बनाए थे, जिसमें 14 चौके शामिल थे। ठाणे के मध्‍यम वर्गीय परिवार से संबंधित पृथ्‍वी ने पिछले माह दिलीप ट्रॉफी में भी अपने पहले मैच में शतक जमाया था। लखनऊ में दिलीप ट्राफी के अपने डेब्‍यू मैच में पृथ्‍वी ने इंडिया रेड की ओर से शतक जमाया था। मैच में उन्‍होंने इंडिया ब्‍लू टीम के खिलाफ 154 रन की पारी खेली थी, इस पारी में 18 चौके और एक छक्‍का शामिल था। गौरतलब है इस मैच में इंडिया ब्‍लू की टीम में ईशांत शर्मा, जयदेव उनादकट और पंकज सिंह जैसे गेंदबाज शामिल थे लेकिन इन गेंदबाजों का सामना करते हुए पृथ्‍वी जरा भी मुश्किल में नजर नहीं आए थे।
यह देखना दिलचस्‍प होगा कि पृथ्‍वी अपनी कामयाबी के इस सिलसिले को बरकरार रखते हुए ईरानी ट्रॉफी के पहले मैच में भी शतक बनाने में कामयाब रहते हैं या नहीं। यह भी याद रखना होगा कि जूनियर स्‍तर पर कई ऐसे खिलाड़ी आए जिन्‍होंने अपनी प्रतिभा से हैरान किया लेकिन वक्‍त के साथ ये अपने प्रदर्शन में स्थिरता को बरकरार नहीं रखा पाए और गायब हो गए. उम्‍मीद करनी होगी कि पृथ्‍वी सीनियर लेबल पर भी लंबे समय तक अपने खेल कौशल की चमक को बरकरार रखेंगे। पृथ्‍वी भारत ए की टीम में भी स्‍थान बना चुके हैं। उनका अगला लक्ष्‍य टीम इंडिया में जगह बनाना है।

जैक्सन ने बनाया रिकार्ड
भारत के जैक्सन सिंह फीफा अंडर-17 विश्व कप में गोल करने के साथ ही छा गये हैं। ग्रुप-ए के दूसरे मैच में कोलंबिया के खिलाफ 82वें मिनट में जैक्सन ने भारत की ओर से एकमात्र गोल किया। इस मैच में हार से भारत की संभावनाएं समाप्त हो गयीं पर उसे भविष्य के लिए जैक्सन के रुप में एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी जरुर मिल गया है।
जैक्सन भारत की ओर से विश्व कप में पहला गोल दागकर रिकॉर्ड बुक में शामिल हो गए। जैक्सन के इस गोल से यह साफ हो गया है कि भारतीय टीम आने वाले समय में विश्व फुटबॉल में अपनी धाक जमा सकती है।
जैक्सन का फुटबॉलर बनने का सफर आसन नहीं रहा। भारतीय टीम में चुने गए जैक्सन को फुटबॉलर बनाने के लिए उनकी मां ने कड़ा संघर्ष किया है। दो साल पहले पिता की नौकरी जाने के बाद परिवार का गुजारा सब्जी बेचकर हुआ पर इतने कठिन हालात में भी जैक्सन ने फुटबॉल नहीं छोड़ा। जैक्सन मणिपुर के थोउबल जिले के हाओखा ममांग गांव के हैं। उनके पिता कोंथुआजम देबेन सिंह को 2015 में पक्षाघात हुआ और उन्हें मणिपुर पुलिस की अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। उनके परिवार का खर्च मां इंफाल के ख्वैरामबंद बाजार में सब्जी बेचकर चलाती हैं, जो घर से 25 किलोमीटर दूर है।
जैक्सन को 2015 में चयनकर्ताओं की उपेक्षा भी झेलनी पड़ी, जब वह चंडीगढ़ में एकेडमी में थे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अंडर 17 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई। शुरुआत में चंडीगढ़ फुटबॉल एकेडमी के साथ खेलने वाले जैक्सन बाद में मिनर्वा से जुड़े और राष्ट्रीय अंडर-15 तथा अंडर-16 खिताब जीतने वाली टीम के कप्तान भी रहे।
गोल का श्रेय साथियों को दिया
मिडफील्डर जैक्सन ने कहा कि साथी खिलाड़ियों के सहयोग से ही वह गोल कर पाने में सफल हुए। जैक्सन ने कहा, ‘मैं बेहद खुश हूं और अपनी टीम के साथियों का धन्यवाद करना चाहता हूं क्योंकि उन्हीं की सहायता से मैं गोल कर पाने में सफल रहा। मैंने सिर्फ अपना खेल खेला। गोल करने का मतलब ये नहीं कि मुझे ही उसका पूरा श्रेय दिया जाए। मेरे लिए यह अच्छा अहसास है साथ ही पूरी टीम के लिए भी।’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस गोल को अपने माता-पिता को समर्पित करना चाहता हूं। मैंने अपनी मां से बात की। उन्हें मुझ पर गर्व है। मेरे पिता की तबीयत ठीक नहीं है उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, लेकिन वह जानते हैं कि मैंने भारत के लिए गोल किया है।’ जैक्सन ने कहा कि उनके द्वारा बराबरी का गोल दागने के बाद तुरंत गोल खाना निराशाजनक था। उन्होंने कहा, ‘मैं उस समय काफी उत्सुक था। हम सभी अपने प्रशंसकों को मैच में हमारे लिए चिल्लाते देख रहे थे, लेकिन तुरंत बाद हमने एक और गोल खा लिया और यह अहसास टूटने जैसा था।’
उन्होंने कहा, ‘हम सभी के लिए यह खट्टा-मीठा अहसास था। काफी लोग थे जिन्होंने मुझे बधाई दी। मैं खुश था। हम सभी खुश थे। लेकिन दूसरी तरफ काफी निराशा थी क्योंकि हम वो परिणाम हासिल नहीं कर सके जिसके हम अधिकारी थे।’

न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 में अंतिम बार उतरेंगे नेहरा
अनुभवी तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने कहा है कि वह वह एक नवंबर को घरेलू मैदान फिरोजशाह कोटला में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले टी20 मैच के बाद क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। नेहरा ने कहा कि कामयाबी के साथ संन्यास लेना बेहतर होता है। इस गेंदबाज ने कहा कि मेरे लिये घरेलू दर्शकों के सामने खेल को अलविदा कहने से बढकर कुछ नहीं होगा। उसी मैदान पर 20 साल पहले मैने अपना पहला रणजी मैच खेला था।’’ उन्होंने कहा ,‘‘मैं हमेशा कामयाबी के साथ संन्यास लेना चाहता था। मुझे लगता है कि यह सही समय है और मेरे फैसले का स्वागत किया गया है।’’ 38 साल के नेहरा ने मुख्य कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली को इस फैसले की जानकारी दे दी है।
भारत और न्यूजीलैंड 22 अक्तूबर से तीन मैचों की वनडे और तीन टी20 मैचों की श्रृंखला खेलेंगे। इसके बाद 2018 में कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं होना है। नेहरा ने कहा कि अच्छा प्रदर्शन कर रहे युवाओं को ही और मौके दिये जाना सही कदम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह अब आईपीएल भी नहीं खेलेंगे। भारत के लिये 1999 में पहला मैच खेलने वाले नेहरा 117 टेस्ट, 120 वनडे और 26 टी20 मैच खेल चुके हैं। उन्होंने 44 टेस्ट, 157 वनडे और 34 टी20 विकेट लिये हैं। उन्हें डरबन में 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर छह विकेट लेने के लिये याद रखा जायेगा। बीमार होने के बावजूद उन्होंने उस मैच में शानदार प्रदर्शन किया था। वह 2011 विश्व कप विजेता टीम के भी सदस्य थे और उन्होंने सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था।
नेहरा के प्रदर्शन पर एक नजर
जिम्बाब्वे के खिलाफ
2001 में टीम इंडिया जिम्बाब्वे के दौरे पर थी। भारत को दो टेस्ट और एक त्रिकोणीय सीरीज खेलनी थी। भारत 15 साल से विदेशी जमीन पर कोई सीरीज नहीं जीता था। 22 वर्षीय नेहरा का यह पहला विदेशी दौरा था। पहली पारी में नेहरा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 23 रन पर 3 विकेट लिए। जिंबाब्वे की पूरी टीम 173रन पर आउट हो गई। भारत को पहली पारी में 145 रनों की बढ़त मिल गई। दूसरी पारी में भी नेहरा ने एंडी फ्लॉवर और डिओन इब्राहिम का विकेट निकाला. नेहरा की शानदार गेंदबाजी की बदौलत भारत यह टेस्ट जीत सका।
इंग्लैंड के खिलाफ, डर्बन
2003 का विश्व कप करीब था, लेकिन नेहरा का करियर दोराहे पर खड़ा था। लगातार चोटों से वह परेशान थे। टीम इंडिया को डर्बन में लीग मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेलना था। भारत ने पहले खेलते हुए 249 रन बनाए थे, लेकिन इस मैच में नेहरा ने शानदार तेज गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए 63रन पर 6 विकेट निकाले। नेहरा 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी की। कोई भी बल्लेबाज उनकी गेंदों की सही से नहीं खेल पाया और भारत 82 रनों से यह मैच जीत गया।
श्रीलंका के खिलाफ, 2005
इंडियन ऑयल कप के फाइनल में भारत का मुकाबला श्रीलंका से था। श्रीलंका ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। फ्लैट ट्रैक पर सभी गेंदबाज विकेटों के लिए तरस रहे थे। ऐसे में आशीष नेहरा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट लिए। वह अकेले ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने वन डे में दो बार 6 विकेट लिए हैं। नेहरा ने इस मैच में 59 रन देकर 6 विकेट लिए। नेहरा दोनों टीमों के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज साबित हुए।
पाकिस्तान के खिलाफ, मोहाली
2011 के विश्व कप में नेहरा ने केवल तीन मैच खेले। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खराब प्रदर्शन के बावजूद उन्हें सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ टीम में शामिल कर लिया गया। पाकिस्तान 260 रनों का बचाव कर रहा था। नेहरा को शुरू में विकेट नहीं मिले, लेकिन रन गति पर वह अंकुश लगाये रहे। उन्होंने 10 ओवरों में 33 रन देकरी दो विकेट लिए।
पांच साल बाद वापसी
जनवरी 2016 में नेहरा के एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी हुई और वह टी20 के सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए हालांकि इसके बाद वह फिर चोटों की वजह से टीम से बाहर हो गये जनवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 में नेहरा फिर टीम में वापस आए। इंग्लैंड 145 के स्कोर का बचाव कर रहा था। नेहरा ने शुरूआत में ही इंग्लैंड के दोनों ओपनरों को पवेलियन भेज दिया। इंग्लैंड का स्कोर 22 पर 2 हो गया। अपने पहले स्पैल में नेहरा ने 2ओवरों में 7रनों पर 2 विकेट लिए। 17वें ओवर में फिर नेहरा गेंदबाजी करने आए। इस समय इंग्लैंड को 4 ओवरों में 32 रन बनाने थे। नेहरा ने इस ओवर में केवल 4रन दिये और बेन स्टोक्स को आउट कर दिया। अंतिम ओवर में इंग्लैंड को जीत के लिए 8 रन बनाने थे लेकिन बुमराह ने इंग्लैंड को 8 रन नहीं बनाने दिए। भारत ने यह मैच जीत कर सीरीज 1-1 से बराबरी कर ली।

 

पीबीएल नीलामी में प्रणय और श्रीकांत सबसे महंगे बिके
देश के शीष पुरुष खिलाड़ियों में शामिल एचएस प्रणय प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) की तीसरे सत्र की नीलामी में सबसे महंगे खिलाड़ी बने हैं जबकि दूसरे नंबर पर किदांबी श्रीकांत रहे। प्रणय को अहमदाबाद स्मैश मास्टर्स ने 62 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। उनके पिछले साल की कीमत 25 लाख रुपये थी। अब वह आगामी सत्र के सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए है। अवध वॉरियर्स ने श्रीकांत को 56.1 लाख रुपये में खरीदा। श्रीकांत पहले भी अवध वॉरियर्स से ही खेलते थे। उभरते खिलाड़ी समीर वर्मा को मुंबई रॉकेट्स ने 52 लाख, जबकि अजय जयराम को नॉर्थ ईस्ट वॉरियर्स ने 45 लाख रुपये में अपनी टीम से जोड़ा।
वहीं महिला वर्ग में स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधू और साइना नेहवाल नीलामी में प्रणय और श्रीकांत से पीछे रहे।
महिला एकल में सिंधू और साइना को उनकी पुरानी फ्रेंचाइजी ने बढ़ी कीमतों के साथ अपनी टीम में बरकरार रखा। मौजूदा चैंपियन चेन्नई स्मैशर्स ने ओलंपिक रजत पदक विजेता सिंधू को 48.75 लाख रुपये में टीम में बनाए रखा। वही सिंधू को पिछले साल नीलामी में 39 लाख रुपये में खरीदा था। साइना को अवध वॉरियर्स ने 41.25 लाख रुपये में टीम में बरकरार रखा, जबकि उनका पिछले साल आधार मूल्य 33 लाख रुपये था। पीबीएल का तीसरा सत्र 22 दिसंबर, 2017 से 14 जनवरी, 2018 तक चलेगा।
पीबीएल का तीसरा सत्र 22 दिसंबर 2017 से 14 जनवरी 2018 तक चलेगा। टीम में बरकरार रखने वाले खिलाड़ियों को पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा रकम दिए जाने का प्रावधान है, जबकि ‘राइट टू मैच’ कार्ड के इस्तेमाल से खरीदे गए खिलाड़ियों की फीस में दस फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
सात्विक, ली और इवानोव टीम में कायम : युगल खिलाड़ी भारत के सात्विक साईराज और कोरिया के ली यंग डाई और रूस के व्लादिमिर इवानोव को उनकी पुरानी टीमों ने बरकरार रखा। नियमों के मुताबिक, पुरानी टीम एक खिलाड़ी को अपनी टीम में बरकरार रख सकती है, जबकि नई टीम पीबीएल में पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों में से ‘राइट टू मैच’ के आधार पर एक खिलाड़ी को चुन सकती है। हर फ्रेंचाइजी में 11 खिलाड़ी शामिल होंगे, जिसमें तीन महिला सहित पांच विदेशी खिलाड़ी होने चाहिए। प्रत्येक टीम 2.12 करोड़ रुपये खर्च कर सकती है।
विश्व नंबर एक ताई को 52 लाख : विश्व की नंबर एक महिला खिलाड़ी ताई जू यींग को अहमदाबाद स्मैश मास्टर्स ने 52 लाख रुपए में खरीदा। स्पेन की कैरोलिना मारिन को हैदाराबाद हंटर्स ने 50 लाख रुपए में खरीदा। डेनमार्क के विक्टर एलेक्सेन को उनकी पुरानी टीम बेंगलुरु ब्लास्टर्स ने 50 लाख रुपए में टीम के साथ जोड़ा, जबकि सोन वान हो और सुंग जी यून को दिल्ली एसर्स ने क्रमशः 50-50 लाख रुपए में अपनी टीम में शामिल किया। इसके अलावा नॉर्थ ईस्टर्न वॉरियर्स ने चीनी ताइपे के तजू वेई वांग को 52 लाख रुपए में खरीदा।
पोनप्पा पर दिल्ली ने खर्च किए 20 लाख : युगल विशेषज्ञ प्राजक्ता सावंत और चिराग शेट्टी को नॉर्थ ईस्टर्न वॉरियर्स ने क्रमशः 7 और 5 लाख रुपए में खरीदा। अश्विनी पोनप्पा पर दिल्ली एसर्स ने 20 लाख रुपए खर्च किए, जबकि मनु अत्री को बेंगलुरु ब्लास्टर्स ने 17 लाख रुपए में खरीदा।
08 टीमें प्रीमियर बैडमिंटन लीग में हिस्सा लेंगी
06 करोड़ रुपए टूर्नामेंट की कुल पुरस्कार राशि है।
विजेता को तीन करोड़, उपविजेता को 1.5 करोड़, तीसरे और चौथे स्थान की टीमों को 75-75 लाख रुपए मिलेंगे।

क्रिकेट में पहली महिला अंपायर बनी क्लेयर
क्लेयर पोलोसेक क्रिकेट में पहली महिला अंपायर बनी हैं हालांकि क्लेयर ने कभी क्रिकेट नहीं खेला। अंपायर बनने की प्रक्रिया में भी वह कई बार असफल हुईं, लेकिन सारी बाधाओं को पार करते हुए अब अधिकृत रूप से अंपायर बन गयी हैं। वह पहली महिला अंपायर होंगी जो न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलिया इलेवन के मैच में अंपायरिंग करेंगी। पोलोसेक सिडनी में अंपायर पॉल विल्सन के साथ मैदान पर अंपायर के रूप में दिखाई देंगी।
29 साल की पोलोसेक इंग्लैंड में संपन्न हुए विश्व कप के चार मैचों में अंपायरिंग कर चुकी है। उनका कहना है, क्रिकेट न खेलने के बावजूद उनका अंपायरिंग का सपना था। इसके लिए वह प्रतिबद्ध थीं। सिडनी में बुधवार को उन्होंने कहा, मैंने कभी क्रिकेट नहीं खेला, इसके बावजूद अंपायरिंग को चुनना किसी को भी दिलचस्प लग सकता है। मेरे अभिभावकों ने मुझे इसके लिए प्रेरित किया। इस खेल को न खेलने के बावजूद मैं क्रिकेट को लगातार देखा करती थी। मेरे अभिभावकों ने मुझे इस क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया। मेरे पिता मुझे गाड़ी में अंपायर्स कोर्स के लिए छोड़ने जाते थे।
वह कहती हैं, मुझे यह परीक्षा पास करने में थोड़ा समय लगा लेकिन मैं इसके लिए प्रतिबद्ध थी। मैं सिडनी प्रतिस्पर्धा के लिए लगातार तैयारी करती रही। पिछले दो साल से पोलोसेक किक्रेट ऑस्ट्रेलिया की डेवलपमेंट अंपायर्स के पैनल में रही हैं। वह घरेलू क्रिकेट में पुरुषों के मैच में थर्ड अंपायर भी रही हैं। पोलोसेक का मानना है, खेल के मैदान में तैयारियां, खेल की परिस्थितियां, टीममेट्स के साथ मिलना, दूसरे अंपायर के साथ इस पर चर्चा करना कि आप क्या सिग्नल देने जा रही है, यह सब बहुत अहम होता है, लेकिन मैंने पूरी तैयारी की है।
इसके साथ ही उसी तरह की फिटनेस की जरूरत होती है जिस तरह की फिटनेस खिलाड़ियों को चाहिए क्योंकि उन्हें भी लगातार सात घंटे मैदान पर खड़े रहना होता है। पोलोसेक कहती हैं, मैं मानसिक रूप से इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं। हर गेंद को बारीकी से देखने के लिए और आप भी मुझे अंपायर के रूप में देखने के लिए तैयार हो जाइए। बता दें कि क्लेयर इससे पहले इस साल इंग्लैंड में हुए आईसीसी महिला विश्व कप के चार मैचों में भी अंपायरिंग कर चुकी हैं। पोलोसेक बीते करीब दो साल से क्रिकेट आस्ट्रेलिया के डिवलेपमेंट अंपायर पैनल का हिस्सा हैं। इससे पहले वह पुरुषों के क्रिकेट में थर्ड अंपायर रही हैं।

क्रिकेट छोड़ने जब मजबूर हुए कुलदीप यादव
क्रिकेट जगत में अब कुलदीप यादव अनजाना नाम नहीं है। यह सही है कि कुछ साल पहले तक तो कुलदीप अपनी पहचान बनाने के लिए भी जीतोड़ मेहनत करते और खूब कोशिशें करते देखे जाते थे। कहते हैं न कि भगवान के घर देर है अंधेर नहीं अत: समय जरूर लगा लेकिन कुलदीप को क्रिकेट जगत में पहचान मिल ही गई। अनेक साल खेलने के बाद उन्हें आईपीएल खेलने के लिए टीम इंडिया में मौका मिला। बताने वाले बताते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब कप्तान कोहली उनको टीम में देखना भी पसंद नहीं करत थे। इसे लेकर उनकी बहस उस वक्त के कोच अनिल कुंबले से भी हुई जो कि चर्चा में रही। बहरहाल कुलदीप को एक अवसर मिला और इसका उन्होंने भरपूर लाभ उठाया और खुद को साबित कर दिखाया। इसी के साथ कानपुर से बाहर निकलकर क्रिकेट में अपना नाम बनाने के सपने को भी पूरा करने का काम कर दिखाया। दरअसल यह सपना तो उनके पिता का भी था कि बेटा एक दिन टीम इंडिया के लिए खेलें और नए मुकाम हासिल करें। कड़ी मेहनत और बुजुर्गों की दुआओं का ही असर है कि आज कुलदीप टीम इंडिया के स्टार बॉलर हैं और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने जैसी गलती कोई नहीं करना चाहेगा। अपने 9वें मुकाबले में ही हैट्रिक लेकर कुलदीप ने अपने मजबूत इरादों से दुनिया को आगाह कर दिया था। ऐसे सफल खिलाड़ी के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे कि उनकी जिन्दगी में एक समय ऐसा भी आया था जबकि वो क्रिकेट को अलविदा कहने पर मजबूर हो गए थे। जी हां, कुलदीप क्रिकेट के शुरुआती दौर में टीम में नहीं चुने जाने को लेकर इतने निराश हुए थे कि उन्‍होंने क्रिकेट छोडऩे का ही मन बना लिया था। इसके बाद बहन ने समझाया तो उन्होंने वापसी की और आज उस मुकाम पर हैं जहां सभी खिलाड़ी पहुंचने की चाह रखते हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में रहना एडम होलियोक की जांबाजी
अफगानिस्तान में जिस तरह के हालात हैं उसमें किसी का भी रहना चुनौती भरा काम ही है। खासतौर पर तब जबकि आपकी पहचान दुनिया में हो। ऐसे में याद आते हैं मशहूर खिलाड़ी एडम होलियाक की, जिनके महज सौ मीटर दूर पर एक आत्मघाती हमला हुआ और वो बाल-बाल बचे। इसके बाद भी उन्होंने अफगानिस्तान नहीं छोड़ने का ही फैसला लिया। दरअसल अफ़ग़ानिस्तान में होलियोक खिलाड़ियों को कोचिंग दे रहे हैं और यह बम धमाका इसी दौरान स्टेडियम के पास हुआ। काबुल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में हुए इस आत्मघाती हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी और करीब पांच लोग ही घायल भी हुए थे। इसके बाद होलियोक के सहयोगियों ने अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने का फैसला लिया जबकि होलियोक और उनके कुछ अन्य साथियों ने अफ़ग़ानिस्तान में ही रहने का ऐलान कर दिया। यह फैसला ऐसा था मानों जांबाज सिपाही सीमा पर तैनात रहने के लिए कह रहा हो। होलियोक का कहना है कि इस देश को अभी हाल ही में टेस्ट स्टेटस मिला है और यहां लोगों में क्रिकेट को लेकर जुनून है। इस जुनून को देखकर ही वो अफगानिस्तान में रहने को तैयार हैं। अत: यहीं रहते हुए वो अपनी जिम्मेदारी को पूरा करना चाहते हैं। हालियोक बताते हैं कि हमले के दिन दो टीमों के बीच मुकाबला हो रहा था। तीन चक्र वाली सुरक्षा का माकूल इंतजाम था। आत्मघाती हमले को तैयार शख्स को पहले ही सुरक्षा चक्र में पकड़ लिया गया। पर अफसोस कि उसने खुद को उड़ा लिया जिसमें कई सुरक्षाकर्मी और आम लोगों की जान चली गई। ऐसे में होलियोक ने अपनी संवेदनाएं मृतक सुरक्षाकर्मियों के परिवार के प्रति जाहिर कीं और कहा कि चूंकि हम लोग महज सौ मीटर की दूरी पर बैठे थे अत: धमाके का कंपन भी उन्होंने महसूस किया। इस हमले के बाद आम इंसान होते तो होलियोक अफगानिस्तान छोड़ चुके होते, लेकिन वो जांबाज हैं इसलिए उन्होंने वहीं रहकर अपना काम पूरा करने की ठानी है।

स्टीफंस ने पहली बार अमरीकी ओपन खिताब जीता
अमेरिका की स्लोएन स्टीफंस ने अमरीकी ओपन टेनिस टूर्नामेंट के फाइनल में अपने ही देश की मेडिसन कीज को 6-3, 6-0 हराकर अपना पहला महिला एकल खिताब जीता है। स्टीफंस ने अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए 37 लाख डालर की इनामी राशि हासिल की। इस टूर्नामेंट के फाइनल में 2002 के बाद पहली बार फाइनल में दो अमेरिकी खिलाड़ी आमने सामने थी। स्टीफंस ने जीत के बाद कहा कि मुझे अब संन्यास ले लेना चाहिए। मैं कभी इससे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाऊंगी। पिछले 6 हफ्ते शानदार रहे।
5वीं गैरवरीय खिलाड़ी
पिछले 17 मैचों में 15 जीत के साथ स्टीफंस महिला ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाली सिर्फ 5वीं गैरवरीय खिलाड़ी हैं।इससे पहले अमेरिकी ओपन का खिताब जीतने वाली एकमात्र महिला गैरवरीय खिलाड़ी किम क्लाइस्टर्स थी जिन्होंने 2009 में संन्यास से वापसी करते हुए खिताब जीता था। क्रिस एवर्ट के 1976 में इवोन गूलागोंग को 6-3, 6-0 से हराने के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी ओपन के महिला खिताबी मुकाबले में अंतिम सेट में हारने वाली खिलाड़ी कोई गेम नहीं जीत सकी।
स्टीफंस ने मैच के दौरान सिर्फ 6 सहज गलतियां की जबकि कीज ने 30 सहज गलतियां की। कीज ने हालांकि 18 विनर लगाए जबकि स्टीफंस 10 बार ही ऐसा कर सकी। कीज ने मैच के बाद कहा कि मैंने आज अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस नहीं खेला और मैं इससे निराश हूं।
विश्व रैंकिंग में 20 वें स्थान पर पहुंचीं
स्टीफंस ने महिला एकल वर्ग का खिताब जीतने के साथ ही विश्व रैंकिंग में लंबी छलांग लगाई है। स्टीफंस के करियर का यह पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है। इस जीत के साथ ही स्टीफंस विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान से सीधे 20वें स्थान पर पहुंच गई हैं। गौरतलब है कि पैर में चोट के कारण 11 माह तक टेनिस कोर्ट से बाहर रहने के बाद स्टीफंस ने विम्बलडन ओपन से टेनिस में वापसी की है। खिताबी जीत के बाद स्टीफंस ने कहा, ‘चोटिल होने पर मुझे लगा था कि अब संन्यास ले लेना चाहिए क्योंकि मैं कभी भी इस टूर्नामेंट में वापसी नहीं कर पाऊंगी। ‘ इस टूर्नामेंट में ब्रिटिश खिलाड़ी जैमी मरे और स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस की जोड़ी ने मिश्रित युगल वर्ग का खिताब जीता है। टूर्नामेंट के मिश्रित युगल वर्ग के फाइनल में मरे-हिंगिस की जोड़ी ने न्यूजीलैंड के माइकल वीनस और चीनी ताइपे की चान हाओ-चिंग की जोड़ी को हराया। विम्बलडन ओपन जीतने वाली मरे-हिंगिस की जोड़ी ने माइकल-चिंग की जोड़ी को 6-1, 4-6, 10-8 से मात दी।

सोशल मीडिया में छायी साइना
बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहती हैं। ट्विटर की बात करें, तो 27 साल की साइना की फैंस लिस्ट में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। ट्वीटर पर उनके फॉलोअर्स की संख्या 5 मिलियन (50 लाख) तक जा पहुंची है। साइना के 50,02,576 फॉलोअर्स हो गये हैं। साइना ने ट्वीट कर अपनी खुशी जताई है। उन्होंने फैंस को उनके प्यार और विशेज के लिए थैंक्स कहा है।
भारत की महिला खिलाड़ियों की बात करें, तो टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ट्विटर पर सर्वाधिक फोलो की जाने वाली महिला खिलाड़ी हैं। 30 साल की साइना के 6.31मिलियन फॉलोअर्स हैं। जबकि तीसरे स्थान पर बैडमिंटन की वर्ल्ड नंबर-4 पीवी सिंधु हैं।
सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहने वाली ज्वाला गुट्टा ट्विटर पर ज्यादा फैंस नहीं बटोर पाई हैं। वह चौथे नंबर पर हैं। उधर, स्टार क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर और कप्तान मिताली राज की लोकप्रियता का ग्राफ काफी ऊपर चढ़ा है, लेकिन वे दोनों अब भी पांच बार की वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन मेरी कोम से पीछे हैं।
ट्विटर पर भारतीय महिला खिलाड़ियों के फॉलोअर्स
1. 63,14,613 सानिया मिर्जा
2. 50,02,576 साइना नेहवाल
3. 15,02,490 पीवी सिंधु
4. 13,35,399 ज्वाला गुट्टा
5.3,76,295 मेरी कोम
6.2,43,702 मिताली राज
7. 1,28,956 हरमनप्रीत कौर
8. 1,12, 793 दीपिका पल्लीकल।

धोनी 300 खिलाड़ियों के क्लब में शामिल
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी श्रीलंका के खिलाफ सीरीज के चौथे एकदिवसीय क्रिकेट मैच के लिए मैदान पर उतरते ही अपने करियर में 300 एकदिवसीय मैच खेलने वाले खिलाड़ियों के क्लब में शामिल हो गये हैं। धोनी 300 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले छठे भारतीय और दुनिया के 20वें क्रिकेटर बने हैं।
299 मैचों में बनाये हैं 9608 रन
धोनी ने मौजूदा वनडे सीरीज में एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित करते हुए मैच विजेता पारियां खेली हैं और वह जबरदस्त लय में हैं। अब तक उन्होंने 299 मैचों में 51.93 के औसत से 9608 रन बनाए हैं जिसमें 10 शतक और 65 अर्धशतक शामिल हैं। इसमें नाबाद 183 रन की पारी सर्वश्रेष्ठ है जो धोनी ने 31 अक्टूबर 2005 को जयपुर वनडे में श्रीलंका के खिलाफ ही बनाई थी।
100 स्टपिंग का रिकार्डस
कपिल देव के बाद देश को विश्वकप विजेता बनाने वाले दूसरे कप्तान बने धोनी के नाम एकदिवसीय करियर में कई रिकार्ड दर्ज हैं। उन्होंने मौजूदा सीरीज में ही दो रिकार्ड अपने नाम कर लिए हैं जिसमें दूसरे एकदिवसीय में कुमार संगकारा के 99 स्टपिंग के रिकार्ड की बराबरी कर ली है।
सबसे अधिक बार नाबाद रहने वाले खिलाड़ी
धोनी अपने 300वें मैच में बेशक अर्धशतक नहीं लगा पाए हों, लेकिन जब वह 49 रनों पर नाबाद लौटे तो एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे अधिक बार नाबाद रहने का विश्व रेकॉर्ड उन्होंने बना लिया था।
धोनी ने इस मैच में 42 गेंदों में पांच चौके और एक छक्के की मदद से नाबाद 49 रनों की पारी खेली। धोनी एकदिवसीय मैचों में 73वीं बार नाबाद रहे हैं। इस मामले में उन्होंने श्रीलंका के चामिंडा वास और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान शॉन पोलाक को पीछे छोड़ दिया। यह दोनों खिलाड़ी एकदिवसीय में 72 बार नाबाद रहे थे। इस सीरीज में यह तीसरा मौका है जब धोनी बिना आउट हुए पवेलियन लौटे, जबकि पिछली सात पारियों में से वह छह बार नाबाद रहे हैं। पिछली सात पारियों में उन्होंने नाबाद नौ, नाबाद 13, नाबाद 78, 54, नाबाद 45, नाबाद 67 और नाबाद 49 रनों की पारियां खेली हैं। धोनी ने यह रिकार्ड अपने 300 वें मैच में बनाया। ।
सचिन, रैना और इशांत ने दी बधाई
धोनी 300 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले छठे भारतीय और दुनिया के 20वें क्रिकेटर बन गये जिसे सर्वाधिक वनडे खेलने का रिकार्ड बनाने वाले सचिन तेंदुलकर ने ‘विशेष उपलब्धि’ करार दिया।
धोनी के इस मुकाम पर पहुंचने के बाद उन्हें सबसे पहले बधाई देने वालों में तेंदुलकर शामिल थे जिन्होंने सर्वाधिक 463 एकदिवसीय मैच खेले हैं। तेंदुलकर ने उम्मीद जताई कि यह मैच इस क्रिकेटर के लिये खास होगा। तेंदुलकर ने ट्वीट किया, ‘‘300वीं बार वनडे कैप पहनना वास्तव में विशेष उपलब्धि है। उम्मीद है कि आज के मैच में आप खास प्रदर्शन करोगे।
धोनी के साथी और मध्यक्रम के बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी उन्हें बधाई दी। रैना ने ट्वीट किया, ‘‘दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज एमएसधोनी 300वां वनडे मैच खेलने के लिये तैयार हैं। जिस व्यक्ति ने हमेशा मुझे प्रेरित किया उसे शुभकामनाएं।’’ तेज गेंदबाज इशांत शर्मा ने ट्वीट करके धोनी को शुभकामना दी। उन्होंने लिखा, ‘‘माही भाई आप जैसा कोई नहीं। शुभकामना।’’ भारत की तरफ से धोनी से पहले तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ (344), मोहम्मद अजहरूद्दीन (334), सौरव गांगुली (311) और युवराज सिंह (304) यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। अजहरूद्दीन दुनिया के पहले क्रिकेटर थे जो इस मुकाम पर पहुंचे थे।

विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय मुक्केबाज बने गौरव
भारत के गौरव बिधुड़ी विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के पुरुषों के 56 किलोग्राम भारवर्ग के सेमीफाइनल में हार के साथ ही बाहर हो गए हैं। गौरव को अमेरिका के ड्यूक रागान ने 5-0 से हराया। इसी के साथ गौरव को चैंपियनशिप में कांस्य से मिला।गौरव इस चैंपियनशिप में अगर जीत जाते तो इस चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने वाले पहले भारतीय होते। 24 साल के गौरव इस चैंपियनशिप में पहली बार उतरे थे। वह इस चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय मुक्केबाज हैं। उनसे पहले विजेंदर सिंह, विकास कृष्णा और शिव थापा ने इस चैंपियनशिप में पदक जीते हैं।
विजेंदर इस चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज थे1 उन्होंने 2009 में पदक जीता था जबकि विकास ने 2011 और थापा ने 2015 में पदक जीते थे। अमेरिकी खिलाड़ी को हालांकि सभी रेफरियों ने आम सहमति से विजेता बनाया पर गौरव ने उनका अच्छा मुकाबला किया और रेफरियों द्वारा दिया गया स्कोर काफी करीबी था पांच में से चार रेफरियों ने 30-27 का स्कोर दिया तो वहीं एक रेफरी ने 30-26 का स्कोर दिया।
गौरव की सफलता के पीछे है पिता का हाथ
24 साल के इस मुक्केबाज की कामयाबी के पीछे उनके पिता धर्मेंद्र बिधूड़ी की संघर्ष और सपनों की कहानी है। धर्मेंद्र मुक्केबाज बनने के सपने संजोते हुए बड़े हो रहे थे। 1987 में वह दिल्ली स्टेट चैंपियन बने। इसी साल नैशनल खेलने गए, वहां क्वॉर्टर फाइनल में सर्विसेस के बॉक्सर एलके घोष ने उन्हें हरा दिया। अगले साल धर्मेंद्र मुक्कों के जोर से फिर स्टेट से उभरे। इस बार सिकंदराबाद में हुई नैशनल चैंपियनशिप के प्री-क्वॉर्टर फाइनल में हार गए। धर्मेंद्र कहते हैं कि हर हार मुझ पर भारी पड़ रही थी। परिवार, समाज, दोस्त रिश्तेदार सब कह रहे थे कि मुक्केबाजी के पीछे जिंदगी बर्बाद कर रहा है। आनन-फानन में शादी कर दी गई। इस तरह मुक्केबाज के तौर पर मेरे करियर का अंत हो गया।
धर्मेंद्र ने ग्लव्स नहीं छोड़े। वह नए उभरते मुक्केबाजों को ट्रेनिंग देने के बहाने दिल्ली टीम के कोच बने। जिस सर्विसेस के बॉक्सर से रिंग में बार-बार मात मिली, उन्हें अपनी कोचिंग में तैयार होने वाले बच्चों के जरिए मिजोरम में हुए टूर्नामेंट में हराया। धर्मेंद्र बताते हैं कि एक मुक्केबाज के तौर पर यह मेरा दूसरा जीवन था। इसकी शुरुआत कोच के तौर पर हुई, लेकिन परवान यह तब चढ़ा, जब 10 साल की उम्र में एक मुक्केबाज का मैच देख फाइट करने की जिद कर रिंग में गौरव उतरा। अपने से ज्यादा उम्र के बच्चों के खिलाफ लड़ा और दो-चार मुक्के खाने के बावजूद देखने वालों को हैरान कर गया।
धर्मेंद्र ने अपने नाकाम करियर का सपना बेटे पर नहीं थोपा। गौरव का मुक्केबाजी रिंग के प्रति लगाव बढ़ रहा था। वह उस बिना दबाव डाले, जूनियर, सबजूनियर, नैशनल में ले गए। दूसरी तरफ किरोड़ीमल कॉलेज में कॉमर्स की पढ़ाई में बाधा न हो, इसकी भी परवाह की। 2009 में यूथ चैंपियनशिप खेल रहे गौरव ने पिता से कहा कि आपने जितना हारा है, उससे कहीं ज्यादा जीतूंगा, मैं मुक्केबाज ही बनूंगा। जर्मनी के हेम्बर्ग में जारी विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में गौरव को एशियन चैंपियनशिप में उनके शानदार खेल की बदौलत वाइल्ड कार्ड से प्रवेश मिला था।

मेवेदर ने 50 वां मुकाबला जीतकर बनाया विश्व रिकार्ड
अपने पेशेवर मुक्केबाजी करियर में एक भी मैच नहीं हारने वाले विश्व हैवीवेट खिताब विजेता फ्लॉयड मेवेदर अब दुनिया के सबसे धनी खिलाड़ी हैं। अपने पेशेवर मुक्केबाजी करियर में एक भी मैच नहीं हारने वाले मेवेदर ने सबसे महंगे मुकाबले में 29 साल के आइरिश कोनॉर मैक्ग्रेगोर को 10वें राउंड में नॉक आउट कर दिया। लॉस वेगास के टी-मोबाइल एरीना में 40 साल के इस अमेरिकी दिग्गज ने मिक्स मॉर्शल आर्ट्स सुपरस्टार मैक्ग्रेगर को हराकर 50वीं जीत दर्ज की।
अमेरिका के प्रोफेशनल बॉक्सर फ्लॉयड मेवेदर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं वो कभी नहीं हारने के लिए तो जाने ही जाते हैं, इसके साथ ही वो अपनी दौलत को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। अपने अब तक के करियर में मेवेदर ने एक भी मैच नहीं हारा।
मेवेदर का जन्म 24 फरवरी 1977 को अमेरिका में हुआ था। मेवेदर एक गरीब परिवार से आते हैं। आज जब लोग उन्हें देखते है तो अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि वह कहां से आये थे। मेवेदर के परिवार के सात लोग एक छोटे से कमरे में रहा करते थे और कई बार उनके यहां बिजली भी नहीं होती थी। एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मेवेदर ने लिखा कि मैं अपनी मां की ड्रग्स की लत छुड़ाने और अपने पिता को जेल से बाहर लाने में लगा रहता था।
मेवेदर का बचपन चाहे जितना भी परेशानी भरा रहा हो लेकिन आज वो एक शाही जिंदगी जीते हैं। इतना ही नहीं वो दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ी रह चुके हैं और फोर्ब्स अपनी लिस्ट में उन्हें दुनिया में सबसे ज्यादा कमाने वाला खिलाड़ी भी बता चुकी है। अपने करियर के दौरान वो तीन बार ‘फाइटर ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। यह अवॉर्ड उन्हें साल 2007, 2013 और 2015 में मिले थे।

रुनी ने फुटबॉल को अलविदा कहा
इंग्लैंड की तरफ से रिकार्ड गोल दागने वाले वेन रूनी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबाल से तुरंत प्रभाव से संन्यास लेने की घोषणा की जबकि मैनेजर गैरेथ साउथगेट टीम में उनकी वापसी का प्रयास कर रहे थे। रूनी ने इंग्लैंड की ओर से 119 मैच में 53 गोल दागे। इस 31 वर्षीय खिलाड़ी ने साउथगेट को अपने फैसले के बारे में बताया। साउथगेट ने नये क्लब एवर्टन की ओर से खेलते हुए सत्र की शुरुआत में भी अच्छी फार्म हासिल करने पर रूनी को बधाई देने के लिए फोन किया था। इससे पहले इस दिग्गज खिलाड़ी ने इंग्लैंड टीम की कप्तानी और फिर अपनी जगह गंवाई और इस दौरान पिछले सत्र में वह जोस मोरिन्हो के मार्गदर्शन में मैनचेस्टर यूनाईटेड की ओर से खेलते हुए प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर पाए।
रूनी तरोताजा और खुश लग रहे हैं और उन्होंने अब तक प्रीमियर लीग के दोनों मैचों में गोल किए हैं। वह एक बार फिर उस क्लब से जुड़े हैं जिन्होंने किशोर के रूप में उन्हें निखारा था और इसके बाद वह मैनेचेस्टर यूनाईटेड से जुड़ गए थे। रूनी ने कहा, ‘‘यह शानदार था कि गैरेथ साउथगेट ने इस हफ्ते मुझे फोन किया और कहा कि वह आगामी मैचों के लिए मुझे टीम में वापस चाहते हैं। मैं इसकी काफी सराहना करता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘काफी लंबे समय तक पहले ही विचार करने के बाद मैंने गैरेथ से कहा कि मैंने अच्छे के लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबाल से संन्यास लेने का फैसला किया है।’’ रूनी ने कहा, ‘‘यह काफी कड़ा फैसला था और मैंने इस बारे में अपने परिवार, एवर्टन में अपने मैनेजर (रोनाल्ड कोमैन) और अपने करीबियों से बात की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इंग्लैंड के लिए खेलना मेरे लिए हमेशा से विशेष रहा। जब भी मुझे खिलाड़ी या कप्तान के रूप में चुना गया तो यह सचमुच में विशेष था और जिन्होंने भी मेरी मदद की मैं उनको धन्यवाद देता हूं लेकिन मेरा मानना है कि अब संन्यास लेने का समय आ गया है।

नए मिस्टर भरोसेमंद के तौर पर उभरे पुजारा
पिछले एक साल में भारत के लिए टेस्ट में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मध्य क्रम के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का मानना है कि वे अभी भी अपनी बल्‍लेबाजी के शीर्ष स्‍तर पर नहीं पहुंचे हैं। टीम इंडिया के मध्‍यक्रम के इस बल्‍लेबाज ने कहा कि उन्‍हें अपनी बल्लेबाजी में कई सुधार करने हैं। उन्‍होंने कहा कि मेरा सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन आना अभी बाकी है। पुजारा ने कहा, “एक क्रिकेट खिलाड़ी के तौर पर, मैं हमेशा महसूस करता हूं कि मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है। मैं अपने खेल पर काफी मेहनत कर रहा हू।” हाल ही में भारत को श्रीलंका में तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 3-0 से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले पुजारा ने कहा, “मैं अच्छी बल्लेबाजी कर रहा हूं, लेकिन अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां मुझे सुधार करना है।
मेरा सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है।
इसलिए यह मेरे करियर का सर्वश्रेष्ठ दौर नहीं है। मेरा मानना है कि मेरा सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है।” सौराष्ट्र के लिए खेलने वाले पुजारा दिन-प्रतिदिन अपने आप को मजबूत करते जा रहे हैं। उनकी बल्लेबाजी में नई परिपक्वता दिखी है जिसने उन्हें नए मिस्टर भरोसेमंद खिलाड़ी के तौर पर पहचान दिलाई है। पुजारा श्रीलंका के खिलाफ खेली गई सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे खिलाड़ी थे। उन्होंने तीन मैचों में 309 रन बनाए थे, जिसमें दो शतक भी शामिल हैं. जब से टीम पिछले साल वेस्टइंडीज से लौटी है तब से कप्तान विराट कोहली के साथ पुजारा लगातार रन बना रहे हैं. उन्होंने 2016-17 घरेलू सत्र के 13 मैचों में 1,316 रन बनाए हैं।
काउंटी क्रिकेट खेलने से फायदा हुआ
पुजारा का मानना है कि नॉटिंघमशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेलने से उन्हें काफी फायदा हुआ है। पुजारा ने इस पर कहा, “काउंटी क्रिकेट में मेरा यह तीसरा सीजन है। मैं पहले डर्बीशायर के लिए खेला, फिर यार्कशायर और अब नॉटिंघमशायर के लिए खेल रहा हूं। इसलिए मैं काउंटी क्रिकेट खेलने का आनंद उठा रहा हूं.” उन्होंने कहा, “वहां विकेट चुनौतीपूर्ण होते हैं, जिनमें तेज गेंदबाजों के लिए कुछ न कुछ होता है। इसलिए आप जब वहां रन बनाते हो तो आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि आप अपनी तकनीक को अच्छे से जान जाते हो. वहां का माहौल भी आपकी मदद करता है। मैंने वहां खेलते हुए काफी कुछ सीखा है।”
पुजारा से जब पूछा गया कि कैसे भारत ने श्रीलंका को एकतरफा हराया? इस सवाल के जवाब में पुजारा ने कहा कि टीम अपनी क्षमता के अनुरूप खेली। उन्होंने कहा, “हम अपनी क्षमता के हिसाब से खेले. हमारे सभी बल्लेबाज और गेंदबाज पूरी तरह से तैयार थे। एक टीम के तौर पर खेलते हुए हमने उन्हें हराया, यह मेरा मानना है। मैं नहीं जानता कि श्रीलंका टीम कैसे खेली या उनके गेंदबाजों ने किस तरह से तैयारी की थी। वो अच्छी टीम है, लेकिन हम उनसे मजबूत हैं। हम नंबर-1 टेस्ट टीम हैं और हम उसी तरह से खेले।” पुजारा से जब पूछा गया कि क्या श्रीलंका का दौरा आगामी दक्षिण अफ्रीका दौरे की तैयारी के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ मौका था? इस पर उन्होंने कहा, “दक्षिण अफ्रीका में उन्हीं के खिलाफ खेलना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उससे पहले हम भारत में श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेंगे. अच्छी बात यह रहेगी कि इस दौरान हम एक साथ रहेंगे।”
उन्होंने कहा, “दक्षिण अफ्रीका के लिए हमारे पास अलग रणनीति होगी, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ भारत में खेलने से हमें अपनी फॉर्म को बनाए रखने में मदद मिलेगी. हालात काफी अलग होंगे, लेकिन विदेशी दौरे से पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने से फायदा होता है।” क्या पुजारा छोटे प्रारूप में खेलते नजर आएंगे? इस पर उन्होंने कहा, “समय आएगा जब मुझे मौका मिलेगा। इस समय मैं यही कह सकता हूं कि मैं कुछ चीजों पर सुधार कर रहा हूं जो मुझे टेस्ट में मदद कर रही हैं और धीरे-धीरे छोटे प्रारूप में भी मुझे मदद मिलेगी।” महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली की कप्तानी की तुलना करने पर पुजारा ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों कप्तान सिर्फ जीत चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मेरे या अन्य किसी और के लिए जीत सबसे अहम है। मैंने एमएस (धोनी) की कप्तानी में खेलने का लुत्फ उठाया है और अब विराट की कप्तानी में खेलने का लुत्फ उठा रहा हू।.”

शांति के लिए चीन को लौटा सकता हूं खिताब : विजेंदर
भारत के स्टार पेशेवर मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने कहा है कि वह सीमा पर शांति के लिए वह चीन के मुक्केबाज जुल्फिकार माइमाइतियाली को उसका खिताब भी लौटाने के लिए तैयार हैं। इससे पहले एक करीबी मुकाबले में विजेंदर ने माइमाइतियाली को हराकर डब्ल्यूबीओ एशिया पेसीफिक सुपर मिडिलवेट खिताब जीता। विजेंदर ने इसके अलावा डब्ल्यूबीओ ओरिएंटल सुपर मिडिलवेट खिताब भी जीता। विजेंदर ने जीत के बाद चीनी खिलाड़ी को खिताबी बेल्ट लौटाने का प्रस्ताव देते हुए कहा कि मैं दोनों देशों के बीच तनाव को कम कर शांति का संदेश देना चाहता हूं! खिताब लौटाने के पीछे मेरा मकसद शांति का संदेश देना है। विजेंदर ने कहा कि मैं अपनी खिताब वापस लौटा दूंगा लेकिन चीन सीमा पर शांति बनाए रखे।
भारत और चीन के बीच डोक्लाम में विवाद जारी है। यह विवाद तब शुरु हुआ जब चीन ने भूटान के डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की और भारत ने उसे रोक दिया। डोकलाम वो इलाका है जहां भारत-चीन-और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भारत का कहना है कि तीनों देशों के बीच सहमति के बिना चीन यहां कुछ नहीं कर सकता। फिलहाल भारत के सैनिक डोकलाम में मौजूद हैं और चीन इस बात पर अड़ा है कि भारत अपने सैनिकों को वहां से हटाए। ऐसे समय में विजेंदर के इस कदम की सोशल मीडिया पर सराहना की जा रही है। बता दें कि बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता विजेंदर की पेशेवर कैरियर में यह लगातार नौवी जीत थी! विजेंदर ने अपने कद और अनुभव का बखूबी इस्तेमाल करके विरोधी को दबाव बनाने का कोई मौका नहीं दिया।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग से लेकर दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने दोहरे डब्ल्यूबीओ एशिया पैसीफिक सुपर मिडिलवेट और डब्ल्यूबीओ ओरिएंटल सुपर मिडिलवेट खिताब जीतने के लिए भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह को बधाई दी है।
टीम इंडिया में सहवाग के पूर्व साथी हरभजन सिंह ने भी विजेंदर को बधाई देते हुए लिखा कि मेरे भाई बाक्सरविजेंदर को बधाई। शाबास शेरा। बैटलग्राउंड एशिया। विजेंदर ने 10 राउंड के मुकाबले में सर्वसम्मत फैसले में 96-93 95-94 95-94 की जीत के साथ पेशेवर मुक्केबाजी में अपना अजेय अभियान जारी रखा।

विदाई रेस को यादगार नहीं बना सके बोल्ट
विश्व के नंबर एक फर्राटा धावक जमैका के उसैन बोल्ट विश्व ऐथलेटिक चैंपियनशिप में अपनी अंतिम रेस में खिताब नहीं जीत पाये और तीसरे स्थान पर रहे। ओलिंपिक स्टेडियम में 100 मीटर की अपनी विदायी रेस में आखिरी बार दौड़ रहे बोल्ट ने 9.95 सेकंड समय निकालते कांस्य पदक जीता। वहीं पहले के दोनों स्थानों पर अमेरिकी धावक विजयी रहे। अमेरिका के जस्टिन गैटलिन ने 9.92 सेकंड में तय करके स्वर्ण जबकि क्रिस्टियन कोलमैन ने 9.94 सेकंड में रेस पूरी करते हुए रजत हासिल किया। बोल्ट ने इस सीजन की समाप्ति के साथ ही रिटायरमेंट की घोषणा की थी हालांकि उन्होंने पिछली बार 200 मीटर और 400 मीटर रेस में भी खिताब जीता था, पर इस बार वह उन्हें बचाने के लिए मैदान पर नहीं उतरे।
पदक वितरण समारोह में लोगों ने हौंसला बढ़ाया
ओलिंपिक स्टेडियम में पदक वितरण समारोह के दौरान दर्शकों ने 100 मीटर के नये चैंपियन अमेरिका के जस्टिन गेटलिन की जबर्दस्त हूटिंग की जबकि तीसरे स्थान पर रहे बोल्ट का हौंसला बढ़ाया। डोपिंग मामलों को लेकर विवादों में रहे गेटलिन ने बोल्ट की विदाई रेस में 100 मीटर का खिताब जीता जिसमें जमैका के बोल्ट तीसरे स्थान पर खिसक गये।
जब कांस्य पदक विजेता बोल्ट का नाम घोषित किया गया तो दर्शकों ने उनका स्वागत किया। इससे पहले जैसे ही गेटलिन का नाम लिया गया दर्शकों ने उनकी हूटिंग शुरू कर दी हालांकि सभी दर्शकों ने ऐसा नहीं किया और काफी दर्शक गेटलिन की जीत को स्वीकार करते हुए तालियां भी बजा रहे थे। गेटलिन ने इस दौरान पोडियम पर कोई भावना नहीं दिखाई। उन्होंने बाद में बोल्ट और रजत पदक विजेता हमवतन अमेरिकी क्रिस्टियन कोलेमन के साथ मिलाकर तस्वीरें खिंचाई। दुनिया के सबसे तेज धावक बोल्ट अपनी विदाई रेस को स्वर्णिम नहीं बना सके।

विश्व बैडमिंटन में सायन, सिंधु पर रहेंगी नजरें
ग्लास्गो में इस महीने होने वाली विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के लिये मजबूत भारतीय टीम की घोषणा की गयी है जिसका लक्ष्य इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पहली बार स्वर्ण पदक जीतना होगा। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने इस साल लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और उम्मीद की जा रही है कि विश्व बैडमिंटन में भारत के पहले स्वर्ण का सपना इस बार पूरा हो सकता है। भारत ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के इतिहास में अपना एक रजत और चार कांस्य पदक जीते हैं। लेकिन उसके हाथ कोई स्वर्ण पदक नहीं लगा है। इसमें सभी की निगाहें साइना और सिंधु पर लगी रहेंगी। इन दोनो को इसके लिए बाय भी मिला है।
पुरूष एकल में भारत को एक कांस्य पदक, महिला एकल में एक रजत और दो कांस्य पदक तथा महिला युगल में एक कांस्य पदक जीता है। महान प्रकाश पादुकोण ने 1983 में कोपेनहेगन में हुई विश्व चैंपियनशिप में पुरूष एकल में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने 2011 में लंदन में हुई विश्व चैंपियनशिप में महिला युगल का कांस्य पदक जीता। रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता पीवी सिंधू ने 2013 में ग्वांगझू में और 2014 में कोपेनहेगन में हुई विश्व चैंपियनशिप में लगातार कांस्य पदक जीते। पूर्व नंबर एक सायना नेहवाल ने 2015 में जकार्ता में हुई चैंपियनशिप में फाइनल में जगह बनाई लेकिन उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
विश्व की पांचवें नंबर की खिलाड़ी और ओलंपिक पदक विजेता सिंधू को विश्व चैंपियनशिप में चौथी और श्रीकांत को आठवीं वरीयता दी गयी है। सिंधू इस टूर्नामेंट में चौथी वरीय और भारत की उच्च रैंकिंग की भारतीय महिला खिलाड़ी होंगी जबकि पुरूषों में आठवीं रैंकिंग के किदाम्बी श्रीकांत आठवीं वरीय खिलाड़ी के तौर पर उतरेंगे। विश्व रैंकिंग में शीर्ष 10 में शामिल भारत के दोनों खिलाड़ियों को टूर्नामेंट में शीर्ष 10 वरीय खिलाड़ियों में शामिल किया गया है। महिलाओं में सिंधू के अलावा 16वीं रैंकिंग की सायना नेहवाल पर भी सभी की निगाहें रहेंगी जो पिछले काफी समय से खराब फार्म से जूझ रही हैं। भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) ने टीम के साथ राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद सहित सात सदस्यीय कोचिंग स्टाफ रखा है। इनके साथ चार सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ भी रहेगा।

पहली बार किसी पैरालिंपिक खिलाड़ी को मिला खेल रत्न
रियो पैरालिंपिक में इस बार स्वर्ण पदक विजेत देवेंद्र झाझरिया और हॉकी के मशहूर खिलाड़ी सरदार सिंह को संयुक्‍त रूप से खेल रत्‍न पुरस्‍कार दिया जा रहा है। रियो पैरालिंपिक (2016) में विश्‍व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीतने वाले देवेंद्र झाझरिया (36) जेवलिन थ्रो की एफ46 स्‍पर्द्धा में हिस्‍सा लेते हैं। वह 2004 में एथेंस में भी इस स्‍पर्द्धा में स्वर्ण जीत चुके हैं। इस तरह पैरालिंपिक खेलों में दो स्‍वर्ण जीतने वाले वह पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। जेवलिन थ्रो में वह अभी विश्‍व रैंकिंग में वह तीसरे नंबर के खिलाड़ी है। राजस्‍थान के देवेंद्र जब आठ साल के थे तो पेड़ पर चढ़ने के दौरान एक इलेक्ट्रिक केबिल की चपेट में आ गए। उनका मेडिकल उपचार किया गया लेकिन उनको बचाने के लिए डॉक्‍टरों को उनका बायां हाथ काटने के लिए मजबूर होना पड़ा। झाझरिया खेल रत्न पाने वाले पहले पैरालंपिक खिलाड़ी हैं।
वहीं हॉकी के स्‍टार खिलाड़ी सरदार सिंह का जन्म 15 जुलाई 1986 को हरियाणा के सिरसा जिले में हुआ। उनकी गिनती देश के बेहतरीन मिडफील्‍डरों में की जाती है। डिफेंस और आक्रमण, दोनों के ही मामले में वे बेजोड़ हैं। भारतीय हॉकी टीम के कप्‍तान भी रह चुके हैं। सरदार सिंह ने इंटरनेशनल हॉकी में पदार्पण वर्ष 2006 में पाक के खिलाफ टेस्ट सीरीज में किया। इंचियोन में आयोजित एशियाई खेल 2014 के शुभारंभ समारोह में उन्‍हें भारतीय दल के ध्वजवाहक बनने का गौरव मिला था। सरदार की कप्तानी में भारत ने हॉकी प्रतियोगिता स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। उन्हें 2006 में पद्म श्री प्रदान किया. जबिक वर्ष 2012 में उन्‍हें अर्जुन पुरूस्कार से सम्मानित किया गया था।
वहीं इस साल अर्जुन पुरस्कार के 17 खिलाड़ियों के नामों की घोषणा की गईहै, जिनमें क्रिकेटर्स चेतेश्वर पुजारा और हरमनप्रीत कौर के अलावा पैरालंपिक पदक विजेता मरियप्पन थांगावेलु और वरुण भाटी और गोल्फर एसएसपी चौरसिया शामिल हैं।
बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा और महिला क्रिकेट टीम की हरमनप्रीत कौर को अर्जुन पुरस्कार देने की घोषणा की गई। इन दोनों के इलावा परालम्पिक पदक विजेता एम थंगावेलू और वरूण भाटी, गोल्फर एसएसपी चौरसिया समेत 17 खिलाडिय़ों को अर्जुन पुरस्कार मिलने की घोषणा हो गई है।
अर्जुन अवॉर्ड
चेतेश्वर पुजारा, हरमनप्रीत कौर, साकेत मिनेनी, अतनु दास , मरियप्पन थांगावेलु, वीजे श्वेता, खुशबीर कौर, आरोकिया राजीव, प्रशांति सिंह, एसवी सुनील, एसएसपी चौरसिया, सत्यव्रत कादियान, एंथोनी अमलराज, पीएन प्रकाश, जसवीर सिंह, देवेंद्रो सिंह, बिंबा देवी!

विश्व कप में शायद ही नजर आयें धोनी और युवराज
महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह को आने वाले दिनों में टीम से बाहर बैठना पड़ सकता है। इससे साफ है कि यह दोनों खिलाड़ी 2019 में होने वाले आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप में भी नहीं खेल पायेंगे। यह संकेत टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने दिए हैं। प्रसाद ने कहा कि फिलहाल दोनों खिलाड़ियों को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ही धोनी और युवराज पर सही समय पर ही फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया : प्रसाद
प्रसाद ने कहा कि यह फैसला अचानक नहीं लिया जा सकता। इन दोनों खिलाड़ियों के विकल्पों के बारे में एक-एक कर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘विश्व कप को लेकर टीम का तालमेल बैठाना कप्तान कोहली और कोच रवि शास्त्री पर निर्भर करता है। हम भी इस बात पर गौर कर रहे हैं कि हमें इस पर बात करनी होगी। हम समय आने पर टीम के बारे में अपना फैसला लेंगे।’
मुख्य चयनकर्ता ने कहा कि सही समय आने पर हम इन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों को लेकर टीम के कप्तान और कोच के साथ मिलकर बात करेंगे। भारतीय टीम के लिए साल 2007 से 2016 तक कप्तानी करने वाले धोनी टीम में अब पूर्ण रूप से विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में है।
वहीं इन दोनो के आलोचकों का कहना है कि इनकी उम्र बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही धोनी अब पहले की तरह के मैच फिनिशर नहीं रहे। उनकी बल्लेबाजी कर स्तर भी कम हुआ है। इसके अलावा जहां तक युवराज की बात है तो कैंसर से उबरने के बाद उन्होंने 2013 में वापसी की पर उनकी बल्लेबाजी पहले जैसी नहीं रही है।
प्रसाद ने कहा कि चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में हुई हार से भी हमें भारतीय टीम की कमजोरी और ताकत का पता चला है। हम टीम के सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए विश्व कप की तैयारियों में जुटेंगे। भारतीय टीम के भविष्य की योजनाओं को लेकर कप्तान कोहली काफी सचेत हैं और वह युवा खिलाड़ियों पर अपनी नजरें लगाये हुए हैं।’

पाक में पुरुष फुटबॉल टीम की कोच बनी एक महिला
पाकिस्तान में पहली बार एक महिला फुटबॉल टीम की कोच बनी है। अगर किसी पुरुष फुटबॉल टीम की कोच महिला हो तो ये अपने आप में एक रोचक बात हो जाती है और जब ऐसा बेहद कटटरपंथी देश पाकिस्‍तान में हो तो सभी को हैरानी होती है। पाकिस्‍तान की राष्‍ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की मैनेजर रहीला ज़रमीन को एक पेशेवर पुरुष फुटबॉल टीम का कोच नियुक्‍त किया गया है। कराची इलेक्‍ट्र‍िक नाम की पुरुष टीम ने रहीला को अपना कोच बनाया है। यही नहीं, रहीला लीज़र लीग की ब्रैंड ऐम्बेसडर भी हैं। वह दक्षिण एशिया की पहली महिला हैं जो पुरुषों की किसी पेशेवर टीम की कोच हैं। रहीला का बचपन बलूचिस्तान में अपनी दो बहनों के साथ फुटबॉल खेलते हुए बीता। क्वेटा में कोई फुटबॉल का मैदान नहीं था तो वह गर्ल्स कॉलेज के हॉकी मैदान पर खेलतीं। एक रिपोर्ट के अनुसार उन्हें फुटबॉल की प्रेरणा कई खिलाड़ियों से मिलीं लेकिन एक नाम जो सदा उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा रहा, वह था डेविड बेकहम का। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वह फुटबॉल खेलते वक्त डेविड बेकहम की कॉपी करने की कोशिश करतीं। इसलिए नहीं क्योंकि वह उनके टैटू और हेटरस्टाइल्स से प्रभावित थीं बल्कि इसलिए क्योंकि वह एक शानदार खिलाड़ी थे। अपने परिवार को वह इस खेल को चुनने और इसकी संघर्षों से पार पाने का श्रेय देती हैं।
रहीला के अनुसार ‘प्रांतीय सरकार की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। साल 2012 में वह बलूचिस्तान के लिए पदक जीतकर लाईं। 2013 और 2014 में उन्हें सिल्वर और गोल्ड मेडल मिले लेकिन सरकार ने उनके प्रयासों को गंभीरता से नहीं लिया। उनकी बहन शैला बलूच फीफा द्वारा सबसे युवा खिलाड़ी के तौर पर चुनी गईं. और वह खुद पहली पाकिस्तानी फुटबॉलर बनीं जिन्होंने विदेशी लीग में हैट-ट्रिक हासिल की हो लेकिन पाकिस्तान की न तो प्रांतीय न ही संघीय सरकार की ओर से कोई सराहना मिली। रहीला की मां बलूचिस्तान की महिला फुटबॉल टीम की प्रेसिडेंट थीं और इस कारण यह भी आरोप लगे कि हम उनकी वजह से आगे बढ़ पाए जबकि सच तो यह है कि हमने संघर्ष किया।’ रहीला ने कहा कि कि बाधाएं उस रास्ते का हिस्सा होती हैं जिस पर चलकर सफलता मिलती है। मुझे लगता है ये मुझे आगे भी मिलती रहेंगी लेकिन मेरा लक्ष्य स्‍पष्‍ट है। हमने महिलाओं को फुटबॉल खेलने को प्रेरित करने के लिए बलूचिस्तान में मैदान बनाने शुरू कर दिए हैं। हम अन्य शहरों में भी ऐसा करेंगे।

खेल जगत का सबसे बड़ा करार, हर सप्ताह 6 करोड़ 54 लाख कमाएंगे नेमार
ब्राजील के फुटबॉल स्टार नेमार अब यूरोपीय क्लब पेरिस सेंट जर्मन पहुंच गये हैं। यह खेल जगत का सबसे बड़ा करार है। पेरिस सेंट जर्मन ने 22 करोड़ 20 लाख यूरो करीब 1680 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड ट्रांसफर फीस पर नेमार को अपने साथ जोड़ा है। इसका सीधा मतलब ये है कि नेमार अब मैसी के साथ बार्सिलोना की ओर से खेलते नहीं दिखेंगे। इससे पहले सबसे बड़े करार का रिकॉर्ड पॉल पोग्बा के नाम था. उन्हें अगस्त, 2016 में मैनचेस्टर यूनाइटेड में वापसी के लिए आठ करोड़ 90 लाख पाउंड करीब 7 अरब 45 करोड़ रुपए मिले थे। नेमार का करार 5 साल के लिए हुआ है। इस दौरान नेमार सालाना 4 करोड़ 50 लाख यूरो यानी करीब 3 अरब 40 करोड़ रुपए कमाएंगे। हर सप्ताह उनकी कमाई 8 लाख 65 हज़ार यूरो यानी करीब 6 करोड़ 54 लाख रुपए होगी।
कौन हैं नेमार
नेमार पेले के बाद सांतोस के लिए सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 229 मैचों में 138 गोल किए हैं। जून, 2013 में उनका करार बार्सिलोना के साथ हुआ था। इस समय उनकी उम्र 21 साल थी। वह ब्राज़ील के लिए अब तक 77 मैचों में 52 गोल कर चुके हैं। नेमार ने कहा कि पेरिस सेंट जर्मन यूरोप के सबसे महत्वाकांक्षी क्लबों में से एक है। इस क्लब की महात्वाकांक्षा, जुनून और ऊर्जा ने मुझे इस क्लब के प्रति आकर्षित किया। मैं इसके लिए खेलते समय अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने का प्रयास करुंगा।
नेमार के बार्सिलोना छोड़ने पर भावुक हुए मैसी
अर्जेंटीन के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मैसी ने बार्सिलोना के अपने साथी खिलाड़ी ब्राजील के नेमार को भावुक होकर अलविदा कहा है। नेमार. बार्सिलोना छोड़कर जा रहे हैं और अब क्लब ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है। नेमार अब फ्रांस के क्लब पेरिस सेंट जर्मन (पीएसजी) के साथ खेलते नजर आएंगे. मैसी ने सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम पर लिखा, “यह साल तुम्हारे साथ बिताना मेरे लिए खुशी की बात है दोस्त नेमार मैं तुम्हें जिंदगी के अगले पड़ाव के लिए शुभकामनाएं देता हूं फिर मिलेंगे।”नेमार बुधवार सुबह बार्सिलोना के अभ्यास सत्र में आए थे। तभी उन्होंने क्लब को अपने पीएसजी में जाने के फैसले की जानकारी दी। मैसी ने लिखा, “मैं तुम्हें बेहद प्यार करता हूं दोस्त।” नेमार 2013 में ब्राजीलियाई क्लब सांतोस से बार्सिलोना में आए थे। उनकी मैसी और उरुग्वे के लुइस सुआरेज के साथ जोड़ी बेहद अच्छी मानी जाती थी। इस तिगड़ी ने क्लब के लिए तीन सत्र में तकरीबन 364 गोल किए हैं।
नेमार का ट्रांसफर फुटबॉल इतिहास का सबसे महंगा ट्रांसफर भी है। 30 जून 2022 तक नेमार अब पीएसजी क्लब के लिए खेलेंगे।
ट्रांस्फर फीस वो रकम होती है जो एक क्लब दूसरे क्लब को किसी खिलाड़ी को खरीदने के लिए देता है। इसके बाद इसी रकम के आधार पर खिलाड़ी की सैलरी तय की जाती है। नेमार की बात करें तो इस रिकॉर्ड डील के बाद अब पेरिस सेंट-जर्मेन हर हफ्ते उनको 5,37,000 पाउंड (तकरीबन 5 करोड़ रुपये) सैलरी देगा। अगर मिनट और घंटों की बात करें तो नेमार पीएसजी को काफी महंगे पड़ने वाले हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक नेमार इस रकम के आधार पर हर मिनट 53 पाउंड (तकरीबन 5000 रुपये) और हर घंटे 3,197 पाउंड (तकरीबन 2.7 लाख रुपये) कमाने जा रहे हैं। दरअसल, पेरिस सेंट-जर्मेन यूरोपियन फुटबॉल में सबसे बड़ी ताकत बनना चाहता है और इसके इरादे वो पहले भी जाहिर कर चुका है लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि वो इसके लिए ब्राजीली खिलाड़ियों को सहारा बना रहा है। फिलहाल पीएसजी के पास थियागो सिल्वा, दानी एल्वेस, मारक्विनहोस और लुकास मोरा जैसे धुरंधर ब्राजीली खिलाड़ी मौजूद हैं।
नेमार के पिता सांटोस सीनियर एक पेशेवर फुटबॉलर और ट्रेनर थे। बचपन से उन्होंने अपने बेटे को ट्रेनिंग दी और देखते-देखते नेमार स्ट्रीट फुटबॉल और फुटसाल में अपनी पहचान बनाने लगे। 11 साल की उम्र में एफसी सांतोस क्लब में शामिल हुए और 17 की उम्र में सांतोस ने उन्हें पहली बार सीनियर टीम में शामिल किया। सांतोस की तरफ से करियर में 54 गोल करके चर्चा में आए और अगले साल (2009) ब्राजील की राष्ट्रीय टीम में शामिल हो गए। फिर 2013 में बार्सिलोना ने उन्हें 76 मिलियन डॉलर में खरीदा। 2014 फीफा विश्व कप में वो चर्चा का विषय रहे, चार गोल भी किए लेकिन क्वार्टर फाइनल में चोटिल होकर बाहर हो गए। ब्राजील उनकी गैरमौजूदगी में जर्मनी के खिलाफ सेमीफाइनल हार गई। वो 2011 में वर्ल्ड सॉकर यंग प्लेयर ऑफ द इयर का अवॉर्ड जीत चुके हैं। नेमार का अपनी पिछली गर्लफ्रेंड केरोलीना दंतास से एक बेटा भी है जिसका नाम डावी लुका है।
नेमार की जगह भरने बार्सिलोना खरीदेगा नये खिलाड़ी
बार्सिलोना में अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी लिओनेल मैसी, उरुग्वे के स्टार लुइस सुआरेज जैसे कई दिग्गज खिलाड़ी मौजूद हैं लेकिन नेमार को खोने का झटका उसके लिए आसान नहीं होगा। इसीलिए नेमार के ट्रांस्फर के बाद बार्सिलोना उस पैसे से एक नहीं बल्कि कई शानदार खिलाड़ियों को भी खरीदने की तैयारी कर चुका है। इनमें से एक खिलाड़ी हैं मोनाको से खेलने वाले 18 वर्षीय फ्रेंच खिलाड़ी काइलियन बापे जो तकरीबन 14 अरब रुपये की डील में फाइनल किए जा सकते हैं। काइलियन को रीयल मैड्रिड भी भारी भरकम डील के जरिए अपनी टीम में शामिल करने के मूड में है। इस खिलाड़ी के लिए दो बड़ी दिग्गज टीमों के बीच पैसों का युद्ध देखने को मिल सकता है। इसके अलावा चेल्सी के इडेन हेजार्ड, एटलेटिको मैड्रिड के एंटोइन ग्रीजमेन, जुवेंटस के पाउलो डायबला और लीवरपूल के ब्राजीली स्टार फिलिप कॉटिन्हो भी बार्सिलोना की नजरों में हैं।
ये हैं अब तक के 5 सबसे बड़े ट्रांस्फर
1. नेमार जूनियर (ब्राजील) – 2017 में बार्सिलोना से पीएसजी – 222 मिलियन यूरो (तकरीबन 16.5 अरब रुपये)
2. पॉल पोग्बा (फ्रांस) – 2016 में जुवेंटस से मैनचेस्टर युनाइटेड – 105 मिलियन यूरो (तकरीबन 8 अरब रुपये)
3. गेरेथ बेल (वेल्स) – 2013 में टोटेनहेम स्पर से रीयल मैड्रिड – 100 मिलियन यूरो (तकरीबन 7.5 अरब रुपये)
4. क्रिस्टियानो रोनाल्डो (पुर्तगाल) – 2009 में मैनचेस्टर युनाइटेड से रीयल मैड्रिड – 94 मिलियन यूरो (तकरीबन 7 अरब रुपये)
5. गोंजालो हिगुएन (अर्जेंटीना) – 2016 में नेपोली से जुवेंटस – 90 मिलियन यूरो (तकरीबन 6.7 अरब रुपये)

वर्ल्ड रैंकिंग में पांचवें पायदान पर फिसले जोकोविच
दुनिया के पूर्व नंबर एक टेनिस प्लेयर सर्बिया के नोवाक जोकोविच एटीपी रैंकिंग्स में 5वें नंबर पर पहुंच गए हैं। सिंगल्स रैंकिंग्स में चौथे नंबर पर जोकोविच की जगह ली है स्विट्जरलैंड के स्टानिसलास वावरिंका ने जो विंबलडन के पहले राउंड में हारने के बाद से कोई टूर्नमेंट नहीं खेले हैं। रैंकिंग्स में ब्रिटेन के एंडी मरे पहले, स्पेन के राफेल नडाल दूसरे और स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर तीसरे नंबर पर हैं। जोकोविच ने कोहनी की चोट के कारण इस साल टेनिस कोर्ट से दूर रहने का फैसला करने वाले
मेयर की लंबी छलांग
जर्मनी के फ्लोरियन मेयर को हराकर जर्मन ओपन का खिताब जीतने वाले अर्जेंटीना के लियोनार्दो मेयर ने सिंगल्स रैंकिंग्स में लंबी छलांग लगाई है। वह 89 पायदान ऊपर चढ़कर 49वें नंबर पर, जबकि फ्लोरियन 42 पायदान ऊपर चढ़कर 59वें नंबर पर आ गए हैं। अटलांटा ओपन के चौथी बार चैंपियन बने अमेरिका के जॉन इस्नर 20वें से 18वें नंबर पर पहुंच गए हैं।
स्विट्जरलैंड के स्टाड में हुए स्विस ओपन के चैंपियन बने इटली के फाबियो फोग्नीनी 31वें से 25वें नंबर पर जा पहुंचे हैं। भारतीय प्लेयर्स में रामकुमार रामनाथन 178वें से 182वें और युकी भांबरी 201वें से 200वें नंबर पर आ गए हैं। दुनिया के टॉप-50 डबल्स प्लेयर्स में केवल एक भारतीय रोहन बोपन्ना (21वें नंबर) हैं।
प्लिसकोवा शीर्ष पर
डब्ल्यूटीए सिंगल्स रैंकिंग्स में चेक रिपब्लिक की कैरोलिना प्लीसकोवा पहले नंबर पर बरकरार हैं। शीर्ष 15 खिलाड़ियों की रैंकिंग्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है। चीन में जियांगजी ओपन का खिताब जीतने वाली चीन की शुआई पेंग 9 पायदान ऊपर चढ़ 23वें और स्वीडन के बस्टाड में एरिक्सन ओपन जीतने वाली चेक रिपब्लिक की कैटरीना सिनियाकोवा 17 पायदान ऊपर चढ़ 39वें नंबर पर आ गई हैं। डबल्स रैंकिंग्स में सानिया मिर्जा सातवें नंबर पर बरकरार हैं।
सिटी ओपन में रामनाथन,युकी
यहां आयोजित सिटी ओपन के मेन ड्रॉ के लिए भारत के रामकुमार रामनाथन और युकी भांबरी ने क्वॉलिफाई कर लिया है।