वास्तु -फेंगशुई

विजेता बनना है तो धारण करें वैजयंती माला
धर्म में सफल होने के लिए पूजा पाठ और हवन के साथ ही कई अन्य उपाय भी है। धर्म शास्त्रों के अनुसार
वैजयंती माला- एक ऐसी माला जो सभी कार्यों में विजय दिला सकती है। इसका प्रयोग भगवान श्री कृष्ण माता दुर्गा, काली और दूसरे कई देवता करते थे। रत्न के जानकार मानते हैं कि अगर इस माला को सही विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठित करके धारण किया जाए तो इसके परिणाम आपको तत्काल मिल सकते हैं। कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो जिसमें रुकावट आएगी।
वैजयंती माला को धारण करने वाला इंद्र के समान सारे वस्त्रों को जीतने वाला बन जाता है और श्री कृष्ण के समान सभी को मोहित करने वाला बन जाता है और महर्षि नारद के समान विद्वान बन जाता है। इस सिद्ध माला को धारण करने वाला हर जगह विजय प्राप्त करता है। उसके सर्व कार्य अपने आप बनते चले जाते हैं । यदि किसी काम में लंबे समय से बाधा आ रही है तो वह काम आसानी से बन जाता है। यह माला शत्रुओं का नाश भी करती है। वैजयंती माला को सिद्ध करने के लिए इसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। पूरा फल पाने के लिए जरूरी है कि माला सही विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही पहनी चाहिए।

सही दिशा में सोयें
वास्तुशास्र के अनुसार जीवन में दिशाओं का बेहद महत्व है। अगर हम सही दिशा में नहीं रहते तो स्वास्थ्य के साथ ही हमें धन की हानि भी होती है और मान सम्मान भी कम होता है।
इन्सान के स्वास्थ्य का शयन कक्ष से सीधा संबंध है। हमारे धर्म ग्रंथों में सोने के कुछ नियम बताए गए हैं। इनका पालन करने से शरीर में कोई रोग नहीं होता, साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। मनुस्मृति में लिखा गया है कि सूने घर में अकेले नहीं सोना चाहिए। जहां बिल्कुल अंधेरा हो, वहां सोने से भी बचना चाहिए। साथ ही मंदिर और श्मशान में कभी नहीं सोना चाहिए। अच्छी सेहत के लिए सुबह जल्दी उठाना जरूरी है। कुछ लोगों की आदत होती है कि सोने से पहले पैर धोते हैं। यह अच्छा है, लेकिन भीगे पैर सोना धर्म ग्रंथों में शुभ नहीं माना गया है। बताते हैं कि सूखे पैर होने से घर में लक्ष्मी आती है।
पलंग या खाट टूटा हो तो उस पर न सोएं। खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर न जाएं। झूठे मुंह सोना अशुभ है। आप किस दिशा में सोते हैं, यह भी बहुत अहम है। पूर्व की तरफ सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु, तथा दक्षिण की तरफ सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है।
कई लोगों को दिन में सोने की आदत होती है। इसे तुरंत छोड़ दें। दिन में तथा सुर्योदय एवं सुर्यास्त के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है।
बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। दक्षिण दिशा में पांव रखकर कभी नहीं सोना चाहिए। इस तरफ यम और दुष्टदेवों का निवास रहता है। इसका वैज्ञानिक कारण यह भी है कि मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है।
सोते समय हदय पर हाथ रखकर नहीं सोना चाहिए। पैर पर पैर रखकर भी नहीं सोना चाहिए। माथे पर तिलक लगा है तो सोने से पहले उसे साफ कर लें। तिलक लगाकर सोना अच्छा नहीं माना जाता।

बीमारी का कारण कहीं घर का मुख्य द्वार तो नहीं
कभी आपने सोचा है कि आपके घर में लोग अक्सर बीमार क्यों रहने लगे हैं। इसके साथ ही घर में आपसी मतभेद और धन की परेशान व तनाव वास्तुदोष के कारण भी हो सकता है। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता तो परेशानी और भी बढ़ती चली जाती है। इसलिए जरुरी हो जाता है कि वास्तु संबंधी इन दोषों को पहचानकर इनका उपाय किया जाए। ऐसा करने से आपकी समस्या का समाधान निकल सकता है। सबसे पहले तो आप देखें कि आपके घर का मुख्य द्वार कहीं काले रंग का तो नहीं है, यदि ऐसा है तो सबसे पहले उसका रंग बदल दें। मुख्य द्वार काले रंग का नहीं होना चाह‌िए। वास्तु अनुसार इससे घर के मुख‌िया की बदनामी, किसी अपने से धोखा और यहां तक कि अपमान भी बर्दाश्त करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त यदि मुख्य द्वार से घर के अन्य द्वार बड़े हैं तो सदा ही धन की कमी सताती रहेगी। आर्थ‌िक परेशान‌ियों का कारण ये द्वार भी हो सकते हैं, अत: उपाय करें कि मुख्य द्वार ही बड़ा हो। इसके अलावा जरुरी है कि प्रात:काल में जब सूर्योदय हो तो घर की ख‌िड़क‌ियां खोल दें, इससे घर में सकारात्मक उर्जा का संचार होगा और अन्य लाभ भी होंगे। सुबह खिड़ियां बंद रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो जाती हैं, इसलिए इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पक्षियों के घौंसले भी होते हैं दरिद्रता का कारण
खूब मेहनत और खूब पैसा कमाने के बावजूद यदि आप दरिद्र बने हुए हैं तो यह आपकी अपनी कमी नहीं बल्कि वास्तुदोष हो सकता है। ऐसे में आपको देखना होगा कि आपके घर में ऐसा कौन सा दोष है जिस कारण दरिद्रता दूर ही नहीं हो रही है। दरअसल वास्तु व‌‌िज्ञान कहता है कि घर में अनेक ऐसी चीजें स्थापित हो जाती हैं जिसकी अनदेखी करना दरिद्रता का कारण बन जाता है। ऐसे ही दोषों में प्रमुखत: घर में कबूतर का घोंसला बना लेना है। ऐसा होना दरअसल वास्तु व‌िज्ञान के अनुसार अशुभ है। इससे घर पर बड़ी मुसीबत आ सकती है इसलिए कबूतर ही नहीं बल्कि किसी अन्य पक्षी को भी घर में घोंसला न बनाने दें। इसके अतिरिक्त यदि घर में मधुमक्खी छत्ता लगाती है तो उसे भी हटा देना चाहिए। ऐसा होने से घर में अशुभ होने का अंदेशा बना रहता है। इसी तरह मकड़ी का जाला भी अशुभ माना गया है इसलिए समय-समय पर मकड़ी के जाले साफ किए जाने चाहिए। इन जालों की वजह से घर में उलझन और परेशानी आती है। इन कुछ उपायों से आप अपनी दरिद्रता दूर कर सकते हैं।

वास्तुशास्त्र के अनुसार ही बनायें रसोईघर
जीवन में हर कोई सुख, शांति और धन संपत्ति चाहता है पर कई बार नये घर में जाते ही उसे पर्याप्त सफलता नहीं मिलती। तब वास्तुशास्त्र की और देखना चाहिये। आवासीय मकान में सबसे मुख्य घर होता है रसोईघर। इसी दिशा में अग्नि अर्थात ऊर्जा का वास होता है। इसी ऊर्जा के सहारे हम धन अर्जित करते है। अतः इस स्थान का महत्त्व कितना है आप समझ सकते है। कहा जाता है कि व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं धन-सम्पदा दोनो को रसोईघर प्रभावित करता है। अतः वास्तुशास्त्र के अनुसार ही रसोईघर बनाना चाहिए।
कई बार ऐसा देखा गया है कि घर में रसोईघर गृहिणी के अनुरूप बना हुआ है फिर भी रसोईघर में खाना बनाकर ही खुश नही होती है या खाना बनाने के बाद उसमे कोई बरकत नहीं होता है बल्कि घट जाता है । उसका मुख्य कारण है रसोईघर का वास्तु सम्मत नहीं होना अर्थात वास्तुदोष का होना। ऐसे में कुछ उपाय कर आप उसके दोष दूर कर सकते हैं।
वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोईघर| आग्नेय अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा ( दक्षिण पू्र्व्) में ही होना चाहिए। इस दिशा का स्वामी अग्नि ( आग ) है तथा इस दिशा का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। आग्नेय कोण में अग्नि का वास होने से रसोईघर तथा सभी अग्नि कार्य के लिए यह दिशा निर्धारित किया गया है। यदि आपका किचन इस स्थान पर है तो सकारत्मक ऊर्जा का प्रवाह घर के सभी सदस्यों को मिलता है।
आग्नेय कोण/ दिशा का विकल्प
वैसे तो इस दिशा का स्थान कोई अन्य दिशा नहीं ले सकता फिर भी यदि आप किसी कारण से आग्नेय कोण / दिशा में रसोई नही बना सकते तो विकल्प के रूप में आप वायव्य दिशा का चुनाव कर सकते है।
घर के ईशान कोण मे रसोईघर का होना शुभ नहीं है। रसोईघर की यह स्थिति घर के सदस्यों के लिए भी शुभ नहीं है। इस स्थान में रसोईघर होने से निम्नप्रकार कि समस्या आ सकती है। खाना बनाने में गृहिणी की रूचि नहीं होना, परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य खराब रहना, धन की हानि, वंश वृद्धि रूक जाना, कम लड़के का होना तथा मानसिक तनाव इत्यादि का सामना करना पड़ता है।
इस दिशा में रसोईघर बनाने से अपव्यय (बेवजह खर्च होना) एवं दुर्घटना होता है अतः भूलकर भी इस दिशा में रसोईघर नहीं बनवाना चाहिए।
उत्तर दिशा मे रसोईघर
उत्तर दिशा रसोई घर के लिए अशुभ है। इस स्थान का रसोईघर आर्थिक नुकसान देता है इसका मुख्य कारण है कि उत्तर दिशा धन का स्वामी कुबेर का स्थान है यहाँ रसोईघर होने से अग्नि धन को जलाने में समर्थ होती है इस कारण यहाँ रसोई घर नहीं बनवानी चाहिए।
वायव्य कोण मे रसोईघर| उत्तर-पश्चिम दिशा
विकल्प के रूप में वायव्य कोण में रसोईघर का चयन किया जा सकता है परन्तु अग्नि भय का डर बना रह सकता है। अतः सतर्क रहने की जरूरत है।
पश्चिम दिशा मे रसोईघर
पश्चिम दिशा में रसोईघर होने से आए दिन अकारण घर में क्लेश होती रहती है। इसके साथ ही संतान पक्ष से भी परेशानी आती है।
नैर्ऋत्य कोण मे रसोईघर
इस दिशा में रसोईघर बहुत ही अशुभ फल देता है। नैऋत्य कोण में रसोईघर बनवाने से आर्थिक हानि तथा घर में छोटी-छोटी समस्या बढ़ जाती है। यही नहीं घर के कोई एक सदस्य या गृहिणी शारीरिक और मानसिक रोग के शिकार भी हो सकते है। दिवा स्वप्न बढ़ जाता है और इसके कारण गृह क्लेश और दुर्घटना की सम्भावना भी बढ़ जाती है।
दक्षिण दिशा मे रसोईघर
दक्षिण दिशा में रसोई घर बनाने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। मन में हमेशा बेचैनी बानी रहेगी। कोई भी काम देर से होगा। मानसिक रूप से हमेशा परेशान रह सकते है।
आग्नेय कोण मे रसोईघर | दक्षिण-पूर्व दिशा
दक्षिण- पूर्व । आग्नेय कोण में रसोई घर बनाना सबसे अच्छा मान गया है। इस स्थान में रसोई होने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। घर के सदस्य स्वस्थ्य जीवन व्यतीत करते है।
पूर्व दिशा मे रसोईघर
पूर्व दिशा में किचन होना अच्छा नहीं है फिर भी विकल्प के रूप में इस दिशा में रसोई घर बनाया जा सकता है। इस दिशा में रसोई होने से पारिवारिक सदस्यों के मध्य स्वभाव में रूखापन आ जाता है। वही एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी बढ़ जाता है। वंश वृद्धि में भी समस्या आती है।

वास्तु से पढ़ाई पर भी पढ़ता है प्रभाव
वास्तु दोष का प्रभाव न केवल पारिवारिक जीवन पर, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी होता है। वास्तु के प्रभाव से अध्ययन के लिए सही वातावरण का निर्माण होता है। अक्सर यह देखा गया है कि जिस बच्चे के अध्ययन कक्ष में कोई भी वास्तु दोष होता है, उसकी पढ़ाई में बाधाएं आने लगती हैं। वह काफी मेहनत करे तो भी उसे मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलता। आखिर इसकी क्या वजह है? वास्तु के अनुसार, इसके अनेक कारण हो सकते हैं। आप भी जानिए ऐसे ही कुछ खास उपायों के बारे में जिनसे आपका बच्चा भी पढ़ाई में तेज हो जाएगा। – अध्ययन कक्ष का रंग बच्चे के मन को बहुत प्रभावित करता है। कमरे की दीवारों का रंग बहुत गहरा, भड़कीला और लाल, काला, नीला आदि नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार जिस टेबल पर बच्चा पढ़ाई करे, उस पर अनावश्यक वस्तुएं नहीं होनी चाहिए। बहुत पुरानी किताबें, टूटे और खराब पेन, खाली दवात, रबर के टुकड़े आदि नहीं होने चाहिए। इस कक्ष में प्रकाश की ठीक व्यवस्था होनी चाहिए। जहां तक संभव हो, पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जहां बैठकर पढ़ाई करे, वहां से बाईं ओर प्रकाश आना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि रोशनी बहुत तेज या धुंधली न हो। इससे बच्चे की आंखें कमजोर हो सकती हैं या ​सरदर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अध्ययन कक्ष में सामान बिखरा हुआ न हो। हर चीज सलीके से और सही जगह रखी होनी चाहिए। कमरे में कचरा, बहुत ज्यादा जूते-चप्पल, बिखरा हुआ खेल का सामान, मैले कपड़े नहीं होने चाहिए। कमरे में बहुत ज्यादा खिड़की-दरवाजे भी नहीं होने चाहिये। खासतौर पर पढ़ते वक्त बच्चे का ध्यान खिड़की की ओर न जाए। ऐसी स्थिति में खिड़की पर पर्दा लगा देना चाहिए। याद रखें, यह कक्ष सिर्फ अध्ययन के लिए है। अत: यहां सिर्फ पढ़ाई होनी चाहिए। इस कक्ष में म्यूजिक सिस्टम, टीवी आदि नहीं होने चाहिए। इसी प्रकार जब तक पढ़ाई करें, मोबाइल आदि उपकरणों से दूर ही रहना चाहिए। बार-बार मोबाइल देखने से ध्यान भटकता है। अध्ययन कक्ष् में भारी सामान, अनुपयोगी कबाड़, पुराने बर्तन आदि नहीं होने चाहिए। स्टडी रूम में ज्ञान की देवी सरस्वती का चित्र स्थापित कर रोज प्रणाम करने से विद्या की प्राप्ति होती है।

उत्तर-पूर्व में वाशिंग मशीन होगी सेहत पर भारी
वाशिंग मशीन का उपयोग कपड़े धोने में किया जाता है, लेकिन इसे वास्तु के लिहाज से देखा जाए तो यह आपकी कई परेशानियों को भी बढ़ा सकती है, वहीं अगर इसके उपाय पहले से ही कर लिए जाऐं वाशिंग मशीन से संबंधित वास्तुदोषों से राहत भी पायी जा सकती है। क्या आप जानते हैं वाशिंग मशीन से कौनसे वास्तुदोष उत्पन्न होते हैं और इन्हें दूर करने के उपाय क्या हैं।
वास्तुशास्त्र के अनुसार वाशिंग मशीन को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। यह दोनों ही दिशाएं चिंता और विश्लेषण से संबंधित होती है। यदि आप घर में वाशिंग मशीन को इस दिशा में रखते हैं तो करियर के विकास में आ रही रुकावटों को दूर किया जा सकता है।
उत्तर-पूर्व में यदि वाशिंग मशीन रखी हो तो यह आपके स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। इसलिए इसे ऐसी जगह रखने से बचें।दक्षिण-पश्चिम दिशा में अगर वाशिंग मशीन रखी जाती है तो इससे वास्तुदोष उप्पन्न होता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है। ऐसे में इस दिशा में वाशिंग मशीन भूलकर भी न रखें।

शयनकक्ष हो वास्तु के अनुसार
दिन भर के कामकाज के बाद शयनकक्ष ही वह जगह है जहां हम आराम के पल बिताने के साथ ही तरोताजा होते हैं। शयनकक्ष के वास्तु का हमारी शांति और सुकून से गहरा संबंध है। वास्तु सम्मत शयनकक्ष हमारे कष्टों को दूर करता है और हमारे जीवन में प्रसन्नता लाता है। वहीं अगर शयनकक्ष में वास्तुदोष हो तो न ठीक से नींद आती है और न ही किसी काम में मन लगता है। ऐसे में शयनकक्ष के वास्तु को ठीक करना बहुत आवश्यक होता है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार पलंग शयनकक्ष के द्वार के पास नहीं होना चाहिए इससे मन में व्याकुलता और अशांति बनी रहेगी। इसके साथ ही शयनकक्ष का द्वार एक पल्ले का होना चाहिए।
गृहस्वामी का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम कोण में अथवा पश्चिम दिशा में होना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋर्त्य कोण पृथ्वी तत्व अर्थात स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
बच्चों, अविवाहितों अथवा मेहमानों के लिए पूर्व दिशा में शयनकक्ष होना चाहिए, वास्तुशास्त्र के अनुसार इस कक्ष में नवविवाहित जोड़े को नहीं ठहरना चाहिए।
अगर गृहस्वामी को अपने कार्य के सिलसिले में अक्सर टूर पर रहना पड़ता हो तो वास्तुशास्त्र के अनुसार शयनकक्ष वायव्य कोण में बनाना श्रेयस्कर होगा।
शयनकक्ष में पलंग या बेड इस तरह हो कि उस पर सोते हुए सिर पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर रहे। इस तरह सोने से प्रातः उठने पर मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होगा। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है, यह जीवनदाता और शुभ है।

घर में इस प्रकार रहेगा सकारात्मक माहौल
घर में खुशहाली लाने के लिए हमें सकारात्मक माहौल रखना होगा। साथ ही वास्तुदोषों को दूर करना होगा। हम जिस स्थान पर रहते हैं, उसे वास्तु कहते हैं। इसलिए जिस जगह रहते हैं, उस मकान में कौन-सा दोष है, जिसके कारण हम दुख-तकलीफ उठाते हैं, इसे स्वयं नहीं जान सकते। हमें यह भी पता नहीं रहता कि उस घर में नकारात्मक ऊर्जा है या सकारात्मक।
वास्तु में प्रत्येक स्थान का जगह तय है और इसमें फेरबदल होने से वास्तु दोष होता है।
ईशान अर्थात ई-ईश्वर, शान-स्थान। इस स्थान पर भगवान का मंदिर होना चाहिए एवं इस कोण में जल भी होना चाहिए। यदि इस दिशा में रसोई घर हो या गैस की टंकी रखी हो तो वास्तुदोष होगा।
अतः इसे तुरंत हटाकर पूजा स्थान बनाना चाहिए या फिर इस स्थान पर जल रखना चाहिए। पूर्व दिशा में बाथरूम शुभ रहता है। खाना बनाने वाला स्थान सदैव पूर्व अग्निकोण में होना चाहिए। भोजन करते वक्त दक्षिण में मुंह करके नहीं बैठना चाहिए।
प्रमुख व्यक्तियों का शयन कक्ष नैऋत्य कोण में होना चाहिए। बच्चों को वायव्य कोण में रखना चाहिए। शयनकक्ष में सोते समय सिर उत्तर में, पैर दक्षिण में कभी न करें। अग्निकोण में सोने से पति-पत्नी में वैमनस्यता रहकर व्यर्थ धन व्यय होता है। ईशान में सोने से बीमारी होती है। पश्चिम दिशा की ओर पैर रखकर सोने से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। उत्तर की ओर पैर रखकर सोने से धन की वृद्धि होती है एवं उम्र बढ़ती है।
फेंगशुई के अनुसार घर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व व अग्नि कोण के द्वार का रंग सदैव हरा या ब्ल्यू रखना चाहिए। दक्षिण दिशा के प्रवेश द्वार का रंग हरा, लाल, बैंगनी, केसरिया होना चाहिए। नैऋत्य और ईशान कोण का प्रवेश द्वार हरे रंग का या पीला केसरी या बैंगनी होना चाहिए। पश्चिम और वायव्य दिशा का प्रवेश द्वार सफेद या सुनहरा होना चाहिए। उत्तर दिशा का प्रवेश द्वार आसमानी सुनहरा या काला होना चाहिए।
बेडरूम में टेबल गोल होना चाहिए। बीम के नीचे व कालम के सामने नहीं सोना चाहिए। बच्चों के बेडरूम में कांच नहीं लगाना चाहिए। मिट्टी और धातु की वस्तुएं अधिक होना चाहिए। ट्यूबलाइट की जगह लैम्प होना चाहिए।

शयनकक्ष में न रखें डरावनी तस्वीरें व वस्तुएं
शयनकक्ष आपके घर की वो जगह होती है जहां आप दिन भर की थकान भुलाकर तरोताजा होते हैं। पर कई वस्तुएं रात के समय सिर के पास नहीं होनी चाहिये। वरना नींद में खलल के साथ आपकी रातें भी डरावनी हो जाएंगी।
अक्‍सर देखने को मिलता है कि लोग आलस्‍य के चलते अपना पर्स तकिए के नीचे ही रखकर सो जाते हैं। कई बार पर्स नहीं तो पैसे ही लोग अपने तकिए के नीचे दबा देते हैं। वास्‍तु के हिसाब से ऐसा करने से हर वक्‍त रुपये पैसे की चिंता लगी रहती है और रात में भी नींद नहीं आती।
बेडरूम में कोई भी डरावनी फोटो या वस्‍तुएं नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने से रात में आपको डरावने सपने आ सकते हैं। यहां तक कि बेडरूम में किसी भी प्रकार का हथियार न रखें। इससे नकारात्‍मक ऊर्जा बढ़ती है और दुर्घटना होने की आशंका भी रहती है।
अक्‍सर देखा गया है कि लोग रात को सोने से पहले किताब पढ़ते हैं और फ‍िर उसे तकिए के पास में ही रखकर सो जाते हैं। ऐसा करने से मन चलायमान और विचलित रहता है और गहरी नींद नहीं आ पाती। किताब पढ़ने के बाद उसे यथा स्‍थान रख दें।
कभी भी अपने सोने के स्‍थान पर इलैक्‍ट्रॉनिक वस्‍तुएं जैसे मोबाइल, आईपैड या आईफोन आदि गैजेट्स या किसी भी प्रकार के आवाज करने वाले खिलौने या इससे मिलता-जुलता कोई भी सामान न रखें।
अपने बेड के आस-पास या उसके नीचे जूते-चप्‍पल या अन्‍य कबाड़ा गलती से भी न रखें। अन्‍यथा नकारात्‍मक ऊर्जा आएगी जो कि आपकी नींद को भंग करेगी। कई बार देखा गया है कि लोग कई दिन के पुराने-पुराने अखबार बेडरूम में इकट्ठा करते रहते हैं। ऐसा भूलकर भी न करें।

घर में खुशहाली इस प्रकार आयेगी
घर में खुशहाली सभी चाहते हैं पर इसके लिए कई बातों का ध्यान रखना जरुरी है। यहां तक की घर का दरवाजा भी वास्तु के अनुसार सही होना चाहिये। अक्सर देखा जाता है कि सुख-समृद्धि के लिए परेशान लोगों को वास्तु के कुछ तरीके अपनाने से लाभ होता है। इसलिए घर बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें।
दरवाजे से ना आए आवाज
दरवाजा होता है सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बिंदु इसलिए दरवाजा खोलते/बंद करते समय नहीं आनी चाहिए आवाज। यह अशुभ माना जाता है।
झुका ना हो दरवाजा
अगर घर का दरवाजा अंदर को झुका हो तो घर में परेशानी बनी होती है जबकि बाहर की ओर झुका होने पर घर का मालिक अक्सर बाहर ही रहता है। इसलिए दरवाजे को हमेशा रखें संतुलित।
उल्टा ना खुले दरवाजा
घर का मुख्य दरवाजा हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए, बाहर की ओर दरवाजा खुलने से रोग और खर्च बढ़ते हैं।
रगड़ ना खाए दरवाजा
घर के मुख्य दरवाजे को खोलते समय रगड़ नहीं खाना चाहिए। दरवाजे के रगड़ खाने से आर्थिक दिक्कतें आती हैं और पैसा कमाने के लिए भी हद से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
घर के बीचोबीच ना हो मुख्य दरवाजा
घर का मुख्य दरवाजा हमेशा किसी एक तरफ को होना चाहिए। दरवाजा बीचोबीच होने से घर में विवाद, शोक और हानि होते हैं। साथ ही साथ महिलाओं को काफी कष्ट का सामना करना पड़ता है।अगर आपके घर का दरवाजा अपने आप खुलता है तो आपको मानसिक परेशानी और मतिभ्रम पैदा होता है और अपने आप बंद होता है तो कुल का नाश हो सकता है।

सही दिशा में रखें जरुरी दस्तावेज
अतीत, वर्तमान, भविष्य के लिए कुछ जरूरी कागजात सभी के साथ लगे होते हैं। ऐसे में इंश्योरेन्स, इंकम टैक्स, सेल्स टैक्स, वसीयत, जमीन की रजिस्ट्री के कागज, कोर्ट कचहरी के कागज, गिरबी एवं ब्याज के कागज, व्यापारिक दस्तावेज, मेडिकल फाईल, चेक बुक, पासबुक, एफ.डी, धार्मिक किताबें, शिक्षित योग्यता (मार्कशीट, रिजल्ट इत्यादि) शादी-विवाह का निमंत्रण पत्र, सम्मानित किया हुआ प्रशंसा पत्र इत्यादि को अपने घर या ऑफिस में किस स्थान पर रखें। यह भी बेहद अहम होता है अन्यथा नुकसान की संभावना रहती है।
वास्तुशास्त्र के संपूर्णं ज्ञान से चारो फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है यही मानव के लक्ष्य हैं।
हर एक दस्तावेज अपनी अहमियत रखता है। सबसे पहले भूखंड कि दिशाओं के बारे में आपको जानकारी दे दें। मुख्य दिशाएं चार होती है पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण। चार विदिशाएं होती है – आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य और ईशान। अलग-अलग दिशाओं मे रखने के लिए अलग-अलग दस्तावेज होते हैं। विद्वानों ने मार्गदर्शन दिया है सर्वप्रथम संपति-अनादिकाल से ही सम्पति बनाना, संपत्ति का संचय करना चला आ रहा है। प्राचीन काल में हाथी, घोड़े सम्पति का एक भाग होता था। श्रेष्ठी की पहचान करने में इनकी गिनती बोली जाती थी। समय का चक्र बदलता चला गया। आज संपत्ति का तात्पर्य सोना-चांदी, रुपए-पैसे, जमीन-जायदाद माना जा रहा है। प्राचीन समय से ही विद्वानों के मतान्तर रहे हैं कुछ विद्वानों का मत नैऋत्य कोण है। कुछ विद्वानों का मत उत्तर के मध्य कुबेर स्थान है। वैसे ज्यादातर नैऋत्य कोण में संपति रखने के परिणाम अच्छे पाए जाते हैं।
नैऋत्य कोण में कागजात रखते समय विशेष रखना चाहिए –
तिजोरी का मुख उत्तर की तरफ हो। तिजोरी जमीन से लगी हुई न हो।
तिजोरी लकड़ी के आसन पर विराजमान हो।
तिजोरी दीवार से लगी नहीं होनी चाहिए एवं दीवार के अंदर नहीं होनी चाहिए।
तिजोरी में इतर, सेंट, नेलकटर, छुरी-कैची, सरौता इत्यादि नहीं रखना चाहिए।
तिजोरी के ऊपर नीचे अगल-बगल में टॉयलेट, किचन नहीं आना चाहिए।
तिजोरी के ऊपर एवं अंदर काला एवं लाल रंग नहीं होना चाहिए।
नैऋत्य की तिजोरी धन संपत्ति को रोककर एंव संभाल कर रखने में सहायक होती है। उदाहरण के तौर पर सोना-चांदी, रुपए-पैसे, जमीन-जायदाद के कागजात, वसीयत के पेपर, एफ डी इंश्योरेंस इत्यादि।
वायव्य दिशा में क्यों ?
वायव्य दिशा में रखने का अर्थ हवा की तरह भागना है। इकंम टैक्स, सेल्स टैक्स, कोर्ट कचहरी के कागज जो किसी कारण वश आगे नहीं बढ़ पा रहा हो या उस जमीन-जायदाद का वायव्य कोण में रखना चाहिए। वायव्य कोण में रखने से उपरोक्त कार्य में आगे बढ़ने की चंचलता आ जाती है। आपका प्रयास सफल हो जाता है। सम्मानित मान-पत्र प्रशंसापत्र वायव्य में लगाने से ख्याति फैलती है।
ईशाण कोण में क्यों ?
इंकम टैक्स, सेल्स टैक्स, कोर्ट-कचहरी इत्यादि जिसमें हमारा पक्ष कमजोर हो, हमें जीत की संभावना कम हो उन्हें ईशाण कोण में रखने से लाभ प्राप्त होता है। कोई जायदाद क्रय करने के बाद उसमें कई प्रकार की कानूनी अड़चने आने लग जाती हैं उन कागजातों को भी ईशाण कोण में रखना चाहिए। धार्मिक किताबें, धार्मिक चित्र इत्यादि ईशान कोण में शोभित होते हैं।

घर में इस प्रकार लायें सकारात्मक उर्जा
सामान्य तौर यदि घर में या घर के आस-पास कोई ऐसी संरचना, पेड़े-पौधे, वस्तु आदि जिनसे नकारात्मक उर्जा में वृद्धि होती है, तो वह वास्तुशास्त्र के अनुसार गंभीर वास्तुदोष माना जाता है।
भारतीय वास्तुशास्त्र जिस मौलिक सिद्धांत पर काम करता है, वह है घर और जीवन में सकारात्मक उर्जा
में वृद्धि और नकारात्मक उर्जा को नष्ट करना है। सामान्य तौर यदि घर में या घर के आस-पास कोई ऐसी संरचना, पेड़े-पौधे, वस्तु आदि जिनसे नेगेटिव एनर्जी में वृद्धि होती है, तो वह वास्तुशास्त्र के अनुसार गंभीर वास्तुदोष माना जाता है। इन वास्तुदोषों को दूर कर घर और जीवन को बुरे प्रभावों से बचाया जा सकता है और सकारात्मक उर्जा को बरकार रखा जा सकता है।
यदि आप अपने ड्रॉइंगरूम में ताजे फूलों का गुलदस्ता रखते हैं या उसे सजाते हैं, तो ध्यान रखें कि ये सही समय पर बदले जाएं1 हो सके तो इन्हें रोज बदलें। वास्तुशास्त्र के अनुसार, जब ये फूल मुरझा जाते हैं तो इनसे घर में नेगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है।
कई बार घरों में सही चुनाई और प्लास्टरिंग न होने की वजह से कमरों की दीवारों पर सीलन पैदा होने लगती है1 भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार यह शुभ नहीं माना जाता है। सीलन से बनी आकृतियां नकारात्मक उर्जा को बढ़ाती है। इसलिए ऐसी दीवारों को जल्द-से-जल्द ठीक करवा लें।
घर के आंगन में लगे पेड़-पौधे अगर सूख जाएं, तो उन्हें तुरंत हटवा दें. ये न केवल भद्दे लगते हैं, बल्कि ये पेड़ जीवन की समाप्ति को दर्शाते है और नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करते हैं।
इंटीरियर डेकोरेशन के लिए कुछ ऐसी पेंटिंग और कलाकृतियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो मृतप्राय पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के अवशेषों से बने होते हैं। ये सभी मृतप्राय सजावटी कलाकृतियां और वस्तुएं, शंख, सीपी, मूंगा को छोड़कर, वास्तुशास्त्र के दृष्टिकोण से शुभ नहीं माने जाते हैं। इसलिए इनका उपयोग करने बचें।
यदि बेडरूम की खिड़की और मकान के मेन गेट से सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं, ट्रांसफॉर्मर आदि जैसे दृश्य दिखाई देते हों, तो इनसे से बचने के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर पर्दा डाल दें. ऐसे दृश्य नकारात्मकता में वृद्धि करते हैं.

वास्‍तु के अनुरूप हो प्रवेश द्वार
कई बार घर में सब कुछ ठीक होने के बावजूद मन में अशांति रहती है। इसके पीछे कई बार घर के मुख्‍य से जुड़े वास्‍तु दोष जिम्मेदार होते हैं। इसलिए वास्तु की मान्यता के अनुसार यह जरूरी है कि आपके घर का प्रवेश द्वारा वास्‍तु के अनुरूप हो ताकी नकारात्‍मक ऊर्जा घर में प्रवेश ही न कर सके.
आपके घर का मुख्‍य द्वार वास्‍तु की नजर से बेहद अहम है, जिस तरह इसी दरवाजे से अच्‍छे और बुरे लोग आपके घर में आते हैं ठीक उसी तरह इसी दरवाजे से सकारात्‍मक और नकारात्‍मक ऊर्जा भी प्रवेश करती है। अक्‍सर घर में सब कुछ ठीक होने के बावजूद कुछ ठीक नहीं होता। मन और घर में नकारात्‍मक ऊर्जा रहती है1 इसके पीछे कई बार घर के मुख्‍य से जुड़े वास्‍तु दोष होते हैं। इसलिए वास्तु की मान्यता के अनुसार यह जरूरी है कि आपके घर का प्रवेश द्वारा वास्‍तु के अनुरूप हो ताकी नकारात्‍मक ऊर्जा घर में प्रवेश ही न कर सके।
क्‍या करें क्‍या न करें
घर के बाहर रोशनी का इंतजाम जरूर करें1 भले ही बल्ब या ट्यूबलाइट लगाएं, पर अंधेरा होते ही उसे जला कर रखें।
अक्‍सर हम सभी घर के बाहर नेमप्लेट लगाते हैं और उसे लगा कर भूल जाते हैं. ऐसी गलती न करें. वास्‍तु के अनुसार नेमप्लेट जितनी साफ और चमकदार होगी नकारात्मक ऊर्जा आपके घर से उतनी ही दूर रहेगी1
अगर आपके घर के बाहर भी शू रैग, साइकिल, स्‍कूटर, कार वगैरह रखे या पार्क होते हैं, तो कोशिश करें कि ये मेन डोर से हट कर हों।
मुख्‍य द्वार के वास्‍तु दोष
वास्‍तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार के सामने किसी दीवार, पेड या किसी भी तरह की छाया नहीं होनी चाहिए.
कई बार सब कुछ ठीक होने के बावजूद वास्‍तु दोष के कारण परेशानियां सामने आती हैं। इसी तरह मुख्य द्वार अगर घर के बीचों-बीच होता है तो कलह का संकेत है।
कई बार हम सजावाट के लिए घर के बाहर या मुख्य द्वार पर किसी तरह की बेल-पौधे लगा लेते हैं, जोकि वास्‍तु के अनुसार ठीक नहीं है1
वास्‍तु के हिसाब से घर का मेन डोर खोलते ही सामने सीढ़ी नहीं होनी चाहिए1 इस बात का भी ध्‍यान रखें कि मेन डोर हमेशा अंदर की तरफ खुलने वाला होना चाहिए।
वास्‍तु के सरल उपाय
याद हो तो पुराने जमाने में घर के मुख्‍य द्वार को झालरों से सजाया जाता था। यह घर की खूबसूरती के साथ ही वास्‍तु के हिसाब से भी अच्‍छा है. ऐसा करने से घर में नकारात्‍मक ऊर्जा नहीं आती। मेन डोर के बाहरी ओर दीवार पर पाकुआ दर्पण स्थापित करें।
आप चाहें तो नकारात्‍मक ऊर्जा को दूर करने के लिए विंड बेल्‍स लगाएं।
मुख्य द्वार पर क्रिस्टल बॉल लटकाएं। इसके अलावा आप मेन डोर पर लाल रंग का फीता बांधने से भी घर में नकारात्‍मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती।
घर का मुख्‍य द्वार खोलते ही सीढ़ी नहीं होनी चाहिए, अगर ऐसा है, तो फिर उन पर पर्दा डाल कर नकारात्‍मक ऊर्जा को दूर किया जा सकता है।

 

तो समझे आप पर है महालक्ष्मी की कृपा
अगर आप पर महालक्ष्मी की कृपा होने वाली है तो इसके लिए कुछ विशेष संकेत पहले ही मिलने लगते हैं। किसी भी व्यक्ति की पैसों से जुड़ी इच्छाएं कब पूरी होंगी, महालक्ष्मी की कृपा कब मिलेगी। यह जानने के लिए ज्योतिष में यह संकेत बताए गए हैं. मान्यता है कि जब भी ये संकेत मिलते हैं तो समझ लेना चाहिए कि व्यक्ति को लक्ष्मी की कृपा मिलने वाली है और पैसों की परेशानियां दूर होने वाली हैं।
सुबह-सुबह उठते ही आपकी नजर अगर दूध या दही से भरे बर्तन पर पड़े तो समझ लें कि कुछ शुभ होने वाला है।सुबह शंख ,मंदिर की घंटियों की आवाज सुनाई दे तो यह बहुत ही शुभ होता है। यदि किसी व्यक्ति को सुबह शाम गन्ना दिखाई दे तो उसे निकट भविष्य में धन सबंधी मामलो में सफलता मिल सकती है। यदि किसी व्यक्ति के सपनों में बार-बार पानी ,हरियाली ,लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू दिखाई दे तो समझ लेना चाहिए कि आने वाले समय में मां लक्ष्मी जी की कृपा से धन सबंधी परेशानियां दूर होने वाली हैं। यदि हम किसी आवश्यक काम के लिए जा रहे हैं और रास्ते में लाल साड़ी में पुरे सोलह श्रृंगार में कोई महिला दिख जाए तो यह भी महालक्ष्मी की कृपा का इशारा ही है ऐसा होने पर उस दिन कार्यों में सफलता मिलने की सम्भवना अधिक है। नारियल, शंख, मोर, हंस, फूल आदि चीजें सुबह दिखाई देती है तो बहुत शुभ है
शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को महालक्ष्मी की पूजा करने से विशेष कृपा मिलती है। इस दिन यदि कोई कन्या आपको सिक्का दे तो यह शुभ संकेत है। ऐसा होने पर समझ लेना चाहिए की निकट भविष्य में धन लाभ होने वाला है।
यदि घर से निकलते ही गाय दिखाई दे तो यह शुभ संकेत है। अगर गाय सफेद हो तो यह बहुत ही शुभ संकेत है।
यदि किसी व्यक्ति के सपने में सफेद सांप, सोने के जैसा सांप दिखाई देने लगे तो यह भी महालक्ष्मी की कृपा का इशारा है ऐसा होने पर निकट भविष्य में कोई विशेष उपलब्धि हासिल हो सकती है। यदि घर से निकलते ही कोई सफाई कर्मी दिखाई दे तो यह भी शुभ संकेत होता है।

वस्तुओं को घर से करें बाहर
हमारा जीवन खुशियों से भरा हो और हमें कोई संकट नहीं आये इसकी कामना हम सभी करते हैं। इसके लिए हम पूजा पाठ के साथ ही क्रत और उपवास भी करते हैं पर फिर भी कई बार परिणाम नहीं आ पाते। इसके लिए वास्तु के दोष भी जिम्मेदार हो सकते हैं। जिस तरह वास्तु के अनुसार, कुछ चीजों को घर में रखने से सुख-शांति का माहौल बनता है, ठीक उसी तरह घर में कुछ चीजों के होने से अशांति का माहौल भी बनता है। वास्तु के अनुसार, कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें घर मे रखने से घर का माहौल बिगड़ सकता है। ऐसे में इन वस्तुओं को तत्काल ही हटा देना चाहिये।
घर साफ रखना जरूरी है। घर में अगर कहीं से गंदा पानी लीक हो रहा हो तो तुरंत उसकी मरम्मत करा लें। घर में गंदा पानी रहना सही नहीं है। इससे न सिर्फ बीमारियों के होने का खतरा बढ़ता है बल्कि वास्तु के अनुसार भी यह सही नहीं है।
इसके अलावा घर के अंदर कांटेदार पौधे तो कभी न रखें। ऐसे पौधे घर के बाहर लगाएं। जिन घरों में ऐसे पौधे होते हैं, उन घरों में लोगों की सेहत अक्सर खराब रहती है।
घर के भीतर पत्थर न रखें
ध्यान रहे आपके घर के भीतर कोई पत्थर न हो। घर के भीतर पत्थर होने का सीधा सा मतलब यह है कि परिवार के लोगों को सफलता पाने के लिए काफी संघर्ष करना होगा। इशके अलावा घर में अशांति भी बढ़ती है।
रोजाना के कचड़े को हर रोज घर से बाहर फेंक दें। घर में कचड़ा जमा होने से रिश्तों में तनाव आने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही कर्ज की आशंका भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही अगर आपके घर के आगे कोई रास्ता है तो वह दरवाजे के प्लेटफॉर्म से ऊंचा नहीं होना चाहिए। अगर दोनों एक समान स्तर पर हैं तो भी ठीक है लेकिन मुख्य द्वार नीचे नहीं होना चाहिए। इन सब उपायों को अपनाएं जरूर लाभ होगा।

नौकरी के लिए करें ये उपाय
जीवन में धन संपदा के बिना कोई सुख नहीं मिल सकता। सभी लोग इसके लिए प्रयास करते हैं पर कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी बेरोजगार रह जाता है। वह नौकरी के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उसकी कोशिश विफल होती जाती है। इसके लिए व्यक्ति भाग्य को जिम्मेदार ठहराता है पर अपने भाग्य को कोसने के बजाय अगर वास्तु सम्मत उपाय किए जाएं तो हमें सफलता मिल सकती है।
नौकरी के लिए साक्षात्कार देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें। सम्भव हो, तो शर्ट भी लाल पहनें। आप जितना अधिक लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं, करें। लेकिन यह याद रखें कि लाल रंग भड़कीला ना हो, सौम्य लगे।
रात में सोते समय बेडरूम में पीले रंग का प्रयोग करें। याद रखें, लाल, पीला व सुनहरा रंग आपके भाग्य में वृद्धि लाता है। इसलिए हमेशा इसे अपने साथ रखें और इन रंगों का व्यवहार ज्यादा से ज्यादा करें, सफलता मिलेगी।
उत्तर दिशा की दीवार को व्यवस्थित करें। अगर इस दीवार पर कोई गैर जरूरी या पुराना सजावट का सामान हो तो उसे हटा दें। स्टेशनरी का पुराना सामान, ऑफिस की पुरानी फाइलें इन चीजों को घर से बाहर कर दें और उत्तर दिशा की दीवार को खाली रखें। साथ ही स्टील की अलमारी को भी उत्तर दिशा में रखने से बचें।
उत्तर दिशा की दीवार पर फुल लेंथ मिरर (आईना) रख सकते हैं। इस दिशा में आईना रखने से आपको बेहतर अवसर मिलेंगे और साक्षात्कार में भी सकारात्मक परिणाम आयेंगे।
साक्षात्कार के लिए घर से बाहर निकल रहे हों तो अपना दायां पैर पहले बाहर रखें। साथ ही घर से निकलने से पहले भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें सुपारी चढ़ाएं और प्रसाद के तौर पर इसे ग्रहण करें।
साक्षात्कार के समय अपना हाथ या पैर मोड़कर बैठने की बजाए, पूरे आत्मविश्वास के साथ बैठें। इस प्रकार आपको जरूर सफलता मिलेगी।

सकारात्मकता लाती हैं रंगबिरंगी मोमबत्तियां
वास्तु में कई ऐसे सामान होते हैं जो नकरात्मकता दूर कर सकारात्मकता लाते हैं। वहीं चीनी वास्तु फेंगशुई में मोमबत्ती या कैंडल की अहम भूमिका बतायी गई है। इसके द्वारा ऊर्जा का संतुलन किया जा सकता है। फेंगशुई में इस ऊर्जा को ’ची’ कहते हैं। मोमबत्तियों से प्राप्त ची नकारात्मक ऊर्जा को काट देती है और घर में सकारात्मक ची यानी ऊर्जा की वृद्धि करने के साथ ही आपका भाग्य भी जगाती है। घर के उत्तर-पूर्वी कोने में ग्रीन या हरे रंग की मोमबत्ती लगाएं। इससे न सिर्फ घर की सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है, बल्कि पढ़ने वाले बच्चों की एकाग्रता भी बढ़ती है।
दक्षिण पश्चिम यानी अग्निकोण में गुलाबी और पीले रंग की मोमबत्ती जलाएं। इससे परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम व सामंजस्य बढ़ता है। दक्षिण भाग को लाल रंग की मोमबत्ती से सजाएं। इससे धन समृद्धि में वृद्धि होती है।
नीले रंग की मोमबत्तियां पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में ही लगानी चाहिए। घर की उत्तर दिशा में सफेद रंग की मोमबत्ती लगाने से परिवार के सदस्यों में रचनात्मकता बढ़ती है।

व्यवसाय को इस प्रकार बनाये लाभकारी
कारोबार बढ़ाने में भी वास्तु के उपाय बेहद लाभदायक होते हैं। कार्यालय वह जगह है जहां लोग पेशेवर ढंग से अपने पेशे और व्यापार के लिए लक्षित होकर काम करते हैं। यह जगह धन सृजन के साथ-साथ प्रतिष्ठा और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति की जगह है। सैद्धांतिक तौर पर ऑफिस को सकारात्मक उर्जा से भरा होना चाहिए, माहौल में रौशनी की अधिकता होनी चाहिए, साथ इसका डिजायन भी आकर्षक और सुविधाजनक होना चाहिए। भारतीय वास्तुशास्त्रों में ऑफिस को व्यवसाय स्थल, कार्यस्थान या कार्यालय कहा गया है और अनेक विस्तृत उपायों की चर्चा की गई, जिसे अपना कर लाभ उठाया जा सकता ह।
भारतीय वास्तुशास्त्रों के अनुसार कार्यालय की बिल्डिंग के लिए उसका प्लॉट चौकोर या आयताकार होना सबसे लाभकारी होता है। अनियमित आकार के भूखंडों से बचने का सुझाव इन ग्रंथों में दिया गया है।
कार्यालय के बॉस या कंपनी के मालिक के बैठने का स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां किसी आगंतुक की दृष्टि सीधे उसपे न पड़े। इसके लिए ग्रंथों में दक्षिण-पश्चिम कोने में केबिन बनाने का सुझाव दिया गया है और उनका मुख उत्तर दिशा की और सर्वोत्तम माना गया है।
कार्यालय के सीनियर स्टाफ के लिए दक्षिण और पश्चिम में बैठना काफी वास्तुसम्मत माना गया है। साथ ही यह भी सुझाव है कि जब वे दक्षिण में बैठे हों, उनका मुख उत्तर की ओर होना चाहिए और पश्चिम में बैठते समय पूर्व का सामना करना चाहिए. जबकि ऑफिस के जूनियर स्टाफ के लिए पूर्व और उत्तरी भाग की जगह सर्वोत्तम मानी गई है।
धन नहीं रूकता तो बुधवार को करें भगवान गणेश का पूजन
हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन को किसी न किसी देवता, गृह के साथ पूजा-अर्चना से जोड़ा गया है। इसी क्रम में बुधवार को बुध ग्रह के नाम से जोड़ा गया है। इस दिन बुध ग्रह का पूजन किया जाता है। बुधवार के दिन श्री गणेश की पूजा का प्रावधान है। साथ ही, बुध ग्रह की पूजा भी बुधवार को की जाती है। मान्यता है कि कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ स्थिति में होने पर बुधवार को गणेश का पूजन करना लाभदायक होता है। हिंदू मान्यता के अनुसार अगर घर में धन नहीं रुकता, बेवजह धन व्यर्थ होता है, घर में क्लेश मचा रहता है, तो यह सब बुधवार को व्रत या पूजन से दूर किया जा सकता है। मान्यता है कि यह व्रत बुध ग्रह का अशुभ प्रभाव दूर करता है।
मान्यता है कि बुधवार का व्रत अंधेर यानी कृष्ण पक्ष की बजाए चांदन यानी शुक्ल पक्ष में रखने की शुरुआत करनी चाहिए। यह व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से करना शुभ माना जाता है। बुधवार का व्रत कम से कम 21 बुधवारों तक और ज्यादा से ज्यादा 41 बुधवारों तक करने से शुभ फल मिलता है। अन्य व्रतों की तरह इस व्रत में भी नमक का सेवन नहीं किया जा सकता। हिंदू धर्म में हर देवता का कुछ न कुछ प्रिय आहार होता ही है। ठीक इसी तरह मान्यता है कि बुधवार को खाने में मूंग की दाल की पंजीरी या हलवा भोग लगाने से भागवान गणेश जल्दी खुश होते हैं। इस व्रत में दान को विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि बुधवार का व्रत रखने के दौरान दान के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिये।