वास्तु -फेंगशुई

उत्तर दिशा में फव्वारा बढ़ाता है समृद्धि
अगर आप घर बनवाते समय वास्तु का ध्यान रखेंगे तो जीवन में कई परेशानियों से बचे रहेंगे। घर में हमेशा दक्षिणी हिस्से में ही सीढ़ियां बनवानी चाहिए, इससे घर में धन का आगमन सुचारु रूप से होता है। घर के उत्तर-पूर्वी हिस्से तथा उत्तर दिशा में फव्वारा लगाना समृद्धि कारक होता है। इस दिशा में छत पर वाटर टैंक लगाना अच्छा होता है। घर के दक्षिणी हिस्से में यदि तुलसी लगी हो, तो उसे तुरंत वहां से हटा लेना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा यम की है और इस दिशा में तुलसी लगाने से घरवालों को अनके प्रकार के रोग व कष्ट झेलने पड़ते है। घर के उत्तरी हिस्से से दक्षिणी हिस्से को हमेशा ऊंचा रखना चाहिए। घर का दक्षिणी हिस्सा उत्तरी हिस्से से जितना ऊंचा होगा, उतनी ही सुख समृद्धि का वास होगा।
मुख्यद्वार सबसे अहम
घर के मुख्यद्वार पर कभी कीचड़, गड्ढा या गंदा पानी नहीं बहना चाहिए, इससे घर में दरिद्रता आती है।
धन की कामना करने वाले को कभी भी देशी घी को जूठे हाथों से नहीं छूना चाहिए। सात मुखी रुद्राक्ष को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। इसे धारण करने से दरिद्रता दूर होती है पर रुद्राक्ष धारणकर्ता को मांस मदिरा से दूर रहना चाहिए
घर में जल का प्रवाह हमेशा उत्तर पूर्व या उत्तर दिशा में रखना चाहिए इससे धन की वृद्धि होती है। घर के ड्राइंग रूम में कभी फालतू का सामान या पुरानी वस्तुएं कभी नहीं रखनी चाहिए। इससे समृद्धि में रुकावट आती है। घर के ईशान कोण या मध्य में भूलकर भी शौचालय नहीं बनवाना चाहिए, इससे घर में अशांति और दरिद्रता आती है। घर के मुख्यद्वार के अंदर दक्षिणी दीवार के पास मनीप्लांट का पौधा लगाना श्रेयस्कर होता है।
भूखंड तिकोना न हो
घर में कभी सामान इधर उधर बिखराकर नहीं रखना चाहिए। घर के मुख्यद्वार में घुसते ही न ही सीधी सीढ़ी होनी चाहिए न ही सीधा अंदर का रास्ता होना चाहिए, घर में एक सीध में तीन द्वार होना भी हानिकारक होता है। घर के लिए कभी भी तिकोना भूखंड नहीं चुनना चाहिए, ऐसे भूखंड में हमेशा रोग और बीमारी लगे रहते हैं और कुछ न कुछ अशुभ ही होता रहता है। घर में कभी भी टूटे फूटे बर्तन, टूटा पलंग या खाट नहीं रखनी चाहिए, इससे घर में दरिद्रता का वास होता है।
लक्ष्मी की कामना करने वाले को कभी भी भगवान विष्णु को कनेर का पुष्प नहीं चढ़ाना चाहिए ऐसा शास्त्रों का कथन है।
घर की दक्षिण दिशा में पहाड़ का चित्र लगाने से समृद्धि आती है। बंद गली के अंतिम मकान जहां गली खत्म होती हो, उसमें नहीं रहना चाहिए। दीपक, पलंग या कैथे के पेड़ की छाया में कभी नहीं बैठना चाहिए इससे दरिद्रता आती है।

खुशहाली के लिए वास्तुशास्त्र का पालन करें
सभी अपने घर और जीवन में खुशहाली चाहते हैं पर कई बार हमें मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। अगर हम इस दौरान वास्तुशास्त्र का पालन करें तो आने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं। वास्तु विज्ञानियों की मानें तो घर में रखी हर चीज़ को वास्तुशास्त्र के अनुसार रखना चाहिए। इससे वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता तो उसके जीवन में कईं तरह की मुसीबतें पैदा हो जाती हैं। कहा जाता है कि वास्तुशास्त्र की हर बात इंसान के जीवन में अहम मानी जाती है। अगर इसमें लिखी सभी बातों को मान लिया जाए तो परिवार के लोगों का जीवन खुशहाल होता है। वहीं अगर वास्तुशास्त्र का पूरी तरह से पालन न किया जाए तो घर में खुशहाली नहीं रहती। कई बार घर के सदस्यों के बीच क्लेश और झगड़े बढ़ने लगते हैं। वास्तुशास्त्र के खास नियम अपनाकर कलह और आर्थिक समस्या से बचा जा सकता है।
उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ-सुधरा रखें
अगर आपके घर में आर्थिक परेशानी चल रही है तो घर की उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ-सुधरा रखें। उत्तर-पूर्व दिशा देवताओं के आगमन की दिशा मानी गई है। इसी दिशा से परिवार में खुशियों और धन की बारिश होती है। कहा जाता है कि इस दिशा में कभी भी कोई भारी सामान नहीं रखना चाहिए। घर की उत्तर-पश्चिम दिशा को भी धन का महत्वपूर्ण स्त्रोत माना गया है। जानकारों का कहना है कि इस दिशा में हमेशा रोशनी मौज़ूद होनी चाहिए। कभी भी इस दिशा में गंदगी नहीं होनी चाहिए। घर की इस दिशा में रोज़ सफाई करना शुभ माना जाता है।
दक्षिण दिशा रखें बंद
दक्षिण दिशा को यम का द्वार माना गया है। कोशिश करें कि इस दिशा को हमेशा बंद रखें और इस बात का भी ध्यान रखें कि कभी भी घर का प्रवेश द्वारा इस दिशा में न हो। इस दिशा को धन का नुकसान करने वाली दिशा कहा जाता है, इसलिए यहां कभी भी धन न रखें। इस दिशा को लेकर कुछ मान्यताएं यह भी है कि यह दिशा यहां रहने वाले सदस्यों की उम्र कम करती है। कहा जाता है कि दक्षिण-पूर्वी कोने में घर के मुखिया का कमरा कभी नहीं होना चाहिए। अगर घर के मुखिया का कमरा इस दिशा में है तो उसका जीवन कभी सुखी नहीं रहता। हमेशा परेशानियों से भरा रहता है। साथ ही घर का रसोईघर कभी उत्तर-पूर्वी दिशा में नहीं होना चाहिए।

नए घर में प्रवेश से पहले कुछ बातों का रखें ध्यान
नये मकान में प्रवेश से पहले या घर खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। वास्तु-ज्योतिष के अनुसार मकान क्या लाभ एवं हानि देते हैं इस पर विचार करना आवश्यक है। घर लेते समय एवं निवास में प्रवेश के बाद कुछ बातों का विशेष ध्‍यान रखना चाहिये। किसी भी रास्ते का अथवा गली का अंतिम मकान अशुभ होता है, यह कष्ट देने वाला होता है, (जहाँ रास्ता न हो)।एक ही दीवार से दो मकान बने हुए हों,(संयुक्त हों) तो वह यमराज के समान कष्ट देने वाले होते हैं। मालिक कष्ट में रहता है।
मकान पूर्व में उत्तर में हमेशा नीचा एवं पश्चिम में ऊँचा होना चाहिए। मकान दक्षिण में यदि ऊँचा है तो धनवृद्धि एवं पश्चिम में नीचा है तो धन का नाश करता है।घर के चारों तरफ एवं मेन गेट के सामने कुछ जगह छोड़ना चाहिए, यह लाभदायक रहती है।घर ऐसा बनाना चाहिए जिसमें मंदिर, के स्थान (देवालय) में सूर्य किरणें पड़ें, वरना अशुभ होता है।
हमेशा याद रखें पश्चिम से पूर्व की तरफ जो मकान लंबा होता है, वह ‘सूर्यबेधी’ कहलाता है एवं उत्तर से दक्षिण की ओर वाला मकान ‘चंद्रबेधी’ कहलाता है। शास्त्रों के अनुसार चंद्रबेधी मकान शुभ होता है। मकान में यदि आप आँगन छोड़ते हैं तो ध्यान रखें वह चंद्रबेधी हो। मकान के कुछ भाग में मिट्‍टी अवश्य होना चाहिए। पंचक में घर को लीपना, पुताई करना, जलाऊ लकड़ी लाना अशुभ होता है। (पंचक धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद एवं रेवती के बीच रहता है।) नए घर में मेन गेट का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसके टूटने से स्त्री को कष्ट होता है। नए घर में कोई वस्तु टूट जाती है, तो घर में किसी सदस्य की मृत्यु या मृत्यु समान कष्ट होता है। घर में टूटी खाट, टूटे बर्तन, टूटे-फूटे आसन एवं टूटी सायकल अथवा टूटे वाहन अशुभ फल देते हैं।
घर के अंदर बड़े वृक्ष नहीं होना चाहिए क्योंकि बड़े वृक्ष की जड़ में साँप, बिच्छू अपना स्थान बनाते हैं जोकि अशुभ होता है। व्यक्ति को हमेशा अपने भविष्य को शुभ मानकर मकान में सच्चे मन से प्रवेश करना चाहिए एवं शांतिपूर्वक जीवन बिताना चाहिए। इसलिए दोनों (पति-पत्नी) घर बनाते या लेते समय मन को साफ एवं स्वच्छ रखें एवं अपने इष्ट देवता, कुलदेवता के साथ पितरों का आशीर्वाद लेकर गृह प्रवेश करना चाहिए। आपको घर हमेशा सुख समृद्धि देगा।

मुख्य द्वार पर इसलिए बनाये जाते हैं शुभ प्रतीक
धर्म शास्त्रों के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर शुभ प्रतीक बनाने चाहिये, माना जाता है कि इससे सुख-समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों में कई शुभ प्रतीक बताए गए हैं जो घर को सभी परेशानियों को दूर रखने में हमारी मदद करते हैं। घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे इसलिए कई प्रकार के प्रतीक बनाए जाते हैं। इनमें स्वस्तिक, ॐ, ॐ नमः शिवाय, श्रीगणेश, पंचमुखी हनुमानजी, शुभ-लाभ आदि शामिल हैं।
ऐसी मान्यता है कि घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाकर शुभ-लाभ लिखने से घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। स्वस्तिक के साथ ही शुभ-लाभ भी धनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
नकारात्मक ऊर्जा नहीं रहती
स्वस्तिक का चिह्न बनाने से हमारे आसपास से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। इसलिए स्वस्तिक के साथ ही हर-त्योहार पर घर के मुख्य द्वार पर सिन्दूर से शुभ-लाभ लिखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार गणेश प्रथम पूज्य हैं और शुभ व लाभ यानी शुभ व क्षेम को उनका पुत्र माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर श्रीगणेश का चित्र या स्वस्तिक बनाने से घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे घर में हमेशा गणेशजी की कृपा रहती है और धन-धान्य की कमी नहीं होती। इसी वजह से घर के मुख्य द्वार पर श्रीगणेश का छोटा चित्र लगाएं या स्वस्तिक या कोई भी शुभ या मंगल चिह्न अवश्य लगाया जाना चाहिए। अगर आपका मुख्य द्वार दक्षिण मुखी है तो दरवाजे पर पंचमुखी हनुमानजी का चित्र लगाकर उसकी शुभता बढ़ाई जा सकती है।

फेंग शुई से लायें जीवन में खुशियां
फेंग शुई के जरिये आज अपने जीवन में खुशियां ला सकते हैं। यह एक प्रकार से चीनी वास्तुशास्त्र है। फेंग शुई में पेड़ पौधों का भी अहम स्थान रहता है। इसलिए अगर आप बगीचा बनाते हैं तो इसे फेंग शुई के अनुरुप रखें।
पौधे फेंग शुई के प्रभाव को बढ़ा देते हैं। फेंग शुई के अनुसार स्वस्थ और मजबूत पौधे आपके घर में खुशियां लाते हैं, और घर के हर कोने को उत्साह से भर देते हैं। फेंग शुई में पौधों को नौ आधारभूत सुरक्षा सावधानियों में से एक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि पेड़ जैविक तत्वों या तेज को बहुत शक्तिशाली रूप में संचारित करते हैं और नकारात्मक प्रभावों को दूर करते हैं। इसलिए घर के खाली हिस्सों में पौधे लगा देना चाहिए।
पेड़-पौधे ध्वनि और विकिरणों को भी प्रभावशाली ढंग से अवशोषित कर लेते हैं। चढ़ने वाली बेलें जिन्हें ‘क्लाइमबर्स कहा जाता है जैसे, मनी प्लांट को कोने में लगाकर उस जगह की उदासीनता को कम किया जा सकता है। घर के दक्षिण-पूर्व कोने को धन और समृद्धि का कोना माना जाता है, इसलिए यहां चौड़े पत्तियों वाले पौधे लगाना चाहिए।
मुरझा गए या सूख गए पौधों को तुरंत हटा देना चाहिए। घर के सामने वाले हिस्से में कांटेदार या नुकीले पत्तों वाले पौधे नहीं लगाना चाहिए। इन कुछ बातों पर अमल कर के आप भी फेंग शुई का फायदा उठा सकते हैं।
वहीं बगीचा बनाने के लिए जरूरी है कि सबसे पहले आप उसकी जगह तय कर लें। यदि आप घर के सामने में बगीचा बनाना चाहते हैं तो देखें कि कहां पौघे लगेंगे और किस जगह रास्ता रहेगा। बगीचे को अपनी इच्छा के अनुसार 2 या 3 भागों में बांट दीजिए। अब इन भाग में अलग-अलग तरह के फूल लगाइए जो बहुत सुंदर लगेंगे। बगीचे के बीच में आप चाहें तो गुलमोहर, नीम या आम जैसा बड़ा पेड़ भी लगा सकते हैं।यह पेड़ स्वास्थ के लिए अच्छे तो होते ही हैं, साथ ही साथ गर्मियों में ताजी हवा भी आपको मिलेगी। छोटी क्यारियां बनाने के बाद बाकी बची जमीन पर हरी घास लगा दें। आप चाहे तो क्यारियों को स्टार, सर्कल या कोई और आकार दे सकते हैं।

घर की सीढ़ियों हैं प्रगति का मार्ग
No Imageघर की सीढ़ियां प्रगति का मार्ग होती हैं, पर कई बार यही सीढ़ियां अगर ठीक से न बनें तो हमारी तरक्की में बाधा भी जाती हैं। यदि कोई चीज आपको शिखर तक पहुंचाने का मार्ग बना सकती है, तो वही आपके नीचे उतरने का कारण भी बना सकती है। मान्यता है कि सीढ़ियां हमेशा दक्षिण-पश्चिम में बनाएं, परंतु जिनका घर उत्तरमुखी है, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उन्हें घर के पिछले हिस्से में सीढ़ियां देनी पड़ती हैं। इससे उनके घर का आकार ही बिगड़ जाता है।
वास्तु के अंतर्गत ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि आप किसी चीज को केवल एक ही दिशा में बना सकते हैं, उसके लिए अन्य स्थान भी होते हैं। हां, यह बात सत्य है कि वे उतने लाभकारी न हों, परंतु अपने घर को वास्तु के अनुरूप आकर्षक रूप दे सकें, ऐसा संभव है।
सही दिशा से नहीं आयेंगी परेशानियां
घर में सीढ़ियों के लिए सर्वोत्तम दिशा दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम है। अगर सीढ़ियां सही जगह पर बनी हों तो बहुत से उतार-चढ़ाव व कठिनाइयों से बचा जा सकता है। सीढ़ियां कई प्रकार की होती हैं- लकड़ी की, लोहे की, पत्थर की आदि-आदि। आजकल की भागदौड़भरी जिंदगी में सीढ़ियों ने भी आधुनिक रूप ले लिया है।
दिशा के साथ-साथ सीढ़ियों की साज-सज्जा पर भी ध्यान देना चाहिए। सीढ़ियों की साज-सज्जा इस प्रकार की हो कि व्यक्ति को पता ही न चले कि वह कब पहली सीढ़ी से चढ़कर ऊपर पहुंच गया।
सीढ़ियों को अगर सही दिशा में न बनाया गया तो यह एक गंभीर वास्तुदोष माना जाता है। इस दोष के कारण मनुष्य को अनावश्यक आर्थिक कठिनाइयों के साथ ही निजी जीवन में भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसका उपाय तो सीढ़ियों का सही दिशा में स्‍थित होना ही है। किंतु यदि सीढ़ियां गलत दिशा में बनी हों और उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करना संभव न हो तो बिना तोड़-फोड़ के भी इस वास्तुदोष का निवारण किया जा सकता है। इसके लिए किसी वास्तु विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में स्टोन पिरामिड की स्थापना करनी पड़ती है। यदि कोई चीज हमें सफलता की राह पर ले जाती है तो जाहिर है कि उसका सुंदर, आकर्षक तथा सही होना भी जरूरी है।
फेंगशुई के अंतर्गत आदर्श सीढ़ियां वही होती हैं, जो सही आकार की व ठोस हों। यदि सीढ़ियों के मध्य वाला भाग खुला रहेगा तो वह किसी महत्वपूर्ण चीज को नष्ट करेगा।
सीढ़ियां हमेशा चौड़ी व व्यापक हों, क्योंकि संकीर्ण बनावट वाली सीढ़ियां शुभ फेंगशुई के अंतर्गत नहीं आती हैं। सीढ़ियों के नीचे का भाग कभी भी खाली न छोड़ें। आप यहां पर छोटा-सा कोठरीनुमा कमरा दे सकते हैं, स्टोर रूम दे सकते हैं, परंतु उसे सुसज्जित व संगठित तरीके से बनाएं। सीढ़ियों के नीचे कोई फिश-एक्वेरियम व अन्य जल से संबंधित उपकरण न रखें। इससे शुभ का रिसाव होता है और उस घर के सदस्यों को धन एकत्र करने में काफी परेशानी होती है।
सीढ़ियों के नीचे बाथरूम बनाने से भी इस प्रकार की परेशानी आती है, फिर चाहे उसकी दिशा ठीक भी हो तो भी वह नुकसानदायक साबित होता है।
घुमावदार न हों सीड़ियां
घर को आकर्षक रूप देने के लिए व जमीन का कम भाग प्रयोग में लाने के लिए अक्सर डिजाइनर व आर्किटेक्ट सीढ़ियों को घुमावदार रूप दे देते हैं। ऐसी सीढ़ियां आजकल बाजार में भी उपलब्‍ध होती हैं, परंतु ये बहुत नुकसानदायक होती हैं, क्योंकि ये घर की सकारात्मक ऊर्जा को निष्कासित कर देती हैं जिसके चलते कई समस्याएं आती हैं। सीढ़ियों के पास आप फूलदान लगा सकते हैं जिसमें पीले रंग के फूल हों। यह घर के अंदर काफी अच्छी ऊर्जा का संचालन करते हैं। इस प्रकार आप अपने घर की सीढ़ियों को वास्तु व फेंगशुई के अनुसार बना सकते हैं और जिनके घर में सीढ़ियां गलत भी बनी हों, वे इसकी सहायता से दोष को कम कर सकते हैं।

वास्तु दोष इस प्रकार होंगे दूर
घरों में वास्तु दोष के निवारण के लिए तोड़फोड़ जरुरी नहीं होती। कुछ ऐसे आसन उपाय हैं जिन्हें अपना कर आप वास्तु दोष दूर कर सकते हैं।
ईशान का कोना हमेशा स्वच्छ व खाली रखना चाहिए। इसे पूजा स्थल बनायें और यहां एक बर्तन में जल भरकर जरुर रखें। ध्यान रहे, यहां शौचालय किसी भी हालत में नहीं हो। घर में अग्नि का स्थान वास्तुसम्मत दिशा में होना चाहिए। अग्नि का स्थान आग्नेय कोण है, अतः रसोईघर यथासंभव घर के दक्षिण-पूर्व दिशा में बनाना चाहिए। चूल्हा उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए।
मुख्य द्वार या खिड़की से चूल्हा दिखाई नहीं देना चाहिए अन्यथा परिवार पर संकट आने की संभावना रहती है।
पश्चिम दिशा में बैठकर भोजन करने से संतोष, सुख व शांति मिलती है। अतः भोजन कक्ष पश्चिम में होना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो डाइनिंग टेबल पश्चिम दिशा में लगाएं।
घर की उत्तर और पूर्व दिशाओं में खिड़कियां, द्वार, जाल और बरामदा आदि बनवाएं और खुली जगह रखें। ध्यान रखें, घर का कोई भाग गोलाकार न हो। ध्यान रखें, पड़ोसी की वॉशिंग मशीन, सूखते कपड़े आदि आपके घर की खिड़की से दिखाई न दें।
घर का ईशान कोण दूषित हो, तो परिवार में अनेक समस्याएं आती हैं। इस दोष से मुक्ति हेतु एक घड़ा बरसात के पानी से भरकर उसे मिट्टी के बर्तन से ढंक कर ईशान कोण में दबा दें। द्वार खोलते ही सीढ़ियों का दिखाई देना अशुभ होता है। यदि आपके घर की सीढ़ियां इस स्थिति में हों, तो उनके मध्य एक पर्दा लगा दें।

घर में रहेगा सकारात्मक माहौल
हर व्यक्ति की चाहत होती है कि घर में शांत और खशी का माहौल हो। मगर, कई बार आपने देखा होगा कि सबकुछ अच्छा होते हुए भी घर में मानसिक शांति नहीं मिलती। परिवार के सदस्यों के बीच बिना किसी बात के तनाव हमेशा बना रहा है। अगर, आपको इसका कोई कारण समझ में नहीं आता है, तो इसकी वजह वास्तु संबंधी दोष हो सकते हैं।
वास्तु शास्त्र में प्रकृति की पांच प्राथमिक शक्तियों पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और वायु की शक्ति को देखा जाता है। वास्तु शास्त्र का मुख्य मकसद सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना और मानव जीवन को ऊंचा उठाना है। यदि आप भी इन वास्तु टिप्स को अपनाते हैं, तो आपके घर में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
उत्तर-पूर्व दिशा के बीच में एक मनी प्लांट या बांस का पेड़ लगाने से न केवल सकारात्मक आभा घर में बनेगी, बल्कि आपको आर्थिक रूप से भी यह मजबूत करेगा।
दक्षिणी-पश्चिमी दिशा में लकड़ी के पीले या गोल्डन फ्रेम में परिवार की तस्वीर लगाने से परिवार के लोगों के बीच संबंध अच्छे बने रहते हैं।
पूर्व दिशा में उगते हुए सूरज की पेंटिंग रखने से आप अपने सामाजिक संबंधों को बढ़ा सकते हैं।
प्रवेश द्वार पर गणेश की मूर्ति या तस्वीर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
उत्तर-पूर्व दिशा में प्रकृति से जुड़ी तस्वीरें लगाने से आपको अच्छी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
घर में दरवाजे और खिड़कियां की संख्या को सम संख्या में रखने का कोशिश करें।
पढ़ाई-लिखाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए पूर्व की दिशा में बच्चों की टेबल रखें।
अक्सर लोग चीजों को बिस्तर के नीचे रखते हैं। गैर-जरूरी चीजों को वहां से हटा दें क्योंकि ये आप पर भार बनाती हैं और आगे बढ़ने से रोकती हैं।
बेडरूम की दीवारों पर गहरे रंग का इस्तेमाल नहीं करें, कमरे को अच्छी तरह से रोशन रखें।
सकारात्मकता लाने के लिए बाथरूम में मोमबत्तियों या हरे पौधों रखें। पत्नी को हमेशा पति के बाईं तरफ सोने चाहिए और बिस्तर पर सिर्फ एक ही गद्दे का उपयोग करें। घर का पूर्वोत्तर कोना पूजा-पाठ करने के लिए सबसे शुभ दिशा है।

फैंगशुई का चलन बढ़ा
समाज में जैसी महत्ता वास्तु को प्रदान है, ठीक वैसी ही महत्ता फैंगशुई को भी प्रदान की गई। फैंगशुई चीन देश का वास्तु शास्त्र माना जाता है, इसके बावजूद इसे अन्य देशों में भी बेहद प्रसद्धि प्राप्त है। दुनिया में कई देशो में फैंगशुई का चलन दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। इसका कारण जीवन में सुख-सफलता पाने में मदद करने वाले इसके साधारण उपाय हैं। इसके उपाय इतने आसान हैं कि हर कोई इनको आसानी से अपना सकता है। वैसे तो आईए जानते हैं कि इसके कुछ आसान उपाय जिन पर अमल करने से व्यक्ति मनचाही सफलता व घर में सुख-समृद्धि पा सकता है।
भारतीय बाजारों में विंड चाइम (हवा से हिलने वाली घंटी) उपलब्ध है। हवा चलने से जब यह टकराती हैं तो बहुत ही मधुर ध्वनि उत्पन्न करती हैं, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
फैंगशुई के अनुसार बांस के पौधे सुख-समृद्धि के प्रतीक हैं। इनसे परिवार के सदस्यों को पूर्ण आयु व अच्छी सेहत मिलती है। घर की बैठक में जहां घर के सदस्य आमतौर पर एकत्र होते हैं, वहां बांस का पौधा लगाना चाहिए। जैसे, पौधे को बैठक के पूर्वी कोने में रखें।
फैंगशुई के अनुसार ड्रैगन घर की रक्षा करता है। इसलिए घर में ड्रैगन की मूर्ति या तस्वीर रखना चाहिए।
अपने घर के दरवाजे के हैंडल में सिक्के लटकाना घर में संपत्ति जैसा सौभाग्य लाने का सर्वोत्तम मार्ग है। आप तीन पुराने चीनी सिक्कों को भी लाल रंग के धागे अथवा रिबन में बांध कर अपने घर के मुख्य द्वार के हैंडल में लटका सकते हैं। इससे घर के सभी लोग लाभान्वित होंगे। ध्यान रखें कि इन सिक्कों को दरवाजे के अंदर की ओर लटकाना चाहिए न कि बाहर की ओर।
घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त रखने के लिए पूर्व दिशा में मिट्टी के एक छोटे से बर्तन में नमक भर कर रखें और हर चौबीस घंटे के बाद नमक बदलते रहें।
फैंगशुई के अनुसार ऑफिस में कान्फ्रेंस हॉल में धातु की सुंदर मूर्ति रखने से कारोबार में बढ़ौतरी होती है।
फेंगशुई के अनुसार घर में झरने, नदी आदि के चित्र उत्तर दिशा में लगाने चाहिए। घर में हिंसक तस्वीर कभी नहीं लगाएं, इससे घर में नकारात्मकता आ सकती है।

सुख शांति के लिए वास्तु के अनुसार बनाये घर
घर में सुख शांति के लिए हमें वास्तु के अनुसार निर्माण करने चाहिये। पूजा घर हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात् ईषान कोण में ही बनाना चाहिए क्योंकि उत्तर-पूर्व में परमपिता परमेष्वर अर्थात ईश्वर का वास माना जाता है। कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु के साथ उत्तर-पूर्व में निवास करती हैं। साथ ही ईशान क्षेत्र में देव गुरू बृहस्पति का अधिकार है जो कि आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख कारक ग्रह है। प्रातःकाल उत्तर-पूर्व भाग या ईशान कोण में पृथ्वी की चुम्बकीय ऊर्जा, सूर्य ऊर्जा तथा वायु मंडल और ब्रह्मांड से मिलने वाले ऊर्जा एवं शक्तियों का अनूकूल प्रभाव मिलता है। फलस्वरूप आध्यात्मिक एवं मानसिक शक्तियों में सकारात्मक वृद्धि होती है।
पूजाघर, रसोई में नहीं रखें
पूजाघर कभी भी रसोईघर के साथ नहीं बनाना चाहिए। प्रायः लोग रसोईघर में ही पूजाघर बना लेते हैं जो सही नहीं है। रसोईघर में प्रयोग होनेवाली वस्तुएं मिर्च-मसाला, गैस, तेल, कांटा, चम्मच, नमक आदि मंगल की प्रतीक वस्तुएं हैं। मंगल का वास भी रसोईघर में ही होता है। उग्र ग्रह होने के कारण मंगल उग्र प्रभाव में वृद्धि कर पूजा करने वाले की शांति एवं सात्विकता मे कमी लाता है। भगवान भाव एवं सुगंध के भूखे होते हैं। रसोईघर में सात्विक एवं निरामिष दोनां प्रकार का भोजन पकाते है जिसका सुगंध एवं दुर्गंध भगवान को मिलती है, जो कि उनके प्रति व्यवहार ठीक नहीं है, इससे देवता श्राप देते हैं। अतः पूजाघर में रसोई बनाने से आध्यात्मिक चेतना का विकास नहीं हो पाता।
पूजाघर, टायलेट के सामने नहीं होना चाहिए क्योंकि टायलेट पर राहु का अधिकार होता है जबकि पूजा स्थान पर बृहस्पति का अधिकार है। राहु अनैतिक संबंध एवं भौतिकवादी विचारधारा का सृजन करता है। साथ ही राहु की प्रवृत्तियां राक्षसी होती हैं जो पूजाकक्ष के अधिपति ग्रह बृहस्पति के सात्विक गुणों के प्रभाव को कम करती है जिसके फलस्वरूप पूजा का पूर्ण अध्यात्मिक लाभ व्यक्ति को नहीं मिल पाता। पूजा कक्ष सीढ़ियों के नीचे भी नहीं रखना चाहिए।
गणेश जी की स्थापना किन दिशाओं में करना लाभप्रद होता है?
गणेश जी की स्थापना दक्षिण दिशा में करनी चाहिए। इससे उनकी दृष्टि उत्तर की तरफ रहेगी, उत्तर मे हिमालय पर्वत है और उसपर गणेश् जी के माता-पिता अर्थात् शंकर-पार्वती जी का वास स्थान है। गणेश जी को अपने माता पिता की तरफ देखना बड़ा अच्छा लगता है इसलिए गणेशजी की मूर्ति दक्षिण दिशा में रखी जानी चाहिए। गणेश जी की स्थापना पशिचम दिशा में कभी नहीं करनी चाहिए क्योंकि गणेश् जी मंगल के प्रतीक और पष्चिम दिशा का स्वामी शनि है। इस तरह मंगल व शनि एक साथ हो जाएंगे जिससे घर में कठिनाइयां आ जाएंगी।
पूजाघर में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कात्र्तिकेय, सूर्य एवं इन्द्र को इस तरह स्थापित करना चाहिए कि पूजा करते समय व्यक्ति का मूंह पूर्व या पश्चिम की ओर हो। अर्थात् इन सभी देवी देवताओं की स्थापना की सही दिश पूर्व या पश्चिम है। देवी देवताओ की प्रतिमाएं दक्षिण वाली दीवार पर नहीं लगानी चाहिए अन्यथा वे दक्षिणाभिमुख हो जाएंगी। साथ ही उत्तर मे उत्तर होता है, अतः दोनों का एक दिशा में रहना ठीक नहीं रहेगा। कुबेर का स्थान उत्तर दिषा है। लक्ष्मी उत्तर-पूर्व में रहती हैं। सरस्वती पश्चिम दिशा में निवास करती हैं। इसलिए पश्चिम दिशाओं में बैठकर सरस्वती जी की पूजा की एवं उत्तर-पूर्व में बैठकर लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए।
पूजा कक्ष में द्वार कहाँ रखें
उत्तर-पूजा कक्ष का द्वार हमेशा कक्ष के मध्य में स्थित होनी चाहिए लेकिन प्रतिमाएं द्वार के ठीक सामने हैं तो द्वार पर परदा रखना जरुरी है। इसके कारण फलस्वरूप उस घर में निवास करने वाले लोगों के नाम और यश में वृद्धि होती है तथा विषिष्ट व्यक्ति के रूप में उनकी पहचान बनती है। यदि पूजा कक्ष का द्वार उत्तर-पूर्व दिषा में हो तथा उसमें आना जाना उत्तर-पूर्व दिशा से ही होता हो तो सूर्य कि किरणों और चुंबकीय प्रभाव से धन दौलत के साथ-साथ चहुंमुखी सुख की प्राप्ति होती है क्योंकि कुछ देवी देवता इन्द्र के रास्ते पूर्व से पूजन कक्ष या मंदिर में प्रवेश करना पसंद करते हैं तथा कुछ देवी देवता उत्तर या उत्तर-पूर्व के रास्ते पूजन कक्ष में प्रवेश करना पसंद करते हैं। वरूण एवं वायु देवता हमेशा पश्चिम -उत्तर के रास्ते प्रवेश करते हैं, इसलिए इन स्थानों से भी प्रवेश द्वार रखना शुभ फलदायी है। दक्षिण-पूर्व के रास्ते यज्ञ के देवता अग्नि देव प्रवेश करते हैं अतः इस कारण से इस ओर का द्वार भी अच्छा माना गया है। इन सिद्धांतों को अपनाने से पूजन कक्ष की गरिमा बढ़ती है तथा वहां पर देवी देवता शुभ फल प्रदान कर मानसिक एवं आध्यात्मिक सुख समृद्धि प्रदान करते हैं।
उत्तर-घर में विष्णु, लक्ष्मी, राम-सीता, कृष्ण, एवं बालाजी जैसे सात्विक एवं शांत देवी देवता का यंत्र, प्रतिमाएं एवं तस्वीर रखना लाभप्रद होता है। पूर्व में भगवान का मंदिर तथा पष्चिम में देवी मंदिर नाम, ऐष्वर्य एवं धन-दौलत देने वाला बनता है। पूजा घर में प्रतिमाएं एक दूसरे की ओर मुख करके नहीं रखनी चाहिए।
पूजाघर में किसी भी प्रकार से अंश मात्र भी इष्ट प्रतिमा खंडित हो गयी हो तो कितनी ही बहुमूल्य क्यों न हो पूजन योग्य नहीं होती। ऐसी स्थिति होने पर उन्हे पवित्र जल में विधि विधान से विसर्जित कर देनी चाहिए। साथ ही किसी प्राचीन मंदिर से लाई गई खंडित मूर्ति भी नहीं रखना चाहिए। देवी देवताओं की प्रतिमा पर से उतरे हुए सूखे पुष्प, माला तथा हवन, धूप आदि की राख, सफाई में निकला अवषेश जल, नारियल के टुकडे़, पुराने वस्त्र आदि को अनावष्यक समझ फेंकने के बजाय तेज बहते जल में विसर्जित कर देना चाहिए।

दिशाएं और उनके फल
हमारे जीवन में दिशाओं का भी अहम स्थान है जैसे हम किस दिशा में रहते हैं और किस ओर जाते हैं।वास्तु के अनुसार किसी भी भवन का उपयोग करने के लिए उसमें द्वार रखना आवश्यक होता है। सही दिशा में लगा द्वार उस भवन में रहने वालों के जीवन में सुख-समृद्धि एवं सरलता लाता है और इसके विपरीत गलत स्थान पर लगा द्वार जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर दुख पहुंचाता है। इसलिए वास्तुशास्त्र में दिशाओं का ध्यान रखना बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है।
किसी भी भवन में कहां पर दरवाजा रखना शुभ होगा और कहां रखना अशुभ होगा? कितने दरवाजे रख सकते हैं? इस बारे में वास्तुशास्त्र के पुराने ग्रंथों जैसे वशिष्ठ संहिता, वास्तु प्रदीप, विश्वकर्मा आदि में विस्तृत जानकारी दी गई है। लगभग सभी मानक वास्तु ग्रंथों में आगम व निर्गम द्वार के साथ-साथ दरवाजों की लंबाई, चैड़ाई व ऊंचाई का भी विवरण दिया गया है।
मानक ग्रंथों के अनुसार घर के किसी भी दिशा के मध्य में दरवाजा शुभ नहीं होता है पर मंदिर, होटल, कार्यालय, सार्वजनिक स्थला पर मुख्य द्वार शुभ होता है। भवन के किस भाग में मुख्यद्वार रखने का क्या शुभ अशुभ परिणाम होता है। इसके लिये भवन की प्रत्येक दिशा को समान नौ भागों में विभाजित किया गया है। इस विभाजन से कुल बत्तीस भाग बनते हैं। हर भाग का एक देवता प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक भाग पर द्वार होने पर निम्नलिखित शुभाशुभ परिणाम मिलेंगे।
उपरोक्त सारणी के अनुसार 3, 4, 11, 12, 20, 21, 27, 28 व 29वें भाग में ही द्वार शुभ होता है।
वास्तु में पूर्व द्वार सबसे उत्तम माना जाता है। इसे ‘‘विजय द्वार’’ भी कहते हैं। उत्तरी द्वार भी उत्तम फलदायक माना जाता है। इसे ‘‘कुबेर द्वार’’ भी कहा जाता है। अतः मकान का प्रवेश द्वार पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान) में होना चाहिये। पश्चिमी द्वार मध्यम फलदायक और इसे ‘मकर द्वार’ भी कहा जाता है। जहां तक संभव हो दक्षिणी द्वार बनाने से बचना चाहिये। चारों कोणों के द्वार के फल निम्न हैं:
उत्तर-पूर्वी (ईशान) द्वार ऐश्वर्य, लाभ, वंश वृद्धि एवं मेधावी संतान देने वाला होता है। अतः यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
दक्षिण-पूर्वी (आग्नेय) द्वार स्त्री रोग, अग्नि भय तथा आत्मघात वाला होता है।
दक्षिण-पश्चिम (नैर्ऋत्य) द्वार आकस्मिक मृत्यु, आत्मघात, भूत-प्रेत बाधा तथा व्यावसायिक हानि देने वाला है। अतः इसे अत्यंत ही अशुभ माना जाता है।
उत्तर-पश्चिम (वायव्य) द्वार मानसिक अशांति के साथ धनहानि भी देता है। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि वायव्य दिशा में दरवाजा खोलते समय सदैव पश्चिम, उच्च स्थान के उत्तर-पश्चिम में ही दरवाजा खुलना चाहिए, नहीं तो कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है।
मुख्य प्रवेश द्वार का निर्धारण निम्न दो प्रकार से किया जाता है।
1-उच्च-नीच 2. वास्तु पुरूष अनुसार
पहले प्रकार अर्थात् उच्च-नीच अनुसार चारां दिशाओं को निम्न दो भागों में बांटते हैं- पहले भाग में उत्तर, उत्तर-पूर्व-(ईशान), पूर्व, दक्षिण-पर्वू व उत्तर-पश्चिम म खुलने वाले मुख्य प्रवेश द्वार शुभ तथा उच्च स्थान वाले माने जाते हैं। इसके विपरीत, दूसरे भाग में दक्षिण, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम में खुलने वाले मुख्य प्रवेश द्वार अशभ् तथा नीच स्थान वाले होते हैं। इसमें नीच के दक्षिण-पूर्व व उत्तर-पश्चिम भी अशुभ माने जाते हैं। यह सिद्धांत भूखंड के साथ कमरों के लिए भी उपयोगी है।
वास्तु में यदि भूखंड के चारों कोणों (ईशान, आग्नेय, र्नैत्य व वायव्य) में किसी भी कोण में सड़क हो तो मुख्य द्वार दो वर्गों को छोड़कर बनाना चाहिये। मुख्य द्वार सदैव मुख्य सड़क की तरफ ही बनाना शुभ रहता है। यदि एक से अधिक विकल्प हो तो दिशाओं के साथ-साथ सड़क व उच्च-नीच सिद्धांत रखकर मुख्य द्वार का निर्माण करवाना शुभ रहता है क्योंकि वास्तु में मुख्य प्रवेश द्वार का काफी महत्व है।
साथ में यह भी ध्यान रखना चाहिये कि निर्माण पहले दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम दिशा में किया जाना चाहिए। ऐसे भूखंड स्वामी को सफल व अत्यंत ऊंची स्थिति में ला देते हैं।
यदि केवल पश्चिमी दिशा में ही निर्माण हो अर्थात् – दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में निर्माण नहीं हो तो घर में महालक्ष्मी का आगमन तो शुरू होगा परंतु गृहस्वामी लक्ष्मी प्राप्ति के अनुरूप सम्मान प्राप्त नहीं कर पायेगा।
यदि दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम म सबसे भारी निर्माण कराया जाये तो नेतृत्व व अधिकार भी मिल जाता है। केवल पश्चिम में भारी निर्माण से जो धन आता है, उसमें धन का अपव्यय भी बहुत तेज गति से होता है।
आठों दिशाओं में मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण व प्रभाव निम्न है:
1 ईशान द्वार: भूखंड के इस कोण (उ. पू.) की दिशा का प्रतिनिधित्व बृहस्पति ग्रह के करने से ईशान द्वार को वास्तु शास्त्र में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इससे स्वास्थ्य अच्छा होने से सुख, समृद्धि भी मिलती है। इसमें दोष होने पर उपाय के रूप में गुरु यंत्र की स्थापना करें।
2 पूर्वी द्वार: भूखंड की इस दिशा का प्रतिनिधित्व सूर्य ग्रह के करने से इसमें मुख्य द्वार बनाना श्रेष्ठ माना जाता है। इससे धन व वंश वृद्धि होती है तथा जातक निरोगी रहता है। इसमें यदि दोष हो तो सूर्य यंत्र की स्थापना कर उपाय करें।
3 आग्नेय द्वार: भूखंड की दिशा का प्रतिनिधित्व शुक्र ग्रह करता है जिससे इस दिशा में मुख्य प्रवेश द्वार बनवाने से सदैव अग्नि का भय रहता है। अतः इस दिशा में उपाय के रूप में शुक्र यंत्र स्थापित करें।
4 दक्षिणी द्वार: भूखंड की यह दिशा यम (काल) का प्रतिनिधित्व करती है। अतः इस दिशा में मुख्य प्रवेश द्वार बनवाना श्रेष्ठ नहीं होता है। अतः उपाय के रूप में मंगल यंत्र स्थापित करना शुभ रहता है।
5 नैर्ऋत्य द्वार: इस कोण में प्रवेश द्वार बनवाने से रोग, कष्ट व धन हानि होती है। अतः उपाय के रूप में राहु यंत्र की स्थापना करें।
6 पश्चिमी द्वार: इस दिशा में मुख्य द्वार होने से आमतौर से कष्टों में वृद्धि तथा दुःख मिलता है। अतः उपाय के रूप में शनि यंत्र स्थापित करना शुभ रहता है।
7 वायव्य द्वार: इस कोण में मुख्य प्रवेश द्वार बनवाना सामान्य श्रेणी अर्थात् मध्यम रहता है। यदि उपाय करना चाहें तो चंद्र यंत्र स्थापित करना चाहिये।
8 उत्तरी द्वार: इस दिशा में मुख्य द्वार बनवाने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य, धन आदि की प्राप्ति होती है। जैसे दक्षिणी दिशा आपकी अशुभ है तो इसके ठीक सामने उत्तरी दिशा कुबेर की मानी जाती है। उत्तर धन-लक्ष्मी की दिशा है और लाभ के लिये बुध के साथ कुबेर व लक्ष्मी यंत्र की इस दिशा में स्थापना करें।

घर के रंग का भी पड़ता है प्रभाव
घर में सुख शांति और संपन्नता में वास्तु का भी अहम स्थान होता है। इसलिए घर का रंग भी सही होना चाहिये। वास्तु के अनुसार अपने घर के फर्श के रंग का चुनाव सोच-समझकर करें क्योंकि रंग भी घर में भी रहने वाली सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा को प्रबावित करते हैं। घर में यदि सही रंगों का प्रयोग किया गया है तो घर में अच्छी ऊर्जा बनी रहती है। अगर आप अपने घर का फर्श बनवाते हैं तो आपको घर वास्तुदोष से मुक्त रहेगा। लेकिन अगर किसी कारण से आपने किसी दिशा में गलत रंग का फर्श बनवा लिया है तो आप कमरों का उपयोग बदल सकते हैं। जैसे रसोईघर को शयन कक्ष बना लें या लिविंग एरिया को बेडरूम बनाकर घर को वास्तुअनुरूप बना सकते हैं।
पूर्व दिशा
पूर्व दिशा यदि ठीक हो तो घर के मुखिया पर भगवान इंद्र की कृपा रहती है। इसके अलावा यह दिशा भगवान सूर्य को भी समर्पित मानी गई है, इस दिशा में सही होने से समाज में मान-सम्मान बना रहता है। वास्तु के अनुसार इस दिशा का फर्श गहरे हरे रंग का होना चाहिए।
पश्चिम दिशा
शास्त्रों के अनुसार पश्चिम दिशा लक्षमीजी का निवास माना गया है। इसलिए इस दिशा का दोष मुक्त होना बहुत जरूरी है। इस दिशा में अच्छी साफ-सफाई रखनी चाहिए। इस दिशा में फर्श का रंग सफेद होना चाहिए और बहुत ज्यादा आकृति और डिजाइंस नहीं होना चाहिए।
उत्तर दिशा
घर की उत्तर दिशा बेहद महत्वपूर्ण होती है। वास्तु-शास्त्र के अनुसार केवल इस एक दिशा के सही होने से घर में खुशहाली आती है। वास्तु-शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा को धन के देवता-कुबेर का स्थान माना जाता है। इस दिशा में हमेशा गहरे काले रंग का पत्थर फर्श के तौर पर लगवाना चाहिए।
दक्षिण दिशा
वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा नर्क की दिशा मानी जाती है, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि कभी भी इस दिशा में घर का प्रलेश द्वार नहीं होना चाहिए। न ही इस दिशा में शयन-कक्ष या पति-पत्नी का बेडरूम होना चाहिए। चूंकि इसे यम की दिशा मानी जाती है तो यहां के फर्श का रंग गहरा लाल होना चाहिए।
उत्तर-पूर्व दिशा
उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान शिव का वास माना गया है। शिवजी को आसमानी और नीला रंग बेहद पसंद है, इसलिए शिव पूजा में आसमानी रंगों का प्रयोग किया जाना शुभ माना गया है।
दक्षिण पूर्व
इस दिशा का सृष्टि के रचियता ब्रह्मा की दिशा माना गया है। इस दिशा में बैंगनी रंग का फर्श होना शुभ माना जाता है।
दक्षिण-पश्चिम दिशा
दक्षिण दिशा के स्वभाव से ठीक विपरीत दक्षिण पश्चिम दिशा का स्वभाव है। इस दिशा में हल्के रंगों का इस्तेमाल सही माना गया है। यहां हल्के गुलाबी रंग का फर्श ठीक माना गया है।
उत्तर-पश्चिम दिशा
घर की इस दिशा को वायु की दिशा माना जाता है। इसलिए इस दिशा की दीवारों, पर्दों और यहां तक फर्श का रंग भी ग्रे होना चाहिए। यह रंग इस दिशा के लिए सबसे शुभ माना गया है।

घर में न रखें बेकार सामान
हर किसी को जीवन में सुख और धन की चाहत होती है। यह भी सही है कि सभी काम धन से ही होते हैं। इसी लिए हर कोई धन कमाने का प्रयास करता है पर कई बार देखा गया है कि काफी प्रयास के बाद भी आर्थिक हालात ठीक नहीं होते। इसमें वास्तु से संबंधित दोष जिम्मेदार होते हैं।
घर में रखी गई चीज़ें भी घर में अच्छा या बुरा प्रभाव डालती है। कई बार हम जाने-अनजाने में ऐसे चीज़ें घर में रख लेते हैं जो देवी लक्ष्मी को अप्रिय होती है। उन चीजों को घर में रखने से घर में लक्ष्मी नहीं टिकती और हर समय धन का नुकसान होता रहता है।कभी भी किसी एक देवी-देवता की मूर्ति आमने-सामने नहीं रखनी चाहिए। ऐसा होने से आय के साधन कम होने लगते है और खर्च बढ़ जाते हैं।
बंद या खराब घड़ी न रखें
बंद या खराब घड़ी नकारात्क एनर्जी को बढ़ाती है। उन्नति और धन संबंधी परेशानियों से बचाव के लिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बंद घड़ी को ठीक करवा लें या घर में न रखें।घर में टूटा हुआ कांच या टूटे कांच की वस्तुएं रखना आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। दरवाजे-खिड़कियों में लगे कांच के टूट जाने पर उन्हें भी तुरंत बदलवा देना चाहिए।
घर में भगवान की खंडित मूर्ति भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए। भगवान की टूटी हुई मूर्तियों घर में पैसों से संबंधी परेशानियां बढ़ाती हैं। तस्वीर के अलावा भगवान की फटी हुई तस्वीरों को भी घर में नहीं रखना चाहिए।
कांटेदार पौधों को न लगायें
बहुत से लोगों को पेड़ पौधे लगाने का शौक होता है। ऐसे में नई-नई तरह के पेड़-पौधों लगाने की चाह में कई लोग कांटेदार पौधों को घर में सजा लेते है, जो की घर को धन संबंधी परेशानियों का कारण बनते हैं। खराब और बेकार चीजों को घर में रखने से नकारात्मक उर्जा बढ़ती है और कई तरह की धन संबंधी परेशानियां भी आती हैं। खराब उपकरण जैसे टीवी, कंप्यूटर, फ्रीज आदि को घर में भूलकर भी न रखें।

नव वर्ष के लिए घर में करें वास्तु ठीक
जीवन में हर कोई सुख शांति से रहना चाहता है। इसके लिए वास्तु की भी एक अहम भूमिका रहती है।नया साल आते ही खुद के लिए संकल्प लेते हैं, तो फिर घर के लिए क्यों नहीं लेते कोई संकल्प? घर हमारे लिए सिर्फ ईंट-पत्थरों से बना एक ढांचा नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके साथ हमारे आत्मीय संबंध भी होने चाहिए। साल 2018 का आरंभ होने जा रहा है, तो क्यों न हम घर को मजबूत, साफ और सुंदर बनाने के साथ, पारिवारिक सदस्यों के लिए भी कुछ करें। हमारे प्रिय जो हमसे बहुत दूर चले गए हैं, जो हमारे साथ हैं, सभी के जीवन के लिए सकारात्मक संकल्प लें। घर व उसके सदस्यों के मध्य अपनापन का भाव विकसित करें।
ध्यान दें, दीवारों पर पड़ी दरारें, धब्बे, जाले, टूटी खिड़कियां आपके मन को प्रतिबिबिंत करती हैं। इसलिए सबसे पहले दरारों को भरवाएं। टूट-फूट ठीक कराएं। सामर्थ्य के अनुसार, घर में रंग-रोगन कराएं।यदि बच्चों की शिक्षा, बुद्धिमानी, युवावस्था के विकास को अच्छा रखना है, तो पूर्व दिशा को ठीक रखने का संकल्प लें। यहां पर देवराज इंद्र का प्रभाव रहता है। इस दिशा में मेष और वृष राशि तथा शुक्र का प्रभाव होता है। बच्चों के शयनकक्ष तथा कमरे को बल देना है, तो इंद्र से जुड़ी चीजें जैसे हाथी, डायमंड, क्रिस्टल या सफेद रंग का घोड़ा लगाएं। यहां सफेद या हरे रंग का प्रयोग करें। सेहत ठीक न रहे। धन की समस्या हो, तो उत्तर दिशा पर ध्यान दें। इस स्थान पर कुबेर तथा बृहस्पति का प्रभाव रहता है। यह स्टोर, लाइब्रेरी, ऑफिस और कीमती सामान रखने का उत्तम स्थान है। यहां पूर्वजों की तस्वीर बिल्कुल न लगाएं। रसोई, बाथरूम न बनाएं। इस स्थान को शुभ रखने के लिए सोने-चांदी के रंग की तस्वीरें, अंबर की बनी चीजें रखें। बृहस्पति को खुश रखने के लिए पीले रंग का प्रयोग करें।
रसोई में खर्चा ज्यादा हो रहा हो या बिजली की चीजें जल्दी खराब हो रही हों, तो आग्नेय दिशा (पूर्व-दक्षिण का कोना) को सुधारें। इस दिशा में प्रज्‍ज्वलित अग्नि की तस्वीर, मंगल चिन्ह, मोमबत्ती या फिर अग्नि तत्व का प्रतीक त्रिकोण आकृति लगाएं। इस दिशा में लाल, पीला व नारंगी रंग का प्रयोग करें। रात को नींद न आए, बेचैनी रहे, बीमारी से परेशान हैं, तो दक्षिण की दिशा को ठीक करें। यहां मुख्य दरवाजा, स्टडी रूम, लिविंग रूम या डायनिंग रूम न बनावाएं। दिशा में सुधार लाने के लिए यहां गाय या बैल का चित्र लगाएं। अपने स्वर्गवासी पूर्वजों का चित्र लगाएं।
नींद की परेशानी, भूत-प्रेत का डर अथवा बुरे सपने आए, तो नैऋत्य दिशा (दक्षिण-पश्चिम का कोना) ठीक करें। यह शनि ग्रह तथा भूमि तत्व से जुड़ा स्थान है। इस स्थान पर भारी चीजें रखें। वॉर्डरोब, भारी अलमारी रखें। रसोई या मुख्य दरवाजा यहां न बनाएं। इस स्थान को शुभ बनाने के लिए शेर पर सवार देवी, बड़ी बिल्ली या शेर की तस्वीर लगाएं। बैंगनी रंग का प्रयोग करें। शुक्र शयनकक्ष से जुड़ा ग्रह है, अतः यहां गुलाबी और हल्के हरे रंग का प्रयोग करें। बेचैनी ठीक करने के लिए वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) को ठीक रखें। चंद्रमा इस स्थान का कारक है। यहां पर कोई चीज स्थिर नहीं रहती। अतः बाथरूम या गेस्ट रूम बनाएं। यहां पर अर्धचन्द्राकार चंद्र की फोटो लगाएं। अगर आप नव वर्ष में यह तरीके अपनाएंगे तो सुखी रहेंगे।

कई देशों में सुख, समृद्धि के लिए हैं अलग-अलग मान्यताएं
सभी अपने घर में सुख, समृद्धि और शांति चाहते हैं। इसके लिए हर कोई अनोखे तरह की चीजें अपने घर में रखता है, जिन्हें हम लकी चार्म कहते हैं। जिस प्रकार चीनी मान्यता में लाभ के लिए फेंगशुई आईटम रखे जाते हैं जिन चान को मनी टोड के नाम से भी जाना जाता है यानी पैसे वाला मेंढक। लाल आंखें व तीन पैरों वाला बड़ा-सा मेंढक सिक्कों के ढेर पर बैठा होता है। चीन में मिलने वाले इस लकी चार्म के मुंह में भी सोने का सिक्का होता है। माना जाता है कि अगर मेंढक के मुंह में सिक्का न हो तो इसे ऐसे जगह रखें कि उसका मुंह घर के बाहर की ओर हो, ताकि वह पैसों को अपनी जीभ से खींचकर घर के अंदर ले आए। मान्यता है कि इसे घर में रखने से धन-दौलत की कभी कमी नहीं होती।
ठीक उसी प्रकार भारत में हाथी को भगवान गणेश के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। हाथी की उम्र लंबी होती है और वह बेहद समझदार जानवर है, इसलिए भी हाथी मूर्ति को घर में रखाना अच्छा माना जाता है।
ब्रिटेन में परंपरा है कि क्रिसमस के दौरान पुडिंग बनाते समय उसमें एक सिल्वर कॉइन डाल दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि पुडिंग खाते समय जिस गेस्ट के हिस्से में यह सिक्का आता है, उसका आने वाला नया साल बहुत अच्छा रहता है।
सेंट्रल अमेरिका स्थित ग्वाटेमाला में वरी डॉल (उदास गुड़िया) काफी लोकप्रिय है। इस छोटी-सी गुड़िया को तार, ऊन और रंग-बिरंगे कपड़ों से तैयार कर वहां के पारंपरिक कपड़े पहनाए जाते हैं। यह गुड़िया उदास बच्चों को दी जाती है और उन्हें कहा जाता है कि अगर वो रात को इसे अपने तकिये के नीचे रखकर सोएंगे, तो यह गुड़िया उनकी सभी परेशानियों को ले लेगी।
नॉर्थ अमेरिका के इलाके में रैबिट फुट को बेहद लकी माना जाता है। आध्यात्मिक तौर पर इसे हूडू के नाम से बुलाया जाता है।
जर्मन कल्चर में पिग को खुशहाली व धन-दौलत का प्रतीक चिह्न माना गया है। जंगली सुअर को सभी पिग का राजा माना गया है।
मध्य यूरोप के पॉलैंड, आस्ट्रिया, क्रोआटिया व स्लोवेकिया जैसे देशों में कॉर्प यानी मछली को खाना शुभ माना जाता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर इस मछली को घोड़ी की नाल के आकार में काटकर खाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे सब कुछ अच्छा होता है। कुछ लोग तो मछली की खाल को क्रिसमस की अगली पूर्व संध्या तक संभालकर रखते हैं, ताकि पूरा साल अच्छा बीते।
नॉर्वे में माना जाता है कि एकॉर्न (एक प्रकार का फल) को खड़की पर रखने से बुरी किरणें घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती हैं। एकॉर्न ओक के पेड़ से मिलता है। नॉर्वे में रहने वाले लोगों का कहना है कि तूफान और रोशनी के देवता थोर ने ओके के पेड़ जगह-जगह फैला दिए थे। इसलिए जिस प्रकार ओक के पेड़ बुरी किरणों को अपने में खींच लेते हैं, उसी तरह का काम एकॉर्न भी करता है।

विजेता बनना है तो धारण करें वैजयंती माला
धर्म में सफल होने के लिए पूजा पाठ और हवन के साथ ही कई अन्य उपाय भी है। धर्म शास्त्रों के अनुसार
वैजयंती माला- एक ऐसी माला जो सभी कार्यों में विजय दिला सकती है। इसका प्रयोग भगवान श्री कृष्ण माता दुर्गा, काली और दूसरे कई देवता करते थे। रत्न के जानकार मानते हैं कि अगर इस माला को सही विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठित करके धारण किया जाए तो इसके परिणाम आपको तत्काल मिल सकते हैं। कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो जिसमें रुकावट आएगी।
वैजयंती माला को धारण करने वाला इंद्र के समान सारे वस्त्रों को जीतने वाला बन जाता है और श्री कृष्ण के समान सभी को मोहित करने वाला बन जाता है और महर्षि नारद के समान विद्वान बन जाता है। इस सिद्ध माला को धारण करने वाला हर जगह विजय प्राप्त करता है। उसके सर्व कार्य अपने आप बनते चले जाते हैं । यदि किसी काम में लंबे समय से बाधा आ रही है तो वह काम आसानी से बन जाता है। यह माला शत्रुओं का नाश भी करती है। वैजयंती माला को सिद्ध करने के लिए इसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। पूरा फल पाने के लिए जरूरी है कि माला सही विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही पहनी चाहिए।

सही दिशा में सोयें
वास्तुशास्र के अनुसार जीवन में दिशाओं का बेहद महत्व है। अगर हम सही दिशा में नहीं रहते तो स्वास्थ्य के साथ ही हमें धन की हानि भी होती है और मान सम्मान भी कम होता है।
इन्सान के स्वास्थ्य का शयन कक्ष से सीधा संबंध है। हमारे धर्म ग्रंथों में सोने के कुछ नियम बताए गए हैं। इनका पालन करने से शरीर में कोई रोग नहीं होता, साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। मनुस्मृति में लिखा गया है कि सूने घर में अकेले नहीं सोना चाहिए। जहां बिल्कुल अंधेरा हो, वहां सोने से भी बचना चाहिए। साथ ही मंदिर और श्मशान में कभी नहीं सोना चाहिए। अच्छी सेहत के लिए सुबह जल्दी उठाना जरूरी है। कुछ लोगों की आदत होती है कि सोने से पहले पैर धोते हैं। यह अच्छा है, लेकिन भीगे पैर सोना धर्म ग्रंथों में शुभ नहीं माना गया है। बताते हैं कि सूखे पैर होने से घर में लक्ष्मी आती है।
पलंग या खाट टूटा हो तो उस पर न सोएं। खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर न जाएं। झूठे मुंह सोना अशुभ है। आप किस दिशा में सोते हैं, यह भी बहुत अहम है। पूर्व की तरफ सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु, तथा दक्षिण की तरफ सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है।
कई लोगों को दिन में सोने की आदत होती है। इसे तुरंत छोड़ दें। दिन में तथा सुर्योदय एवं सुर्यास्त के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है।
बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। दक्षिण दिशा में पांव रखकर कभी नहीं सोना चाहिए। इस तरफ यम और दुष्टदेवों का निवास रहता है। इसका वैज्ञानिक कारण यह भी है कि मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है।
सोते समय हदय पर हाथ रखकर नहीं सोना चाहिए। पैर पर पैर रखकर भी नहीं सोना चाहिए। माथे पर तिलक लगा है तो सोने से पहले उसे साफ कर लें। तिलक लगाकर सोना अच्छा नहीं माना जाता।

बीमारी का कारण कहीं घर का मुख्य द्वार तो नहीं
कभी आपने सोचा है कि आपके घर में लोग अक्सर बीमार क्यों रहने लगे हैं। इसके साथ ही घर में आपसी मतभेद और धन की परेशान व तनाव वास्तुदोष के कारण भी हो सकता है। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता तो परेशानी और भी बढ़ती चली जाती है। इसलिए जरुरी हो जाता है कि वास्तु संबंधी इन दोषों को पहचानकर इनका उपाय किया जाए। ऐसा करने से आपकी समस्या का समाधान निकल सकता है। सबसे पहले तो आप देखें कि आपके घर का मुख्य द्वार कहीं काले रंग का तो नहीं है, यदि ऐसा है तो सबसे पहले उसका रंग बदल दें। मुख्य द्वार काले रंग का नहीं होना चाह‌िए। वास्तु अनुसार इससे घर के मुख‌िया की बदनामी, किसी अपने से धोखा और यहां तक कि अपमान भी बर्दाश्त करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त यदि मुख्य द्वार से घर के अन्य द्वार बड़े हैं तो सदा ही धन की कमी सताती रहेगी। आर्थ‌िक परेशान‌ियों का कारण ये द्वार भी हो सकते हैं, अत: उपाय करें कि मुख्य द्वार ही बड़ा हो। इसके अलावा जरुरी है कि प्रात:काल में जब सूर्योदय हो तो घर की ख‌िड़क‌ियां खोल दें, इससे घर में सकारात्मक उर्जा का संचार होगा और अन्य लाभ भी होंगे। सुबह खिड़ियां बंद रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो जाती हैं, इसलिए इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पक्षियों के घौंसले भी होते हैं दरिद्रता का कारण
खूब मेहनत और खूब पैसा कमाने के बावजूद यदि आप दरिद्र बने हुए हैं तो यह आपकी अपनी कमी नहीं बल्कि वास्तुदोष हो सकता है। ऐसे में आपको देखना होगा कि आपके घर में ऐसा कौन सा दोष है जिस कारण दरिद्रता दूर ही नहीं हो रही है। दरअसल वास्तु व‌‌िज्ञान कहता है कि घर में अनेक ऐसी चीजें स्थापित हो जाती हैं जिसकी अनदेखी करना दरिद्रता का कारण बन जाता है। ऐसे ही दोषों में प्रमुखत: घर में कबूतर का घोंसला बना लेना है। ऐसा होना दरअसल वास्तु व‌िज्ञान के अनुसार अशुभ है। इससे घर पर बड़ी मुसीबत आ सकती है इसलिए कबूतर ही नहीं बल्कि किसी अन्य पक्षी को भी घर में घोंसला न बनाने दें। इसके अतिरिक्त यदि घर में मधुमक्खी छत्ता लगाती है तो उसे भी हटा देना चाहिए। ऐसा होने से घर में अशुभ होने का अंदेशा बना रहता है। इसी तरह मकड़ी का जाला भी अशुभ माना गया है इसलिए समय-समय पर मकड़ी के जाले साफ किए जाने चाहिए। इन जालों की वजह से घर में उलझन और परेशानी आती है। इन कुछ उपायों से आप अपनी दरिद्रता दूर कर सकते हैं।

वास्तुशास्त्र के अनुसार ही बनायें रसोईघर
जीवन में हर कोई सुख, शांति और धन संपत्ति चाहता है पर कई बार नये घर में जाते ही उसे पर्याप्त सफलता नहीं मिलती। तब वास्तुशास्त्र की और देखना चाहिये। आवासीय मकान में सबसे मुख्य घर होता है रसोईघर। इसी दिशा में अग्नि अर्थात ऊर्जा का वास होता है। इसी ऊर्जा के सहारे हम धन अर्जित करते है। अतः इस स्थान का महत्त्व कितना है आप समझ सकते है। कहा जाता है कि व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं धन-सम्पदा दोनो को रसोईघर प्रभावित करता है। अतः वास्तुशास्त्र के अनुसार ही रसोईघर बनाना चाहिए।
कई बार ऐसा देखा गया है कि घर में रसोईघर गृहिणी के अनुरूप बना हुआ है फिर भी रसोईघर में खाना बनाकर ही खुश नही होती है या खाना बनाने के बाद उसमे कोई बरकत नहीं होता है बल्कि घट जाता है । उसका मुख्य कारण है रसोईघर का वास्तु सम्मत नहीं होना अर्थात वास्तुदोष का होना। ऐसे में कुछ उपाय कर आप उसके दोष दूर कर सकते हैं।
वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोईघर| आग्नेय अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा ( दक्षिण पू्र्व्) में ही होना चाहिए। इस दिशा का स्वामी अग्नि ( आग ) है तथा इस दिशा का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। आग्नेय कोण में अग्नि का वास होने से रसोईघर तथा सभी अग्नि कार्य के लिए यह दिशा निर्धारित किया गया है। यदि आपका किचन इस स्थान पर है तो सकारत्मक ऊर्जा का प्रवाह घर के सभी सदस्यों को मिलता है।
आग्नेय कोण/ दिशा का विकल्प
वैसे तो इस दिशा का स्थान कोई अन्य दिशा नहीं ले सकता फिर भी यदि आप किसी कारण से आग्नेय कोण / दिशा में रसोई नही बना सकते तो विकल्प के रूप में आप वायव्य दिशा का चुनाव कर सकते है।
घर के ईशान कोण मे रसोईघर का होना शुभ नहीं है। रसोईघर की यह स्थिति घर के सदस्यों के लिए भी शुभ नहीं है। इस स्थान में रसोईघर होने से निम्नप्रकार कि समस्या आ सकती है। खाना बनाने में गृहिणी की रूचि नहीं होना, परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य खराब रहना, धन की हानि, वंश वृद्धि रूक जाना, कम लड़के का होना तथा मानसिक तनाव इत्यादि का सामना करना पड़ता है।
इस दिशा में रसोईघर बनाने से अपव्यय (बेवजह खर्च होना) एवं दुर्घटना होता है अतः भूलकर भी इस दिशा में रसोईघर नहीं बनवाना चाहिए।
उत्तर दिशा मे रसोईघर
उत्तर दिशा रसोई घर के लिए अशुभ है। इस स्थान का रसोईघर आर्थिक नुकसान देता है इसका मुख्य कारण है कि उत्तर दिशा धन का स्वामी कुबेर का स्थान है यहाँ रसोईघर होने से अग्नि धन को जलाने में समर्थ होती है इस कारण यहाँ रसोई घर नहीं बनवानी चाहिए।
वायव्य कोण मे रसोईघर| उत्तर-पश्चिम दिशा
विकल्प के रूप में वायव्य कोण में रसोईघर का चयन किया जा सकता है परन्तु अग्नि भय का डर बना रह सकता है। अतः सतर्क रहने की जरूरत है।
पश्चिम दिशा मे रसोईघर
पश्चिम दिशा में रसोईघर होने से आए दिन अकारण घर में क्लेश होती रहती है। इसके साथ ही संतान पक्ष से भी परेशानी आती है।
नैर्ऋत्य कोण मे रसोईघर
इस दिशा में रसोईघर बहुत ही अशुभ फल देता है। नैऋत्य कोण में रसोईघर बनवाने से आर्थिक हानि तथा घर में छोटी-छोटी समस्या बढ़ जाती है। यही नहीं घर के कोई एक सदस्य या गृहिणी शारीरिक और मानसिक रोग के शिकार भी हो सकते है। दिवा स्वप्न बढ़ जाता है और इसके कारण गृह क्लेश और दुर्घटना की सम्भावना भी बढ़ जाती है।
दक्षिण दिशा मे रसोईघर
दक्षिण दिशा में रसोई घर बनाने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। मन में हमेशा बेचैनी बानी रहेगी। कोई भी काम देर से होगा। मानसिक रूप से हमेशा परेशान रह सकते है।
आग्नेय कोण मे रसोईघर | दक्षिण-पूर्व दिशा
दक्षिण- पूर्व । आग्नेय कोण में रसोई घर बनाना सबसे अच्छा मान गया है। इस स्थान में रसोई होने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। घर के सदस्य स्वस्थ्य जीवन व्यतीत करते है।
पूर्व दिशा मे रसोईघर
पूर्व दिशा में किचन होना अच्छा नहीं है फिर भी विकल्प के रूप में इस दिशा में रसोई घर बनाया जा सकता है। इस दिशा में रसोई होने से पारिवारिक सदस्यों के मध्य स्वभाव में रूखापन आ जाता है। वही एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी बढ़ जाता है। वंश वृद्धि में भी समस्या आती है।

वास्तु से पढ़ाई पर भी पढ़ता है प्रभाव
वास्तु दोष का प्रभाव न केवल पारिवारिक जीवन पर, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी होता है। वास्तु के प्रभाव से अध्ययन के लिए सही वातावरण का निर्माण होता है। अक्सर यह देखा गया है कि जिस बच्चे के अध्ययन कक्ष में कोई भी वास्तु दोष होता है, उसकी पढ़ाई में बाधाएं आने लगती हैं। वह काफी मेहनत करे तो भी उसे मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलता। आखिर इसकी क्या वजह है? वास्तु के अनुसार, इसके अनेक कारण हो सकते हैं। आप भी जानिए ऐसे ही कुछ खास उपायों के बारे में जिनसे आपका बच्चा भी पढ़ाई में तेज हो जाएगा। – अध्ययन कक्ष का रंग बच्चे के मन को बहुत प्रभावित करता है। कमरे की दीवारों का रंग बहुत गहरा, भड़कीला और लाल, काला, नीला आदि नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार जिस टेबल पर बच्चा पढ़ाई करे, उस पर अनावश्यक वस्तुएं नहीं होनी चाहिए। बहुत पुरानी किताबें, टूटे और खराब पेन, खाली दवात, रबर के टुकड़े आदि नहीं होने चाहिए। इस कक्ष में प्रकाश की ठीक व्यवस्था होनी चाहिए। जहां तक संभव हो, पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जहां बैठकर पढ़ाई करे, वहां से बाईं ओर प्रकाश आना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि रोशनी बहुत तेज या धुंधली न हो। इससे बच्चे की आंखें कमजोर हो सकती हैं या ​सरदर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अध्ययन कक्ष में सामान बिखरा हुआ न हो। हर चीज सलीके से और सही जगह रखी होनी चाहिए। कमरे में कचरा, बहुत ज्यादा जूते-चप्पल, बिखरा हुआ खेल का सामान, मैले कपड़े नहीं होने चाहिए। कमरे में बहुत ज्यादा खिड़की-दरवाजे भी नहीं होने चाहिये। खासतौर पर पढ़ते वक्त बच्चे का ध्यान खिड़की की ओर न जाए। ऐसी स्थिति में खिड़की पर पर्दा लगा देना चाहिए। याद रखें, यह कक्ष सिर्फ अध्ययन के लिए है। अत: यहां सिर्फ पढ़ाई होनी चाहिए। इस कक्ष में म्यूजिक सिस्टम, टीवी आदि नहीं होने चाहिए। इसी प्रकार जब तक पढ़ाई करें, मोबाइल आदि उपकरणों से दूर ही रहना चाहिए। बार-बार मोबाइल देखने से ध्यान भटकता है। अध्ययन कक्ष् में भारी सामान, अनुपयोगी कबाड़, पुराने बर्तन आदि नहीं होने चाहिए। स्टडी रूम में ज्ञान की देवी सरस्वती का चित्र स्थापित कर रोज प्रणाम करने से विद्या की प्राप्ति होती है।

उत्तर-पूर्व में वाशिंग मशीन होगी सेहत पर भारी
वाशिंग मशीन का उपयोग कपड़े धोने में किया जाता है, लेकिन इसे वास्तु के लिहाज से देखा जाए तो यह आपकी कई परेशानियों को भी बढ़ा सकती है, वहीं अगर इसके उपाय पहले से ही कर लिए जाऐं वाशिंग मशीन से संबंधित वास्तुदोषों से राहत भी पायी जा सकती है। क्या आप जानते हैं वाशिंग मशीन से कौनसे वास्तुदोष उत्पन्न होते हैं और इन्हें दूर करने के उपाय क्या हैं।
वास्तुशास्त्र के अनुसार वाशिंग मशीन को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। यह दोनों ही दिशाएं चिंता और विश्लेषण से संबंधित होती है। यदि आप घर में वाशिंग मशीन को इस दिशा में रखते हैं तो करियर के विकास में आ रही रुकावटों को दूर किया जा सकता है।
उत्तर-पूर्व में यदि वाशिंग मशीन रखी हो तो यह आपके स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। इसलिए इसे ऐसी जगह रखने से बचें।दक्षिण-पश्चिम दिशा में अगर वाशिंग मशीन रखी जाती है तो इससे वास्तुदोष उप्पन्न होता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है। ऐसे में इस दिशा में वाशिंग मशीन भूलकर भी न रखें।

शयनकक्ष हो वास्तु के अनुसार
दिन भर के कामकाज के बाद शयनकक्ष ही वह जगह है जहां हम आराम के पल बिताने के साथ ही तरोताजा होते हैं। शयनकक्ष के वास्तु का हमारी शांति और सुकून से गहरा संबंध है। वास्तु सम्मत शयनकक्ष हमारे कष्टों को दूर करता है और हमारे जीवन में प्रसन्नता लाता है। वहीं अगर शयनकक्ष में वास्तुदोष हो तो न ठीक से नींद आती है और न ही किसी काम में मन लगता है। ऐसे में शयनकक्ष के वास्तु को ठीक करना बहुत आवश्यक होता है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार पलंग शयनकक्ष के द्वार के पास नहीं होना चाहिए इससे मन में व्याकुलता और अशांति बनी रहेगी। इसके साथ ही शयनकक्ष का द्वार एक पल्ले का होना चाहिए।
गृहस्वामी का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम कोण में अथवा पश्चिम दिशा में होना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋर्त्य कोण पृथ्वी तत्व अर्थात स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
बच्चों, अविवाहितों अथवा मेहमानों के लिए पूर्व दिशा में शयनकक्ष होना चाहिए, वास्तुशास्त्र के अनुसार इस कक्ष में नवविवाहित जोड़े को नहीं ठहरना चाहिए।
अगर गृहस्वामी को अपने कार्य के सिलसिले में अक्सर टूर पर रहना पड़ता हो तो वास्तुशास्त्र के अनुसार शयनकक्ष वायव्य कोण में बनाना श्रेयस्कर होगा।
शयनकक्ष में पलंग या बेड इस तरह हो कि उस पर सोते हुए सिर पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर रहे। इस तरह सोने से प्रातः उठने पर मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होगा। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है, यह जीवनदाता और शुभ है।

घर में इस प्रकार रहेगा सकारात्मक माहौल
घर में खुशहाली लाने के लिए हमें सकारात्मक माहौल रखना होगा। साथ ही वास्तुदोषों को दूर करना होगा। हम जिस स्थान पर रहते हैं, उसे वास्तु कहते हैं। इसलिए जिस जगह रहते हैं, उस मकान में कौन-सा दोष है, जिसके कारण हम दुख-तकलीफ उठाते हैं, इसे स्वयं नहीं जान सकते। हमें यह भी पता नहीं रहता कि उस घर में नकारात्मक ऊर्जा है या सकारात्मक।
वास्तु में प्रत्येक स्थान का जगह तय है और इसमें फेरबदल होने से वास्तु दोष होता है।
ईशान अर्थात ई-ईश्वर, शान-स्थान। इस स्थान पर भगवान का मंदिर होना चाहिए एवं इस कोण में जल भी होना चाहिए। यदि इस दिशा में रसोई घर हो या गैस की टंकी रखी हो तो वास्तुदोष होगा।
अतः इसे तुरंत हटाकर पूजा स्थान बनाना चाहिए या फिर इस स्थान पर जल रखना चाहिए। पूर्व दिशा में बाथरूम शुभ रहता है। खाना बनाने वाला स्थान सदैव पूर्व अग्निकोण में होना चाहिए। भोजन करते वक्त दक्षिण में मुंह करके नहीं बैठना चाहिए।
प्रमुख व्यक्तियों का शयन कक्ष नैऋत्य कोण में होना चाहिए। बच्चों को वायव्य कोण में रखना चाहिए। शयनकक्ष में सोते समय सिर उत्तर में, पैर दक्षिण में कभी न करें। अग्निकोण में सोने से पति-पत्नी में वैमनस्यता रहकर व्यर्थ धन व्यय होता है। ईशान में सोने से बीमारी होती है। पश्चिम दिशा की ओर पैर रखकर सोने से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। उत्तर की ओर पैर रखकर सोने से धन की वृद्धि होती है एवं उम्र बढ़ती है।
फेंगशुई के अनुसार घर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व व अग्नि कोण के द्वार का रंग सदैव हरा या ब्ल्यू रखना चाहिए। दक्षिण दिशा के प्रवेश द्वार का रंग हरा, लाल, बैंगनी, केसरिया होना चाहिए। नैऋत्य और ईशान कोण का प्रवेश द्वार हरे रंग का या पीला केसरी या बैंगनी होना चाहिए। पश्चिम और वायव्य दिशा का प्रवेश द्वार सफेद या सुनहरा होना चाहिए। उत्तर दिशा का प्रवेश द्वार आसमानी सुनहरा या काला होना चाहिए।
बेडरूम में टेबल गोल होना चाहिए। बीम के नीचे व कालम के सामने नहीं सोना चाहिए। बच्चों के बेडरूम में कांच नहीं लगाना चाहिए। मिट्टी और धातु की वस्तुएं अधिक होना चाहिए। ट्यूबलाइट की जगह लैम्प होना चाहिए।

शयनकक्ष में न रखें डरावनी तस्वीरें व वस्तुएं
शयनकक्ष आपके घर की वो जगह होती है जहां आप दिन भर की थकान भुलाकर तरोताजा होते हैं। पर कई वस्तुएं रात के समय सिर के पास नहीं होनी चाहिये। वरना नींद में खलल के साथ आपकी रातें भी डरावनी हो जाएंगी।
अक्‍सर देखने को मिलता है कि लोग आलस्‍य के चलते अपना पर्स तकिए के नीचे ही रखकर सो जाते हैं। कई बार पर्स नहीं तो पैसे ही लोग अपने तकिए के नीचे दबा देते हैं। वास्‍तु के हिसाब से ऐसा करने से हर वक्‍त रुपये पैसे की चिंता लगी रहती है और रात में भी नींद नहीं आती।
बेडरूम में कोई भी डरावनी फोटो या वस्‍तुएं नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने से रात में आपको डरावने सपने आ सकते हैं। यहां तक कि बेडरूम में किसी भी प्रकार का हथियार न रखें। इससे नकारात्‍मक ऊर्जा बढ़ती है और दुर्घटना होने की आशंका भी रहती है।
अक्‍सर देखा गया है कि लोग रात को सोने से पहले किताब पढ़ते हैं और फ‍िर उसे तकिए के पास में ही रखकर सो जाते हैं। ऐसा करने से मन चलायमान और विचलित रहता है और गहरी नींद नहीं आ पाती। किताब पढ़ने के बाद उसे यथा स्‍थान रख दें।
कभी भी अपने सोने के स्‍थान पर इलैक्‍ट्रॉनिक वस्‍तुएं जैसे मोबाइल, आईपैड या आईफोन आदि गैजेट्स या किसी भी प्रकार के आवाज करने वाले खिलौने या इससे मिलता-जुलता कोई भी सामान न रखें।
अपने बेड के आस-पास या उसके नीचे जूते-चप्‍पल या अन्‍य कबाड़ा गलती से भी न रखें। अन्‍यथा नकारात्‍मक ऊर्जा आएगी जो कि आपकी नींद को भंग करेगी। कई बार देखा गया है कि लोग कई दिन के पुराने-पुराने अखबार बेडरूम में इकट्ठा करते रहते हैं। ऐसा भूलकर भी न करें।

घर में खुशहाली इस प्रकार आयेगी
घर में खुशहाली सभी चाहते हैं पर इसके लिए कई बातों का ध्यान रखना जरुरी है। यहां तक की घर का दरवाजा भी वास्तु के अनुसार सही होना चाहिये। अक्सर देखा जाता है कि सुख-समृद्धि के लिए परेशान लोगों को वास्तु के कुछ तरीके अपनाने से लाभ होता है। इसलिए घर बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें।
दरवाजे से ना आए आवाज
दरवाजा होता है सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बिंदु इसलिए दरवाजा खोलते/बंद करते समय नहीं आनी चाहिए आवाज। यह अशुभ माना जाता है।
झुका ना हो दरवाजा
अगर घर का दरवाजा अंदर को झुका हो तो घर में परेशानी बनी होती है जबकि बाहर की ओर झुका होने पर घर का मालिक अक्सर बाहर ही रहता है। इसलिए दरवाजे को हमेशा रखें संतुलित।
उल्टा ना खुले दरवाजा
घर का मुख्य दरवाजा हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए, बाहर की ओर दरवाजा खुलने से रोग और खर्च बढ़ते हैं।
रगड़ ना खाए दरवाजा
घर के मुख्य दरवाजे को खोलते समय रगड़ नहीं खाना चाहिए। दरवाजे के रगड़ खाने से आर्थिक दिक्कतें आती हैं और पैसा कमाने के लिए भी हद से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
घर के बीचोबीच ना हो मुख्य दरवाजा
घर का मुख्य दरवाजा हमेशा किसी एक तरफ को होना चाहिए। दरवाजा बीचोबीच होने से घर में विवाद, शोक और हानि होते हैं। साथ ही साथ महिलाओं को काफी कष्ट का सामना करना पड़ता है।अगर आपके घर का दरवाजा अपने आप खुलता है तो आपको मानसिक परेशानी और मतिभ्रम पैदा होता है और अपने आप बंद होता है तो कुल का नाश हो सकता है।

सही दिशा में रखें जरुरी दस्तावेज
अतीत, वर्तमान, भविष्य के लिए कुछ जरूरी कागजात सभी के साथ लगे होते हैं। ऐसे में इंश्योरेन्स, इंकम टैक्स, सेल्स टैक्स, वसीयत, जमीन की रजिस्ट्री के कागज, कोर्ट कचहरी के कागज, गिरबी एवं ब्याज के कागज, व्यापारिक दस्तावेज, मेडिकल फाईल, चेक बुक, पासबुक, एफ.डी, धार्मिक किताबें, शिक्षित योग्यता (मार्कशीट, रिजल्ट इत्यादि) शादी-विवाह का निमंत्रण पत्र, सम्मानित किया हुआ प्रशंसा पत्र इत्यादि को अपने घर या ऑफिस में किस स्थान पर रखें। यह भी बेहद अहम होता है अन्यथा नुकसान की संभावना रहती है।
वास्तुशास्त्र के संपूर्णं ज्ञान से चारो फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है यही मानव के लक्ष्य हैं।
हर एक दस्तावेज अपनी अहमियत रखता है। सबसे पहले भूखंड कि दिशाओं के बारे में आपको जानकारी दे दें। मुख्य दिशाएं चार होती है पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण। चार विदिशाएं होती है – आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य और ईशान। अलग-अलग दिशाओं मे रखने के लिए अलग-अलग दस्तावेज होते हैं। विद्वानों ने मार्गदर्शन दिया है सर्वप्रथम संपति-अनादिकाल से ही सम्पति बनाना, संपत्ति का संचय करना चला आ रहा है। प्राचीन काल में हाथी, घोड़े सम्पति का एक भाग होता था। श्रेष्ठी की पहचान करने में इनकी गिनती बोली जाती थी। समय का चक्र बदलता चला गया। आज संपत्ति का तात्पर्य सोना-चांदी, रुपए-पैसे, जमीन-जायदाद माना जा रहा है। प्राचीन समय से ही विद्वानों के मतान्तर रहे हैं कुछ विद्वानों का मत नैऋत्य कोण है। कुछ विद्वानों का मत उत्तर के मध्य कुबेर स्थान है। वैसे ज्यादातर नैऋत्य कोण में संपति रखने के परिणाम अच्छे पाए जाते हैं।
नैऋत्य कोण में कागजात रखते समय विशेष रखना चाहिए –
तिजोरी का मुख उत्तर की तरफ हो। तिजोरी जमीन से लगी हुई न हो।
तिजोरी लकड़ी के आसन पर विराजमान हो।
तिजोरी दीवार से लगी नहीं होनी चाहिए एवं दीवार के अंदर नहीं होनी चाहिए।
तिजोरी में इतर, सेंट, नेलकटर, छुरी-कैची, सरौता इत्यादि नहीं रखना चाहिए।
तिजोरी के ऊपर नीचे अगल-बगल में टॉयलेट, किचन नहीं आना चाहिए।
तिजोरी के ऊपर एवं अंदर काला एवं लाल रंग नहीं होना चाहिए।
नैऋत्य की तिजोरी धन संपत्ति को रोककर एंव संभाल कर रखने में सहायक होती है। उदाहरण के तौर पर सोना-चांदी, रुपए-पैसे, जमीन-जायदाद के कागजात, वसीयत के पेपर, एफ डी इंश्योरेंस इत्यादि।
वायव्य दिशा में क्यों ?
वायव्य दिशा में रखने का अर्थ हवा की तरह भागना है। इकंम टैक्स, सेल्स टैक्स, कोर्ट कचहरी के कागज जो किसी कारण वश आगे नहीं बढ़ पा रहा हो या उस जमीन-जायदाद का वायव्य कोण में रखना चाहिए। वायव्य कोण में रखने से उपरोक्त कार्य में आगे बढ़ने की चंचलता आ जाती है। आपका प्रयास सफल हो जाता है। सम्मानित मान-पत्र प्रशंसापत्र वायव्य में लगाने से ख्याति फैलती है।
ईशाण कोण में क्यों ?
इंकम टैक्स, सेल्स टैक्स, कोर्ट-कचहरी इत्यादि जिसमें हमारा पक्ष कमजोर हो, हमें जीत की संभावना कम हो उन्हें ईशाण कोण में रखने से लाभ प्राप्त होता है। कोई जायदाद क्रय करने के बाद उसमें कई प्रकार की कानूनी अड़चने आने लग जाती हैं उन कागजातों को भी ईशाण कोण में रखना चाहिए। धार्मिक किताबें, धार्मिक चित्र इत्यादि ईशान कोण में शोभित होते हैं।

घर में इस प्रकार लायें सकारात्मक उर्जा
सामान्य तौर यदि घर में या घर के आस-पास कोई ऐसी संरचना, पेड़े-पौधे, वस्तु आदि जिनसे नकारात्मक उर्जा में वृद्धि होती है, तो वह वास्तुशास्त्र के अनुसार गंभीर वास्तुदोष माना जाता है।
भारतीय वास्तुशास्त्र जिस मौलिक सिद्धांत पर काम करता है, वह है घर और जीवन में सकारात्मक उर्जा
में वृद्धि और नकारात्मक उर्जा को नष्ट करना है। सामान्य तौर यदि घर में या घर के आस-पास कोई ऐसी संरचना, पेड़े-पौधे, वस्तु आदि जिनसे नेगेटिव एनर्जी में वृद्धि होती है, तो वह वास्तुशास्त्र के अनुसार गंभीर वास्तुदोष माना जाता है। इन वास्तुदोषों को दूर कर घर और जीवन को बुरे प्रभावों से बचाया जा सकता है और सकारात्मक उर्जा को बरकार रखा जा सकता है।
यदि आप अपने ड्रॉइंगरूम में ताजे फूलों का गुलदस्ता रखते हैं या उसे सजाते हैं, तो ध्यान रखें कि ये सही समय पर बदले जाएं1 हो सके तो इन्हें रोज बदलें। वास्तुशास्त्र के अनुसार, जब ये फूल मुरझा जाते हैं तो इनसे घर में नेगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है।
कई बार घरों में सही चुनाई और प्लास्टरिंग न होने की वजह से कमरों की दीवारों पर सीलन पैदा होने लगती है1 भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार यह शुभ नहीं माना जाता है। सीलन से बनी आकृतियां नकारात्मक उर्जा को बढ़ाती है। इसलिए ऐसी दीवारों को जल्द-से-जल्द ठीक करवा लें।
घर के आंगन में लगे पेड़-पौधे अगर सूख जाएं, तो उन्हें तुरंत हटवा दें. ये न केवल भद्दे लगते हैं, बल्कि ये पेड़ जीवन की समाप्ति को दर्शाते है और नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करते हैं।
इंटीरियर डेकोरेशन के लिए कुछ ऐसी पेंटिंग और कलाकृतियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो मृतप्राय पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के अवशेषों से बने होते हैं। ये सभी मृतप्राय सजावटी कलाकृतियां और वस्तुएं, शंख, सीपी, मूंगा को छोड़कर, वास्तुशास्त्र के दृष्टिकोण से शुभ नहीं माने जाते हैं। इसलिए इनका उपयोग करने बचें।
यदि बेडरूम की खिड़की और मकान के मेन गेट से सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं, ट्रांसफॉर्मर आदि जैसे दृश्य दिखाई देते हों, तो इनसे से बचने के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर पर्दा डाल दें. ऐसे दृश्य नकारात्मकता में वृद्धि करते हैं.

वास्‍तु के अनुरूप हो प्रवेश द्वार
कई बार घर में सब कुछ ठीक होने के बावजूद मन में अशांति रहती है। इसके पीछे कई बार घर के मुख्‍य से जुड़े वास्‍तु दोष जिम्मेदार होते हैं। इसलिए वास्तु की मान्यता के अनुसार यह जरूरी है कि आपके घर का प्रवेश द्वारा वास्‍तु के अनुरूप हो ताकी नकारात्‍मक ऊर्जा घर में प्रवेश ही न कर सके.
आपके घर का मुख्‍य द्वार वास्‍तु की नजर से बेहद अहम है, जिस तरह इसी दरवाजे से अच्‍छे और बुरे लोग आपके घर में आते हैं ठीक उसी तरह इसी दरवाजे से सकारात्‍मक और नकारात्‍मक ऊर्जा भी प्रवेश करती है। अक्‍सर घर में सब कुछ ठीक होने के बावजूद कुछ ठीक नहीं होता। मन और घर में नकारात्‍मक ऊर्जा रहती है1 इसके पीछे कई बार घर के मुख्‍य से जुड़े वास्‍तु दोष होते हैं। इसलिए वास्तु की मान्यता के अनुसार यह जरूरी है कि आपके घर का प्रवेश द्वारा वास्‍तु के अनुरूप हो ताकी नकारात्‍मक ऊर्जा घर में प्रवेश ही न कर सके।
क्‍या करें क्‍या न करें
घर के बाहर रोशनी का इंतजाम जरूर करें1 भले ही बल्ब या ट्यूबलाइट लगाएं, पर अंधेरा होते ही उसे जला कर रखें।
अक्‍सर हम सभी घर के बाहर नेमप्लेट लगाते हैं और उसे लगा कर भूल जाते हैं. ऐसी गलती न करें. वास्‍तु के अनुसार नेमप्लेट जितनी साफ और चमकदार होगी नकारात्मक ऊर्जा आपके घर से उतनी ही दूर रहेगी1
अगर आपके घर के बाहर भी शू रैग, साइकिल, स्‍कूटर, कार वगैरह रखे या पार्क होते हैं, तो कोशिश करें कि ये मेन डोर से हट कर हों।
मुख्‍य द्वार के वास्‍तु दोष
वास्‍तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार के सामने किसी दीवार, पेड या किसी भी तरह की छाया नहीं होनी चाहिए.
कई बार सब कुछ ठीक होने के बावजूद वास्‍तु दोष के कारण परेशानियां सामने आती हैं। इसी तरह मुख्य द्वार अगर घर के बीचों-बीच होता है तो कलह का संकेत है।
कई बार हम सजावाट के लिए घर के बाहर या मुख्य द्वार पर किसी तरह की बेल-पौधे लगा लेते हैं, जोकि वास्‍तु के अनुसार ठीक नहीं है1
वास्‍तु के हिसाब से घर का मेन डोर खोलते ही सामने सीढ़ी नहीं होनी चाहिए1 इस बात का भी ध्‍यान रखें कि मेन डोर हमेशा अंदर की तरफ खुलने वाला होना चाहिए।
वास्‍तु के सरल उपाय
याद हो तो पुराने जमाने में घर के मुख्‍य द्वार को झालरों से सजाया जाता था। यह घर की खूबसूरती के साथ ही वास्‍तु के हिसाब से भी अच्‍छा है. ऐसा करने से घर में नकारात्‍मक ऊर्जा नहीं आती। मेन डोर के बाहरी ओर दीवार पर पाकुआ दर्पण स्थापित करें।
आप चाहें तो नकारात्‍मक ऊर्जा को दूर करने के लिए विंड बेल्‍स लगाएं।
मुख्य द्वार पर क्रिस्टल बॉल लटकाएं। इसके अलावा आप मेन डोर पर लाल रंग का फीता बांधने से भी घर में नकारात्‍मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती।
घर का मुख्‍य द्वार खोलते ही सीढ़ी नहीं होनी चाहिए, अगर ऐसा है, तो फिर उन पर पर्दा डाल कर नकारात्‍मक ऊर्जा को दूर किया जा सकता है।

 

तो समझे आप पर है महालक्ष्मी की कृपा
अगर आप पर महालक्ष्मी की कृपा होने वाली है तो इसके लिए कुछ विशेष संकेत पहले ही मिलने लगते हैं। किसी भी व्यक्ति की पैसों से जुड़ी इच्छाएं कब पूरी होंगी, महालक्ष्मी की कृपा कब मिलेगी। यह जानने के लिए ज्योतिष में यह संकेत बताए गए हैं. मान्यता है कि जब भी ये संकेत मिलते हैं तो समझ लेना चाहिए कि व्यक्ति को लक्ष्मी की कृपा मिलने वाली है और पैसों की परेशानियां दूर होने वाली हैं।
सुबह-सुबह उठते ही आपकी नजर अगर दूध या दही से भरे बर्तन पर पड़े तो समझ लें कि कुछ शुभ होने वाला है।सुबह शंख ,मंदिर की घंटियों की आवाज सुनाई दे तो यह बहुत ही शुभ होता है। यदि किसी व्यक्ति को सुबह शाम गन्ना दिखाई दे तो उसे निकट भविष्य में धन सबंधी मामलो में सफलता मिल सकती है। यदि किसी व्यक्ति के सपनों में बार-बार पानी ,हरियाली ,लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू दिखाई दे तो समझ लेना चाहिए कि आने वाले समय में मां लक्ष्मी जी की कृपा से धन सबंधी परेशानियां दूर होने वाली हैं। यदि हम किसी आवश्यक काम के लिए जा रहे हैं और रास्ते में लाल साड़ी में पुरे सोलह श्रृंगार में कोई महिला दिख जाए तो यह भी महालक्ष्मी की कृपा का इशारा ही है ऐसा होने पर उस दिन कार्यों में सफलता मिलने की सम्भवना अधिक है। नारियल, शंख, मोर, हंस, फूल आदि चीजें सुबह दिखाई देती है तो बहुत शुभ है
शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को महालक्ष्मी की पूजा करने से विशेष कृपा मिलती है। इस दिन यदि कोई कन्या आपको सिक्का दे तो यह शुभ संकेत है। ऐसा होने पर समझ लेना चाहिए की निकट भविष्य में धन लाभ होने वाला है।
यदि घर से निकलते ही गाय दिखाई दे तो यह शुभ संकेत है। अगर गाय सफेद हो तो यह बहुत ही शुभ संकेत है।
यदि किसी व्यक्ति के सपने में सफेद सांप, सोने के जैसा सांप दिखाई देने लगे तो यह भी महालक्ष्मी की कृपा का इशारा है ऐसा होने पर निकट भविष्य में कोई विशेष उपलब्धि हासिल हो सकती है। यदि घर से निकलते ही कोई सफाई कर्मी दिखाई दे तो यह भी शुभ संकेत होता है।

वस्तुओं को घर से करें बाहर
हमारा जीवन खुशियों से भरा हो और हमें कोई संकट नहीं आये इसकी कामना हम सभी करते हैं। इसके लिए हम पूजा पाठ के साथ ही क्रत और उपवास भी करते हैं पर फिर भी कई बार परिणाम नहीं आ पाते। इसके लिए वास्तु के दोष भी जिम्मेदार हो सकते हैं। जिस तरह वास्तु के अनुसार, कुछ चीजों को घर में रखने से सुख-शांति का माहौल बनता है, ठीक उसी तरह घर में कुछ चीजों के होने से अशांति का माहौल भी बनता है। वास्तु के अनुसार, कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें घर मे रखने से घर का माहौल बिगड़ सकता है। ऐसे में इन वस्तुओं को तत्काल ही हटा देना चाहिये।
घर साफ रखना जरूरी है। घर में अगर कहीं से गंदा पानी लीक हो रहा हो तो तुरंत उसकी मरम्मत करा लें। घर में गंदा पानी रहना सही नहीं है। इससे न सिर्फ बीमारियों के होने का खतरा बढ़ता है बल्कि वास्तु के अनुसार भी यह सही नहीं है।
इसके अलावा घर के अंदर कांटेदार पौधे तो कभी न रखें। ऐसे पौधे घर के बाहर लगाएं। जिन घरों में ऐसे पौधे होते हैं, उन घरों में लोगों की सेहत अक्सर खराब रहती है।
घर के भीतर पत्थर न रखें
ध्यान रहे आपके घर के भीतर कोई पत्थर न हो। घर के भीतर पत्थर होने का सीधा सा मतलब यह है कि परिवार के लोगों को सफलता पाने के लिए काफी संघर्ष करना होगा। इशके अलावा घर में अशांति भी बढ़ती है।
रोजाना के कचड़े को हर रोज घर से बाहर फेंक दें। घर में कचड़ा जमा होने से रिश्तों में तनाव आने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही कर्ज की आशंका भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही अगर आपके घर के आगे कोई रास्ता है तो वह दरवाजे के प्लेटफॉर्म से ऊंचा नहीं होना चाहिए। अगर दोनों एक समान स्तर पर हैं तो भी ठीक है लेकिन मुख्य द्वार नीचे नहीं होना चाहिए। इन सब उपायों को अपनाएं जरूर लाभ होगा।

नौकरी के लिए करें ये उपाय
जीवन में धन संपदा के बिना कोई सुख नहीं मिल सकता। सभी लोग इसके लिए प्रयास करते हैं पर कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी बेरोजगार रह जाता है। वह नौकरी के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उसकी कोशिश विफल होती जाती है। इसके लिए व्यक्ति भाग्य को जिम्मेदार ठहराता है पर अपने भाग्य को कोसने के बजाय अगर वास्तु सम्मत उपाय किए जाएं तो हमें सफलता मिल सकती है।
नौकरी के लिए साक्षात्कार देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें। सम्भव हो, तो शर्ट भी लाल पहनें। आप जितना अधिक लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं, करें। लेकिन यह याद रखें कि लाल रंग भड़कीला ना हो, सौम्य लगे।
रात में सोते समय बेडरूम में पीले रंग का प्रयोग करें। याद रखें, लाल, पीला व सुनहरा रंग आपके भाग्य में वृद्धि लाता है। इसलिए हमेशा इसे अपने साथ रखें और इन रंगों का व्यवहार ज्यादा से ज्यादा करें, सफलता मिलेगी।
उत्तर दिशा की दीवार को व्यवस्थित करें। अगर इस दीवार पर कोई गैर जरूरी या पुराना सजावट का सामान हो तो उसे हटा दें। स्टेशनरी का पुराना सामान, ऑफिस की पुरानी फाइलें इन चीजों को घर से बाहर कर दें और उत्तर दिशा की दीवार को खाली रखें। साथ ही स्टील की अलमारी को भी उत्तर दिशा में रखने से बचें।
उत्तर दिशा की दीवार पर फुल लेंथ मिरर (आईना) रख सकते हैं। इस दिशा में आईना रखने से आपको बेहतर अवसर मिलेंगे और साक्षात्कार में भी सकारात्मक परिणाम आयेंगे।
साक्षात्कार के लिए घर से बाहर निकल रहे हों तो अपना दायां पैर पहले बाहर रखें। साथ ही घर से निकलने से पहले भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें सुपारी चढ़ाएं और प्रसाद के तौर पर इसे ग्रहण करें।
साक्षात्कार के समय अपना हाथ या पैर मोड़कर बैठने की बजाए, पूरे आत्मविश्वास के साथ बैठें। इस प्रकार आपको जरूर सफलता मिलेगी।

सकारात्मकता लाती हैं रंगबिरंगी मोमबत्तियां
वास्तु में कई ऐसे सामान होते हैं जो नकरात्मकता दूर कर सकारात्मकता लाते हैं। वहीं चीनी वास्तु फेंगशुई में मोमबत्ती या कैंडल की अहम भूमिका बतायी गई है। इसके द्वारा ऊर्जा का संतुलन किया जा सकता है। फेंगशुई में इस ऊर्जा को ’ची’ कहते हैं। मोमबत्तियों से प्राप्त ची नकारात्मक ऊर्जा को काट देती है और घर में सकारात्मक ची यानी ऊर्जा की वृद्धि करने के साथ ही आपका भाग्य भी जगाती है। घर के उत्तर-पूर्वी कोने में ग्रीन या हरे रंग की मोमबत्ती लगाएं। इससे न सिर्फ घर की सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है, बल्कि पढ़ने वाले बच्चों की एकाग्रता भी बढ़ती है।
दक्षिण पश्चिम यानी अग्निकोण में गुलाबी और पीले रंग की मोमबत्ती जलाएं। इससे परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम व सामंजस्य बढ़ता है। दक्षिण भाग को लाल रंग की मोमबत्ती से सजाएं। इससे धन समृद्धि में वृद्धि होती है।
नीले रंग की मोमबत्तियां पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में ही लगानी चाहिए। घर की उत्तर दिशा में सफेद रंग की मोमबत्ती लगाने से परिवार के सदस्यों में रचनात्मकता बढ़ती है।

व्यवसाय को इस प्रकार बनाये लाभकारी
कारोबार बढ़ाने में भी वास्तु के उपाय बेहद लाभदायक होते हैं। कार्यालय वह जगह है जहां लोग पेशेवर ढंग से अपने पेशे और व्यापार के लिए लक्षित होकर काम करते हैं। यह जगह धन सृजन के साथ-साथ प्रतिष्ठा और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति की जगह है। सैद्धांतिक तौर पर ऑफिस को सकारात्मक उर्जा से भरा होना चाहिए, माहौल में रौशनी की अधिकता होनी चाहिए, साथ इसका डिजायन भी आकर्षक और सुविधाजनक होना चाहिए। भारतीय वास्तुशास्त्रों में ऑफिस को व्यवसाय स्थल, कार्यस्थान या कार्यालय कहा गया है और अनेक विस्तृत उपायों की चर्चा की गई, जिसे अपना कर लाभ उठाया जा सकता ह।
भारतीय वास्तुशास्त्रों के अनुसार कार्यालय की बिल्डिंग के लिए उसका प्लॉट चौकोर या आयताकार होना सबसे लाभकारी होता है। अनियमित आकार के भूखंडों से बचने का सुझाव इन ग्रंथों में दिया गया है।
कार्यालय के बॉस या कंपनी के मालिक के बैठने का स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां किसी आगंतुक की दृष्टि सीधे उसपे न पड़े। इसके लिए ग्रंथों में दक्षिण-पश्चिम कोने में केबिन बनाने का सुझाव दिया गया है और उनका मुख उत्तर दिशा की और सर्वोत्तम माना गया है।
कार्यालय के सीनियर स्टाफ के लिए दक्षिण और पश्चिम में बैठना काफी वास्तुसम्मत माना गया है। साथ ही यह भी सुझाव है कि जब वे दक्षिण में बैठे हों, उनका मुख उत्तर की ओर होना चाहिए और पश्चिम में बैठते समय पूर्व का सामना करना चाहिए. जबकि ऑफिस के जूनियर स्टाफ के लिए पूर्व और उत्तरी भाग की जगह सर्वोत्तम मानी गई है।
धन नहीं रूकता तो बुधवार को करें भगवान गणेश का पूजन
हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन को किसी न किसी देवता, गृह के साथ पूजा-अर्चना से जोड़ा गया है। इसी क्रम में बुधवार को बुध ग्रह के नाम से जोड़ा गया है। इस दिन बुध ग्रह का पूजन किया जाता है। बुधवार के दिन श्री गणेश की पूजा का प्रावधान है। साथ ही, बुध ग्रह की पूजा भी बुधवार को की जाती है। मान्यता है कि कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ स्थिति में होने पर बुधवार को गणेश का पूजन करना लाभदायक होता है। हिंदू मान्यता के अनुसार अगर घर में धन नहीं रुकता, बेवजह धन व्यर्थ होता है, घर में क्लेश मचा रहता है, तो यह सब बुधवार को व्रत या पूजन से दूर किया जा सकता है। मान्यता है कि यह व्रत बुध ग्रह का अशुभ प्रभाव दूर करता है।
मान्यता है कि बुधवार का व्रत अंधेर यानी कृष्ण पक्ष की बजाए चांदन यानी शुक्ल पक्ष में रखने की शुरुआत करनी चाहिए। यह व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से करना शुभ माना जाता है। बुधवार का व्रत कम से कम 21 बुधवारों तक और ज्यादा से ज्यादा 41 बुधवारों तक करने से शुभ फल मिलता है। अन्य व्रतों की तरह इस व्रत में भी नमक का सेवन नहीं किया जा सकता। हिंदू धर्म में हर देवता का कुछ न कुछ प्रिय आहार होता ही है। ठीक इसी तरह मान्यता है कि बुधवार को खाने में मूंग की दाल की पंजीरी या हलवा भोग लगाने से भागवान गणेश जल्दी खुश होते हैं। इस व्रत में दान को विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि बुधवार का व्रत रखने के दौरान दान के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिये।