प्रशासनिक गलियारे से

34 आईपीएस अफसर होंगे प्रमोट
जल्द 34 आईपीएस अफसर प्रमोट होकर डीजी, एडीजी, आईजी और डीआईजी हो जाएंगे। इसके अलावा राज्य पुलिस सेवा के 7 अफसरों को आईपीएस अवॉर्ड करने की तैयारी भी गृह विभाग ने कर ली है। वरिष्ठता के आधार पर 18 आईपीएस अफसर प्रमोट होकर डीआईजी बनेंगे। गौरतलब है कि आईपीएस अखिलेश झा की याचिका पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने इस बैच के प्रमोशन पर स्टे दिया है। इसी 2004 बैच के आईपीएस झा के खिलाफ दो साल से विभागीय जांच चल रही है। बता दें कि कैट ने नंवबर माह में पूरे बैच के प्रमोशन पर स्टे दिया था। प्रमोट डीजी आरके गर्ग, संजय राणा, अनिल कुमार, पुरुषोत्तम शर्मा। एडीजी अनिल कुमार, सोनाली मिश्रा, आरके गुप्ता, अनिल कुमार गुप्ता व संजीव शमी। बनने वाले अधिकारियों में
आईजी बनने वाले अधिकारियों में संतोष सिंह, केसी जैन व एसपी सिंह और आईजी बनने वाली टीम में डीआईजी गौरव राजपूत, संजय कुमार, इरशाद वली, बीपी चंद्रवंशी, अखिलेश झा, आनंद प्रकाश सिंह, प्रीतम सिंह उइके, डीएस चौधरी, आईपी अरजरिया, आरके जैन, अनिल महेश्वरी, दीपक वर्मा, अशोक कुमार गोयल, एमएस सिकरवार, प्रेमबाबू शर्मा, एके पांडे, आरए चौबे व मनोहर वर्मा के नाम शामिल हैं। सलेक्शन ग्रेड सुशांत कुमार सक्सेना, आशीष, आरएस डेहरिया व संजय तिवारी के नाम शामिल हैं।

एमपी में एसीएस के दो नए पद मंजूर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आईएएस अधिकारी सलीना सिंह जल्द ही अपर मुख्य सचिव (एसीएस) बनेंगी। सुश्री सिंह मप्र कैडर की 1986 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी है। मंगलवार को आयोजित कैबिनेट मीटिंग में एसीएस के दो नए पदों को मंजूरी दे दी है। इसको मिलाकर अब एसीएस के मप्र में 16 पद हो जाएंगे। विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बुलाई जाएगी। इस बीच सलीना सिंह के अलावा एक पद एसीएस पद का लाभ 1986 बैच के बीआर नायडू को भी मिलेगा। नायडू पूर्व में अपर मुख्य सचिव पद पर सशर्त प्रमोट हुए थे कि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वरिष्ठ 1985 बैच के एम गोपाल रेड्डी के लौटने के बाद वे रिवर्ट हो जाएंगे।
रेड्डी के लौटते ही उन्हें एसीएस पद पर प्रमोट करने के बाद राजस्व मंडल ग्वालियर में प्रशासनिक सदस्य बनाया गया। इसके बाद नायडू को प्रमुख सचिव पद पर रिवर्ट करने की बजाए राज्य सरकार ने दो साल के लिए एसीएस के दो नए पद मंजूर कर दिए। इसका फायदा यह होगा कि नायडू को रिवर्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव 1985 बैच के अधिकारी दीपक खांडेकर जल्द ही केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले हैं। माना जा रहा है कि वे जनवरी में दिल्ली जा सकते हैं। उनका पद खाली होने का लाभ 1987 बैच के अधिकारी मनोज श्रीवास्तव को मिलेगा। वे अभी वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर पदस्थ हैं।

मंडलोई क्यों हैं शर्मिंदा
उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में आयुक्त नीरज मंडलोई ने कहा कि पटवारी की परीक्षा के लिए 10 लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें पीएचडी, एमफिल सहित उच्च शिक्षित युवाओं की संख्या लाखों में है। यह शर्म से सिर झुकाने वाली स्थिति है। समीक्षा बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि उच्च शिक्षा प्राप्त लोग पटवारी की परीक्षा दे रहे हैं। वह अपनी डिग्री के अनुसार खुद कोई काम क्यों नहीं कर पा रहे हैं। युवा स्वयं को खुद के रोजगार से क्यों नहीं जोड़ पा रहा है। इस पर चर्चा हुई। समीक्षा बैठक में विसंगति को दूर करने पर चर्चा हुए।

अबकि अटके गौरव
CG के भारतीय प्रशासनिक सेवा 95 बैच के अधिकारी गौरव द्विवेदी और सरकार की पटरी नहीं बैठ रही है। 27 नवंबर को वह मंत्रालय में ज्वाईनिंग दे चुके हैं। लेकिन, पांच दिन गुजरने के बाद भी उनकी पोस्टिंग नहीं हो पाई है। उनसे पहले अमिताभ जैन और अमित अग्रवाल का मामला भी लोग भूले नहीं है। दोनों को 15 दिन से महीने भर तक इंतजार करना पड़ गया था। तब जाकर उनकी पदस्थापना हुई थी।
महत्वपूर्ण यह है कि इस दौरान लगातार नियुक्तियां हो रही हैं। रोहित यादव को जीएडी सिकरेट्री का आर्डर निकला। आईएफएस एके द्विवेद को जलग्रहण एजेंसी का सीईओ बनाया गया। 29 नवंबर को सुनील कुजूर का प्रशासन अकादमी के महानिदेशक का आदेश हुआ। लेकिन, गौरव द्विवेदी की स्थिति पेंडुलम जैसे हो गई है। गौरव कोरबा और बिलासपुर के कलेक्टर रहे। मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना में डा0 आलोक शुक्ला के साथ मिलकर उन्होंने काफी काम किया था। इसके लिए उन्हें भारत सरकार से सम्मान भी मिला था। लेकिन, 2008 चुनाव के दौरान गौरव जब ज्वाइंट इलेक्शन कमिश्नर थे, सरकार से समीकरण कुछ गड़बड़ा गया था। चुनाव में बीजेपी जब फिर से सरकार बनाने में कामयाब हो गई तो वे और उनकी पत्नी मनिंदर कौर द्विवेदी प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। डेपुटेशन भी उनका साल-दर-साल बढ़कर पांच साल से आठ साल हो गया। हालांकि, उनकी पत्नी यहां ज्वाइंनिंग के साथ ही चाईल्ड केयर लीव के लिए अप्लाई कर दिया है। ब्यूरोक्रेसी में इस बात की उत्सुकता है कि गौरव की पोस्टिंग कब तक हो पाती है।

कर्णावत की कोविंद से गुहार
बर्खास्त आईएएस शशि कर्णावत ने बर्खास्तगी को चुनौती राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सामने दी है.उन्होंने कोविंद से मुलाकात कर उन्हें वास्तविकता से अवगत कराया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को यह भी बताया कि मप्र सरकार ने किस तरह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें प्रताड़ित किया.राष्ट्रपति ने कर्णावत की सभी बातें गंभीरता से सुनी और उन्हें इस मामले में जांच कराने और न्याय दिलाए जाने का भरोसा दिया है। कर्णावत ने पिछले दिनों राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा था, जिसके बाद उनकी पिछले दिनों मुलाकात हुई। कर्णावत ने राष्ट्रपति को वे दस्तावेज भी दिखाए, जिनके आधार पर उन्हें दोषी करार दिया गया। गौरतलब है कि अपनी बर्खास्तगी के विरूद्ध शशि कर्णावत ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को चुनौती दी थी कि अब वे इस बर्खास्तगी के विरूद्ध सड़कों पर उतरेगी तथा किसी भी हद तक जा सकती है। एमपी कैडर 1999 बैच की आईएएस अफसर कर्णावत को प्रिंटिंग घोटाले में दोषी करार दिये जाने पर बर्खास्त कर दिया गया है। 1999-2000 में मंडला जिला पंचायत सीईओ रहते हुए 33 लाख के प्रिंटिंग घोटाले के आरोप में ईओडब्ल्यू ने कर्णावत के खिलाफ केस दर्ज किया था। स्पेशल कोर्ट ने कर्णावत को 5 साल सजा सुनाई थी। सितंबर 2013 में वहीं के स्पेशल कोर्ट ने कर्णावत को 5 साल जेल और 50 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके अगले माह ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। तब से उनको 11 बार निलंबन आदेश बढ़ाया जा चुका था। इससे पहले एमपी कैडर के आईएएस अधिकारी दंपती अरविंद जोशी और टीनू जोशी को भी भ्रष्टाचार के चलते बर्खास्त किया जा चुका है।

डबास का बांग्ला करवाया खाली
रिटायर्ड IFS आजाद सिंह डबास का सरकारी आवास सी-20 शिवाजी नगर को सरकार ने खाली करा लिया । बताया गया है कि IFS आजाद सिंह डबास जनवरी 2017 में रिटायर हो गए थे। नियमानुसार उन्हें 6 महीने तक सरकारी आवास में रहने की पात्रता थी। जुलाई में पात्रता खत्म होने के बाद भी जब डबास ने अपना सरकारी बंगला खाली नहीं किया, तो उनके खिलाफ बेदखली प्रकरण दर्ज कर शो कॉज नोटिस दिया गया था।
इसके बाद डबास द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और शासन द्वारा कोई दिशा निर्देश नहीं मिलने की स्थिति में गुरुवार को डबास का सरकारी बंगला खाली करा लिया गया। आजाद सिंह डबास ने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार को दिए अपने रीप्रेजेन्टेशन में रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी बंगलों में रह रहे अफसरों की भांति उनको भी रहने की मांग की थी। सरकार ने डबास के रीप्रेजेन्टेशन को स्वीकार नहीं किया। आजाद सिंह डबास ने आगे कहा कि वह जल्द ही हाईकोर्ट में सरकारी मकानों के आवंटन और बेदखली में ट्रांसपेरेंसी लाने के लिए एक जनहित याचिका लगाएंगे।

ये क्या इतनी शिकायतें
राज्य के 29 आईपीएस अफसरों के खिलाफ सालों से चल रही जांच की आज तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है। इन अफसरों के खिलाफ पुलिस मुख्यालय की सीआईडी विजिलेंस शाखा में शिकायतें हैं। अधिकांश शिकायतें जुआ-सट्टे को बढ़ावा देने, पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार संबंधी हैं। इनमें से कई शिकायतें को सालों से लंबित हैं। एक एसपी के खिलाफ 2006 से जांच चल रही है, जिसमें फर्जी जाति प्रमाण पत्र और दो पत्नियों संबंधी आरोप हैं। आयुक्त आदिवासी विकास मप्र छानबीन समिति भोपाल द्वारा जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया जा चुका है लेकिन इसके विरुद्ध हाईकोर्ट के स्टे के चलते दो पत्नी के मामले में शासन ने आरोप मांगा है जो पीएचक्यू की प्रशासन शाखा में लंबित है।
ये कैसी क्लीन चिट
अरे ये क्या एक आईपीएस अफसर के खिलाफ जुआ-सट्टा, अवैध शराब और खुलेआम वसूली की शिकायतें थीं, फिर भी उन्हें कैसे क्लीनचिट मिल गई वहीं एक डॉक्टर से 10 लाख रुपए लेने ही विचाराधीन है। ऐसे ही लेनदेन के मामले में फंसे आईपीएस अधिकारी की दो शिकायतें थीं जिनमें से एक पुणे की महिला से दस लाख रुपए लेने और एक गलत विवेचना की थी। लेकिन उसमें खात्मा लगा दिया अब अदालत के आदेश पर इसे पुन: विवेचना में लेना पड रहा है।

जीएडी क्यों खफा
संभागायुक्तों द्वारा राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के अधिकार का प्रयोग नहीं किए जाने को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग नाराज है। जीएडी ने इस बारे में सभी संभागायुक्तों एवं कलेक्टरों को परिपत्र लिखकर अपने अधिकारों का प्रयोग करने और इस तरह के प्रकरण जीएडी को ना भेजने के निर्देश जारी किए है। विभाग का कहना है अधिकारों का प्रयोग प्रथम श्रेणी एवं द्वितीय श्रेणी अधिकारियों के विरुद्व करें और भविष्य में इस तरह के प्रकरण नहीं भेजे।

बयान से उड़ी अफसरों की नींद
पिछले दिनों प्रदेश भाजपा की ओर से जारी एक बयान को लेकर राज्य के प्रशासनिक अमले के होश उड़ गए हुआ,यूं कि नंदकुमार चौहान द्वारा बयान में कहा गया कि सरकार ने किसानों को डिफाल्टर होने से बचाने के लिए 12 हजार करोड़ की सब्सिडी का भुगतान बैंकों को कर दिया है। इसके बाद कृषि और सहकारिता विभाग हरकत में आया उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि यह निर्णय कब हो गया। वहीं बैंकों ने सब्सिडी के लिए अधिकारियों से संपर्क करना शुरू कर दिया।
महिला अफसर ने सुरक्षा मांगी
मध्य प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी हैं सोनिया मीणा उन्हें रेत माफिया ने जेल के अंदर से जान से मारने की धमकी दी है । उन्होंने इसकी शिकायत मुख्य सचिव और डीजीपी से करते हुए सुरक्षा की मांग की है। उन्हें गवाही देने के लिए छतरपुर जाना है। जहां उन्होंने एसडीएम रहते कार्रवाई की थी,जेल में बंद ही माफिया अब उन्हें धमका रहा है। जब यह कार्रवाई हुई थी,तब उसने समर्थकों साथ राइफल तानकर सोनिया को धमकाया था। वह गाली गलोज कर रेत से भरे ट्रैक्टर छुड़ाकर ले गया था।
उत्पादन से ज्यादा खरीद गया प्याज
मप्र में किसान आंदोलन को देखते हुए सरकार ने प्याज खरीदी का ताबड़तोड़ निर्णय लिया। 23 जिलों में 68 खरीद केंद्रों से प्याज की खरीदी शुरू की गई। इसे आसपास के जिलों में बिक्री के लिए भेजा जा रहा है। इस प्याज को व्यापारी खरीदकर 68 खरीद केंद्रों पर पहुंचा रहे हैं। जहां बार-बार प्याज की खरीदी हो रही है जिसके कारण मध्यप्रदेश में उत्पादन से 4 गुना ज्यादा प्याज समर्थन मूल्य पर खरीद लिया गया। पिछले साल 4 जून से 30 जून तक सरकार ने 10 लाख 40 हजार मि्ंटल प्याज खरीदी थी। इस साल सरकारी खरीद केंद्रों से 25 लाख मि्ंटल से अधिक प्याज की खरीदी हो चुकी है। प्याज को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से बेचने का निर्णय लिया गया था। किंतु यह प्याज मंडियों में नीलाम करके बेची जा रही है।