ज्योतिष विविध

कुंडली दोष दूर करती है लक्ष्मीपूजा
कुंडलीनी दोष दूर करने के लिए यदि आप उपाय करते-करते थक गए हैं तो आपको बतला दें कि शुक्रवार को लक्ष्मीपूजा करने से आप इनसे आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। आपकी कुंडली में किसी भी प्रकार का दोष हो आप शुक्रवार को लक्ष्मीपूजा वाला उपाय जरुर करें इससे दोष दूर हो जाएगा। वैसे भी कहा जाता है कि कुंडली में शुक्र अशुभ हो, तो वैवाहिक जीवन में संकट पैदा हो जाता है। आपको बताते चलें कि इस शुक्र को सही दिशा में उपयोगी बनाने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं। इनसे दोष भी दूर होंगे, जैसे कि भगवान विष्णु के मंत्र का जाप 108 बार करें। यह मंत्र है- ‘ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।’ इसमें परेशानी हो तो आप भगवान विष्णु के नामों का जप भी कर सकते है। इसके अतिरिक्त शुक्र ग्रह के लिए हीरा, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा, दही, सफेद चंदन आदि चीजों का दान भी किया जा सकता है। इसके साथ ही किसी गरीब व्यक्ति को या फिर पास किसी मंदिर में दूध का दान भी आप कर सकते हैं। दोष दूर करने के लिए किसी सुहागन को सुहाग का सामान दान कर दें, इससे भी राहत मिलती है। चूड़ियां, कुमकुम, लाल साड़ी आदि का दान करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और मन वांछित फल देती हैं।

 

जाते हुए धन को रोकेंगे ये उपाय
तरह-तरह के उपक्रम करने और पूरी मेहनत के बावजूद यदि आपके पास धन नहीं रुक रहा है तो सावधान हो जाएं। धन की कमी वाली परेशानी को दूर करने के लिए वास्तुशास्‍त्र में बताए गए कुछ आसान उपायों को आपके लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। इन्हें करके आप जाते धन को रोक सकते हैं और ऐसा करके धन की कमी भी खत्म हो जाएगी जिससे परिवार में सुख शांत‌ि आने में भी मदद मिलेगी।
इन्हें उपायों में सबसे पहले आप अशोक के पेड़ की जड़ का एक छोटा टुकड़ा ले आएं और प्रतिदिन जहां पूजा की जाती है वहां इसे रख दें। नियमानुसार इसकी पूरा भी रोजाना करें। ऐसा करने से आपका जाता हुआ धन रुक जाएगा और फिर धन की कमी भी नहीं रहेगी। इसी प्रकार यह तो सभी जानते हैं कि कुबेर धन के स्वामी हैं। अगर इनकी दृष्टि दरिद्र पर भी पड़ जाए तो वह धनवान हो जाता है। अत: इन्हें पूजने या इनका यंत्र तिजोरी में रखने से कभी आपकी तिजोरी खाली नहीं होगी और आपका जाता धन भी रुका रहेगा। कुबेर यंत्र से आपका धन तिजोरी में एकदम सुरक्षित होने के साथ ही साथ बढ़ता भी जाएगा। इसके अतिरिक्त एक उपाय और किया जा सकता है जिसमें कि नमक का प्रयोग होता है। घर के ईशान कोण में नमक भरकर किसी पात्र को स्थापित करें। नमक के मामले में यह ध्यान रहे कि वह साबुत होना चाहिए और एक बार रखकर उसे भूल न जाएं बल्कि उसे बार-बार बदलें। ऐसा करने से भी धन जाने से रुक जाता है और धन की कमी भी जाती रहती है।

 

दान करें लेकिन ग्रह अनुसार
वैसे तो कहा यही जाता है कि दान से बड़ा कोई धर्म नहीं, लेकिन कभी आपने सोचा है कि दान भी कभी-कभी आपके लिए परेशानी ला सकता है। जी हॉं कुछ ऐसी चीजें हैं जिनके दान करने से अशुभ हो जाता है। वैसे सनातन धर्म ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों में भी दान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यह परंपरा या रीति-रिवाज़ से बड़कर होता है। अनेक तरह के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी दान किया जाता है। दान करने वाले के लिए कहा गया है कि उसे भोग-विलास से छुटकारा मिल जाता है और उसे मृत्युपरांत भी लाभ मिलता है। दूसरे शब्दों में जीवन भर के पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है दान। यही वजह है कि ज्योतिष शास्त्र में भी दान का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषियों द्वारा व्यक्ति विशेष की जन्म पत्रिका के अनुसार दान करने को कहा जाता है। यही कारण है कि दानदाता तो रुपए-पैसे के अतिरिक्त भोजन, महंगे आभूषण और अन्य वस्तुओं तक का दान करते देखे जाते हैं। इसके बावजूद कहा जाता है कि दान ग्रहों की स्थिति को देखते हुए ही किया जाना चाहिए, अन्यथा इससे लाभ मिलने की बजाय हानि होने लगती है। जन्म कुण्डली के विभिन्न ग्रहों को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के दान कर्म किए जाते हैं। ज्योतिष अनुसार ग्रह स्थिति देखी जानी चाहिए और उसी अनुसार दान किया जाना चाहिए ताकि वह आपके लिए उत्तम फलदायी हो।

कारोबार बढ़ाने करें यह उपाय
मनुष्य अपनी उन्नति के लिए व्यवसाय शुरू करता है, किंतु कई बार यह देखने में आता है कि व्यक्ति मेहनत तो बहुत करता है, परंतु उतना लाभ उसको नहीं मिलता। जिससे वह हमेशा दुखी रहता है।
ऐसे दुखी व्यक्ति नीचे लिखे मंत्र का जप करें। ईश्वर के आशीर्वाद से व्यापार में अत्यंत लाभ मिलेगा।
मंत्र : ॐ श्रीं श्रीं श्रीं परमाम् सिद्धिं श्री श्री श्रीं।
इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए पूर्ण स्वच्छता का ध्यान रखें।
पूर्ण साफ मन से प्रदोष के दिन स्नान करके प्रभु शिव का ध्यान करते हुए पूर्ण निराहार होकर व्रत (उपवास) रखें। उस दिन अन्न न लें।
शाम को (गोधूली बेला में) शिवजी का पूजन करें एवं असगंध के फूल को घी में डूबाकर रख लें।
तीन माला जाप उपरोक्त मंत्र की करें। तत्पश्चात एक माला से मंत्र पढ़ते हुए हवन करें।
यह प्रयोग 11 प्रदोष तक लगातार करें। पूर्ण फल मिलेगा।

भोलेनाथ को इस प्रकार करें प्रसन्न
भगवान शंकर को भोल नाथ भी कहा जाता है क्योंकि वह भक्तों की प्रार्थना से बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। वैसे तो धर्मग्रंथों में भोलेनाथ की कई स्तुतियां हैं, पर श्रीरामचरितमानस का ‘रुद्राष्टकम’ अपने-आप में सबसे बेहतर है।
‘रुद्राष्टकम’ केवल गाने के लिहाज से ही नहीं, बल्कि भाव के नजरिए से भी एकदम मधुर है। यही वजह है शिव के आराधक इसे याद रखते हैं और पूजा के समय सस्वर पाठ करते हैं। ‘रुद्राष्टकम’ और इसका भावार्थ आगे दिया गया है।
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥1॥
(हे मोक्षरूप, विभु, व्यापक ब्रह्म, वेदस्वरूप ईशानदिशा के ईश्वर और सबके स्वामी शिवजी, मैं आपको नमस्कार करता हूं. निज स्वरूप में स्थित, भेद रहित, इच्छा रहित, चेतन, आकाश रूप शिवजी मैं आपको नमस्कार करता हूं.)
निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥2॥
(निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत) वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे परमेशवर को मैं नमस्कार करता हूं.)
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ॥
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥3॥
(जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिर पर सुंदर नदी गंगाजी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीया का चन्द्रमा और गले में सर्प सुशोभित है…)
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥4॥
(जिनके कानों में कुण्डल शोभा पा रहे हैं. सुन्दर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्न मुख, नीलकण्ठ और दयालु हैं. सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुण्डमाल पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ श्री शंकरजी को मैं भजता हूं।)
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं । अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ॥
त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं । भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥5॥
(प्रचंड, श्रेष्ठ तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोडों सूर्य के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकरजी को मैं भजता हूं।)
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी । सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ॥
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी । प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥6॥
(कलाओं से परे, कल्याण स्वरूप, प्रलय करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुरासुर के शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालनेवाले हे प्रभो, प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए।)
न यावद् उमानाथपादारविन्दं । भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं । प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥7॥
(जब तक मनुष्य श्रीपार्वतीजी के पति के चरणकमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इहलोक में, न ही परलोक में सुख-शान्ति मिलती है और अनके कष्टों का भी नाश नहीं होता है। अत: हे समस्त जीवों के हृदय में निवास करने वाले प्रभो, प्रसन्न होइए।)
न जानामि योगं जपं नैव पूजां । नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ॥
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं । प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥8॥
(मैं न तो योग जानता हूं, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो, मैं तो सदा-सर्वदा आप को ही नमस्कार करता हूं। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म के दु:ख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दु:खों से रक्षा कीजिए। हे शम्भो, मैं आपको नमस्कार करता हूं।)
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ॥।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥9॥
(जो मनुष्य इस स्तोत्र को भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर शम्भु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।)

आध्यात्मिक जीवन के लिए साधु, संतों की संगत करें
जीवन में संगत का बेहद प्रभाव पड़ता है जैसी संगत हम करते हैं वैसा ही फल हमें मिलता है। जिस प्रकार अच्छी गुणवत्ता के गुलाब की किस्म को कमजोर गुणवत्ता वाली गुलाब की किस्म के पास लगाया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि कमजोर किस्म के गुलाब का परागण उच्च किस्म के गुलाब के साथ हो सके और उनकी गुणवत्ता में निखार आ सके। ठीक इसी तरह कमजोर को बेहतर बनाने का प्रयत्न किया जाता है।
ठीक उसी प्रकार यह सिद्धांत हमारी जिंदगी में भी काम करता है। कहा भी जाता है कि हम जिस तरह के लोगों की संगत में रहते हैं उसी से हमारी पहचान बनती है। इसी तरह अगर हम आध्यात्मिक जीवन में प्रगति चाहते हैं तो हमें साधु,संतों और उन लोगों का साथ हासिल करना चाहिए जो उस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। अगर हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ कुछ समय बिताते हैं जो खुद ध्यान और प्राणायाम करता है तो हम पर उसकी इन आदतों का असर होगा ही। अच्छे लोगों की संगति हमें अच्छे रास्तों पर आगे बढऩे की प्रेरणा देती है। तो आपको अपनी संगति का मूल्यांकन करना चाहिए कि आप कैसी संगति में हैं। यदि आप ऐसे दोस्तों के साथ जुड़े हैं जो आपकी तरक्की में सहायक हैं या जिनके साथ रहते हुए आप नई चीजें सीख पा रहे हैं तो यह आपके लिए अच्छी बात है लेकिन अगर ऐसा नहीं हो रहा है तब आपको चिंता करनी चाहिए।
आप जिन लोगों के साथ रहते हैं उनके व्यवहार के कारण ही आपके बारे में कोई भी धारणा बनाने का काम होता है इसलिए अपनी संगति के प्रति अत्यधिक सावधानी और सतर्कता रखनी चाहिए। जिस तरह किसी भी आईने में व्यक्ति का अक्स नजर आ जाता है उसी तरह दोस्तों से आपके मिजाज का अंदाज हो जाता है। इसलिए युवा अवस्था में संगति बना भी देती है और बिगाड़ भी सकती है। यही वजह है कि अपनी संगति का चयन बहुत ही देखभाल के साथ करना चाहिए।

इस प्रकार करें मां लक्ष्मी को खुश
धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाने से ही हमें सभी सुख और वैभव मिलते हैं। दिपावली के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे बेहतर योग होता है। इस समय किये गये इन उपायों से आप मां लक्ष्मी को खुश कर सकते हैं। इससे आप जीवन में धन समृद्धि के साथ ही सभी सुख पा सकते हैं।
.दीपावली पांच दिन का पर्व होता है तो इन पांचों दिन कम से कम एक दीप जरूर जलांए। इसके साथ ही लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए पहले एक मुठ्ठी चावल रखें फिर उसके उपर दीपक रखें इससे आप पर मां लक्ष्मी की कृपा होगी।
दीपावली के दिन सुबह पूजा के समय पीतल या तांबे के लोटे में शुद्ध जल भर कर,उस में थोड़ी हल्दी डाल कर पूजा में रखें। पूजा के बाद इस जल को पूरे घर में झिड़क दें। इस तरह मां लक्ष्मी की कृपा आप पर सदैव बनी रहेंगी।
दीपावली की रात को पूजा करने के बाद सभी कमरों में शंख बजाना चाहिए इस से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
दीपावली के दिन आप अपनी पत्नी अथवा मां को लाल वस्त्र उपहार में दें मां और पत्नी को पूरा सम्मान दें क्योंकि मां लक्ष्मी भी वहीं कृपा बरसाती हैं जहां घर की लक्ष्मी का सम्मान होता है। दीपावली की रात को कपूर जला कर उसमें शुद्ध रोली डाल दें। फिर उस राख की पुडिया बना कर किसी लाल रूमाल में बांध रख लें। इससे प्रक्रिया को करने से व्यापार में समृद्धि होती है।

कुंडली दोष इस प्रकार होंगे दूर
अगर आपकी कुंडली में किसी प्रकार का दोष है तो शुक्रवार को किए गए कुछ उपाय दोष से उन दोषों को दूर कर सकते हैं। कुंडली में शुक्र अशुभ हो, तो वैवाहिक जीवन में सुख नहीं मिल पाता है। यहां जानिए कुछ ऐसे उपाय जो शुक्रवार को करना चाहिए, जिनसे लक्ष्मी कृपा मिल सकती है और शुक्र के दोष भी दूर हो सकते हैं।
भगवान विष्णु के मंत्र का 108 बार जप करें।मंत्र: ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि। यदि आप चाहे तो भगवान विष्णु के नामों का जप भी कर सकते है।
शुक्र ग्रह के लिए हीरा, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा, दही, सफेद चंदन आदि चीजों का दान भी किया जा सकता है। किसी गरीब व्यक्ति को या किसी मंदिर में दूध का दान करें।
शुक्रवार को किसी विवाहित स्त्री को सुहाग का सामान दान करें। सुहाग का सामान जैसे चूड़ियां, कुमकुम, लाल साड़ी इस उपाय से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है। शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाए। साथ ही ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। मंत्र का जप कम से कम 108 बार करना चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए।

इस प्रकार मिलेगी प्रेम में सफलता
जीवन में प्रेम का भी अहम स्थान होता है पर कई लोगों को यह नहीं मिलता। ऐसे लोगों के लिए यहां प्रस्तुत हैं कुछ उपाय। यह तो सभी जानते हैं कि शरद रितु प्रेम के लिए उत्तम मानी गई है, ऐसे में प्रेम के देवता भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसी समय महारास रचाया था। इस रितु का चंद्रमा आपको मनचाहे प्रेम का वरदान देता प्रतीत होता है। इसलिए प्रेम चाहने वाले यदि यह उपाय करें तो वो सफल अवश्य ही होंगे।
शाम के समय राधा-कृष्ण की उपासना करें।
दोनों को संयुक्त रूप से एक गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें।
मध्य रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करके चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
इसके बाद “ॐ राधावल्लभाय नमः” मंत्र का कम से कम 3 माला जाप करें।
या मधुराष्टक का कम से कम 3 बार पाठ करें।
फिर मनचाहे प्रेम को पाने की प्रार्थना करें।
भगवान को अर्पित की हुई गुलाब की माला को अपने पास सुरक्षित रख लें।
इन उपायों से निश्चित ही मनचाहे प्रेम की प्राप्ति होती है और सभी संबंधों में प्रेम और लगाव बढ़ने लगता है।

आभूषण के संदेश को भी समझें
आभूषण नारी को हमेशा प्रिय रहे हैं। इससे नारी का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। आभूषण सुंदरता बढ़ाने के साथ ही उसे स्वस्थ भी रखते हैं। हर आभूषण् के अंदर एक गुण सन्देश छिपा है। सभी महिलाओं को चाहिये की आभूषण धारण करने के साथ ही आभूषण के अन्तर्गत निहीत अर्थ संन्देश को भी हृदयगम करे, ताकी उस आभूषण नाम सार्थक हो सके|
काजल – शील का जल आंखों में रखें|
नथ – मन को नियन्त्रित रखें, जिससे नाक ऊंची रहे |
टीका – बुराई छोड़ दे |
बिंदी – ध्यान रखें यश का ही टीका लगे|
वंदनी – पति एवं गुरूजनों की वन्दना करें |
कर्ण फूल – कानों से दूसरों की प्रशंसा सुनें |
कण्ठहार – पति के गले का हार बनें |
कडे़ -किसी से कड़ी बात न बोलें|
छल्ले – किसी से छल न करें
करधनी या कमरबंद – सत्कर्मो के लिए हमेशा कमर बाँधकर तैयार रहें|
पायल – सभी बड़ी बूढ़ी औरतों के पाँव ( चरण ) स्पर्श करें|
मेहेंदी – लाज की लाली बनायें रखें|

महिलाओं को राशि के अनुसार दें उपहार
हर राशि की महिला का अपना अलग स्वभाव व पसंद होती है। इसलिए महिलाओं को उनकी पसंद के अनुसार उपहार दिये जाने चाहिये। ऐसे में अगर आप किसी लड़की को उसकी पसंद के कपड़े या फैशन की कोई वस्‍तु देना चाहते हैं, तो उसकी राशि के अनुसार ही दें। इसमें सिर्फ कपड़े ही नहीं अन्य सभी समान भी आते हैं। राशियों के अनुसार महिलाओं की पसंद ऐसी होती है। मेष राशि- मेष राशि वाली महिलाओं में एक खास खूबी होती है। यह किसी भी नए फैशन ट्रेंड को अपनाने में सबसे आगे रहती हैं। फिर बात चाहे नए तरह के बैग खरीदने की हो या फिर दोस्तों के बीच फैशनेबल दिखने की। मेष राशि की महिलाएं नए ट्रेंड को लेकर काफी साहसी भी होती हैं और नए स्टाइल को लेकर इनमें किसी तरह की झिझक नहीं होती है। इस राशि की महिलाएं लाल रंग को पसंद करती हैं और अपने लुक को बेहतर बनाने के लिए चमकदार एसेसरीज को अधिक तवज्जो देती हैं। वृष राशि- इस राशि की महिलाएं ब्रांड और लेबल को लेकर बेहद सजग होती हैं। यह ब्रांडेड और गुणवत्तायुक्त कपड़े खरीदना ही पसंद करती हैं। मिथुन राशि- इस राशि की महिलाएं काफी मजाकिया और प्यार के प्रति संवेदनशील होने के साथ ही अपने अजीबो-गरीब फैशन सेंस के लिए जानी जाती हैं। वह सीजन के साथ बदलते फैशन ट्रेंड को पसंद करती हैं। साथ ही नए तरह के लुक और अलग स्टाईल को भी प्रचलन में लाती हैं और बाद में उन्हें अपना खुद का फैशन बताने लगती हैं। कर्क- कर्क राशि की महिलाएं परंपरागत और आरामदायक वस्त्रों को पसंद करती हैं। रूढ़ीवादी पसंद के बावजूद इस राशि की महिलाएं अपनी त्वचा पर विशेष ध्यान देती हैं। इस राशि की महिलाएं किसी भी ट्रेंड को ज्यादा समय तक नहीं अपनाती हैं और इनकी पसंदीदा एसेसरीज नेकलेस और मोती है। सिंह राशि- इस राशि की महिलाएं लक्जरी को पसंद करती हैं। इनके लिए यह जरूरी नहीं कि कपड़े और एसेसरीज महंगे ही हो, पर वह विशिष्ट जरूर हों। इस राशि की महिलाओं की पसंद काफी अच्छी होती है। कन्या राशि – इस राशि की महिलाएं कभी भी हल्का सा भी मुड़ा हुआ वस्त्र नहीं पहनती हैं। ऐसी महिलाएं रूढ़ीवादी होने के साथ-साथ प्रगतिशील भी होती हैं और इनका फैशन इनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। इस राशि की महिलाएं साधारण, अच्छी फिटिंग और एक से अधिक सीजन तक चलने वाले कपड़ों को तवज्जो देती हैं। तुला-राशि की महिलाएं कपड़ों का चयन करने में थोड़ा समय जरूर लेती हैं, लेकिन उनके सामने फैशन को लेकर कभी भी संकट की स्थिति नहीं होती है। मेकअप की बात करें तो यह हल्का और प्राकृतिक ही होता है। वृश्चिक राशि की महिलाओं में फैशन को लेकर खासा क्रेज होता है। इस राशि की महिलाएं ट्रेंड को पसंद करती हैं। उन्हें पता होता है कि उनके लिए क्या अच्छा है और इनके अंदर दिखावे का डर नहीं होता। यह रूप बदलने में माहिर होती हैं। धनु राशि- की महिलाएं फैशन के बढ़ते प्रचलन की परवाह नहीं करती है। यह फैशन को तभी अपनाती है जब अपने परिवेश में वह उस फैशन को लेकर सहज महसूस करे। धनु महिलाएं मेकअप काफी कम करती हैं और यदा-कदा ही गहनों का प्रयोग करती हैं। इस राशि की महिलाएं साधारण, रूढ़ीमुक्त और निरहंकारी होती हैं। मकर राशि-इस राशिकी महिलाओं के लिए स्टेटस और इमेज काफी महत्वपूर्ण होता है। जब ये काम पर नहीं होती है तो इनका स्टाईल काफी सामान्य होता है। पर बहुत ज्यादा केजुअल भी नहीं। इस राशि की महिलाएं पहनावे को सफलता से जोड़कर देखती हैं। ऐसेसरीज और आभूषणों पर इस राशि की महिलाएं काफी खर्च करती हैं। कुंभ राशि- इस राशि की महिलाएं शॉपिंग मॉल से काफी दूर रहती हैं। इसके बजाए यह सस्ते स्टोर से पारंपरिक चीजें खरीदना पसंद करती हैं। ये फैशन फॉलोअर नहीं होती हैं। वहीं करती हैं। उनका अपना व्यक्तिगत स्टाइल होता है। इन्हें वैसे रंग पसंद है जो हल्का हो और बर्बस ही ध्यान खींचते हों। जैसे फिरोजी नीला, गुलाबी और हरा। मीन राशि और फैशन पानी को कभी भी सीमाएं नहीं पसंद, इसी प्रकार मीन राशि वालों को भी बंदिशें नहीं पसंद। वो हमेशा ग्रेसफुल दिखना चाहती हैं। इस राशि की लड़कियों की एक खासियत यह भी होती है कि ये वही कपड़े पहनती हैं, जिसमें वो कंफर्टेबल महसूस करें।

नवरात्रि में फलाहार का है वैज्ञानिक आधार
नवरात्रि में देवी की उपासना के साथ ही नौ दिनों के उपवास होते हैं इन दिनों फलाहार ही होता है। इन दिनों घर में सादे नमक की जगह सेंधा नमक और गेहूं के आटे की जगह बल्कि सिर्फ कूटू का आटा या सिंघाड़े का आटा खाया जाता है। इसके पीछे धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक आधार भी है।
आयुर्वेद के मुताबिक गेहूं, प्याज़, लहसुन, अदरक जैसी चीज़ें नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करती हैं। वहीं मौसम के बदलने पर हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति काफी कम होती है, जिसकी वजह से शरीर को बीमारियां लगती हैं। ऐसे में इन चीज़ों का सेवन करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। व्रत करने का मतलब है रोज़ के खाने से शरीर पर रोक लगाना। ऐसे में लोग आसानी से पच जाने वाला और पोषक तत्वों से भरा खाना खाते हैं। गेहूं, पाचन क्रिया को धीमा करता है, इसलिए लोग इससे परहेज़ करते हैं। परिवर्तित खाने की जगह फल, सब्जी, जूस और दूध पीना ज्यादा बेहतर माना जाता है।
सेंधा नमक
देखा गया है कि नवरात्रि के समय लोग खाना बनाने में सादे नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं। सेंधा नमक पहाड़ी नमक होता है, जो स्वास्थ्य के साथ व्रत के खाने में शामिल किए जाने वाला सबसे शुद्ध नमक माना जाता है। यह कम खारा और आयोडीन मुक्त होता है। इसमें सोडियम की मात्रा कम, पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा ज़्यादा पाई जाती है, जो कि हार्ट के लिए काफी फायदेमंद होता है।
साबूदाना
इसे हर तरह के व्रत में खाया जा सकता है। साबूदाना एक प्रकार के पौधे से निकाले जाने वाला पदार्थ होता है, जिसमें स्टार्च की मात्रा काफी अधिक होती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और थोड़ा प्रोटीन भी शामिल होता है। साबूदाना शरीर को आवश्यक शक्ति प्रदान करता है। इससे आप साबूदाना खीर, टिक्की या फिर साबूदाना खिचड़ी जैसे कई व्यंजन बना सकते हैं।
कूटू का आटा
कूटू का आटा एक पौधे के सफेद फूल से निकलने वाले बीज को पीसकर तैयार किया जाता है। आमतौर पर लोग इसे व्रत में खाते हैं, क्योंकि न तो यह अनाज है और न ही वनस्पति। यह एक घास परिवार का सदस्य है। कहते हैं कि इस आटे की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ता है। कूटू का आटा ग्लूटन फ्री होने के साथ काफी पौष्टिक भी होता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और विटामिन-बी की मात्रा अधिक होती है। इस आटे में आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे कई मिनरल्स होते हैं, जो कि व्रत के लिए पौष्टिक आहार माने जाते हैं।
सिंघाड़े का आटा
व्रत में पूरा दिन फलाहार खाने के बाद जब रात में भूख लगती है, तो लोग या तो कूटू के आटे की पकौड़ी खाते है या सिंघाड़े के आटे की। असल में यह आटा सूखे पिसे सिंघाड़े से बनता है। इसमें पोटेशियम और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज़्यादा और सोडियम और चिकनाई की मात्रा कम होती है।सिंघाड़ा, एक तरह का फल होता है, जिसमें फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं. व्रत के समय में इसे खाने का मतलब है, शरीर के पोषक तत्वों से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना।
रामदाना
यह फलाहार पोषक तत्वों से भरा है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। व्रत के समय लोग, अनाज की जगह अपने खाने में इसे शामिल कर सकते हैं। इसमें ग्लायसैमिक इंडेक्स कम होता है और यह ग्लूटेन फ्री भी होता है। आप इससे रामदाना चिक्की या लड्डू समेत कई तरह के पकवान बना सकते हैं। कई लोग तो इसे दूध में ऊपर से डालकर खाना पसंद करते हैं।

गुरुवार को न करें ये काम
भारतीय सभ्यता में हर दिन का अलग महत्व है। खासतौर से गुरुवार को तो धर्म का दिन मानते हैं। गुरु को लेकर एक भी मान्यता है कि यह दूसरे ग्रहों के मुकाबले ज्यादा भारी होते है। इसलिए इस दिन कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे शरीर या घर में हल्कापन आता हो क्योंकि गुरु के प्रभाव में आने वाले कारक तत्वों का प्रभाव हल्का हो जाता है. वो काम कौन से हैं, जिन्हें गुरुवार को नहीं करना चाहिए, आप भी जानिये।
ना बाल धोएं ना कटाएं
शास्त्रों के अनुसार महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति और संतान का कारक होता है। इसका मतलब यह है कि गुरु ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में गुरुवार को महिलाएं अगर अपना सिर धोती हैं या बाल कटाती हैं तो इससे बृहस्पति कमजोर होता है और पति व संतान की उन्नति रुक जाती है।
गुरु ग्रह को जीव भी कहा जाता है। जीव यानी कि जीवन। जीवन से तात्पर्य है आयु. गुरुवार को नाखून काटने और शेविंग करने से गुरु ग्रह कमजोर होता है, जिससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उम्र में से दिन कम हो जाता है।
घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोने, कबाड़ घर से बाहर निकालने, घर को धोने या पोछा लगाने से बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर शुभ प्रभाव में कमी आती है।
गुरुवार को नारायण का दिन होता है, ये बात तो ठीक है. पर नारायण तभी प्रसन्न होंगे जब आप उनके साथ उनकी पत्नी यानी कि लक्ष्मी जी की भी पूजा करेंगे। गुरुवार को लक्ष्मी-नारायण दोनों की एक साथ पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं और पति-पत्नी के बीच कभी दूरियां नहीं आतीं। साथ ही धन में भी वृद्ध‍ि होती है।

केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति रहता है परेशान
यदि जन्म कुंडली में चन्द्रमा किसी भी भाव में अकेला बैठा हो, उससे आगे और पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम दोष बनता है। केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा परेशान होता है। उसे हमेशा एक अज्ञात भय रहता है। उसके जीवन काल में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। आर्थिक रूप से ऐसे व्यक्ति कमजोर ही रहते हैं। जीवन में अनेकों बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति खुद को बहुत समझदार समझते हैं। उन्हें लगता है की उनसे अधिक बुद्धिमान व्यक्ति कोई नहीं है। ऐसे व्यक्ति चिड़चिड़े और शक्की स्वभाव के होते हैं। संतान से कष्ट पाते हैं परन्तु दीर्घायु होते हैं। कुछ परिस्थितियों में केमद्रुम योग भंग या निष्क्रिय भी हो जाता है।
जन्म कुंडली में केमद्रुम दोष हो परन्तु चन्द्रमा के ऊपर सभी ग्रहों की दृष्टि हो तो केमद्रुम दोष के दुष्प्रभाव निष्क्रिय हो जाते हैं।-यदि चन्द्रमा शुभस्थान (केंद्र या त्रिकोण) में हो तथा बुद्ध, गुरु एवं शुक्र किसी अन्य भाव में एक साथ हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।-यदि दसवें भाव में उच्च राशि का चन्द्रमा केमद्रुम दोष बना कर बैठा हो परन्तु उस पर गुरु की दृष्टि हो तो भी केमद्रुम दोष भंग माना जायेगा।यदि केंद्र में कहीं भी चन्द्रमा केमद्रुम दोष का निर्माण कर रहा हो परन्तु उस पर सप्तम भाव से बली गुरु की दृष्टि पड़ रही हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।

आईये राहु-मंगल के मिलन से पड़ने वाले प्रभाव को जानें 

जुलाई 2017 से मंगल जल तत्व राशि कर्क में प्रवेश कर चुका है जो उसकी नीच राशि है। वहीं 18 अगस्त, 2017 को राहू कर्क राशि में प्रवेश कर रहा है अत: दोनों का इस राशि में मिलन विश्व में भारी प्राकृतिक आपदा का सूचक है। उसके पूर्व राहू सूर्य के साथ भ्रमण कर रहा है एवं बुध भी गोचर के साथ है। मंगल अग्नि तत्व एवं कर्क राशि जल तत्व राशि है, दोनों एक-दूसरे के शत्रु हैं। जब-जब मंगल-राहू ऐसी राशि में भ्रमण करते हैं तब-तब जल प्रलय, भूकंप, हिंसा, राजनीतिक उथल-पुथल, सरकार व नेताओं एवं सेना के लिए भारी परेशानियों वाला समय होता है।
गोचर में अग्नि तत्व राशि सिंह में सूर्य, बुध-राहू का भ्रमण अशांति का सूचक है। राहू-मंगल की इस युति से आने वाले 60 दिन बहुत ही नाजुक होंगे और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विश्व के उत्तरी भाग में भारी जल प्रलय के कारण तबाही का माहौल बन सकता है। हिमालय के आगे अफगानिस्तान, रूस, चीन, अटलांटिक यूरोप में इसके कारण बड़ी प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ हिंसा, आंदोलन, विमान दुर्घटना, युद्ध जैसा माहौल होगा। राहू की दृष्टि शनि पर होगी जो और ज्यादा प्राकृतिक आपदा, हिंसा, आंदोलन व वृद्ध जैसी स्थिति पैदा करेगी।
भारत की वृषभ लग्न की कुंडली में फिलहाल चतुर्थ भाव में राहू का भ्रमण जनता को असमंजस स्थिति में डाले हुए है। पिछले लेख में राहू की माया के बारे में लिखा था। कुंडली का चतुर्थ स्थान जनता व दशम स्थान राजा का होता है। शनि सप्तम स्थान में भ्रमण कर रहा है और भाग्य, लग्न एवं चतुर्थ स्थान पर दृष्टि कर रहा है। चूंकि शनि भाग्य व दशम स्थान का मालिक भी है अत: भाग्य हानि इतनी नहीं हुई जो आगे जाकर होगी। राहू ने जनता को जकड़ रखा है एवं ऐसा प्रेमजाल फैला चुका है कि किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है लेकिन आने वाले 15 महीनों में भारत में जबरदस्त परिवर्तन देखने को मिलेगा।
देश की आर्थिक स्थिति जैसी दिखाई जा रही है वैसी नहीं होगी एवं जो व्यापार या आर्थिक स्थिति और प्रगति की कल्पना की जा रही है वह शायद राहू कपोल कल्पना साबित कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। 18 अगस्त, 2017 से राहू का कर्क राशि में भ्रमण देश की कुंडली में तीसरे पराक्रम पड़ोस, मित्र स्थान में होगा। पड़ोसी अपनी नापाक हरकतों से ज्यादा परेशान करेगा एवं आतंकवादी घटना व छद्म युद्ध से ज्यादा नुक्सान पहुंचाने का प्रयास करेगा। सरकार, सेना व जनता को बहुत ही सतर्क रहकर कार्य करना होगा एवं किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हमें हर पल एकजुट होकर सामना करना होगा।
आने वाले 60 दिन में पाक या चीन दोनों कोई बड़ी हरकत को अंजाम दे सकते हैं अत: हमें अति सचेत होकर चार गुना तीव्रता से उसका जवाब देने की तैयारी रखनी होगी। देश को एक तरफ आंतरिक और दूसरी तरफ बाहरी दुश्मनों का सामना करना पड़ेगा। देश के उत्तर-पूर्व एवं दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम भाग में भारी वर्षा के कारण जल प्रलय व एवं दुर्घटना होना संभव है।7 अगस्त से 18 अगस्त के मध्य कोई आतंकवादी घटना या सैनिक कार्रवाई की आशंका रहेगी। वहीं शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव के कारण हाहाकार मचा सकता है। भारत हाल में चंद्रमा की महादशा, राहू की अंतर्दशा में शनि की सूक्ष्म दशा में दिनांक 12 जुलाई से 7 अक्तूबर तक तत्पश्चात 24 दिसम्बर तक बुध एवं 25 जनवरी तक केतु की सूक्ष्म दशा में रहेगा जिस कारण देश को चारों ओर से संकट का सामना विशेषकर शत्रु से सावधान रहने की अति आवश्यक सावधानी रखनी पड़ेगी। शायद यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण न होगा कि भारत इस बार दीवाली पाकिस्तान के साथ मनाएगा।
कुल मिलाकर आने वाले 18 महीने राहू के कर्क राशि में भ्रमण के कारण यह कई वरिष्ठ नेताओं, अधिकारियों के निधन का संकेत देता है। वहीं पड़ोसी देशों से युद्ध करने का संकेत भी दे रहा है। कई प्रदेशों में सत्ता परिवर्तन एवं कई नेताओं का जेल भ्रमण का संकेत भी दे रहा है लेकिन शनि का वृश्चिक राशि में भ्रमण कई ऐसे राज खोलने का संकेत भी दे रहा है जिसके कारण देश की जनता आश्चर्यचकित हो जाए। कुल मिलाकर भारत के लिए आगामी 18 महीने तलवार की धार पर चलने के बराबर होंगे।

इन वस्तुओं का दान नहीं करें
सनातन ध्रर्म में दान की प्रथा शुरु से है और यह जीवन में बेहद अहम माना गया है पर इसमें भी
इन वस्तुओं का दान कभी मत करें, बर्बाद हो सकते हैं आपइन वस्तुओं का दान कभी मत करें, बर्बाद हो सकते हैं आपग्रहों की किस स्थिति में कैसा दान कर्म भूलकर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा दान हमें हमेशा हानि ही देता है।
सनातन धर्म में दान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यह मात्र रिवाज़ के लिए नहीं किया जाता, वरन् दान करने के पीछे विभिन्न धार्मिक उद्देश्य बताए गए हैं। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दान से इंद्रिय भोगों के प्रति आसक्ति छूटती है। मन की ग्रंथियां खुलती है जिससे मृत्युकाल में लाभ मिलता है।
जीवन भर किए गए पाप से मुक्त होने के लिए दान ही सबसे सरल और उत्तम माध्यम माना गया है। वेद और पुराणों में दान के महत्व का वर्णन किया गया है। यही कारण है कि हजारों वर्षों पुराने हिन्दू धर्म में आज भी विभिन्न वस्तुओं को दान करने के संस्कार का पालन किया जाता है। आजकल अधिकतर दान कर्म ज्योतिषीय उपायों को मद्देनज़र रख कर किए जाते हैं।
दान का महत्व
ज्योतिषियों द्वारा किसी व्यक्ति विशेष की जन्म पत्रिका का आंकलन करने के बाद, जीवन में सुख, समृद्धि एवं अन्य इच्छाओं की पूर्ति हेतु दान कर्म करने की सलाह दी जाती है। दान किसी वस्तु का, भोजन का, और यहां तक कि महंगे आभूषणों का भी किया जाता है।
जन्म कुण्डली के विभिन्न ग्रहों को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के दान कर्म किए जाते हैं।
जन्म कुण्डली में कुछ ग्रहों को मजबूत एवं दुष्ट ग्रहों को शांत करने के लिए तो हम दान-पुण्य करते ही हैं, लेकिन ग्रहों की कैसी स्थिति में हमें कैसा दान नहीं करना चाहिए, यह भी जानने योग्य बात है।
ऐसा दान ना करें
क्योंकि ग्रहों की स्थिति के विपरीत यदि दान कर्म किया जाए, तो वह और भी बुरा असर देता है। ऐसे में हमारे द्वारा किया गया दान हमें अच्छा फल देने की बजाय, बुरा फल देना आरंभ कर देता है और हमें इस बात की जानकारी भी नहीं होती।
ग्रहों की किस स्थिति में कैसा दान कर्म भूलकर भी नहीं करना चाहिए, हम आज यही आपको बताने जा रहे हैं। ज्योतिष विधा के अनुसार जन्मकुंडली में जो ग्रह उच्च राशि या अपनी स्वयं की राशि में स्थित हों, उनसे सम्बन्धित वस्तुओं का दान व्यक्ति को कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा दान हमें हमेशा हानि ही देता है।
सूर्य ग्रह
सूर्य मेष राशि में होने पर उच्च तथा सिंह राशि में होने पर अपनी स्वराशि का होता है। यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य इन्हीं दो राशियों में से किसी एक में हो तो उसे लाल या गुलाबी रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा गुड़, आटा, गेहूं, तांबा आदि दान नहीं करना चाहिए। सूर्य की ऐसी स्थिति में ऐसे जातक को नमक कम करके, मीठे का सेवन अधिक करना चाहिए।
चंद्र ग्रह
चन्द्र वृष राशि में उच्च तथा कर्क राशि में अपनी राशि का होता है। यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में चंद्र ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे खाद्य पदार्थों में दूध, चावल एवं आभूषणों में चांदी एवं मोती का दान नहीं करना चाहिए। ऐसे जातक के लिए माता या अपने से बड़ी किसी भी स्त्री से दुर्व्यवहार करना हानिकारक हो सकता है। किसी स्त्री का अपमान करने पर ऐसे जातक मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं।
मानसिक तनाव हो सकता है
जिस जातक के लिए चंद्र ग्रह स्वराशि हो उसे किसी नल, टयूबवेल, कुआं, तालाब अथवा प्याऊ निर्माण में कभी आर्थिक रूप से सहयोग नहीं करना चाहिए। यह उस जातक के लिए आर्थिक रूप से हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
मंगल ग्रह
मंगल मेष या वृश्चिक राशि में हो तो स्वराशि का तथा मकर राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी कुण्डली में मंगल ग्रह ऐसी स्थिति में है तो, मसूर की दाल, मिष्ठान अथवा अन्य किसी मीठे खाद्य पदार्थ का दान ना करें।
मीठे खाद्य पदार्थ का दान निषेध
आपके घर यदि मेहमान आए हों तो उन्हें कभी सौंफ खाने को न दें अन्यथा वह व्यक्ति कभी किसी अवसर पर आपके खिलाफ ही कटु वचनों का प्रयोग करेगा। यदि मंगल ग्रह के प्रकोप से बचना चाहते हैं तो किसी भी प्रकार का बासी भोजन न तो स्वयं खाएं और न ही किसी अन्य को खाने के लिए दें।
बुध ग्रह
बुध मिथुन राशि में तो स्वराशि तथा कन्या राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि किसी जातक की जन्मपत्रिका में बुध उपरोक्त वर्णित किसी स्थिति में है तो, उसे हरे रंग के पदार्थ और वस्तुओं का दान कभी नहीं करना चाहिए। हरे रंग के वस्त्र, वस्तु और यहां तक कि हरे रंग के खाद्य पदार्थों का दान में ऐसे जातक के लिए निषेध है। इसके अलावा इस जातक को न तो घर में मछलियां पालनी चाहिए और न ही स्वयं कभी मछलियों को कभी दाना डालना चाहिए।
बृहस्पति ग्रह
बृहस्पति जब धनु या मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा कर्क राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। जिस जातक की कुण्डली में बृहस्पति ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे पीले रंग के पदार्थ नहीं करना चाहिए। सोना, पीतल, केसर, धार्मिक साहित्य या वस्तुओं आदि का दान नहीं करना चाहिए। इन वस्तुओं का दान करने से समाज में सम्मान कम होता है।
शुक्र ग्रह
शुक्र ग्रह वृष या तुला राशि में हो स्वराशि का एवं मीन राशि में हो तो उच्च भाव का होता है। जिस जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह की ऐसी स्थिति हो, तो उसे श्वेत रंग के सुगन्धित पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए अन्यथा व्यक्ति के भौतिक सुखों में कमी आने लगती है। इसके अलावा नई खरीदी गई वस्तुओं का एवं दही, मिश्री, मक्खन, शुद्ध घी, इलायची आदि का दान भी नहीं करना चाहिए।
शनि ग्रह
शनि यदि मकर या कुम्भ राशि में हो तो स्वगृही तथा तुला राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि आपकी कुण्डली में शनि की स्थिति है तो आपको काले रंग के पदार्थों का दान कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लोहा, लकड़ी और फर्नीचर, तेल या तैलीय सामग्री, बिल्डिंग मैटीरियल आदि का दान नहीं करना चाहिए।
काला रंग
ऐसे जातक को अपने घर में काले रंग का कोई पशु जैसे कि भैंस अथवा काले रंग की गाय, काला कुत्ता आदि नहीं पालना चाहिए। ऐसा करने से जातक की निजी एवं सामाजिक दोनों रूप से हानि हो सकती है।
राहु ग्रह
राहु यदि कन्या राशि में हो तो स्वराशि का तथा वृष एवं मिथुन राशि में हो तो उच्च का होता है। जिस जातक की कुण्डली इसमें से किसी भी एक स्थिति का योग बने, तो ऐसे जातक को नीले, भूरे रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अन्न का अनादर करने से परहेज करना चाहिए। जब भी ये खाना खाने बैठें, तो उतना ही लें जितनी भूख हो, थाली में जूठन छोड़ना इन्हें भारी पड़ सकता है।
केतु ग्रह
केतु यदि मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा वृश्चिक या फिर धनु राशि में हो तो उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी कुण्डली में केतु उपरोक्त स्थिति में है तो आपको घर में कभी पक्षी नहीं पालना चाहिए, अन्यथा धन व्यर्थ के कामों में बर्बाद होता रहेगा। इसके अलावा भूरे, चित्र-विचित्र रंग के वस्त्र, कम्बल, तिल या तिल से निर्मित पदार्थ आदि का दान नहीं करना चाहिए।