ज्योतिष विविध

चन्द्रमा से बनते हैं तीन प्रकार के शुभ योग
चन्द्रमा पृथ्वी पर सबसे ज्यादा असर डालने वाला ग्रह है। इसका सीधा असर व्यक्ति के मन मानसिक स्थास्थ्य और संस्कारों पर पड़ता है, इसलिए चन्द्रमा से बनने वाले एक एक योग इतने ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। चन्द्रमा से तीन प्रकार के शुभ योग बनते हैं। अनफा , सुनफा और दुरधरा और एक अशुभ योग भी बनता है। केमद्रुम कुंडली में केमद्रुम योग हो तो बहुत सारे शुभ योग निष्फल हो जाते हैं। यह व्यक्ति को मानसिक पीड़ा और दरिद्रता देता है।
कैसे बनता है केमद्रुम योग और इसका प्रभाव क्या होता है?
चन्द्रमा के दोनों तरफ कोई ग्रह न हो
तथा उस पर किसी ग्रह की दृष्टि न हो तो , केमद्रुम योग बन जाता है
ऐसी दशा में व्यक्ति को मानसिक रोग या मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है
कभी कभी मिर्गी के दौरे जैसी समस्या भी हो जाती है
व्यक्ति को दरिद्रता का सामना भी करना पड़ता है
धन को लेकर खूब उतार चढ़ाव होते हैं
इसके कारण व्यक्ति को माता का सुख नहीं मिलता
केमद्रुम योग कर्क , वृश्चिक और मीन लग्न में ज्यादा ख़राब होता है
कब केमद्रुम योग भंग हो जाता है?
जब चन्द्रमा से अष्टम या छठवे भाव में शुभ ग्रह हों
जब कुंडली में शुभ ग्रह मजबूत हों
जब केंद्र में केवल शुभ ग्रह हों
जब बृहस्पति केंद्र में हो
जब शुक्ल पक्ष में रात्रि का या कृष्ण पक्ष में दिन का जन्म हो
केमद्रुम योग से बचने के उपाय क्या है?
नित्य प्रातः माता के चरण स्पर्श करें
अगर माँ न हों तो माता सामान स्त्री के चरण स्पर्श करें
सोमवार को दूध, चावल या चीनी का दान करें
शरीर पर चांदी जरूर धारण करें
नित्य सायं “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का जाप करें
हर महीने में एक बार शिवलिंग पर सफ़ेद चन्दन लगाएं और जल चढ़ाएं
शिव जी की भक्ति से केमद्रुम योग निश्चित भंग हो जाता है।

ईशान दिशा में होता है देवी देवताओं का वास
सभी दिशाओं में सबसे उत्तम है ईशान दिशा. ईशान दिशा सबसे शुभ मानी गई है। ईशान में सभी देवी और देवताओं का वास होता है। पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती हैं उस स्थान को ईशान दिशा कहते हैं। वास्तु अनुसार घर में इस स्थान को ईशान कोण कहते हैं। भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है। भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा में होता है, इसीलिए इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा के स्वामी ग्रह बृहस्पति और केतु माने गए हैं।
घर, शहर और शरीर का ईशान हिस्सा सबसे पवित्र होता है इसलिए इसे साफ-स्वच्छ और खाली रखा जाना चाहिए। यहां जल की स्थापना की जाती है जैसे कुआं, बोरिंग, मटका या फिर पीने के पानी का स्थान। इसके अलावा इस स्थान को पूजा का स्थान भी बनाया जा सकता है। घर के मुख्य द्वार का इस दिशा में होना वास्तु की दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है।
इस स्थान पर कूड़ा-करकट रखना, स्टोर, टॉयलेट, किचन वगैरह बनाना, लोहे का कोई भारी सामान रखना वर्जित है। इससे धन-संपत्ति का नाश और दुर्भाग्य का निर्माण होता है। ऐसा करने से प्रगति रुख जाती है।
पूर्व: इस दिशा में इस दिशा में दरवाजे पर मंगलकारी तोरण लगाना शुभ होता है। गृहस्वामी की लंबी उम्र व संतान सुख के लिए घर के प्रवेश द्वार व खिड़की का इस दिशा में होना शुभ माना जाता है।
आग्नेय: पूर्व और दक्षिण के बीच की दिशा को आग्नेय कोण कहते हैं। इस दिशा में किचनस्टैंड, गैस, बॉयलर, ट्रांसफॉर्मर आदि होना चाहिए।
दक्षिण: दक्षिण दिशा में किसी भी प्रकार का खुलापन, शौचालय आदि नहीं होना चाहिए। इस दिशा की भूमि भी तुलनात्मक रूप से ऊंची होना चाहिए। इस दिशा की भूमि पर भार रखने से गृहस्वामी सुखी, समृद्ध व निरोगी होता है। धन को भी इसी दिशा में रखने पर उसमें बढ़ोतरी होती है।
नैऋत्य: दक्षिण-पश्चिम के बीच को नैऋत्य दिशा कहते हैं। इस दिशा में खुलापन अर्थात खिड़की, दरवाजे बिल्कुल ही नहीं होना चाहिए। गृहस्वामी का कमरा इस दिशा में होना चाहिए. कैश काउंटर, मशीनें आदि आप इस दिशा में रख सकते हैं।
पश्चिम: इस दिशा की भूमि का तुलनात्मक रूप से ऊंचा होना आपकी सफलता व कीर्ति के लिए शुभ संकेत है। आपका रसोईघर या टॉयलेट इस दिशा रख सकते हैं। दोनों एक साथ नहीं हो, यह ध्यान रखें।
वायव्य: उत्तर-पश्चिम के बीच वायव्य दिशा होती है। यदि आपके घर में नौकर है तो उसका कमरा भी इसी दिशा में होना चाहिए। इस दिशा में आपका बेडरूम, गैरेज, गौशाला आदि होना चाहिए।
उत्तर: इस दिशा में घर के सबसे ज्यादा खिड़की और दरवाजे होना चाहिए। घर की बालकनी व वॉश बेसिन भी इसी दिशा में होना चाहिए। इस दिशा में यदि वास्तुदोष होने पर धन की हानि व करियर में बाधाएं आती हैं।

ए अक्षर वाले होते हैं प्रभावशाली
No Imageआपने कई बार ज्योतिषशास्त्र और हस्तरेखा विज्ञान के बारे में पढ़ा-सुना होगा लेकिन क्या कभी आपने अपने नाम पर गौर किया है? कई प्रसिद्ध अभिनेताओं, लेखकों और संगीतकारों ने सफलता पाने के लिए अपना नाम बदला। हर व्यक्ति पर उसके नाम का भी प्रभाव जरूर पड़ता है क्योंकि हर अक्षर की अपनी ऊर्जा और उससे जुड़े गुण होते हैं।
आपका नाम किस अक्षर से शुरू होता है, इसका आपके स्वभाव और व्यक्तित्व के बारे में काफी कुछ पता चलता है। कुछ अक्षरों को प्रभावशाली माना जाता है जैसे- ए, जे, ओ और एस. आइए जानते हैं जिन लोगों का नाम एक से शुरू होता है, उनका स्वभाव और व्यक्तित्व कैसा होता है।
अंकज्योतिष में अक्षर ए को नंबर 1 से जोड़कर देखा जाता है। ये काफी प्रभावशाली शख्सियत के मालिक होते हैं। ये दूसरों के सामने अपने मनमुताबिक अपनी छवि गढ़ने में सक्षम होते हैं।
ए अक्षर सबसे प्रभावशाली अक्षर माना जाता है और अगर आपका नाम इसी अक्षर से शुरू होते है तो इसका मतलब है कि आप काफी दृढ़ और साहसी किस्म के व्यक्ति हैं। आपके अंदर आत्मविश्वास कूट-कूटकर भरा होता है और आप अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना पसंद करते हैं।
ए अक्षर से नाम वाले लोग जिंदगी में हर जगह आगे रहने की इच्छा रखते हैं। ये बहुत ही महात्वाकांक्षी होते हैं और नेतृत्व करना इन्हें पसंद होता है। ए अक्षर कई बार एग्रेसिव, एडवेंचरस का भी प्रतीक होता है।
ए अक्षर नाम वाले लोग काफी इंटेलिजेंट, स्मार्ट होते हैं और इनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी अच्छा होता है। आप व्यावहारिक सोच वाले व्यक्ति हैं, इसलिए आपके निर्णय अधिकतर सही साबित होते हैं।
ए अक्षर से नाम वाले कम रोमांटिक होते हैं। इन्हें सीरियस रिलेशनशिप पसंद होती हैं और ये जिस शख्स से प्यार करते हैं, उसे हमेशा खुश रखने की कोशिश करते हैं।
आप अपने लिए जो भी लक्ष्य निर्धारित करते हैं, उसे पाकर रहते हैं। आप थोड़े से बेसब्र होते हैं और आपके अंदर धैर्य की थोड़ी सी कमी होती है। अगर लोग आपके सामने उदारता और विनम्रता से पेश आएं तो भी आप बहुत तेजी से रिऐक्ट नहीं करते हैं।

अग्नि तत्व से जुड़ीं राशियां की ये हैं खासियत
प्रत्येक राशि के जातकों की अपनी खासियतें होती हैं। किस राशि में कौन सा तत्व है वह इसे अहम बनाता है।
ज्योतिष में तीन राशियां अग्नि तत्व की राशियां मानी जाती हैं। ये राशियां हैं – मेष सिंह और धनु। इन राशियों के अंदर ऊर्जा और अग्नि काफी मात्रा में होती है। इन राशियों के लिए सूर्य सबसे महत्वपूर्ण होता है। ये राशियां साहस नेतृत्व और क्रोध की राशियां मानी जाती हैं।
अग्नि तत्व की पहली राशि – मेष।
इस राशि का स्वामी मंगल है।
सूर्य की सर्वाधिक प्रिय राशि है।
इस राशि में ऊर्जा, साहस, नयापन और चंचलता पायी जाती है।
इस राशी की सबसे बड़ी कमजोरी है – अस्थिर दिमाग।
इनको सलाह लेकर एक मोती पहनना चाहिए।
सूर्य की उपासना जरूर करनी चाहिए।
अग्नि तत्व की दूसरी राशि – सिंह।
इस राशि का स्वामी स्वयं सूर्य है।
इस राशि को अग्नि तत्व की प्रमुख राशि माना जाता है।
इस राशि को नेतृत्व, साहस, संघर्ष और राजनीति की राशि माना जाता है।
इस राशि के लोग अक्सर समाज नेतृत्व करते हैं।
इस राशि की सबसे बड़ी कमजोरी है – अतिविश्वास।
इनको सलाह लेकर एक मूंगा धारण करना चाहिए।
इस राशि के लोगों को गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।
अग्नि तत्व की तीसरी राशि – धनु।
इस राशि का स्वामी बृहस्पति है।
यहाँ सूर्य व्यक्ति को भाग्यवान बनाता है।
इस राशि के पास साहस, ज्ञान, गणना और नेतृत्व का गुण होता है।
इस राशि के लोग अक्सर सेना या पुलिस में देखे जाते हैं।
इनकी सबसे बड़ी कमजोरी है-वाणी पर नियंत्रण न रखना।
इस राशि के लोगों को सलाह लेकर माणिक्य धारण करना चाहिए।
इस राशि के लोगों को भगवान् सूर्य की उपासना अवश्य करनी चाहिए।

कर्क राशि के लोग होते हैं सबसे बेहतर जीवनसाथी
कर्क राशि के लोगो के लिए भावनात्मक सुरक्षा बहुत मायने रखती है। प्यार इनके लिए सब चीज से बढ़ कर है। अपने साथी का ख्याल रखना ऐसे लोगों की सबसे बड़ी खासियत है। जीवन साथी आपको ढेर सारा प्रेम करे, आपके नाजो-नखरे उठाए, ऐसा कौन नहीं चाहता। जो आपके लिए हमेशा समर्पित रहे और समर्थन करे तो हम आपको बता रहे हैं उस राशि के बारे में जो आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। साथी का ख्याल रखना ऐसे लोगों की सबसे बड़ी खासियत है।
कर्क राशि के लोगो के लिए भावनात्मक सुरक्षा बहुत मायने रखती है। प्यार इनके लिए सब चीज से बढ़ कर है। ये लोग आपके साथ अपने संबंधों को हमेशा ही सुरक्षित रखेंगे।
प्यार की चाहत इन्हें भावुक बना देती है। किसी बात की परवाह किए बगैर ये आपको अपने भावनाएं जाहिर कर देते हैं। ऐसे में अगर ये आपके सामने रो दें तो कोई बड़ी बात नहीं है।
जो भी लोग इनसे सहानुभूति रखते हैं और आसपास रहते हैं, उनके प्रति इनका लगाव बहुत ज्यादा होता है। उन लोगों के लिए बड़े से बड़ा काम करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
किसी एक खास की भी कमी इनको बहुत परेशान कर देती है। अगर पार्टनर कहीं दूर हो तो उसे को बहुत मिस करते हैं और मिलने के लिए कुछ भी कर जाते हैं।
अपने आसपास के लोगो के लिए बड़े निष्ठावान होते हैं। इनकी लगन और दूसरों के लिए प्रेमभाव इन्हें ज्यादा संवेदनशील बनाता है।
इन्हें जब भी किसी से प्यार होता है तो ये बड़े ही सौम्यता और शालीनता के साथ अपने प्रेम का इजहार कर देते हैं। खूबसूरत और मनमोहक प्रस्ताव इनकी खासियत है। ढेर सारे उपहार और साथी की बढ़ाई कर ये अपना प्यार बखूबी जताते हैं। साथी को रोमांटिक सरप्राइज देना इन्हें बड़ा पसंद है। ये आपको हमेशा सिर आंखों पर बिठाए रखेंगे।

स्त्री के पांव भी बताते हैं पति का भविष्य
No Imageकहते हैं पति का भाग्य पत्नी से जुड़ा होता है। मनुष्य के हाव-भाव, चेहरे और शारीरिक बनावट के आधार पर जीवन के कई रहस्य सामने आ सकते हैं। सामुद्रिक ज्योतिश शास्त्र के अनुसार स्त्री के पांव उसके पति के भविष्य के बारे में भी काफी कुछ बताते हैं।
दरअसल हर स्त्री के पैर में कुछ खास निशान होते हैं, जो उसके पति के उज्जवल भविष्य का संकेत देते हैं। इसके अलावा पैरों का आकार भी ये बताता है कि संबंधित स्त्री का दांपत्य जीवन कैसा रहेगा। ऐसे भी पुराणों के अनुसार पति-पत्नी को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। इसी बात को आधार बनाकर यह बताया गया है कि स्त्री हो या पुरुष, उनके शरीर पर कुछ ऐसे निशान होते हैं जो उनके जीवनसाथी से जुड़े होते हैं।
चक्र, ध्वज
शास्त्र के अनुसार, अगर किसी स्त्री के पांव के तलवों पर चक्र, ध्वज या स्वास्तिक का निशान होता है तो उस संबंधित स्त्री से विवाह करने वाले पुरुष को राज सुख प्राप्त होता है। वह राजा की तरह जीवन व्यतीत करता है और उसकी पत्नी को रानी का सम्मान प्राप्त होता है।
पैर से जाती रेखा
जिस स्त्री के पैर के तलवों के गद्देदार हिस्से पर कोई रेखा पैर की उंगुलियों की तरफ ऊपर जा रही होती है, तो यह उस स्त्री के पति के लिए काफी शुभ कहलाता है। ऐसी स्त्री पति के प्रति पूर्णतः समर्पित होती है। उन्हें जीवन में सफलता और खुशी प्राप्त होती है।
तर्जनी हो बाकी उंगुलियों से बड़ी
शास्त्र में बताया गया है कि यदि किसी स्त्री के पांव की दूसरी उंगुली, जिसे तर्जनी भी कहा जाता है, अन्य उंगुलियों से बड़ी होती है तो ऐसी स्त्री अपने पति के साथ कंधे से कंधे मिलाकर साथ चलने में विश्वास करती है। विपरीत विचारों के चलते आपसी सामंजस्य बनाने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ सकता है।
अगर ये उंगली न करें जमीन को स्पर्श
शास्त्र के अनुसार, अगर चलते समय स्त्री के पैर की कनिष्ठिका और अनामिका उंगुली जमीन को स्पर्श नहीं करती तो यह कम उम्र में विधवा हो जाने का संकेत हो सकता है।
अगर कमल या छत्र का निशान हो
अगर किसी स्त्री के पैर के तलवों पर कमल या छत्र का निशान बना होता है तो, यह इस बात का संकेत है कि संबंधित स्त्री का पति राजनीति के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेगा और उसे समाज में मान-सम्मान प्राप्त होने के साथ ही हमेशा प्रसिद्धि व समृद्धि का साथ मिलेगा।
ये बताती है उंगली की लंबाई
अगर अनामिका उंगुली की लंबाई, अंगूठे और तर्जनी उंगुली से अधिक बड़ी है तो यह इस बात की ओर इशारा करता है कि वह स्त्री अपने पति के लिए चिंता का सदैव कारण बनी रह सकती है।
अनामिका उंगुली की लंबाई
यदि किसी स्त्री के पैर की मध्यमा और अनामिका उंगुली की लंबाई लगभग समान होती है तो उसके पति की आर्थिक स्थिति को लेकर हमेशा समस्या बनी रह सकती है। हालांकि ऐसी स्त्री की अपने ससुराल में सभी से अच्छी बनती है, लेकिन पति के साथ संबंध हमेशा खटास से भरे रहते हैं।
एड़ी
शास्त्र में बताया गया है कि अगर स्त्री के पैरों की एड़ी गोल, कोमल और आकर्षक होती है तो ऐसी स्त्री को चकाचौंध से भरी जीवनशैली प्राप्त होती है। इसके विपरीत अगर तलवा मोटा और कड़ा है तो यह संघर्षों की ओर इशारा करता है।
रेखाएं
अगर पैरों के तलवों पर बनी रेखाएं एकदम स्पष्ट और बिना कटी-फटी होती हैं तो यह इस बात की ओर इशारा करता है कि व्यक्ति का जीवन बिना किसी संघर्ष और व्यवधान के साथ चलता रहेगा।

इस राशि के लोग बनाते हैं मेहनत से किस्मत
कई लोग अपनी नौकरी या व्यवसाय को लेकर बहुत मेहनती होते हैं। ये ऐसे लोग होते हैं जो अपनी मेहनत के बल पर बहुत कामयाब होते हैं और बहुत पैसा कमाते हैं। क्या आप भी ऐसे हैं। जिन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन ये मेहनत ही इन्हें आगे चलकर सितारा बना देती है। आइए जानते हैं कौन सी राशि वाले हैं ये लोग?
अगर आप किसी ऐसे शख्स को ढूंढ रहे हैं, जो पूरी लगन से आपका काम करे तो इस राशि के जातक आपकी खोज खत्म कर सकते हैं। दअरसल, हम बात कर रहे हैं वृषभ राशि वाले लोगों की।
ये बहुत तेज गति से काम नहीं करते हैं पर ये वफादार, भरोसेमंद और मेहनती कार्यकर्ता होते हैं, जिनके अपने टीम में होने से आप सहुलियत महसूस करेंगे क्योंकि ये काफी सहयोगात्मक होते हैं।
ये बहुत व्यावहारिक है और धरती से जुड़े इंसान हैं, और कल्पना की उड़ाने भरना इन्हे पसंद नहीं हैं। इनका सारा काम जमीन पर होता है। ये ऐसे लोग होते हैं जो केवल बातें ही नहीं करते काम करके दिखाते हैं।
ये किसी भी कंपनी की सेवा के लिए उपयुक्त रहते हैं, यहां तक कि ये अपनी स्वयं की कंपनी बना सकते हैं।
यदि आपके किसी कार्य को पूरा करने की समय सीमा आ गई हैं तो काम पूरा करवाने के लिए आप वृषभ राशि के लोगों पर भरोसा कर सकते हैं।
जब इन्हें जिम्मेदारी दे दी जाती हैं तो ये पूरी लगन से निभाते हैं और काम को पूरा करने में जी-जान लगा देते हैं।
ये काम की काम के बोझ की परवाह किए बिना धैर्य के साथ कार्यभार संभालते हैं। यह विशेषताएं सूर्य राशि के आधार पर बताई गई हैं। यदि किसी जातक का जन्म 20 अप्रैल से 20 मई के बीच हुआ है तो उसी राशि वृषभ होगी।

बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक के लिए करें यह उपाय
बोर्ड परीक्षाएं शुरु होने को हैं। सभी छात्र बेहतर भविष्य के लिए बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छे अंक चाहते हैं और इसके लिए प्रयास भी करते हैं पर कई बार देखने में आता है कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिलते हैं। ऐसे में कुछ आसान उपायों से आप बेहतर अंक हासिल कर सकेंगे। वहीं कुछ भावुक छात्रों पर तो पढ़ाई का इतना दबाव होता है की वह तनाव में रहने लगते हैं और बीमार भी हो जाते हैं। इस विषय में ज्योतिष विद्वान कहते हैं की जब राहु कर्क और शनि धनु में मंदभाग्‍य चल रहे हों तो चन्द्रमा अशुभ फल देता है, जिससे छात्र पीड़ित हो जाता है।
वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो परीक्षा जैसे जैसे नजदीक आती है। तनाव के कारण होने वाला स्ट्रैस हारमोन बनने लगता है। जिससे विद्यार्थियों की नींद उड़ जाती है और वह परेशान रहने लगते हैं। ऐसे में छात्रों को 24 घण्टों में से कम से कम 7 घण्टे नींद और 8 घंटे पढ़ाई अवश्य करनी चाहिए पर ऐसा हो नहीं पाता, जिस वजह से उनके तन और मन को पूर्णता आराम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य में गिरावट आने लगती है। जिसका प्रभाव स्मरण-शक्ति पर पड़ता है और दिमाग व हार्मोन के असंतुलित होने से शरीर में कोलोस्ट्रोल और थाइरॉइड बढ़ने लगता है। बच्चों में मोटापा, ब्लड प्रैशर और दिल की बिमारियों का होना आम हो गया है। भरपूर नींद के साथ व्यायाम और योग करना चाहिए।
करें ये उपाय। शनिवार के दिन शनि और राहू की शुभता में बढ़ौतरी के लिए उनकी पूजा करें।
पढ़ाई में मन लगा रहेगा, इसके लिए समय-समय पर पानी पीते रहें, इससे चन्द्रमा मजबूत होता है।
पढ़ाई करने का स्थान साफ रखें, इधर-उधर कॉपी-किताबें बिखेर कर न रखें। इससे सकारात्मकता का नाश होता है। एकाग्रता नहीं बन पाती। पढ़ाई करने की मेज पर मोर पंख लगा कर रखें, ध्यान में वृद्धि होगी। जिस विषय में कमजोर हैं, गुरुवार के दिन उस किताब में मोर पंख रखें। देर रात तक पढ़ाई करने की बजाय ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पढ़ें। इससे याद किया पाठ नहीं भूलेंगे।

हस्त रेखाओं में छुपा है जीवन का रहस्य
हस्त रेखाओं बताती हैं कि आपकी आयु कितनी है आपके जीवन में क्या-क्या परेशानी आएगीं। शास्त्रों में कहा गया है कि जीवन समुद्र के समान जीवन अथाह सागर है। इसमें जो जितना पारंगत होता है, वो उतना ही जान पाता है। हाथ की रेखाएं सदैव एक समान नहीं रहतीं। वह बनती-बिगड़ती रहती हैं। अत: भविष्य कथन में परिवर्तन आता रहता है। स्वच्छ सीधी रेखाएं जहां उत्तम स्वास्थ्य को दर्शाती हैं, तो वहीं प्रगति में भी सहायक मानी जाती हैं। अस्त-व्यस्त, कटी-टूटी रेखाएं हो तो अस्वस्थ्य और तरक्की में बाधक रहती हैं।
बुध रेखा हथेली में किसी भी स्थान से निकल सकती है। इसकी सबसे अच्छी स्थिति यह मानी गई है कि बुध रेखा की स्थिति भाग्य रेखा और जीवन रेखा से जितनी अधिक दूर हो उतनी ही शुभ फलदायक होती है। बुध रेखा कहीं से भी जाए इसका अंत कनिष्ठका अंगुली पर ही होता है। यदि किसी भी हथेली में यह रेखा है परंतु जीवन रेखा से पर्याप्त दूर है, साथ ही मणिबंध विघ्नरहित है तो वह व्यक्ति निश्चित रूप से दीर्घायु होगा। अशुभ चिन्हों से मुव्त बुध रेखा वाला व्यव्ति पाचन शव्ति का धनी और स्वस्थ, सबल गुर्दों का स्वामी होता है।
निर्दोष बुध रेखा के साथ-साथ यदि हथेली में हृदय, मस्तिष्क और भाग्य रेखाएं निर्दोष रूप में विद्यमान हों, तो ऐसी हथेली वाली बुध रेखा व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, आरोग्य और जीवन शव्ति की वृद्धि करती है। यदि बुध रेखा टूटी, छिन्न-भिन्न टेढ़ी-मेढ़ी और मार्ग से हटी हुई हो तो समझना चाहिए कि ऐसा व्यव्ति उदर विकारों से ग्रस्त होगा। पाचन शव्ति की कमी स्नायु तंत्र में अतिप्रम जोड़ों का दर्द अन्य प्रकार के वात-विकार, मानसिक व्याधियों की आशंका और दुर्बलता क्षीणता जैसे रोग होते हैं। बुध रेखा अशुभ मानी जाती है। जन्म लग्न में भी बुध नीच का या शत्रु मित्रहोगा। बुध रेखा का लहरदार होना यह संकेत देता है कि जातक को लीवर संबंधित रोग होगा। लहरदार या जंजीरदार रेखा टूटी, अस्त-व्यस्त हो तो वह मंदबुद्धि, आलसी, निकम्मे, दुविधाग्रस्त तथा कार्य क्षेत्र में पिछड़े हुए होते हैं।
अपने दैनिक जीवन के कार्यकलाप, व्यवसाय, आगामी योजना और अन्य व्यावहारिक क्षेत्रों में भी ऐसे लोग प्राय अस्थिर मन, अनिश्चित और आत्मविश्वास से रहित होते हैं। ये कोई भी कार्य करें सफलता की उम्मीद बहुत कम कर पाते हैं। ऐसे जातक आशंका में रहते हैं। यदि बुध रेखा ऊपर अंगुलियों की ओर, बुध पर्वत की ओर अग्रसर है और उसके मार्ग में कोई बिंदु दिख रहा है, साथ ही किसी पर्वत पर विभिन्न रेखाओं का चप्रव्यूह जैसा दिखाई दे रहा है तो यह निश्चित है कि वह अवश्य ही अस्वस्थ्ता के दौर से गुजर रहा है अथवा कोई रोग-विकार इसे शीघ्र होगा। बुध रेखा पर कहीं भी द्वीप का चिन्ह होना यह तथ्य प्रकट करता है कि इस जातक को आयु रेखा से निर्दिष्ट व्यय-प्रम में स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं पैदा करती हैं। बुध पर्वत तक पहुंचने वाली निर्दोश बुध रेखा व्यव्ति की लंबी आयु का वरदान होती है। यदि यह रेखा चंद्र पर्वत से प्रारंभ हो तो मनुष्य अपने जीवन में कई यात्राएं करता है।

इसलिए चढ़ाए जाते हैं नारियल और नींबू
आदिकाल से ही दुनिया के लगभग सभी धर्मों में बलि देने की प्रथा मौजूद रही है हालांकि ईश्वर भाव का भूखा होता हैं। आजतक किसी ने भगवान को कभी किसी वस्तु का उपभोग करते हुए नहीं देखा है। भारत में भी कई जगहों पर देवी देवताओं को जानवरों की बलि दी जाती रही है। परन्तु क्या आप जानते हैं कि बलि क्यों दी जाती हैं? ऐसा नहीं है कि बलि देने से भगवान प्रसन्न होते हैं न ही भगवान उस बलि के जानवर का उपभोग करेंगे। इसका मूल कारण तंत्र में छिपा हुआ है। इस प्रथा को समझने के लिए सबसे पहले हमें तंत्रशक्ति का अध्ययन करना होगा क्योंकि बलि की शुरुआत तंत्र में ही हुई है। हर देवी-देवता के लिए अलग-अलग ध्वनियां विकसित की गई, उनके साथ कुछ विशेष विधि-विधानों को जोड़ा, उन्हें ऊर्जा से परिपूर्ण करने के लिए कुछ प्रयोग किए।
तंत्र के अनुसार एक ऊर्जा को दूसरी ऊर्जा को बदला जा सकता है और उससे मनमाना काम लिया जा सकता है। ऊर्जा आपको किसी से भी मिल सकती है, चाहे वो एक नींबू हो या जानवर। इनकी बलि देकर इनकी जीवन ऊर्जा को मुक्त कर दिया जाता है और फिर उसी ऊर्जा को नियंत्रित कर उससे मनचाहा कार्य किया जा सकता है। मां काली तथा भैरव के मंदिरों में दी जाने वाली बलि इसी का उदाहरण है। वहां जीवों की ऊर्जा को मुक्त कर उसे नियंत्रित किया जाता है और उससे तांत्रिक शक्तियॉ प्राप्त की जाती है। परन्तु इस तरह करने में सबसे बड़ी बाधा यह है कि जब तक आप बलि देते रहेंगे, आपकी ऊर्जा और शक्तियॉ बनी रहेंगी, जब भी बलि नहीं दी जाएगी, उनकी शक्तियॉ खत्म होनी आरंभ हो जाएगी और एक दिन वो आम आदमी की तरह बन जाएंगे। इसीलिए तांत्रिक अनुष्ठान करने वाले नियमित रूप से बलि देते हैं।
अघोर पर लिखी पुस्तक में भी एक ऐसा उदाहरण मिलता है जब एक तांत्रिक ने नरबलि देने के लिए कुछ आत्माओं को वश में किया और फिर मां काली को उनकी बलि चढ़ाई थी। यह भी ऊर्जा के परिवर्तन का ही एक उदाहरण है। इस प्रक्रिया से उन प्रेतात्माओं की मुक्ति का मार्ग भी खुलता है। मंदिरों में नारियल फोड़ना या नींबू की बलि देना भी इसी का एक उदाहरण है। नारियल और नींबू में मौजूद जीवनउर्जा को मुक्त कर उसे अपने देवता को समर्पित किया जाता है ताकि वो अन्य कार्यों में इस ऊर्जा का उपयोग कर सकें।

रंग भी बताता है व्यक्तित्व
No Imageरंगों का भी हमारे जीवन में अहम स्थान है। रंगों को लेकर सबकी अपनी अलग-अलग पसंद होती है। ऐसा माना जाता है कि लोगों के पसंदीदा रंग केवल उनकी खुशी ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के बारे में भी जानकारी देते हैं। आप किसी भी इंसान के पसंदीदा रंग के आधार पर उसकी पूरी शख्सियत का अंदाजा लगा सकते हैं। आइए जानते हैं कि कौनसा रंग क्या कहता है।
लाल रंग को पसंद करने वाले लोग जीवन को भरपूर आनंद के साथ जीना पसंद करते हैं और उन्हें प्रकृति से बेहद प्यार होता है। बड़े कदम उठाने या फैसले लेने में वे हिचकिचाते नहीं है और हर पल ऊर्जा तथा रोमांच से भरे रहते हैं।
नीला रंग को पसंद करने वाले लोग शांत स्वभाव के होते हैं और अपनी मंजिल को पाने के लिए वह बड़े रास्ते तय करना भी जानते हैं।
गुलाबी रंग विशेषकर लड़कियों को बहुत अधिक पसंद आता है। यह मासूमियत और प्रकृति से लगाव को दर्शाता है। इस रंग को पसंद करने वाले लोग दान आदि कार्यों में रुचि रखते हैं। पीला रंग को पसंद करने वाले लोग तर्कसंगत होते हैं और जीवन के प्रति अपनी सोच के साथ बने रहते हैं। ये लोग कल्पनाशील भी होते हैं।
वहीं काला रंग मजबूत इरादों वाले और अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध बच्चों का पसंदीदा रंग काला होता है। इस रंग को पसंद करने वाले लोग अपनी सोच को लेकर सख्त मिजाज होते हैं और किसी भी रेस को जीतने के लिए बड़ा कदम उठाने से शर्माते नहीं हैं। वे सुंदरता और कभी न खत्म होने वाली शैली पर अधिक भरोसा रखते हैं।
हरा रंग को पसंद करने वाले लोग आत्मविश्वास से भरे और आकर्षक व्यक्तित्व केहोते हैं। वे किसी भी प्रम में आगे रहने के लिए अवसरों की तलाश करते हैं और किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना करने से नहीं घबराते। वे प्रकृति प्रेमी भी होते हैं।
नारंगी रंग को पसंद करने वाले लोग मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखने वाले और किसी भी माहौल में घुल-मिल जाने वाले लोगों का पसंदीदा रंग नारंगी होता है। ऐसे लोगों के प्रति हर किसी को लगाव होता है।

रुद्राक्ष और उनके महत्व
रुद्राक्ष की का धार्मिक महत्व जगजाहिर है। मान्यता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रुओं से हुई है। रुद्राक्ष को प्राचीन काल से आभूषण के रूप में,सुरक्षा के लिए,ग्रह शांति के लिए और आध्यात्मिक लाभ के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। कुल मिलाकर मुख्य रूप से सत्तरह प्रकार के रुद्राक्ष पाए जाते हैं, परन्तु ग्यारह प्रकार के रुद्राक्ष विशेष रूप से प्रयोग में आते हैं। रुद्राक्ष का लाभ अदभुत होता है और प्रभाव सटीक पर यह तभी सम्भव है जब सोच समझकर नियमों का पालन करके रुद्राक्ष धारण किया जाय। बिना नियमों को जाने गलत तरीके से रुद्राक्ष को धारण करने से लाभ की जगह हानि भी हो सकती है।
रुद्राक्ष धारण करने के नियम
रुद्राक्ष कलाई , कंठ और ह्रदय पर धारण किया जा सकता है। इसे कंठ प्रदेश तक धारण करना सर्वोत्तम होगा।
कलाई में बारह,कंठ में छत्तीस और ह्रदय पर एक सौ आठ दानो को धारण करना चाहिए।
एक दाना भी धारण कर सकते हैं पर यह दाना ह्रदय तक होना चाहिए तथा लाल धागे में होना चाहिए।
सावन में,सोमवार को और शिवरात्री के दिन रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम होता है।
रुद्राक्ष धारण करने के पूर्व उसे शिव जी को समर्पित करना चाहिए तथा उसी माला या रुद्राक्ष पर मंत्र जाप करना चाहिए।
जो लोग भी रुद्राक्ष धारण करते हैं उन्हें सात्विक रहना चाहिए तथा आचरण को शुद्ध रखना चाहिए अन्यथा रुद्राक्ष लाभकारी नहीं होगा।
विभिन्न रुद्राक्ष और उनका महत्व-
एक मुखी – यह साक्षात शिव का स्वरुप माना जाता है।
सिंह राशी वालों के लिए यह अत्यंत शुभ होता है।
जिनकी कुंडली में सूर्य से सम्बंधित समस्या हो ऐसे लोगों को एक मुखी रुद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए।
दो मुखी- यह अर्धनारीश्वर स्वरुप माना जाता है।
कर्क राशी के जातकों को यह अत्यंत उत्तम परिणाम देता है।
अगर वैवाहिक जीवन में समस्या हो या चन्द्रमा कमजोर हो दो मुखी रुद्राक्ष अत्यंत लाभकारी होता है।
तीन मुखी- यह रुद्राक्ष अग्नि और तेज का स्वरुप होता है।
मेष राशी और वृश्चिक राशी के लोगों के लिए यह उत्तम परिणाम देता है।
मंगल दोष के निवारण के लिए इसी रुद्राक्ष का प्रयोग किया जाता है।
चार मुखी- यह रुद्राक्ष ब्रह्मा का स्वरुप माना जाता है।
मिथुन और कन्या राशी के लिए सर्वोत्तम।
त्वचा के रोगों और वाणी की समस्या में इसका विशेष लाभ होता है.
पांच मुखी- इसको कालाग्नि भी कहा जाता है।
इसको धारण करने से मंत्र शक्ति तथा अदभुत ज्ञान प्राप्त होता है।
जिनकी राशी धनु या मीन हो या जिनको शिक्षा में लगातार बाधाएँ आ रही हों ,ऐसे लोगों को पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
छह मुखी- इसको भगवान कार्तिकेय का स्वरुप माना जाता है।
इसको धारण करने से व्यक्ति को आर्थिक और व्यवसायिक लाभ होता है।
अगर कुंडली में शुक्र कमजोर हो अथवा तुला या वृष राशी हो तो छह मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ होता है।
सात मुखी- यह सप्तमातृका तथा सप्तऋषियों का स्वरुप माना जाता है।
मारक दशाओं में तथा अत्यंत गंभीर स्थितियों में इसको धारण करने से लाभ होता है।
अगर मृत्युतुल्य कष्टों का योग हो अथवा मकर या कुम्भ राशी हो तो यह अत्यंत लाभ देता है।
आठ मुखी- यह अष्टदेवियों का स्वरुप है तथा इसको धारण करने से अष्टसिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
इसको धारण करने से आकस्मिक धन की प्राप्ति सहज होती है तथा किसी भी प्रकार के तंत्र मंत्र का असर नहीं होता।
जिनकी कुंडली में राहु से सम्बन्धी समस्याएँ हों ऐसे लोगों को इसे धारण करना शुभ होता है।
ग्यारह मुखी- एकादश मुखी रुद्राक्ष स्वयं शिव का स्वरुप माना जाता है।संतान सम्बन्धी समस्याओं के निवारण के लिए तथा संतान प्राप्ति के लिए इसको धारण करना शुभ होता है।

गृहस्थ जीवन को सुखी बनाने कामदेव का पूजन करें
बसंत पंचमी का पर्व वसंत ऋतु के आने के उपलक्ष्य के तौर पर भी मनाया जाता है। मौसम के रुमानी होने के कारण बंसत और कामदेव की दोस्ती मानी जाती है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या और बुद्धि की देवी माता सरस्वती की आराधना का दिन होता है। इसी उपासना के दिन को बसंत पंचमी कहा जाता है। इस दिन संगीत कला और आध्यात्म का आशीर्वाद भी लिया जा सकता है। बसंत पंचमी का पर्व वसंत ऋतु के आने के उपलक्ष्य के तौर पर भी मनाया जाता है। इस दिन के बाद मौसम में बदलाव होना शुरु हो जाता है। मौसम के रुमानी होने के कारण बंसत और कामदेव की दोस्ती मानी जाती है। इसी कारण से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्नी रति का पूजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार कामदेव को प्रेम का देवता माना जाता है। अन्य मान्यता के अनुसार शिव रात्रि को भगवान शिव के विवाह से पहले इस दिन भगवान शंकर का तिलकोत्सव हुआ था।
वसंत ऋतु को कामदेव की ऋतु माना जाता है। मान्यताओं अनुसार कहा जाता है कि इस दिन के बाद मौसम में मादकता भर जाती है, जिसके कारण मनुष्य के शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं। इन्हीं कारणों के कारण कामदेव और उनकी पत्नी का पूजन विशेष विधि-विधान के साथ किया जाता है। मनुष्य पर काम भाव हावी नहीं हो जाए इसलिए ही देवी सरस्वती मनुष्यों को ज्ञान और विवेक देने के लिए इस दिन प्रकट हुई थीं। पुराणों के अनुसार गृहस्थ जीवन को सुखी बनाने के लिए बसंत पंचमी के दिन रति और कामदेव का पूजन किया जाता है। इसके बाद पीछे वाले पुंज में रति और कामदेव का पूजन करना चाहिए। रति और कामदेव के चित्र पर सबसे पहले अबीर और फूल डालकर वसंत का सदृश्य बनाना शुभ माना जाता है।
कामदेव के पूजन को सफल बनाने के लिए इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
शुभा रतिः प्रकर्तव्या वसंतोज्जवलभूषणा।
नृत्यमाना शुभा देवी समस्ताभरणैर्युता।।
वीणावादनशीला च मदकर्पूरचज्ञर्चिता।
कामदेवस्तु कर्तव्यो रुपेणाप्रतिमो भुवि।
अष्टबाहुः स कर्तव्यः शड्खपद्माविभूषणः।।
चापबाणकरश्चैव मदादञ्चितलोचनः।
रतिः प्रीतिस्तथा शक्तिर्मदशक्ति-स्तथोज्जवाला।।
चतस्त्रस्तस्य कर्तव्याः पत्न्यो रुपमनोहराः। चत्वारश्च करास्तस्य कार्या भार्यास्तनोपगाः। केतुश्च मकरः कार्यः पञ्चबाणमुखो महान।
इसके बाद कामदेव और रति को विविध प्रकार के फल, फूल और पत्रादि समर्पित करें।

इस प्रकार व्रत में भी रहे स्वस्थ
No Imageव्रत में जितना हल्का खाना हो उतना शरीर के लिए अच्छा होता है। उपवास के दौरान आपको आहार का पूरा ख्याल रखना चाहिए। व्रत के आहार में तैलीय और मीठे पदार्थो का ज्यादा सेवन आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञ की सलाह के मुताबिक, स्वस्थ तरीके से व्रत रखने के लिए उबला हुआ, भुना हुआ और बेक किया हुआ आहार लें।
व्रत के दौरान तले हुए स्नैक्स और तले हुए आलू न खाएं। इनसे वजन बढ़ जाता है। अगर आपको आलू पसंद है तो एक दिन में मध्यम आकार का एक आलू उबाल कर या बेक करके सेंधा नमक के साथ खाएं। लड्डुओं का सेवन भी सीमित मात्रा में करें, क्योंकि ये मीठे होते हैं। गुड़ या ऑर्गेनिक शहद से बने लड्डू खाएं। अपने पसंदीदा फल के साथ भुने हुए अलसी के बीज खाएं। कुट्टू के आटे की रोटियां खाएं। यह दैनिक प्रयोग में भी वजन कम करने के लिए उपयुक्त है। सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा कम होती है। इसे खाना बनाने में हर रोज इस्तेमाल करें। मखाने में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में होते हैं। इन्हें भून कर सेंधा नमक के साथ खाना उपयुक्त है। इन्हें तल कर न खाएं। व्रत के दौरान भरपूर मात्रा में पानी पीएं और हर्बल चाय पीएं।

ग्रहों में टकराव से भी प्रभावित वैवाहिक जीवन
पति पत्नी के बीच आपसी संबंधों के बेहतर होने में ग्रहों की भी भूमिका होती है। अगर ये ठीक हों तो वैवाहिक जीवन सुखी होता है। वहीं अगर ग्रहों में टकराव हो तो दोनो के संबंधों में दूरियां आने लगती हैं और बात अलगाव तक पहुंच जाती है। पति के लिए अच्छा वैवाहिक जीवन शुक्र से आता है। वहीं पत्नी के लिए यह काम गुरु करता है। पति पत्नी का आपसी सम्बन्ध और तालमेल कुल मिलाकर शुक्र पर निर्भर करता है। जब शुक्र या गुरु कमजोर हों तो वैवाहिक जीवन में काफी समस्याएं आती हैं। यह समस्यायें शनि , मंगल , सूर्य , राहु और केतु से काफी बढ़ जाती हैं और चन्द्र , बुध और गुरु इन समस्याओं को कम करते हैं।
धन को लेकर विवाद होता हो
अगर एक की कुंडली में बुध मजबूत हो और दूसरे में चन्द्र तब इस तरह के विवाद होते हैं।एक भावनात्मक होता है और एक भौतिकवादी। दोनों की कुंडलियों में शुक्र के मजबूत होने पर अनावश्यक खर्चे होते हैं। इसी कारण से धन को लेकर विवाद होता रहता है।
प्रातः घी का दीपक जलाएं
घर में पूजा स्थान पर राम दरबार की स्थापना करें। उनके समक्ष रोज प्रातः घी का दीपक जलाएं। नियमित रूप से पति पत्नी को शुक्रवार को सफ़ेद मीठी चीज़ों का दान करना चाहिए। अगर पति पत्नी के बीच ससुराल के लोगों को लेकर विवाद होता रहता हो तो पति पत्नी के बीच इस तरह के विवाद का कारण मंगल होता है। मंगल के कारण पति और पत्नी एक दूसरे के रिश्तों का सम्मान नहीं करते। कभी कभी घर के बाकी लोग भी पति पत्नी के बीच हस्तक्षेप करते रहते हैं।
ऐसे में हर मंगलवार को घर में हलवा बनायें। हनुमान जी को भोग लगाएं। इसके बाद “संकटमोचन हनुमानाष्टक” का पाठ करें। सारे हलवे का प्रसाद पूरे घर में बाँटें। अगर पति पत्नी के बीच विवाहेत्तर संबंधों के कारण तनाव हो रहा हो तो आम तौर पर ऐसी समस्याओं के लिए राहु जिम्मेदार होता है। राहु का प्रभाव शुक्र पर हो तो विवाहेत्तर सम्बन्ध बन जाते हैं और यह भयंकर विवाद का कारण बनते हैं। राहु का प्रभाव अगर चन्द्र पर हो तो विवाहेत्तर सम्बन्ध नहीं बनते, सिर्फ शक होता रहता है। यह संदेह जीवन को नारकीय बना देता है।
ऐसे में माँ पार्वती और शिव जी को नित्य प्रातः सफ़ेद फूल अर्पित करें। इसके बाद “ॐ पार्वतीपतये नमः” का जाप करें। शयन कक्ष को बिलकुल साफ़ सुथरा रखें। सोमवार के दिन घर में तीखा न बनायें, न खाएं। अगर पति पत्नी के बीच विवाद का कारण नशा हो। पति पत्नी के ग्रहों में शनि या राहु का प्रभाव हो या चन्द्रमा विपरीत हो तो कभी कभी तो इस कारण विवाह विच्छेद भी हो जाता है।शनि के कारण यहाँ हिंसा और दुर्व्यवहार भी शामिल हो जाता है।
नित्य प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें
गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। हर शनिवार को शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
शनिवार को शाम को घर में “सुन्दरकाण्ड” का पाठ जरूर करें। जहाँ तक हो सके मांसाहार से परहेज करें।
अगर ससुराल में पति के अलावा अन्य रिश्तों से समस्या हो रही हो। चमेली के तेल में सिदूर मिलाकर पेस्ट बना लें।
एक हरे पान के पत्ते पर इस सिन्दूर से “सीताराम” लिखें। इस पत्ते को हनुमान जी के चरणों में अर्पित कर दें।
सुखद रिश्तों के लिए प्रार्थना करें।

कब लगती है नजर
आम तौर पर किसी काम के बिगड़ने पर कहा जाता है कि नजर लग गई। नजर लगने का क्या मतलब होता है। यह जानिये।
दुनिया में तीन तरह की ऊर्जा काम करती है- सकारात्मक , नकारात्मक और उदासीन। यह ऊर्जा हमारी सोच , व्यवहार , आदत और शब्दों से बनती है। हमारे अपने शरीर और घर में आम तौर पर सकारात्मक ऊर्जा होती है। जब किसी के सोच , स्वभाव और सम्पर्क से हमारे ऊपर नकारात्मक असर पड़ जाता है तो इसे हम नज़र लगना कहते हैं। नज़र लगने से हमारे स्वास्थ्य , सोच और प्रगति पर कुछ क्षण के लिए रुकावट आ जाती है। यह रुकावट काफी तेज होती है और एकदम से बिना कारण सब रोक देती है।
क्या होता है प्रभाव जब घर में नज़र दोष की समस्या हो?
घर में नज़र दोष होने पर बिना कारण घर भारी लगता है
घर के लोगों में आपसी कलह और क्लेश बढ़ता जाता है
घर में बीमारियों में धन खर्च होता जाता है
आम तौर पर बार बार रोजगार में उतार चढ़ाव हो सकता है
इस प्रकार होगा निवारण
घर में बिना कारण कूड़ा कबाड़ न रखें
घर के पूजा स्थान पर रोज शाम को दीपक जरूर जलाएं
नित्य प्रातः और सायं घर में गुग्गल या चन्दन की अगरबत्तियां जलाएं
घर के हर कमरे के दरवाजे पर ऊपर लाल रंग का स्वस्तिक लगाएं
सप्ताह में एक बार घर में कीर्तन , भजन या कोई धार्मिक पाठ करें
क्या होता है प्रभाव जब काम या रोजगार में नज़र दोष की समस्या हो
रोजगार पर संकट आता है
काफी लम्बे समय तक नौकरी के बिना रहना पड़ता है
कारोबार पर नज़र दोष के कारण , काम एकदम से ठप हो जाता है
बिना कारण के ऐसा लगने लगता है कि व्यवसाय बंद हो जाएगा
कारोबार में लगाया हुआ धन फंस जाता है
उपाय
नौकरी हासिल करने
एक लोहे का छल्ला बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करें
रोज सुबह घर से निकलते समय गुड़ खाकर निकलें
जहाँ तक हो सके अपने काम करने की मेज को बिलकुल साफ़ सुथरा रखें।
कारोबार के लिए
अपने कारोबार के स्थान पर एक लाल रंग के हनुमान जी की स्थापना करें
नित्य प्रातः उन्हें लाल फूल अर्पित करें और गुलाब की धूप बत्ती जलाएं
अपने कारोबार के स्थान पर नित्य प्रातः शंख में जल भरकर छिड़काव करें
अगर किसी व्यक्ति को नज़र लग गयी हो तो उसके किस तरह के प्रभाव होते हैं ?
बिना कारण के व्यक्ति बीमार हो जाता है
कारण और निवारण दोनों समझ नहीं आते
व्यक्ति का मन बिना कारण के अशांत और ख़राब हो जाता है
कभी कभी व्यक्ति अपने रिश्तों और चीज़ों को खुद ख़राब करने लगता है
जब भी ऐसा हो जाए , अपने थोड़े से बाल काट लें या दाढ़ी बना लें
इसके बाद केवड़ा जल डालकर स्नान कर लें
लाल मिर्च के एकाध बीज चबा लें
नज़र दोष से हमेशा बचे रहने के लिए चन्दन की सुगंध का प्रयोग करें
और घर से बाहर निकलते समय गुड़ खाकर जाएँ।

अपनी हथेली के से जानिये भविष्य
भविष्य की बातें जानने की उत्कंठा सभी के मन में होती है। इसके लिए लोग ज्योतिषियों के पास जाते हैं। अगर आप चाहें तो
हथेलियों से और उसके रंग से भाग्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिल सकती हैं। हथेलियों के रंग से स्वभाव , स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति के बारे में आसानी से जाना जा सकता है परन्तु हथेलियों को देखने के लिए सुबह का ही समय सबसे उत्तम होता है, अन्यथा न तो रंग जान पायेंगे , न ही रेखा।
लाल हथेली से क्या पता चलता है ?
मंगल प्रधान लोगों की हथेलियां लाल होती हैं
ऐसे लोग क्रोधी और तुनकमिजाज़ होते हैं
अगर अंगूठा छोटा हो तो ये हिंसक भी हो जाते हैं
ऐसे लोगों को खान पान और वाहन चलाने में सावधानी रखनी चाहिए
पीली हथेली क्या कहती है ?
बृहस्पति के कमजोर होने पर हथेली पीली हो जाती है
यह बीमारी , चिडचिड़ाहट और आलस्य की सूचना है
ऐसे लोग किसी न किसी कारण से परेशान होते रहते हैं
ऐसे लोगों को उपवास जरूर रखना चाहिए साथ ही नशे से परहेज करना चाहिए
कालापन लिए हुए हथेली का अर्थ क्या है ?
जब शनि और राहु जीवन में नकारात्मक होते हैं , तब ऐसे हथेलियाँ होती हैं
यह जीवन में अत्यधिक संघर्ष और उतार चढ़ाव के बारे में बताता है
ऐसे लोगों को कदम कदम पर मेहनत करनी होती है , और ये करते भी हैं
इनको दान और अपने माता – पिता की सेवा जरूर करनी चाहिए
गुलाबी हथेली का अर्थ ?
गुलाबी हथेलियों को सर्वश्रेष्ठ हथेली माना जाता है
यह शुक्र के मजबूत प्रभाव के बारे में बताता है
जैसे जैसे व्यक्ति उन्नति करता जाता है , उसकी हथेलियाँ गुलाबी होती जाती हैं
जिनकी हथेलियाँ शुरू से गुलाबी होती हैं , ऐसे लोग जन्म से ही समृद्ध होते हैं
इनको अहंकार और गलत आकर्षण से बचना चाहिए।

वस्तु के खोने का ज्योतिष से भी संबंध
किसी वस्तु के खोने का ज्योतिष से भी संबंध है। आखिर चीजें खोने से ज्योतिष का संबंध क्या है, कब चीजें लगातार खोती हैं और कब चीजें खोकर जरूर मिल जाएंगी।
6वें,11वे और 12वे भाव से चीज़ों का नुकसान देखा जाता है।
गोचर के चंद्रमा के 4थे, 6वे, 8वे या 12वे भाव में होने पर चीज़ों का नुकसान हो सकता है
राहू और चंद्रमा का संयोग बनने पर चीजें अचानक खो जाती हैं
अगर इसमें शनि या मंगल का सम्बन्ध होता है तो चीजें नहीं मिलती
परन्तु अगर शुक्र, गुरु या शुभ ग्रह इसमें होते हैं तो चीजें मिल जाती हैं
आम तौर पर शनिवार को खोयी चीजें या तो नहीं मिलती या काफी देर से मिलती हैं
कब चीजें लगातार खोती हैं और कब सावधान रहना चाहिए चीज़ों के खोने से?
अगर आप की कुंडली में राहू ,केतु या बुध की दशा हो
अगर आप की शनि की साढे साती या ढैया चल रही हो
अगर आप की राशि वृष,कन्या या मकर हो या कर्क,वृश्चिक या मीन हो
अगर आप का मूलांक 02, 04, या 08 हो
अगर आपने भूरे रंग का कुत्ता पाला हो या काले रंग की गाडी ली हो
कब चीजें खोकर जरूर मिल जाती हैं?
जब चीजें सोमवार या बुधवार को खोती हैं
जब चीज़ों के खोने पर उपाय कर दिया जाए
जब गुरु बलवान हो या गुरु की दृष्टि हो
जब साढे साती या ढैया उतर रही हो
जब आपका मूलांक 05, 07 या 09 हो
क्या सामान का खोना-पाना कोई संकेत देता है या ये शुभ अशुभ भी होता है?
चीज़ों का खोना या मिलना ग्रहों की स्थिति के बारे में बताता है
सोने का खोना शुभ नहीं होता परन्तु मिलना शुभ होता है
शीशा या रुमाल का खोना शुभ नहीं होता है परन्तु इनका मिलना शुभ होता है
कपडों का खोने बिलकुल शुभ नहीं होता ,यह किसी बीमारी का संकेत देता है
रत्नों का खोना शुभ होता है ,इससे कोई बड़ी बाधा टल जाती है
किसी मांगलिक कार्य के समय सौंदर्य प्रसाधन का खोना आपके स्वस्थ होने का सूचक है
अगर आपका कोई सामान गायब हो गया हो
जैसे ही सामान गायब होने का पता चले
उसी समय एक सफ़ेद रंग का रुमाल ले लें
उसके बीचो बीच एक रूपये का सिक्का रक्खें
रुमाल को चारों कोनों से बाँध दें
चौबीस घंटों में खोयी हुयी वस्तु का पता चल जाएगा।

कालभैरव की पूजा से बाधाएं होती हैं दूर
शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष अष्टमी को भगवान शिव कालभैरव रूप में प्रकट हुए थे इसलिए इस तिथि को व्रत एवं पूजा का विशेष विधान माना जाता है। तंत्र-मंत्र साधना के लिए कालभैरव की पूजा को बिशेष महत्व दिया जाता है। मान्यताओं के अनुसार कालभैरव की पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और काल भय भी समाप्त होता है।
मान्यताओं के अनुसारा कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए रात में काले कुत्ते को मीठा भोजन कराएं, यह शुभ माना जाता है।
मान्यताओं के अनुसार कालभैरव की पूजा करने से सभी शत्रुओं, नकारात्मक उर्जा, कष्ट और सभी पाप दूर हो जाते हैं। भैरव जी की पूजा उपासना से मनोवांछित फल मिलता है। कालभैरव का व्रत करने पर उनकी प्रिय वस्तु नींबू, अकौन के फूल, सरसों का तेल, नारियल, काले तिल, उड़द, पुए, मदिरा, सुगंधित धूप दान करें।
भारत में काल भैरव के कई मंदिर हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं काशी के काल भैरव, यह मंदिर विश्वनाथ मंदिर से दो किमी दूरी पर हैं। काशी के बाद उज्जैन का काल भैरव मंदिर काफी प्रसिद्ध है। यहां काल भैरव को प्रसाद के रुप में केवल शराब चढ़ाते हैं। दिल्ली के विनय मार्ग पर भी काल भैरव का मंदिर है, इन्हें बटुक भैरव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापना पांडव भीमसेन ने की थी। नैनीताल के पास घोड़ाखाला का बटुकभैरव मंदिर काफी प्रसिद्ध है। यहां यह मंदिर गोलू देवता के नाम से जाना जाता है।
कालभैरव की पूजा करने से सभी क्रूर ग्रहों का प्रभाव खत्म हो जाता है। इनकी पूजा करने से किसी भी प्रकार का भय, जादू-टोना, भूत-प्रेत आदि का भय खत्म होता ऐसी मान्यताएं कहती हैं। साथ ही शत्रु से मुक्ति, संकट आदि पर विजय मिलती है। इनकी अराधना करने से शनि का प्रकोप भी शांत होता है। पूजा करते समय अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्, भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!! इस मंत्र का जप करें।
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान ब्रह्मा और विष्णु में श्रैष्ठता को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद को सुलझाने के लिए सभी देवता भगवान शंकर के पास आए। सभी देवता और ऋषि-मुनियों ने शिव को ही श्रेष्ठ मान लिया। यह बात ब्रह्मा जी को अच्छी नहीं लगी और उन्होंने शिव को अपशब्द कह दिए। इससे भगवान शंकर को गुस्सा आया और इसी गुस्से से कालभैरव का जन्म हुआ। कालभैरव ने शंकर जी के अपमान करने पर ब्रह्माजी का सिर काट दिया। इसलिए ब्रह्मा चतुर्मुख हो गए।

इन कामों से मिलता है स्वर्ग
आधुनिक जीवन में सफलता का अर्थ पैसों और सुख-सुविधा की चीजों से जुड़ा हुआ है। आप जितना भी धन कमा लेंगे दुनिया आपको उतना ही कामयाबी कहेगी, अंधाधुध पैसे कमाने की होड़ में कोई व्यक्ति ये नहीं सोचता कि उससे भौतिक दुनिया की सुख-सुविधा कमाने के कारण कितने पाप हो गए हैं।
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने कई नीतियों के उपदेश दिए हैं। इसमें बताए गए एक श्लोक के अनुसार, जो मनुष्य ये 4 आसान काम करता है, उसे निश्चित ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ऐसे मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्म माफ हो जाते हैं और उसे नर्क नहीं जाना पड़ता।
दान
दान करने का अर्थ है किसी जरूरतमंद को वो चीज निशुल्क उपलब्ध करवाना, जिसे पाने में वो अक्षम है। दान करने से पहले या बाद किसी को भी दान के बारे में नहीं बताना चाहिए। दान को हमेशा गुप्त ही रखना चाहिए.
आत्म संयम
कई बार ऐसा होता है कि हमारा मन और दिमाग दोनों विपरीत दिशा में चलते हैं और हम अधर्म कर बैठते हैं। गीता में दिए गए ज्ञान के अनुसार मन को वश में कर लेने से व्यक्ति द्वारा किसी पाप को करने की संभावना रहती है।
सत्य बोलना
कलियुग में सत्य और असत्य का पता लगाना मुश्किल हो गया है। किसी भी व्यक्ति की बात को सुनने मात्र से ये नहीं कहा जा सकता कि वो झूठ बोल रहा है या सच। अगर आपने भूतकाल में कोई गलत काम किया है, तो आप शेष बचे जीवन में हमेशा सत्य बोलकर पापों का प्रायश्चित कर सकते हैं।
ध्यान या जप
आधुनिक युग में ऐसे लोग बहुत कम बचे हैं, जो रोजाना ध्यान करते हो। पूजा-पाठ भगवान को प्रसन्न करने के लिए नहीं बल्कि स्वंय का स्वंय से मिलन करवाने के लिए की जाती है। आत्मध्यान करके हम आत्मसाक्षात्कार कर सकते हैं। नियमित रूप से स्वच्छ मन से जप या ध्यान करने से भूल से हुई गलतियों से पार पाया जा सकता है.इन कामों से मिलता है स्वर्ग
आधुनिक जीवन में सफलता का अर्थ पैसों और सुख-सुविधा की चीजों से जुड़ा हुआ है। आप जितना भी धन कमा लेंगे दुनिया आपको उतना ही कामयाबी कहेगी, अंधाधुध पैसे कमाने की होड़ में कोई व्यक्ति ये नहीं सोचता कि उससे भौतिक दुनिया की सुख-सुविधा कमाने के कारण कितने पाप हो गए हैं।
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने कई नीतियों के उपदेश दिए हैं। इसमें बताए गए एक श्लोक के अनुसार, जो मनुष्य ये 4 आसान काम करता है, उसे निश्चित ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ऐसे मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्म माफ हो जाते हैं और उसे नर्क नहीं जाना पड़ता।
दान
दान करने का अर्थ है किसी जरूरतमंद को वो चीज निशुल्क उपलब्ध करवाना, जिसे पाने में वो अक्षम है। दान करने से पहले या बाद किसी को भी दान के बारे में नहीं बताना चाहिए। दान को हमेशा गुप्त ही रखना चाहिए.
आत्म संयम
कई बार ऐसा होता है कि हमारा मन और दिमाग दोनों विपरीत दिशा में चलते हैं और हम अधर्म कर बैठते हैं। गीता में दिए गए ज्ञान के अनुसार मन को वश में कर लेने से व्यक्ति द्वारा किसी पाप को करने की संभावना रहती है।
सत्य बोलना
कलियुग में सत्य और असत्य का पता लगाना मुश्किल हो गया है। किसी भी व्यक्ति की बात को सुनने मात्र से ये नहीं कहा जा सकता कि वो झूठ बोल रहा है या सच। अगर आपने भूतकाल में कोई गलत काम किया है, तो आप शेष बचे जीवन में हमेशा सत्य बोलकर पापों का प्रायश्चित कर सकते हैं।
ध्यान या जप
आधुनिक युग में ऐसे लोग बहुत कम बचे हैं, जो रोजाना ध्यान करते हो। पूजा-पाठ भगवान को प्रसन्न करने के लिए नहीं बल्कि स्वंय का स्वंय से मिलन करवाने के लिए की जाती है। आत्मध्यान करके हम आत्मसाक्षात्कार कर सकते हैं। नियमित रूप से स्वच्छ मन से जप या ध्यान करने से भूल से हुई गलतियों से पार पाया जा सकता है.

घड़ी भी तय करती है भविष्य
जीवन में समय सबसे बड़ा बलवान माना जाता है। मनुष्य हमेशा समय के साथ चलता है, अगर वह नहीं चला तो पीछे रह जाएगा। समय अच्छा हो या बुरा वह हर किसी के जीवन में आता-जाता रहता है। जो समय एक बार चला जाए तो वह जीवन में कभी वापस नहीं आता। परंतु क्या आप जानते हैं कि गलत दिशा में घड़ी रखने से आपके जीवन पर असर पड़ सकता है। वास्तु के अनुसार अगर घर की गलत दिशा में घड़ी लगी हो तो परिवार वाले परेशानियों से घिर जाते हैं इसलिए घड़ी लगाते समय ध्यान रखें।
वास्तु के अनुसार घर में कभी बंद घड़ी न रखें, इससे घर में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हमेशा अपने घर में घड़ी को चालू रखें। यदि आपके घर मे बंद घड़ी है तो उसको तुरंत निकाल दें।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घड़ी को कभी भी दक्षिण की दिशा में नहीं लगाना चाहिए। दक्षिण, यम की दिशा मानी जाती है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार यम को मृत्यु का देवता माना जाता है। हमेशा घड़ी को उत्तर-पूर्व की तरफ ही लगाएं।
ज्यादातर लोग घडी को दरवाजे या फिर खिड़की के पास लगा देते हैं। ऐसा करने से परिजनों की सेहत पर असर पड़ सकता है। कमरे के दरवाजे से मनुष्य ही नहीं प्रकृति की उर्जा भी प्रवेश करती है। दरवाजे या खिड़की पर घड़ी लगाने से खुशियां प्रवेश नहीं कर पातीं, इससे घर में अच्छा माहौल नहीं रहता।
वास्तु के अनुसार घर में घड़ी का शीशा टूटा नहीं होना चाहिए और साथ ही घर की कोई भी घड़ी समय से पीछे न चले। अगर हो सके तो घड़ी की सुई को 5 से 7 मिनट आगे ही रखनी चाहिए।
वास्तु के अनुसार किसी भी प्रकार की घड़ी को तकिए के नीचे नहीं रखनी चाहिए। इससे व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर आप नए अवसर तलाश रहे हैं तो घड़ी को पश्चिम दिशा में लगाएं।

कुंडली दोष दूर करती है लक्ष्मीपूजा
कुंडलीनी दोष दूर करने के लिए यदि आप उपाय करते-करते थक गए हैं तो आपको बतला दें कि शुक्रवार को लक्ष्मीपूजा करने से आप इनसे आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। आपकी कुंडली में किसी भी प्रकार का दोष हो आप शुक्रवार को लक्ष्मीपूजा वाला उपाय जरुर करें इससे दोष दूर हो जाएगा। वैसे भी कहा जाता है कि कुंडली में शुक्र अशुभ हो, तो वैवाहिक जीवन में संकट पैदा हो जाता है। आपको बताते चलें कि इस शुक्र को सही दिशा में उपयोगी बनाने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं। इनसे दोष भी दूर होंगे, जैसे कि भगवान विष्णु के मंत्र का जाप 108 बार करें। यह मंत्र है- ‘ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।’ इसमें परेशानी हो तो आप भगवान विष्णु के नामों का जप भी कर सकते है। इसके अतिरिक्त शुक्र ग्रह के लिए हीरा, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा, दही, सफेद चंदन आदि चीजों का दान भी किया जा सकता है। इसके साथ ही किसी गरीब व्यक्ति को या फिर पास किसी मंदिर में दूध का दान भी आप कर सकते हैं। दोष दूर करने के लिए किसी सुहागन को सुहाग का सामान दान कर दें, इससे भी राहत मिलती है। चूड़ियां, कुमकुम, लाल साड़ी आदि का दान करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और मन वांछित फल देती हैं।

 

जाते हुए धन को रोकेंगे ये उपाय
तरह-तरह के उपक्रम करने और पूरी मेहनत के बावजूद यदि आपके पास धन नहीं रुक रहा है तो सावधान हो जाएं। धन की कमी वाली परेशानी को दूर करने के लिए वास्तुशास्‍त्र में बताए गए कुछ आसान उपायों को आपके लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। इन्हें करके आप जाते धन को रोक सकते हैं और ऐसा करके धन की कमी भी खत्म हो जाएगी जिससे परिवार में सुख शांत‌ि आने में भी मदद मिलेगी।
इन्हें उपायों में सबसे पहले आप अशोक के पेड़ की जड़ का एक छोटा टुकड़ा ले आएं और प्रतिदिन जहां पूजा की जाती है वहां इसे रख दें। नियमानुसार इसकी पूरा भी रोजाना करें। ऐसा करने से आपका जाता हुआ धन रुक जाएगा और फिर धन की कमी भी नहीं रहेगी। इसी प्रकार यह तो सभी जानते हैं कि कुबेर धन के स्वामी हैं। अगर इनकी दृष्टि दरिद्र पर भी पड़ जाए तो वह धनवान हो जाता है। अत: इन्हें पूजने या इनका यंत्र तिजोरी में रखने से कभी आपकी तिजोरी खाली नहीं होगी और आपका जाता धन भी रुका रहेगा। कुबेर यंत्र से आपका धन तिजोरी में एकदम सुरक्षित होने के साथ ही साथ बढ़ता भी जाएगा। इसके अतिरिक्त एक उपाय और किया जा सकता है जिसमें कि नमक का प्रयोग होता है। घर के ईशान कोण में नमक भरकर किसी पात्र को स्थापित करें। नमक के मामले में यह ध्यान रहे कि वह साबुत होना चाहिए और एक बार रखकर उसे भूल न जाएं बल्कि उसे बार-बार बदलें। ऐसा करने से भी धन जाने से रुक जाता है और धन की कमी भी जाती रहती है।

 

दान करें लेकिन ग्रह अनुसार
वैसे तो कहा यही जाता है कि दान से बड़ा कोई धर्म नहीं, लेकिन कभी आपने सोचा है कि दान भी कभी-कभी आपके लिए परेशानी ला सकता है। जी हॉं कुछ ऐसी चीजें हैं जिनके दान करने से अशुभ हो जाता है। वैसे सनातन धर्म ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों में भी दान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यह परंपरा या रीति-रिवाज़ से बड़कर होता है। अनेक तरह के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी दान किया जाता है। दान करने वाले के लिए कहा गया है कि उसे भोग-विलास से छुटकारा मिल जाता है और उसे मृत्युपरांत भी लाभ मिलता है। दूसरे शब्दों में जीवन भर के पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है दान। यही वजह है कि ज्योतिष शास्त्र में भी दान का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषियों द्वारा व्यक्ति विशेष की जन्म पत्रिका के अनुसार दान करने को कहा जाता है। यही कारण है कि दानदाता तो रुपए-पैसे के अतिरिक्त भोजन, महंगे आभूषण और अन्य वस्तुओं तक का दान करते देखे जाते हैं। इसके बावजूद कहा जाता है कि दान ग्रहों की स्थिति को देखते हुए ही किया जाना चाहिए, अन्यथा इससे लाभ मिलने की बजाय हानि होने लगती है। जन्म कुण्डली के विभिन्न ग्रहों को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के दान कर्म किए जाते हैं। ज्योतिष अनुसार ग्रह स्थिति देखी जानी चाहिए और उसी अनुसार दान किया जाना चाहिए ताकि वह आपके लिए उत्तम फलदायी हो।

कारोबार बढ़ाने करें यह उपाय
मनुष्य अपनी उन्नति के लिए व्यवसाय शुरू करता है, किंतु कई बार यह देखने में आता है कि व्यक्ति मेहनत तो बहुत करता है, परंतु उतना लाभ उसको नहीं मिलता। जिससे वह हमेशा दुखी रहता है।
ऐसे दुखी व्यक्ति नीचे लिखे मंत्र का जप करें। ईश्वर के आशीर्वाद से व्यापार में अत्यंत लाभ मिलेगा।
मंत्र : ॐ श्रीं श्रीं श्रीं परमाम् सिद्धिं श्री श्री श्रीं।
इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए पूर्ण स्वच्छता का ध्यान रखें।
पूर्ण साफ मन से प्रदोष के दिन स्नान करके प्रभु शिव का ध्यान करते हुए पूर्ण निराहार होकर व्रत (उपवास) रखें। उस दिन अन्न न लें।
शाम को (गोधूली बेला में) शिवजी का पूजन करें एवं असगंध के फूल को घी में डूबाकर रख लें।
तीन माला जाप उपरोक्त मंत्र की करें। तत्पश्चात एक माला से मंत्र पढ़ते हुए हवन करें।
यह प्रयोग 11 प्रदोष तक लगातार करें। पूर्ण फल मिलेगा।

भोलेनाथ को इस प्रकार करें प्रसन्न
भगवान शंकर को भोल नाथ भी कहा जाता है क्योंकि वह भक्तों की प्रार्थना से बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। वैसे तो धर्मग्रंथों में भोलेनाथ की कई स्तुतियां हैं, पर श्रीरामचरितमानस का ‘रुद्राष्टकम’ अपने-आप में सबसे बेहतर है।
‘रुद्राष्टकम’ केवल गाने के लिहाज से ही नहीं, बल्कि भाव के नजरिए से भी एकदम मधुर है। यही वजह है शिव के आराधक इसे याद रखते हैं और पूजा के समय सस्वर पाठ करते हैं। ‘रुद्राष्टकम’ और इसका भावार्थ आगे दिया गया है।
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥1॥
(हे मोक्षरूप, विभु, व्यापक ब्रह्म, वेदस्वरूप ईशानदिशा के ईश्वर और सबके स्वामी शिवजी, मैं आपको नमस्कार करता हूं. निज स्वरूप में स्थित, भेद रहित, इच्छा रहित, चेतन, आकाश रूप शिवजी मैं आपको नमस्कार करता हूं.)
निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥2॥
(निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत) वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे परमेशवर को मैं नमस्कार करता हूं.)
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ॥
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥3॥
(जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिर पर सुंदर नदी गंगाजी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीया का चन्द्रमा और गले में सर्प सुशोभित है…)
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥4॥
(जिनके कानों में कुण्डल शोभा पा रहे हैं. सुन्दर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्न मुख, नीलकण्ठ और दयालु हैं. सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुण्डमाल पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ श्री शंकरजी को मैं भजता हूं।)
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं । अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ॥
त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं । भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥5॥
(प्रचंड, श्रेष्ठ तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोडों सूर्य के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकरजी को मैं भजता हूं।)
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी । सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ॥
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी । प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥6॥
(कलाओं से परे, कल्याण स्वरूप, प्रलय करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुरासुर के शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालनेवाले हे प्रभो, प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए।)
न यावद् उमानाथपादारविन्दं । भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं । प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥7॥
(जब तक मनुष्य श्रीपार्वतीजी के पति के चरणकमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इहलोक में, न ही परलोक में सुख-शान्ति मिलती है और अनके कष्टों का भी नाश नहीं होता है। अत: हे समस्त जीवों के हृदय में निवास करने वाले प्रभो, प्रसन्न होइए।)
न जानामि योगं जपं नैव पूजां । नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ॥
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं । प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥8॥
(मैं न तो योग जानता हूं, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो, मैं तो सदा-सर्वदा आप को ही नमस्कार करता हूं। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म के दु:ख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दु:खों से रक्षा कीजिए। हे शम्भो, मैं आपको नमस्कार करता हूं।)
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ॥।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥9॥
(जो मनुष्य इस स्तोत्र को भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर शम्भु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।)

आध्यात्मिक जीवन के लिए साधु, संतों की संगत करें
जीवन में संगत का बेहद प्रभाव पड़ता है जैसी संगत हम करते हैं वैसा ही फल हमें मिलता है। जिस प्रकार अच्छी गुणवत्ता के गुलाब की किस्म को कमजोर गुणवत्ता वाली गुलाब की किस्म के पास लगाया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि कमजोर किस्म के गुलाब का परागण उच्च किस्म के गुलाब के साथ हो सके और उनकी गुणवत्ता में निखार आ सके। ठीक इसी तरह कमजोर को बेहतर बनाने का प्रयत्न किया जाता है।
ठीक उसी प्रकार यह सिद्धांत हमारी जिंदगी में भी काम करता है। कहा भी जाता है कि हम जिस तरह के लोगों की संगत में रहते हैं उसी से हमारी पहचान बनती है। इसी तरह अगर हम आध्यात्मिक जीवन में प्रगति चाहते हैं तो हमें साधु,संतों और उन लोगों का साथ हासिल करना चाहिए जो उस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। अगर हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ कुछ समय बिताते हैं जो खुद ध्यान और प्राणायाम करता है तो हम पर उसकी इन आदतों का असर होगा ही। अच्छे लोगों की संगति हमें अच्छे रास्तों पर आगे बढऩे की प्रेरणा देती है। तो आपको अपनी संगति का मूल्यांकन करना चाहिए कि आप कैसी संगति में हैं। यदि आप ऐसे दोस्तों के साथ जुड़े हैं जो आपकी तरक्की में सहायक हैं या जिनके साथ रहते हुए आप नई चीजें सीख पा रहे हैं तो यह आपके लिए अच्छी बात है लेकिन अगर ऐसा नहीं हो रहा है तब आपको चिंता करनी चाहिए।
आप जिन लोगों के साथ रहते हैं उनके व्यवहार के कारण ही आपके बारे में कोई भी धारणा बनाने का काम होता है इसलिए अपनी संगति के प्रति अत्यधिक सावधानी और सतर्कता रखनी चाहिए। जिस तरह किसी भी आईने में व्यक्ति का अक्स नजर आ जाता है उसी तरह दोस्तों से आपके मिजाज का अंदाज हो जाता है। इसलिए युवा अवस्था में संगति बना भी देती है और बिगाड़ भी सकती है। यही वजह है कि अपनी संगति का चयन बहुत ही देखभाल के साथ करना चाहिए।

इस प्रकार करें मां लक्ष्मी को खुश
धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाने से ही हमें सभी सुख और वैभव मिलते हैं। दिपावली के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे बेहतर योग होता है। इस समय किये गये इन उपायों से आप मां लक्ष्मी को खुश कर सकते हैं। इससे आप जीवन में धन समृद्धि के साथ ही सभी सुख पा सकते हैं।
.दीपावली पांच दिन का पर्व होता है तो इन पांचों दिन कम से कम एक दीप जरूर जलांए। इसके साथ ही लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए पहले एक मुठ्ठी चावल रखें फिर उसके उपर दीपक रखें इससे आप पर मां लक्ष्मी की कृपा होगी।
दीपावली के दिन सुबह पूजा के समय पीतल या तांबे के लोटे में शुद्ध जल भर कर,उस में थोड़ी हल्दी डाल कर पूजा में रखें। पूजा के बाद इस जल को पूरे घर में झिड़क दें। इस तरह मां लक्ष्मी की कृपा आप पर सदैव बनी रहेंगी।
दीपावली की रात को पूजा करने के बाद सभी कमरों में शंख बजाना चाहिए इस से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
दीपावली के दिन आप अपनी पत्नी अथवा मां को लाल वस्त्र उपहार में दें मां और पत्नी को पूरा सम्मान दें क्योंकि मां लक्ष्मी भी वहीं कृपा बरसाती हैं जहां घर की लक्ष्मी का सम्मान होता है। दीपावली की रात को कपूर जला कर उसमें शुद्ध रोली डाल दें। फिर उस राख की पुडिया बना कर किसी लाल रूमाल में बांध रख लें। इससे प्रक्रिया को करने से व्यापार में समृद्धि होती है।

कुंडली दोष इस प्रकार होंगे दूर
अगर आपकी कुंडली में किसी प्रकार का दोष है तो शुक्रवार को किए गए कुछ उपाय दोष से उन दोषों को दूर कर सकते हैं। कुंडली में शुक्र अशुभ हो, तो वैवाहिक जीवन में सुख नहीं मिल पाता है। यहां जानिए कुछ ऐसे उपाय जो शुक्रवार को करना चाहिए, जिनसे लक्ष्मी कृपा मिल सकती है और शुक्र के दोष भी दूर हो सकते हैं।
भगवान विष्णु के मंत्र का 108 बार जप करें।मंत्र: ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि। यदि आप चाहे तो भगवान विष्णु के नामों का जप भी कर सकते है।
शुक्र ग्रह के लिए हीरा, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा, दही, सफेद चंदन आदि चीजों का दान भी किया जा सकता है। किसी गरीब व्यक्ति को या किसी मंदिर में दूध का दान करें।
शुक्रवार को किसी विवाहित स्त्री को सुहाग का सामान दान करें। सुहाग का सामान जैसे चूड़ियां, कुमकुम, लाल साड़ी इस उपाय से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है। शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाए। साथ ही ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। मंत्र का जप कम से कम 108 बार करना चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए।

इस प्रकार मिलेगी प्रेम में सफलता
जीवन में प्रेम का भी अहम स्थान होता है पर कई लोगों को यह नहीं मिलता। ऐसे लोगों के लिए यहां प्रस्तुत हैं कुछ उपाय। यह तो सभी जानते हैं कि शरद रितु प्रेम के लिए उत्तम मानी गई है, ऐसे में प्रेम के देवता भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसी समय महारास रचाया था। इस रितु का चंद्रमा आपको मनचाहे प्रेम का वरदान देता प्रतीत होता है। इसलिए प्रेम चाहने वाले यदि यह उपाय करें तो वो सफल अवश्य ही होंगे।
शाम के समय राधा-कृष्ण की उपासना करें।
दोनों को संयुक्त रूप से एक गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें।
मध्य रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करके चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
इसके बाद “ॐ राधावल्लभाय नमः” मंत्र का कम से कम 3 माला जाप करें।
या मधुराष्टक का कम से कम 3 बार पाठ करें।
फिर मनचाहे प्रेम को पाने की प्रार्थना करें।
भगवान को अर्पित की हुई गुलाब की माला को अपने पास सुरक्षित रख लें।
इन उपायों से निश्चित ही मनचाहे प्रेम की प्राप्ति होती है और सभी संबंधों में प्रेम और लगाव बढ़ने लगता है।

आभूषण के संदेश को भी समझें
आभूषण नारी को हमेशा प्रिय रहे हैं। इससे नारी का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। आभूषण सुंदरता बढ़ाने के साथ ही उसे स्वस्थ भी रखते हैं। हर आभूषण् के अंदर एक गुण सन्देश छिपा है। सभी महिलाओं को चाहिये की आभूषण धारण करने के साथ ही आभूषण के अन्तर्गत निहीत अर्थ संन्देश को भी हृदयगम करे, ताकी उस आभूषण नाम सार्थक हो सके|
काजल – शील का जल आंखों में रखें|
नथ – मन को नियन्त्रित रखें, जिससे नाक ऊंची रहे |
टीका – बुराई छोड़ दे |
बिंदी – ध्यान रखें यश का ही टीका लगे|
वंदनी – पति एवं गुरूजनों की वन्दना करें |
कर्ण फूल – कानों से दूसरों की प्रशंसा सुनें |
कण्ठहार – पति के गले का हार बनें |
कडे़ -किसी से कड़ी बात न बोलें|
छल्ले – किसी से छल न करें
करधनी या कमरबंद – सत्कर्मो के लिए हमेशा कमर बाँधकर तैयार रहें|
पायल – सभी बड़ी बूढ़ी औरतों के पाँव ( चरण ) स्पर्श करें|
मेहेंदी – लाज की लाली बनायें रखें|

महिलाओं को राशि के अनुसार दें उपहार
हर राशि की महिला का अपना अलग स्वभाव व पसंद होती है। इसलिए महिलाओं को उनकी पसंद के अनुसार उपहार दिये जाने चाहिये। ऐसे में अगर आप किसी लड़की को उसकी पसंद के कपड़े या फैशन की कोई वस्‍तु देना चाहते हैं, तो उसकी राशि के अनुसार ही दें। इसमें सिर्फ कपड़े ही नहीं अन्य सभी समान भी आते हैं। राशियों के अनुसार महिलाओं की पसंद ऐसी होती है। मेष राशि- मेष राशि वाली महिलाओं में एक खास खूबी होती है। यह किसी भी नए फैशन ट्रेंड को अपनाने में सबसे आगे रहती हैं। फिर बात चाहे नए तरह के बैग खरीदने की हो या फिर दोस्तों के बीच फैशनेबल दिखने की। मेष राशि की महिलाएं नए ट्रेंड को लेकर काफी साहसी भी होती हैं और नए स्टाइल को लेकर इनमें किसी तरह की झिझक नहीं होती है। इस राशि की महिलाएं लाल रंग को पसंद करती हैं और अपने लुक को बेहतर बनाने के लिए चमकदार एसेसरीज को अधिक तवज्जो देती हैं। वृष राशि- इस राशि की महिलाएं ब्रांड और लेबल को लेकर बेहद सजग होती हैं। यह ब्रांडेड और गुणवत्तायुक्त कपड़े खरीदना ही पसंद करती हैं। मिथुन राशि- इस राशि की महिलाएं काफी मजाकिया और प्यार के प्रति संवेदनशील होने के साथ ही अपने अजीबो-गरीब फैशन सेंस के लिए जानी जाती हैं। वह सीजन के साथ बदलते फैशन ट्रेंड को पसंद करती हैं। साथ ही नए तरह के लुक और अलग स्टाईल को भी प्रचलन में लाती हैं और बाद में उन्हें अपना खुद का फैशन बताने लगती हैं। कर्क- कर्क राशि की महिलाएं परंपरागत और आरामदायक वस्त्रों को पसंद करती हैं। रूढ़ीवादी पसंद के बावजूद इस राशि की महिलाएं अपनी त्वचा पर विशेष ध्यान देती हैं। इस राशि की महिलाएं किसी भी ट्रेंड को ज्यादा समय तक नहीं अपनाती हैं और इनकी पसंदीदा एसेसरीज नेकलेस और मोती है। सिंह राशि- इस राशि की महिलाएं लक्जरी को पसंद करती हैं। इनके लिए यह जरूरी नहीं कि कपड़े और एसेसरीज महंगे ही हो, पर वह विशिष्ट जरूर हों। इस राशि की महिलाओं की पसंद काफी अच्छी होती है। कन्या राशि – इस राशि की महिलाएं कभी भी हल्का सा भी मुड़ा हुआ वस्त्र नहीं पहनती हैं। ऐसी महिलाएं रूढ़ीवादी होने के साथ-साथ प्रगतिशील भी होती हैं और इनका फैशन इनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। इस राशि की महिलाएं साधारण, अच्छी फिटिंग और एक से अधिक सीजन तक चलने वाले कपड़ों को तवज्जो देती हैं। तुला-राशि की महिलाएं कपड़ों का चयन करने में थोड़ा समय जरूर लेती हैं, लेकिन उनके सामने फैशन को लेकर कभी भी संकट की स्थिति नहीं होती है। मेकअप की बात करें तो यह हल्का और प्राकृतिक ही होता है। वृश्चिक राशि की महिलाओं में फैशन को लेकर खासा क्रेज होता है। इस राशि की महिलाएं ट्रेंड को पसंद करती हैं। उन्हें पता होता है कि उनके लिए क्या अच्छा है और इनके अंदर दिखावे का डर नहीं होता। यह रूप बदलने में माहिर होती हैं। धनु राशि- की महिलाएं फैशन के बढ़ते प्रचलन की परवाह नहीं करती है। यह फैशन को तभी अपनाती है जब अपने परिवेश में वह उस फैशन को लेकर सहज महसूस करे। धनु महिलाएं मेकअप काफी कम करती हैं और यदा-कदा ही गहनों का प्रयोग करती हैं। इस राशि की महिलाएं साधारण, रूढ़ीमुक्त और निरहंकारी होती हैं। मकर राशि-इस राशिकी महिलाओं के लिए स्टेटस और इमेज काफी महत्वपूर्ण होता है। जब ये काम पर नहीं होती है तो इनका स्टाईल काफी सामान्य होता है। पर बहुत ज्यादा केजुअल भी नहीं। इस राशि की महिलाएं पहनावे को सफलता से जोड़कर देखती हैं। ऐसेसरीज और आभूषणों पर इस राशि की महिलाएं काफी खर्च करती हैं। कुंभ राशि- इस राशि की महिलाएं शॉपिंग मॉल से काफी दूर रहती हैं। इसके बजाए यह सस्ते स्टोर से पारंपरिक चीजें खरीदना पसंद करती हैं। ये फैशन फॉलोअर नहीं होती हैं। वहीं करती हैं। उनका अपना व्यक्तिगत स्टाइल होता है। इन्हें वैसे रंग पसंद है जो हल्का हो और बर्बस ही ध्यान खींचते हों। जैसे फिरोजी नीला, गुलाबी और हरा। मीन राशि और फैशन पानी को कभी भी सीमाएं नहीं पसंद, इसी प्रकार मीन राशि वालों को भी बंदिशें नहीं पसंद। वो हमेशा ग्रेसफुल दिखना चाहती हैं। इस राशि की लड़कियों की एक खासियत यह भी होती है कि ये वही कपड़े पहनती हैं, जिसमें वो कंफर्टेबल महसूस करें।

नवरात्रि में फलाहार का है वैज्ञानिक आधार
नवरात्रि में देवी की उपासना के साथ ही नौ दिनों के उपवास होते हैं इन दिनों फलाहार ही होता है। इन दिनों घर में सादे नमक की जगह सेंधा नमक और गेहूं के आटे की जगह बल्कि सिर्फ कूटू का आटा या सिंघाड़े का आटा खाया जाता है। इसके पीछे धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक आधार भी है।
आयुर्वेद के मुताबिक गेहूं, प्याज़, लहसुन, अदरक जैसी चीज़ें नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करती हैं। वहीं मौसम के बदलने पर हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति काफी कम होती है, जिसकी वजह से शरीर को बीमारियां लगती हैं। ऐसे में इन चीज़ों का सेवन करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। व्रत करने का मतलब है रोज़ के खाने से शरीर पर रोक लगाना। ऐसे में लोग आसानी से पच जाने वाला और पोषक तत्वों से भरा खाना खाते हैं। गेहूं, पाचन क्रिया को धीमा करता है, इसलिए लोग इससे परहेज़ करते हैं। परिवर्तित खाने की जगह फल, सब्जी, जूस और दूध पीना ज्यादा बेहतर माना जाता है।
सेंधा नमक
देखा गया है कि नवरात्रि के समय लोग खाना बनाने में सादे नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं। सेंधा नमक पहाड़ी नमक होता है, जो स्वास्थ्य के साथ व्रत के खाने में शामिल किए जाने वाला सबसे शुद्ध नमक माना जाता है। यह कम खारा और आयोडीन मुक्त होता है। इसमें सोडियम की मात्रा कम, पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा ज़्यादा पाई जाती है, जो कि हार्ट के लिए काफी फायदेमंद होता है।
साबूदाना
इसे हर तरह के व्रत में खाया जा सकता है। साबूदाना एक प्रकार के पौधे से निकाले जाने वाला पदार्थ होता है, जिसमें स्टार्च की मात्रा काफी अधिक होती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और थोड़ा प्रोटीन भी शामिल होता है। साबूदाना शरीर को आवश्यक शक्ति प्रदान करता है। इससे आप साबूदाना खीर, टिक्की या फिर साबूदाना खिचड़ी जैसे कई व्यंजन बना सकते हैं।
कूटू का आटा
कूटू का आटा एक पौधे के सफेद फूल से निकलने वाले बीज को पीसकर तैयार किया जाता है। आमतौर पर लोग इसे व्रत में खाते हैं, क्योंकि न तो यह अनाज है और न ही वनस्पति। यह एक घास परिवार का सदस्य है। कहते हैं कि इस आटे की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ता है। कूटू का आटा ग्लूटन फ्री होने के साथ काफी पौष्टिक भी होता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और विटामिन-बी की मात्रा अधिक होती है। इस आटे में आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे कई मिनरल्स होते हैं, जो कि व्रत के लिए पौष्टिक आहार माने जाते हैं।
सिंघाड़े का आटा
व्रत में पूरा दिन फलाहार खाने के बाद जब रात में भूख लगती है, तो लोग या तो कूटू के आटे की पकौड़ी खाते है या सिंघाड़े के आटे की। असल में यह आटा सूखे पिसे सिंघाड़े से बनता है। इसमें पोटेशियम और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज़्यादा और सोडियम और चिकनाई की मात्रा कम होती है।सिंघाड़ा, एक तरह का फल होता है, जिसमें फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं. व्रत के समय में इसे खाने का मतलब है, शरीर के पोषक तत्वों से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना।
रामदाना
यह फलाहार पोषक तत्वों से भरा है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। व्रत के समय लोग, अनाज की जगह अपने खाने में इसे शामिल कर सकते हैं। इसमें ग्लायसैमिक इंडेक्स कम होता है और यह ग्लूटेन फ्री भी होता है। आप इससे रामदाना चिक्की या लड्डू समेत कई तरह के पकवान बना सकते हैं। कई लोग तो इसे दूध में ऊपर से डालकर खाना पसंद करते हैं।

गुरुवार को न करें ये काम
भारतीय सभ्यता में हर दिन का अलग महत्व है। खासतौर से गुरुवार को तो धर्म का दिन मानते हैं। गुरु को लेकर एक भी मान्यता है कि यह दूसरे ग्रहों के मुकाबले ज्यादा भारी होते है। इसलिए इस दिन कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे शरीर या घर में हल्कापन आता हो क्योंकि गुरु के प्रभाव में आने वाले कारक तत्वों का प्रभाव हल्का हो जाता है. वो काम कौन से हैं, जिन्हें गुरुवार को नहीं करना चाहिए, आप भी जानिये।
ना बाल धोएं ना कटाएं
शास्त्रों के अनुसार महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति और संतान का कारक होता है। इसका मतलब यह है कि गुरु ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में गुरुवार को महिलाएं अगर अपना सिर धोती हैं या बाल कटाती हैं तो इससे बृहस्पति कमजोर होता है और पति व संतान की उन्नति रुक जाती है।
गुरु ग्रह को जीव भी कहा जाता है। जीव यानी कि जीवन। जीवन से तात्पर्य है आयु. गुरुवार को नाखून काटने और शेविंग करने से गुरु ग्रह कमजोर होता है, जिससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उम्र में से दिन कम हो जाता है।
घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोने, कबाड़ घर से बाहर निकालने, घर को धोने या पोछा लगाने से बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर शुभ प्रभाव में कमी आती है।
गुरुवार को नारायण का दिन होता है, ये बात तो ठीक है. पर नारायण तभी प्रसन्न होंगे जब आप उनके साथ उनकी पत्नी यानी कि लक्ष्मी जी की भी पूजा करेंगे। गुरुवार को लक्ष्मी-नारायण दोनों की एक साथ पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं और पति-पत्नी के बीच कभी दूरियां नहीं आतीं। साथ ही धन में भी वृद्ध‍ि होती है।

केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति रहता है परेशान
यदि जन्म कुंडली में चन्द्रमा किसी भी भाव में अकेला बैठा हो, उससे आगे और पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम दोष बनता है। केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा परेशान होता है। उसे हमेशा एक अज्ञात भय रहता है। उसके जीवन काल में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। आर्थिक रूप से ऐसे व्यक्ति कमजोर ही रहते हैं। जीवन में अनेकों बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति खुद को बहुत समझदार समझते हैं। उन्हें लगता है की उनसे अधिक बुद्धिमान व्यक्ति कोई नहीं है। ऐसे व्यक्ति चिड़चिड़े और शक्की स्वभाव के होते हैं। संतान से कष्ट पाते हैं परन्तु दीर्घायु होते हैं। कुछ परिस्थितियों में केमद्रुम योग भंग या निष्क्रिय भी हो जाता है।
जन्म कुंडली में केमद्रुम दोष हो परन्तु चन्द्रमा के ऊपर सभी ग्रहों की दृष्टि हो तो केमद्रुम दोष के दुष्प्रभाव निष्क्रिय हो जाते हैं।-यदि चन्द्रमा शुभस्थान (केंद्र या त्रिकोण) में हो तथा बुद्ध, गुरु एवं शुक्र किसी अन्य भाव में एक साथ हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।-यदि दसवें भाव में उच्च राशि का चन्द्रमा केमद्रुम दोष बना कर बैठा हो परन्तु उस पर गुरु की दृष्टि हो तो भी केमद्रुम दोष भंग माना जायेगा।यदि केंद्र में कहीं भी चन्द्रमा केमद्रुम दोष का निर्माण कर रहा हो परन्तु उस पर सप्तम भाव से बली गुरु की दृष्टि पड़ रही हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।

आईये राहु-मंगल के मिलन से पड़ने वाले प्रभाव को जानें 

जुलाई 2017 से मंगल जल तत्व राशि कर्क में प्रवेश कर चुका है जो उसकी नीच राशि है। वहीं 18 अगस्त, 2017 को राहू कर्क राशि में प्रवेश कर रहा है अत: दोनों का इस राशि में मिलन विश्व में भारी प्राकृतिक आपदा का सूचक है। उसके पूर्व राहू सूर्य के साथ भ्रमण कर रहा है एवं बुध भी गोचर के साथ है। मंगल अग्नि तत्व एवं कर्क राशि जल तत्व राशि है, दोनों एक-दूसरे के शत्रु हैं। जब-जब मंगल-राहू ऐसी राशि में भ्रमण करते हैं तब-तब जल प्रलय, भूकंप, हिंसा, राजनीतिक उथल-पुथल, सरकार व नेताओं एवं सेना के लिए भारी परेशानियों वाला समय होता है।
गोचर में अग्नि तत्व राशि सिंह में सूर्य, बुध-राहू का भ्रमण अशांति का सूचक है। राहू-मंगल की इस युति से आने वाले 60 दिन बहुत ही नाजुक होंगे और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विश्व के उत्तरी भाग में भारी जल प्रलय के कारण तबाही का माहौल बन सकता है। हिमालय के आगे अफगानिस्तान, रूस, चीन, अटलांटिक यूरोप में इसके कारण बड़ी प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ हिंसा, आंदोलन, विमान दुर्घटना, युद्ध जैसा माहौल होगा। राहू की दृष्टि शनि पर होगी जो और ज्यादा प्राकृतिक आपदा, हिंसा, आंदोलन व वृद्ध जैसी स्थिति पैदा करेगी।
भारत की वृषभ लग्न की कुंडली में फिलहाल चतुर्थ भाव में राहू का भ्रमण जनता को असमंजस स्थिति में डाले हुए है। पिछले लेख में राहू की माया के बारे में लिखा था। कुंडली का चतुर्थ स्थान जनता व दशम स्थान राजा का होता है। शनि सप्तम स्थान में भ्रमण कर रहा है और भाग्य, लग्न एवं चतुर्थ स्थान पर दृष्टि कर रहा है। चूंकि शनि भाग्य व दशम स्थान का मालिक भी है अत: भाग्य हानि इतनी नहीं हुई जो आगे जाकर होगी। राहू ने जनता को जकड़ रखा है एवं ऐसा प्रेमजाल फैला चुका है कि किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है लेकिन आने वाले 15 महीनों में भारत में जबरदस्त परिवर्तन देखने को मिलेगा।
देश की आर्थिक स्थिति जैसी दिखाई जा रही है वैसी नहीं होगी एवं जो व्यापार या आर्थिक स्थिति और प्रगति की कल्पना की जा रही है वह शायद राहू कपोल कल्पना साबित कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। 18 अगस्त, 2017 से राहू का कर्क राशि में भ्रमण देश की कुंडली में तीसरे पराक्रम पड़ोस, मित्र स्थान में होगा। पड़ोसी अपनी नापाक हरकतों से ज्यादा परेशान करेगा एवं आतंकवादी घटना व छद्म युद्ध से ज्यादा नुक्सान पहुंचाने का प्रयास करेगा। सरकार, सेना व जनता को बहुत ही सतर्क रहकर कार्य करना होगा एवं किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हमें हर पल एकजुट होकर सामना करना होगा।
आने वाले 60 दिन में पाक या चीन दोनों कोई बड़ी हरकत को अंजाम दे सकते हैं अत: हमें अति सचेत होकर चार गुना तीव्रता से उसका जवाब देने की तैयारी रखनी होगी। देश को एक तरफ आंतरिक और दूसरी तरफ बाहरी दुश्मनों का सामना करना पड़ेगा। देश के उत्तर-पूर्व एवं दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम भाग में भारी वर्षा के कारण जल प्रलय व एवं दुर्घटना होना संभव है।7 अगस्त से 18 अगस्त के मध्य कोई आतंकवादी घटना या सैनिक कार्रवाई की आशंका रहेगी। वहीं शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव के कारण हाहाकार मचा सकता है। भारत हाल में चंद्रमा की महादशा, राहू की अंतर्दशा में शनि की सूक्ष्म दशा में दिनांक 12 जुलाई से 7 अक्तूबर तक तत्पश्चात 24 दिसम्बर तक बुध एवं 25 जनवरी तक केतु की सूक्ष्म दशा में रहेगा जिस कारण देश को चारों ओर से संकट का सामना विशेषकर शत्रु से सावधान रहने की अति आवश्यक सावधानी रखनी पड़ेगी। शायद यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण न होगा कि भारत इस बार दीवाली पाकिस्तान के साथ मनाएगा।
कुल मिलाकर आने वाले 18 महीने राहू के कर्क राशि में भ्रमण के कारण यह कई वरिष्ठ नेताओं, अधिकारियों के निधन का संकेत देता है। वहीं पड़ोसी देशों से युद्ध करने का संकेत भी दे रहा है। कई प्रदेशों में सत्ता परिवर्तन एवं कई नेताओं का जेल भ्रमण का संकेत भी दे रहा है लेकिन शनि का वृश्चिक राशि में भ्रमण कई ऐसे राज खोलने का संकेत भी दे रहा है जिसके कारण देश की जनता आश्चर्यचकित हो जाए। कुल मिलाकर भारत के लिए आगामी 18 महीने तलवार की धार पर चलने के बराबर होंगे।

इन वस्तुओं का दान नहीं करें
सनातन ध्रर्म में दान की प्रथा शुरु से है और यह जीवन में बेहद अहम माना गया है पर इसमें भी
इन वस्तुओं का दान कभी मत करें, बर्बाद हो सकते हैं आपइन वस्तुओं का दान कभी मत करें, बर्बाद हो सकते हैं आपग्रहों की किस स्थिति में कैसा दान कर्म भूलकर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा दान हमें हमेशा हानि ही देता है।
सनातन धर्म में दान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यह मात्र रिवाज़ के लिए नहीं किया जाता, वरन् दान करने के पीछे विभिन्न धार्मिक उद्देश्य बताए गए हैं। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दान से इंद्रिय भोगों के प्रति आसक्ति छूटती है। मन की ग्रंथियां खुलती है जिससे मृत्युकाल में लाभ मिलता है।
जीवन भर किए गए पाप से मुक्त होने के लिए दान ही सबसे सरल और उत्तम माध्यम माना गया है। वेद और पुराणों में दान के महत्व का वर्णन किया गया है। यही कारण है कि हजारों वर्षों पुराने हिन्दू धर्म में आज भी विभिन्न वस्तुओं को दान करने के संस्कार का पालन किया जाता है। आजकल अधिकतर दान कर्म ज्योतिषीय उपायों को मद्देनज़र रख कर किए जाते हैं।
दान का महत्व
ज्योतिषियों द्वारा किसी व्यक्ति विशेष की जन्म पत्रिका का आंकलन करने के बाद, जीवन में सुख, समृद्धि एवं अन्य इच्छाओं की पूर्ति हेतु दान कर्म करने की सलाह दी जाती है। दान किसी वस्तु का, भोजन का, और यहां तक कि महंगे आभूषणों का भी किया जाता है।
जन्म कुण्डली के विभिन्न ग्रहों को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के दान कर्म किए जाते हैं।
जन्म कुण्डली में कुछ ग्रहों को मजबूत एवं दुष्ट ग्रहों को शांत करने के लिए तो हम दान-पुण्य करते ही हैं, लेकिन ग्रहों की कैसी स्थिति में हमें कैसा दान नहीं करना चाहिए, यह भी जानने योग्य बात है।
ऐसा दान ना करें
क्योंकि ग्रहों की स्थिति के विपरीत यदि दान कर्म किया जाए, तो वह और भी बुरा असर देता है। ऐसे में हमारे द्वारा किया गया दान हमें अच्छा फल देने की बजाय, बुरा फल देना आरंभ कर देता है और हमें इस बात की जानकारी भी नहीं होती।
ग्रहों की किस स्थिति में कैसा दान कर्म भूलकर भी नहीं करना चाहिए, हम आज यही आपको बताने जा रहे हैं। ज्योतिष विधा के अनुसार जन्मकुंडली में जो ग्रह उच्च राशि या अपनी स्वयं की राशि में स्थित हों, उनसे सम्बन्धित वस्तुओं का दान व्यक्ति को कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा दान हमें हमेशा हानि ही देता है।
सूर्य ग्रह
सूर्य मेष राशि में होने पर उच्च तथा सिंह राशि में होने पर अपनी स्वराशि का होता है। यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य इन्हीं दो राशियों में से किसी एक में हो तो उसे लाल या गुलाबी रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा गुड़, आटा, गेहूं, तांबा आदि दान नहीं करना चाहिए। सूर्य की ऐसी स्थिति में ऐसे जातक को नमक कम करके, मीठे का सेवन अधिक करना चाहिए।
चंद्र ग्रह
चन्द्र वृष राशि में उच्च तथा कर्क राशि में अपनी राशि का होता है। यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में चंद्र ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे खाद्य पदार्थों में दूध, चावल एवं आभूषणों में चांदी एवं मोती का दान नहीं करना चाहिए। ऐसे जातक के लिए माता या अपने से बड़ी किसी भी स्त्री से दुर्व्यवहार करना हानिकारक हो सकता है। किसी स्त्री का अपमान करने पर ऐसे जातक मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं।
मानसिक तनाव हो सकता है
जिस जातक के लिए चंद्र ग्रह स्वराशि हो उसे किसी नल, टयूबवेल, कुआं, तालाब अथवा प्याऊ निर्माण में कभी आर्थिक रूप से सहयोग नहीं करना चाहिए। यह उस जातक के लिए आर्थिक रूप से हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
मंगल ग्रह
मंगल मेष या वृश्चिक राशि में हो तो स्वराशि का तथा मकर राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी कुण्डली में मंगल ग्रह ऐसी स्थिति में है तो, मसूर की दाल, मिष्ठान अथवा अन्य किसी मीठे खाद्य पदार्थ का दान ना करें।
मीठे खाद्य पदार्थ का दान निषेध
आपके घर यदि मेहमान आए हों तो उन्हें कभी सौंफ खाने को न दें अन्यथा वह व्यक्ति कभी किसी अवसर पर आपके खिलाफ ही कटु वचनों का प्रयोग करेगा। यदि मंगल ग्रह के प्रकोप से बचना चाहते हैं तो किसी भी प्रकार का बासी भोजन न तो स्वयं खाएं और न ही किसी अन्य को खाने के लिए दें।
बुध ग्रह
बुध मिथुन राशि में तो स्वराशि तथा कन्या राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि किसी जातक की जन्मपत्रिका में बुध उपरोक्त वर्णित किसी स्थिति में है तो, उसे हरे रंग के पदार्थ और वस्तुओं का दान कभी नहीं करना चाहिए। हरे रंग के वस्त्र, वस्तु और यहां तक कि हरे रंग के खाद्य पदार्थों का दान में ऐसे जातक के लिए निषेध है। इसके अलावा इस जातक को न तो घर में मछलियां पालनी चाहिए और न ही स्वयं कभी मछलियों को कभी दाना डालना चाहिए।
बृहस्पति ग्रह
बृहस्पति जब धनु या मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा कर्क राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। जिस जातक की कुण्डली में बृहस्पति ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे पीले रंग के पदार्थ नहीं करना चाहिए। सोना, पीतल, केसर, धार्मिक साहित्य या वस्तुओं आदि का दान नहीं करना चाहिए। इन वस्तुओं का दान करने से समाज में सम्मान कम होता है।
शुक्र ग्रह
शुक्र ग्रह वृष या तुला राशि में हो स्वराशि का एवं मीन राशि में हो तो उच्च भाव का होता है। जिस जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह की ऐसी स्थिति हो, तो उसे श्वेत रंग के सुगन्धित पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए अन्यथा व्यक्ति के भौतिक सुखों में कमी आने लगती है। इसके अलावा नई खरीदी गई वस्तुओं का एवं दही, मिश्री, मक्खन, शुद्ध घी, इलायची आदि का दान भी नहीं करना चाहिए।
शनि ग्रह
शनि यदि मकर या कुम्भ राशि में हो तो स्वगृही तथा तुला राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि आपकी कुण्डली में शनि की स्थिति है तो आपको काले रंग के पदार्थों का दान कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लोहा, लकड़ी और फर्नीचर, तेल या तैलीय सामग्री, बिल्डिंग मैटीरियल आदि का दान नहीं करना चाहिए।
काला रंग
ऐसे जातक को अपने घर में काले रंग का कोई पशु जैसे कि भैंस अथवा काले रंग की गाय, काला कुत्ता आदि नहीं पालना चाहिए। ऐसा करने से जातक की निजी एवं सामाजिक दोनों रूप से हानि हो सकती है।
राहु ग्रह
राहु यदि कन्या राशि में हो तो स्वराशि का तथा वृष एवं मिथुन राशि में हो तो उच्च का होता है। जिस जातक की कुण्डली इसमें से किसी भी एक स्थिति का योग बने, तो ऐसे जातक को नीले, भूरे रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अन्न का अनादर करने से परहेज करना चाहिए। जब भी ये खाना खाने बैठें, तो उतना ही लें जितनी भूख हो, थाली में जूठन छोड़ना इन्हें भारी पड़ सकता है।
केतु ग्रह
केतु यदि मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा वृश्चिक या फिर धनु राशि में हो तो उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी कुण्डली में केतु उपरोक्त स्थिति में है तो आपको घर में कभी पक्षी नहीं पालना चाहिए, अन्यथा धन व्यर्थ के कामों में बर्बाद होता रहेगा। इसके अलावा भूरे, चित्र-विचित्र रंग के वस्त्र, कम्बल, तिल या तिल से निर्मित पदार्थ आदि का दान नहीं करना चाहिए।